टैक्स गाइडवित्त

भारत में छोटे व्यवसाय के मालिकों के लिए 12 कर-बचत युक्तियाँ

यहाँ हम सीधे आपके फायदे और व्यापार की बात करेंगे। अपना खुद का काम चलाना कोई आसान बात नहीं है और इसके लिए दिन-रात की कड़ी मेहनत लगती है। कड़ी मेहनत के बाद जो मुनाफा होता है, उसका एक बड़ा हिस्सा जब कर (टैक्स) के रूप में चला जाता है, तो किसी भी व्यापारी को बुरा लग सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे देश के कराधान प्रणाली में कई ऐसे पूरी तरह से कानूनी तरीके मौजूद हैं, जिनकी मदद से आप अपना काफी पैसा बचा सकते हैं।

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इस लेख में हम उन बेहतरीन और असरदार कर बचत के तरीकों के बारे में विस्तार से बात करेंगे जो आपके व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। सही जानकारी के अभाव में कई छोटे व्यापारी जरूरत से ज्यादा कर चुका देते हैं। कर बचाना कोई गलत काम नहीं है, बल्कि सरकार खुद चाहती है कि आप सही नियमों का पालन करते हुए अपने पैसों की बचत करें।

कर बचाना भी मुनाफा कमाने के समान है

क्या आपको इस बात की जानकारी है कि सही तरीके से की गई कर योजना आपके व्यापार के लिए एक नई आय की तरह काम करती है? भारत में बहुत से छोटे व्यापारी केवल इसलिए अपनी गाढ़ी कमाई गँवा देते हैं क्योंकि उन्हें सही नियमों की जानकारी नहीं होती है। कर बचाने का सीधा सा अर्थ यह है कि आपके पास अपने काम में दोबारा लगाने के लिए अधिक नकद पैसा उपलब्ध होगा। जब आपके पास अधिक पैसा होगा, तो आप नई मशीनें खरीद सकते हैं या अधिक माल अपनी दुकान में रख सकते हैं। इसलिए, कर बचाने के इन तरीकों को समझना और अपनाना हर छोटे और मझोले व्यापारी के लिए अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं कि आप किन तरीकों से अपने व्यापार का पैसा सुरक्षित रख सकते हैं।

छोटे व्यापार के लिए बारह बेहतरीन कर बचत के उपाय

इस भाग में हम एक-एक करके उन सभी व्यावहारिक और आसान सुझावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे जिन्हें आप आज ही से अपने व्यापार में लागू कर सकते हैं। इन नियमों का पालन करने से आपको कर विभाग से कोई परेशानी भी नहीं होगी।

1. व्यापार के हर छोटे खर्चे को सही से क्लेम करें

व्यापार चलाते समय हर दिन छोटे-बड़े कई खर्च होते हैं, जिन्हें अक्सर व्यापारी अपनी जेब से चुका देते हैं और उनका कोई लिखित हिसाब नहीं रखते। कार्यालय का किराया, बिजली का बिल, स्टेशनरी का सामान, फोन का खर्च और ग्राहकों के साथ होने वाली बैठकों में चाय-नाश्ते का खर्च भी एक वैध व्यापारिक खर्च माना जाता है। इन सभी खर्चों का सही तरीके से रिकॉर्ड रखना और उनकी रसीदें संभालना बहुत आवश्यक है। आपको हमेशा इन सभी भुगतानों को अपने व्यापारिक बैंक खाते से या डिजिटल माध्यम से ही करना चाहिए। जब आप इन सभी वास्तविक खर्चों को अपनी कुल आय में से घटाते हैं, तो आपका शुद्ध लाभ कम हो जाता है। लाभ कम दिखने का सीधा मतलब है कि आपकी कर देनदारी भी कम हो जाएगी। इसलिए, एक छोटी सी रसीद या बिल भी आपके कर को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

खर्च का प्रकार कर में फायदा ध्यान रखने योग्य बात
कार्यालय और स्टेशनरी आय में से सीधे कटौती होती है हर छोटे बिल की एक अलग फाइल बनाएं
चाय, कॉफी और भोजन व्यापारिक बैठक का खर्च माना जाता है नकद की जगह डिजिटल भुगतान का उपयोग करें
फोन और इंटरनेट पूरी तरह से छूट प्राप्त कनेक्शन व्यापार के नाम पर ही लें

2. परिवार के सदस्यों को वेतन दें

अगर आपके घर के सदस्य या जीवनसाथी आपके व्यापार में किसी भी प्रकार की मदद करते हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से वेतन देना एक बहुत ही शानदार विचार है। अक्सर लोग घर के सदस्यों से काम तो लेते हैं लेकिन उन्हें वेतन नहीं देते, जिससे सारा मुनाफा एक ही व्यक्ति के नाम पर जुड़ जाता है। जब आप उन्हें उनके काम के अनुसार वेतन देते हैं, तो आपके व्यापार का कुल मुनाफा कम दिखाई देता है जिससे सीधा कर बचता है। साथ ही, वेतन के रूप में दिया गया वह पैसा आपके घर में ही रहता है और बाहर नहीं जाता। यदि आपके परिवार के उस सदस्य की कोई और आय नहीं है, तो वह सरकार द्वारा दी जाने वाली मूल कर छूट सीमा का आसानी से लाभ उठा सकता है। बस यह ध्यान रखें कि उनका वेतन बाजार दर के अनुसार ही होना चाहिए। वेतन का भुगतान हमेशा सीधे उनके बैंक खाते में ही किया जाना चाहिए।

विवरण व्यापार को फायदा महत्वपूर्ण नियम
परिवार को वेतन व्यापार का मुनाफा घटता है वेतन सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करें
कर स्लैब का लाभ घर का कुल कर कम होता है काम का उचित रिकॉर्ड और पद तय रखें
कानूनी जागरूकता पैसा सही तरीके से घर में रहता है बाजार के अनुसार ही उचित वेतन तय करें

3. अनुमानित कराधान योजना (धारा 44-एडी) का लाभ उठाएं

सरकार की यह योजना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। अगर आपके व्यापार का सालाना टर्नओवर दो करोड़ रुपये (डिजिटल भुगतान के मामले में तीन करोड़ रुपये तक) से कम है, तो आपको बहुत अधिक कागजी कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। इस योजना के तहत आपको लंबे-चौड़े खाते बनाए रखने और महंगे ऑडिट के झमेले में पड़ने से पूरी तरह छुटकारा मिल जाता है। इस योजना के अंतर्गत आप अपनी कुल बिक्री का केवल आठ प्रतिशत (नकद लेनदेन पर) या छह प्रतिशत (डिजिटल लेनदेन पर) मुनाफा मानकर सीधे अपना कर भर सकते हैं। इससे आपका बहुत सारा कीमती समय बचता है जिसे आप अपने व्यापार को बढ़ाने में लगा सकते हैं। साथ ही, पेशेवर लोगों को दी जाने वाली भारी फीस की भी सीधे तौर पर बचत होती है।

योजना का विवरण टर्नओवर की सीमा कर की दर और लाभ
धारा 44-एडी दो से तीन करोड़ रुपये तक डिजिटल पर छह प्रतिशत, नकद पर आठ प्रतिशत
ऑडिट की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती खाते और बहीखाते रखने से पूरी छूट
सबसे बड़ा फायदा पेशेवर फीस और समय की बचत छोटे दुकानदारों और ठेकेदारों के लिए सर्वोत्तम

4. धारा 80-सी के तहत सुरक्षित निवेश करना न भूलें

अपने व्यापारिक खर्चों से अलग, एक आम नागरिक की तरह आप भी आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत मिलने वाली छूट का पूरा फायदा उठा सकते हैं। इस धारा के अंतर्गत आप सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (एनएससी) या जीवन बीमा में निवेश करके सालाना डेढ़ लाख रुपये तक की कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप तीन साल के लॉक-इन वाले म्यूचुअल फंड में भी अपना पैसा लगा सकते हैं। यह तरीका न केवल आपका वर्तमान कर बचाता है बल्कि आपके और आपके परिवार के भविष्य को भी आर्थिक रूप से सुरक्षित करता है। हर व्यापारी को अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा निकालकर इन सुरक्षित योजनाओं में जरूर डालना चाहिए। इससे व्यापार में उतार-चढ़ाव आने पर भी आपके पास एक सुरक्षित कोष हमेशा बना रहता है।

निवेश का बेहतरीन विकल्प लॉक-इन अवधि कर छूट की अधिकतम सीमा
पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) पंद्रह साल एक लाख पचास हजार रुपये तक
म्यूचुअल फंड (कर बचत वाले) तीन साल एक लाख पचास हजार रुपये तक
जीवन बीमा का प्रीमियम पॉलिसी की अवधि तक एक लाख पचास हजार रुपये तक

5. स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) से कर बचाएं (धारा 80-डी)

स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) से कर बचाएं (धारा 80-डी)

आज के समय में बीमारियों का इलाज बहुत महंगा हो गया है और एक छोटी सी बीमारी भी व्यापार की सारी पूंजी खत्म कर सकती है। इसलिए अपनी और अपने परिवार की सेहत के लिए एक अच्छी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेना अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य बीमा बीमारी के समय अस्पताल के भारी खर्चों से तो बचाता ही है, साथ ही यह आयकर की धारा 80-डी के तहत आपको अतिरिक्त कर बचाने में भी भारी मदद करता है। आप अपने और अपने परिवार के लिए चुकाए गए प्रीमियम पर पच्चीस हजार रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं। यदि आप अपने वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए भी बीमा लेते हैं, तो आपको पचास हजार रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। इस तरह आप इलाज की चिंता से मुक्त होकर पूरा ध्यान अपने काम पर लगा सकते हैं।

पॉलिसी किसके लिए ली गई कर छूट की सीमा मुख्य फायदा
खुद और परिवार (साठ साल से कम) पच्चीस हजार रुपये अचानक आने वाले मेडिकल खर्चों से बचाव
माता-पिता (वरिष्ठ नागरिक) पचास हजार रुपये बुजुर्ग माता-पिता की सेहत की पूरी सुरक्षा
नियमित स्वास्थ्य जांच पांच हजार रुपये गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान

6. यात्रा और ठहरने के खर्चों का सही हिसाब रखें

व्यापार को बढ़ाने के सिलसिले में की गई यात्राएं, होटल में रुकना और हवाई जहाज या ट्रेन की टिकट पूरी तरह से व्यापारिक खर्च माने जाते हैं। अगर आप किसी प्रदर्शनी में भाग लेने, नए ग्राहकों से मिलने या कच्चा माल खरीदने के लिए दूसरे शहर जाते हैं, तो उसका पूरा खर्च आप अपने व्यापार के खाते में दिखा सकते हैं। यात्रा के दौरान स्थानीय परिवहन और भोजन का खर्च भी इसी श्रेणी में आता है। इन सभी खर्चों के पक्के बिल और जीएसटी रसीदें हमेशा ध्यान से संभाल कर रखें। निजी छुट्टियों के खर्च को कभी भी व्यापारिक यात्रा के साथ मिलाने की गलती न करें। यदि आपके पास यात्रा के उचित प्रमाण और रसीदें हैं, तो कर अधिकारी इन खर्चों को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं जिससे आपका मुनाफा कम दर्ज होता है।

खर्च का प्रकार व्यापारिक खर्च का दर्जा ध्यान रखने योग्य बात
हवाई जहाज या ट्रेन की टिकट सौ प्रतिशत क्लेम कर सकते हैं टिकट हमेशा व्यापार के नाम से ही बुक करें
होटल और ठहरने का खर्च पूरी तरह से कटौती योग्य होटल से पक्का जीएसटी बिल जरूर प्राप्त करें
स्थानीय कैब और भोजन व्यापारिक बैठकों के दौरान भोजन के बिल बैठक के प्रमाण के साथ रखें

7. मूल्यह्रास (डेप्रिसिएशन) का पूरा और सही उपयोग करें

जब भी आप अपने कार्यालय या कारखाने के लिए कोई नया लैपटॉप, मशीन, एयर कंडीशनर या फर्नीचर खरीदते हैं, तो समय के साथ उनकी कीमत कम होती जाती है। किसी भी संपत्ति की कीमत में आने वाली इसी कमी को मूल्यह्रास कहा जाता है। आयकर नियमों के अनुसार आप हर साल इन संपत्तियों की घटती हुई कीमत का एक निश्चित हिस्सा खर्च के रूप में दिखा सकते हैं। यदि आप सितंबर महीने के अंत से पहले कोई नई संपत्ति खरीदते हैं तो आपको उस पर पूरे साल का मूल्यह्रास मिलता है। यह आपके कर योग्य मुनाफे को काफी हद तक कम करने का एक बहुत ही शानदार और कानूनी तरीका है। बस आपको इन सभी संपत्तियों के खरीद बिल सुरक्षित रखने होंगे और यह साबित करना होगा कि इनका उपयोग केवल व्यापार के लिए हो रहा है।

संपत्ति का प्रकार मूल्यह्रास की अनुमानित दर व्यापार को फायदा
कंप्यूटर और लैपटॉप चालीस प्रतिशत पहले ही साल में भारी कर छूट
कार्यालय का फर्नीचर दस प्रतिशत कई सालों तक लगातार कर में लाभ
कारखाने की मशीनरी पंद्रह प्रतिशत उत्पादन की कुल लागत को कम दिखाना

8. विज्ञापन और प्रचार के खर्चों को पूरी तरह शामिल करें

आज के डिजिटल युग में अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया, इंटरनेट या स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देना बहुत जरूरी हो गया है। अच्छी बात यह है कि मार्केटिंग और प्रचार पर खर्च किया गया एक-एक रुपया पूरी तरह से व्यापारिक खर्च माना जाता है। अपनी दुकान या कंपनी की वेबसाइट बनवाने से लेकर किसी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी को दी जाने वाली फीस तक, सब कुछ कर कटौती के दायरे में आता है। यहां तक कि त्यौहारों के समय ग्राहकों को दिए जाने वाले छोटे उपहार या छपवाए गए पैम्फलेट का खर्च भी आप क्लेम कर सकते हैं। इन सभी खर्चों से एक तरफ तो आपके ब्रांड की पहचान बढ़ती है और दूसरी तरफ आपको कर चुकाने में भी भारी राहत मिलती है।

यह भी पढ़ें: भारत में वरिष्ठ नागरिक फिक्स्ड डिपॉजिट दरों के लिए एक पूर्ण गाइड

खर्चे का विवरण कर में कटौती व्यापार की वृद्धि पर प्रभाव
सोशल मीडिया विज्ञापन सौ प्रतिशत कटौती योग्य नए ग्राहकों तक ब्रांड की सीधी पहुँच बढ़ती है
वेबसाइट का निर्माण पूर्ण व्यापारिक खर्च इंटरनेट पर व्यापार की मजबूत उपस्थिति बनती है
अखबार या बैनर विज्ञापन सौ प्रतिशत कटौती योग्य स्थानीय बाजार में दुकान की अच्छी पहचान बनती है

9. व्यापारिक ऋण (बिज़नेस लोन) के ब्याज पर पूरी छूट प्राप्त करें

व्यापार को बड़ा करने, नई जगह खरीदने या माल का स्टॉक बढ़ाने के लिए अक्सर बैंक से ऋण लेना पड़ता है। जब आप उस ऋण की मासिक किश्त (ईएमआई) चुकाते हैं, तो उसके दो मुख्य हिस्से होते हैं – मूलधन और ब्याज। आयकर नियमों के अनुसार, आपके द्वारा चुकाया गया पूरा का पूरा ब्याज व्यापारिक खर्च माना जाता है और इसे मुनाफे में से घटाया जा सकता है। हालांकि मूलधन चुकाने पर कोई सीधी छूट नहीं मिलती, लेकिन ब्याज पर मिलने वाली यह छूट बहुत बड़ी राहत देती है। ऋण लेते समय लगने वाली प्रोसेसिंग फीस को भी आप खर्च के रूप में क्लेम कर सकते हैं। वित्तीय वर्ष के अंत में अपने बैंक से ब्याज का आधिकारिक प्रमाणपत्र लेना बिल्कुल न भूलें।

ऋण की किश्त का हिस्सा क्या छूट मिलती है? महत्वपूर्ण सलाह
ऋण का ब्याज सौ प्रतिशत व्यापारिक खर्च बैंक से आधिकारिक ब्याज प्रमाणपत्र अवश्य लें
मूलधन की वापसी कोई कटौती नहीं मिलती मासिक किश्त का सही और अलग-अलग हिसाब रखें
लोन प्रोसेसिंग फीस पूर्ण व्यापारिक खर्च ऋण स्वीकृत होते ही इस खर्चे को क्लेम कर लें

10. सामाजिक कार्यों में दान दें (धारा 80-जी)

समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना न केवल एक अच्छा काम है, बल्कि इसका फायदा आपको कर विभाग से भी मिलता है। यदि आप किसी पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन, अनाथालय या प्रधानमंत्री राहत कोष में अपनी स्वेच्छा से दान देते हैं, तो आप धारा 80-जी के तहत कर कटौती का दावा कर सकते हैं। दान प्राप्त करने वाली संस्था के प्रकार के आधार पर आपको दी गई रकम का पचास प्रतिशत से लेकर सौ प्रतिशत तक छूट के रूप में मिल सकता है। नकद दान की सीमा बहुत कम होती है, इसलिए हमेशा चेक या डिजिटल माध्यम से ही दान दें। इस छूट को प्राप्त करने के लिए संस्था से रसीद और उनका पैन नंबर लेना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।

दान कहाँ किया गया कर छूट (अनुमानित) आवश्यक दस्तावेज
राष्ट्रीय राहत कोष सौ प्रतिशत छूट पैन कार्ड के साथ आधिकारिक रसीद
पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन पचास प्रतिशत छूट संस्था का 80-जी प्रमाणपत्र और रसीद
मान्यता प्राप्त धर्मार्थ ट्रस्ट पचास प्रतिशत छूट बैंक खाते से भुगतान का प्रमाण और रसीद

11. घर से काम (होम ऑफिस) करने के खर्चों का विवरण दें

आजकल बहुत से छोटे व्यापारी, फ्रीलांसर और सलाहकार अपने घर के ही एक हिस्से से अपना सारा काम संभालते हैं। यदि आप भी अपने घर के एक कमरे को पूरी तरह से कार्यालय की तरह उपयोग कर रहे हैं, तो आप उस हिस्से का खर्च क्लेम कर सकते हैं। पूरे घर के किराए, बिजली के बिल और इंटरनेट के खर्च में से कार्यालय वाले हिस्से का प्रतिशत निकालकर उसे व्यापारिक खर्च के रूप में दिखाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका कार्यालय पूरे घर के बीस प्रतिशत हिस्से में है, तो आप कुल बिजली बिल का बीस प्रतिशत व्यापार में खर्च दिखा सकते हैं। यह घर बैठे अपनी कर देनदारी को कम करने का एक बेहद आसान और पूरी तरह से कानूनी तरीका है।

खर्च का विवरण कैसे क्लेम करें मुख्य लाभ
मकान का किराया कार्यालय के क्षेत्रफल के अनुपात में घर बैठे कानूनी तरीके से कर की भारी बचत
मासिक बिजली का बिल उपयोग किए गए हिस्से के अनुसार हर महीने होने वाले नियमित खर्च में कटौती
इंटरनेट और मरम्मत व्यापार में आने वाले हिस्से का बिना किसी अतिरिक्त निवेश के सीधा फायदा

12. एक अच्छे और अनुभवी पेशेवर (सीए) की सेवा लें

कर के नियम हर साल बदलते रहते हैं और ये इतने जटिल होते हैं कि एक आम व्यापारी के लिए इन्हें समझना बहुत मुश्किल होता है। चंद रुपये बचाने के चक्कर में किसी सस्ते या अनुभवहीन व्यक्ति से काम करवाना आपको बहुत महंगा पड़ सकता है। एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट आपको ऐसी कई कटौतियों के बारे में बता सकता है जिनके बारे में आपको बिल्कुल जानकारी नहीं होती। उनका मुख्य काम केवल साल के अंत में आपका रिटर्न भरना नहीं है, बल्कि पूरे साल की कर योजना बनाना है। सबसे अच्छी बात यह है कि आप उन्हें जो भी फीस देते हैं, वह भी आपके व्यापार का एक वैध खर्च माना जाता है। सही पेशेवर आपको कर विभाग के नोटिस और भारी जुर्माने से हमेशा सुरक्षित रखता है।

पेशेवर की भूमिका व्यापारी का फायदा महत्वपूर्ण सुझाव
सही कर योजना बनाना व्यापार का बहुत सारा पैसा बचता है वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही उनसे पूरी चर्चा करें
नियम और कानूनों का पालन जुर्माने और कानूनी नोटिस से बचाव अपने सभी बिल और खाते पूरी तरह से पारदर्शी रखें
ऑडिट और रिटर्न फाइलिंग मानसिक शांति और समय की भारी बचत पेशेवर की फीस का भुगतान हमेशा व्यापारिक खाते से करें

निष्कर्ष

कर योजना कोई ऐसा काम नहीं है जिसे साल के आखिरी महीने में जल्दबाजी में किया जाए। इसे वित्तीय वर्ष के पहले दिन से ही शुरू कर देना चाहिए ताकि कोई भी खर्च क्लेम होने से न छूटे। अपने सभी खातों को साफ-सुथरा रखें, व्यापारिक और निजी खर्चों को कभी आपस में न मिलाएं और सही समय पर अपने पेशेवर सलाहकार से बातचीत करते रहें। यदि आप ऊपर बताए गए इन बारह कर बचत के उपायों को सही तरीके से अपने व्यापार में लागू करते हैं, तो आप पूरी तरह से कानूनी दायरे में रहकर अपना काफी पैसा बचा सकते हैं। हमेशा यह बात याद रखें कि व्यापार में समझदारी से बचाया गया हर एक रुपया, कड़ी मेहनत से कमाए गए रुपये के ही बराबर होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

1. क्या मैं अपने घर के निजी खर्चे को व्यापार में दिखा सकता हूँ?

इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है नहीं। आपके निजी खर्चों और व्यापार के खर्चों को हमेशा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रखना चाहिए। यदि आप अपने घर के राशन का बिल या परिवार के साथ घूमने का खर्च व्यापार में दिखाते हैं, तो कर विभाग इसे अमान्य कर सकता है और आप पर भारी जुर्माना भी लगा सकता है।

2. क्या नकद में लेन-देन करने से कर बचाने में मदद मिलती है?

बिल्कुल नहीं, यह व्यापारियों के बीच फैली एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। सरकार नकद लेन-देन को कम करने पर जोर दे रही है। बड़ी मात्रा में नकद में काम करने से आपके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। डिजिटल भुगतान का उपयोग करना हमेशा सुरक्षित होता है और इससे आपके खातों का सही हिसाब रखना भी बहुत आसान हो जाता है।

3. क्या माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और आयकर दोनों एक ही बात है?

नहीं, ये दोनों कर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं और इनके नियम भी अलग हैं। माल एवं सेवा कर एक अप्रत्यक्ष कर है जो आपके द्वारा बेचे गए सामान या दी गई सेवाओं पर लगाया जाता है। जबकि आयकर एक प्रत्यक्ष कर है जो साल भर के सभी वैध खर्च निकालने के बाद बचे हुए आपके शुद्ध मुनाफे पर लगाया जाता है।

4. यदि मेरा व्यापार अभी हाल ही में शुरू हुआ है, तो क्या मुझे कर भरना अनिवार्य है?

यदि आपके व्यापार का मुनाफा सरकार द्वारा तय की गई आयकर की मूल छूट सीमा से कम है, तो आपको कोई कर नहीं देना होगा। लेकिन कर की देनदारी न होने के बावजूद भी आपको अपना आयकर रिटर्न जरूर फाइल करना चाहिए। शून्य रिटर्न फाइल करने से भविष्य में बैंक से व्यापारिक ऋण लेना काफी आसान हो जाता है।