आपकी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना बनाम पीपीएफ के लिए एक गाइड
अपनी लाडली के सुरक्षित भविष्य का सपना हर माता पिता देखते हैं। जब हम अपनी बच्ची के लिए पैसे जोड़ना शुरू करने की सोचते हैं तो बाजार में अनगिनत विकल्प नजर आते हैं। मैंने अक्सर लोगों को दो सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय सरकारी योजनाओं के बीच उलझते देखा है। दोनों ही योजनाएं सरकार की तरफ से सुरक्षित प्रतिफल देती हैं और कर बचाने में भी बहुत काम आती हैं।
एक माता पिता के तौर पर सही फैसला लेना थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योंकि आपको अपनी मेहनत की कमाई ऐसी जगह लगानी है जहां वह सुरक्षित भी रहे और महंगाई को मात देते हुए एक बड़ा कोष भी तैयार करे। इस लेख में हम Sukanya Samriddhi Yojana vs PPF की गहराई से तुलना करेंगे ताकि आप अपनी जरूरत और लक्ष्य के हिसाब से एकदम सही फैसला ले सकें। मैंने यहां सारी बातें बहुत ही सरल और आम बोलचाल की भाषा में लिखी हैं। चलिए समझते हैं कि आपकी बेटी के लिए इन दोनों में से कौन सा विकल्प सबसे अच्छा रहेगा।
सुकन्या समृद्धि योजना और सार्वजनिक भविष्य निधि की बुनियादी बातें
तुलना करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर ये दोनों योजनाएं काम कैसे करती हैं और इनका मुख्य उद्देश्य क्या है। दोनों ही सरकार द्वारा चलाई जाती हैं इसलिए आपका पैसा डूबने का कोई डर नहीं रहता है।
सुकन्या समृद्धि योजना क्या है
सरकार ने इस विशेष योजना को केवल बेटियों के लिए शुरू किया था ताकि उनकी पढ़ाई और शादी के खर्चों को आसानी से पूरा किया जा सके। आप अपनी बेटी के जन्म से लेकर उसके दस साल की होने तक यह खाता खुलवा सकते हैं और एक परिवार में अधिकतम दो बेटियों के लिए ही यह सुविधा उपलब्ध है। इस योजना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि आपको खाता खुलने के बाद लगातार पंद्रह साल तक पैसे जमा करने होते हैं। इसके बाद आपको कोई पैसा नहीं डालना होता लेकिन आपका खाता इक्कीस साल पूरे होने पर ही अपनी परिपक्वता अवधि तक पहुंचता है।
इतने लंबे समय तक पैसे निकालने पर पाबंदी होने के कारण यह योजना आपको बहुत ही अनुशासित तरीके से पैसे जोड़ने के लिए प्रेरित करती है। एक बार आपने पैसे डाल दिए तो आप उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आसानी से निकाल नहीं सकते जो कि लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए बहुत अच्छी बात है। जब आपकी बेटी बड़ी होगी तो उसके पास एक बहुत बड़ी और सुरक्षित धनराशि होगी।
| योजना का नाम | लाभार्थी | जमा करने की अवधि | परिपक्वता का समय | मुख्य उद्देश्य |
| सुकन्या समृद्धि | केवल दस वर्ष से छोटी बेटियां | पंद्रह वर्ष तक | इक्कीस वर्ष | शिक्षा और विवाह |
सार्वजनिक भविष्य निधि क्या है
भारत में बचत और निवेश के सबसे पुराने और भरोसेमंद तरीकों में से एक सार्वजनिक भविष्य निधि है जिसे आम जनता के लिए बहुत पहले शुरू किया गया था। सुकन्या योजना के विपरीत यह खाता कोई भी भारतीय नागरिक खोल सकता है चाहे वह पुरुष हो या महिला बच्चा हो या बुजुर्ग। इस खाते की परिपक्वता अवधि पंद्रह साल होती है जिसमें आपको हर साल कुछ न कुछ रकम जमा करनी होती है।
अगर आप चाहें तो पंद्रह साल पूरे होने के बाद इसे पांच पांच साल के लिए अपनी इच्छा अनुसार कितनी भी बार आगे बढ़ा सकते हैं। यह योजना उन लोगों के लिए बहुत बढ़िया है जो लंबे समय तक अपने पैसे पर चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ उठाना चाहते हैं और साथ ही अपनी आमदनी पर लगने वाले कर की बचत करना चाहते हैं। यह योजना पूरी तरह से सरकार द्वारा सुरक्षित है और इसमें बाजार के उतार चढ़ाव का कोई भी असर नहीं पड़ता है।
| योजना का नाम | लाभार्थी | जमा करने की अवधि | परिपक्वता का समय | मुख्य उद्देश्य |
| सार्वजनिक भविष्य निधि | कोई भी भारतीय नागरिक | पंद्रह वर्ष तक | पंद्रह वर्ष | लंबी अवधि की बचत |
इन दोनों के बीच के मुख्य अंतर
अब बात करते हैं उन असली बारीकियों की जो इन दोनों योजनाओं को एक दूसरे से पूरी तरह अलग बनाती हैं। आपका निवेश का फैसला इन्हीं बातों पर निर्भर करेगा।
ब्याज दरें किसका पलड़ा भारी है
जब मुनाफे की बात आती है तो सुकन्या योजना साफ तौर पर आगे निकल जाती है क्योंकि सरकार इस पर बहुत ही आकर्षक लाभ दे रही है। वर्तमान समय के आंकड़ों के अनुसार इस विशेष योजना पर आठ दशमलव दो प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि ब्याज मिल रहा है जो कि छोटी बचत योजनाओं में मिलने वाले सबसे ऊंचे मुनाफे में से एक है। दूसरी तरफ सार्वजनिक भविष्य निधि में फिलहाल सात दशमलव एक प्रतिशत का सालाना ब्याज मिल रहा है। दोनों ही योजनाओं में ब्याज की गणना हर महीने की पांचवी तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच खाते में मौजूद सबसे कम शेष राशि पर की जाती है।
आपको लग सकता है कि एक प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा का यह अंतर बहुत छोटा है लेकिन जब आप पंद्रह साल तक हर साल पैसे जमा करते हैं तो चक्रवृद्धि की ताकत इस छोटे से अंतर को लाखों रुपये के फर्क में बदल देती है। इसलिए Sukanya Samriddhi Yojana vs PPF की तुलना में अगर आपका लक्ष्य सिर्फ ज्यादा मुनाफा पाना है तो बेटियों वाली यह योजना ज्यादा दमदार साबित होती है।
| तुलना का आधार | सुकन्या योजना की दर | भविष्य निधि की दर | ब्याज का प्रकार | ब्याज जुड़ने का समय |
| वर्तमान ब्याज दर | आठ दशमलव दो प्रतिशत | सात दशमलव एक प्रतिशत | चक्रवृद्धि | साल के अंत में |
निवेश की सीमा और धन निकासी पर रोक की अवधि

दोनों योजनाओं में आप एक साल में कितना पैसा डाल सकते हैं इसके नियम लगभग एक जैसे ही हैं और इनमें कोई बड़ा फर्क नहीं है। सुकन्या योजना में आप साल भर में कम से कम ढाई सौ रुपये और ज्यादा से ज्यादा डेढ़ लाख रुपये जमा कर सकते हैं। वहीं दूसरी योजना में आपको कम से कम पांच सौ रुपये और अधिकतम डेढ़ लाख रुपये सालाना जमा करने होते हैं। लेकिन इनके पैसे रोके रखने की अवधि में जमीन आसमान का अंतर है जो आपको समझना चाहिए।
सुकन्या योजना में आपको खाता खुलने से लेकर पंद्रह साल तक पैसे जमा करने होते हैं और खाता इक्कीस साल पूरे होने पर ही बंद किया जा सकता है। जबकि दूसरी योजना में आपको पूरे पंद्रह साल तक पैसे जमा करने होते हैं और उसके बाद आप स्वतंत्र होते हैं कि आप अपना सारा पैसा निकाल लें या फिर बिना पैसा डाले भी अपने खाते को आगे बढ़ाते रहें। यह समय सीमा आपके वित्तीय लक्ष्यों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
| निवेश के नियम | सुकन्या योजना | भविष्य निधि | निवेश की छूट |
| न्यूनतम जमा | ढाई सौ रुपये सालाना | पांच सौ रुपये सालाना | साल में कभी भी |
| अधिकतम जमा | डेढ़ लाख रुपये | डेढ़ लाख रुपये | किस्तों या एक साथ |
कर में मिलने वाली भारी छूट
अपनी मेहनत की कमाई पर कर बचाने के मामले में भारत में ये दोनों योजनाएं निवेशकों की सबसे पहली पसंद मानी जाती हैं। दोनों ही योजनाएं आयकर के सबसे लोकप्रिय नियम के तहत आती हैं और इन्हें पूरी तरह से कर मुक्त रखा गया है। इसका सीधा सा मतलब है कि आप साल भर में जो डेढ़ लाख रुपये तक जमा करते हैं उस पर आपको आयकर से पूरी छूट मिलती है।
इसके अलावा आपके खाते में हर साल जो मुनाफा जुड़ता है सरकार उस पर भी कोई कर नहीं लगाती है जो कि एक बहुत बड़ी राहत है। और सबसे बड़ी बात यह है कि समय पूरा होने पर आपको जो पूरी रकम वापस मिलती है वह भी पूरी तरह से कर मुक्त होती है। अगर आप ऊंचे आयकर दायरे में आते हैं तो यह आपके लिए एक बहुत बड़ा फायदा है क्योंकि बाजार के अन्य निवेश विकल्पों में आपको कहीं न कहीं कर चुकाना ही पड़ता है।
| कर की स्थिति | जमा राशि पर छूट | मिलने वाले ब्याज पर कर | पूरी रकम मिलने पर कर | श्रेणी |
| सुकन्या योजना | पूरी तरह छूट | कोई कर नहीं | कोई कर नहीं | पूरी तरह कर मुक्त |
| भविष्य निधि | पूरी तरह छूट | कोई कर नहीं | कोई कर नहीं | पूरी तरह कर मुक्त |
समय से पहले पैसे निकालने के सख्त नियम
जिंदगी में पैसों की जरूरत कभी भी अचानक से पड़ सकती है इसलिए आपको पता होना चाहिए कि मुश्किल वक्त में कौन सी योजना आपका साथ देगी। इस मामले में भविष्य निधि थोड़ी ज्यादा सहूलियत देती है क्योंकि इसमें से आप जरूरत पड़ने पर कुछ पैसा निकाल सकते हैं। आप इस खाते में तीसरे साल से लेकर छठे साल के बीच अपनी जमा रकम के आधार पर कर्ज ले सकते हैं और सात साल पूरे होने के बाद कुछ खास जरूरतों के लिए आंशिक निकासी भी कर सकते हैं।
वहीं सुकन्या योजना के नियम बहुत सख्त हैं और आप इसमें से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए एक रुपया भी नहीं निकाल सकते हैं। जब आपकी बेटी अठारह साल की हो जाती है और दसवीं कक्षा पास कर लेती है केवल तभी आप उसकी उच्च शिक्षा के लिए खाते में मौजूद रकम का आधा हिस्सा निकाल सकते हैं। यह सख्ती दरअसल एक वरदान है क्योंकि यह आपके जमा किए गए पैसे को बिना वजह खर्च होने से बचाती है।
| निकासी के नियम | सुकन्या योजना | भविष्य निधि | कर्ज की सुविधा |
| समय से पहले निकासी | केवल शिक्षा या विवाह के लिए | सात साल बाद संभव | उपलब्ध नहीं |
| निकासी की सीमा | जमा राशि का आधा हिस्सा | तय नियमों के अनुसार | तीसरे साल से उपलब्ध |
सुकन्या समृद्धि योजना के असली फायदे और नुकसान
हर सरकारी योजना की अपनी कुछ खूबियां और कुछ कमियां होती हैं जिन्हें जाने बिना पैसा लगाना सही नहीं होता है। आइए देखते हैं कि यह योजना आपको कहां फायदा पहुंचाती है और कहां इसके हाथ बंधे हुए हैं।
इसके मुख्य फायदे
मेरे अनुभव के अनुसार इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी शानदार ब्याज दर है जो किसी भी अन्य सुरक्षित निवेश से काफी ज्यादा है। आज के समय में आठ दशमलव दो प्रतिशत का सुरक्षित और बिना कर वाला मुनाफा कहीं और मिलना लगभग नामुमकिन है। यह योजना आपको अपनी बेटी के भविष्य के लिए एक अलग और बड़ा कोष बनाने में पूरी मदद करती है। पैसे निकालने के कड़े नियमों के कारण यह पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित रहती है और आप इसे नई गाड़ी खरीदने या घर के अन्य खर्चों में इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। साथ ही सिर्फ ढाई सौ रुपये सालाना निवेश से खाता चालू रखा जा सकता है जो इसे समाज के हर वर्ग के लिए बहुत ही आसान और सुलभ बनाता है।
| फायदे का विवरण | सुकन्या योजना का लाभ | असर |
| उच्च ब्याज दर | आठ दशमलव दो प्रतिशत | तेजी से पूंजी बढ़ती है |
| सुरक्षित निवेश | पूरी तरह सरकारी सुरक्षा | पैसा डूबने का खतरा नहीं |
इसकी मुख्य सीमाएं
इसकी सबसे बड़ी और मुख्य सीमा यह है कि यह योजना सिर्फ और सिर्फ लड़कियों के लिए ही बनाई गई है और वह भी तब जब उनकी उम्र दस साल से कम हो। अगर आपकी बेटी ग्यारह साल की हो चुकी है या आपके घर में बेटा है तो आप सरकार की इस शानदार सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं। इसके अलावा इसका इक्कीस साल का लंबा इंतजार हर किसी के लिए आसान नहीं होता है क्योंकि लोगों को बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है। मान लीजिए आपको अचानक कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या आ जाए या व्यापार में भारी घाटा हो जाए तो यह जमा किया हुआ पैसा आपकी तुरंत मदद नहीं कर पाएगा। आपका पैसा सुरक्षित तो है लेकिन वह पूरी तरह से एक ही जगह पर लंबे समय के लिए बंधा हुआ है।
| नुकसान का विवरण | सुकन्या योजना की कमी | असर |
| आयु सीमा | केवल दस वर्ष तक की बेटियां | बड़ी लड़कियों को लाभ नहीं |
| लंबी अवधि | इक्कीस वर्ष की पाबंदी | आपातकाल में काम नहीं आती |
सार्वजनिक भविष्य निधि के असली फायदे और नुकसान
अब हम इस दूसरी पुरानी और भरोसेमंद योजना को तौलते हैं और देखते हैं कि यह कहां मजबूत नजर आती है और कहां यह थोड़ी कमजोर साबित होती है।
इसके मुख्य फायदे
इस खाते की सबसे बड़ी ताकत इसका लचीलापन और सबके लिए उपलब्ध होना है। इस खाते को देश का कोई भी नागरिक बहुत ही आसानी से खोल सकता है। आप अपने नाम से अपनी पत्नी के नाम से या अपने छोटे बच्चों के नाम से भी यह खाता खुलवा सकते हैं। पंद्रह साल की समय सीमा पूरी होने के बाद इसे पांच पांच साल के लिए कितनी भी बार बढ़ाया जा सकता है जो इसे एक बेहतरीन जीवन भर चलने वाला निवेश बनाता है। आप चाहें तो आगे पैसे जमा करना जारी रखें या फिर बिना पैसे डाले भी खाते को बढ़ाते रहें ब्याज आपको मिलता रहेगा। इसके अलावा समय से पहले कर्ज लेने की सुविधा इसे बहुत ही उपयोगी बनाती है।
| फायदे का विवरण | भविष्य निधि का लाभ | असर |
| सबके लिए उपलब्ध | कोई भी खोल सकता है | पूरे परिवार को लाभ |
| आगे बढ़ाने की सुविधा | पांच साल के लिए असीमित बार | जीवन भर की बचत संभव |
इसकी मुख्य सीमाएं
अगर हम दोनों योजनाओं की सीधे तौर पर तुलना करें तो इस पुराने खाते का सबसे बड़ा नुकसान इसकी कम ब्याज दर है। सात दशमलव एक प्रतिशत का मुनाफा सुरक्षित तो है लेकिन लंबे समय में यह दूसरी योजना के मुकाबले काफी कम पैसा बना पाता है। अगर आप पंद्रह साल तक हर साल बराबर पैसा जमा करते हैं तो इस खाते में आपका कुल पैसा सुकन्या के मुकाबले कई लाख रुपये कम बैठेगा। इसके अलावा इस खाते को भी समय से पहले पूरी तरह बंद करना बहुत ही मुश्किल काम है। सिर्फ गंभीर बीमारी या बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे खास मामलों में ही पांच साल बाद इसे बंद करने की अनुमति मिलती है और वह भी ब्याज में भारी कटौती के साथ।
| नुकसान का विवरण | भविष्य निधि की कमी | असर |
| कम ब्याज दर | सात दशमलव एक प्रतिशत | मुनाफा कम मिलता है |
| खाता बंद करने में सख्ती | आसानी से बंद नहीं होता | पैसे फंसने का डर |
आपको अपने पैसे कहां लगाने चाहिए
मैंने कई माता पिता को इस अहम सवाल पर अटकते हुए और परेशान होते देखा है। इसका सीधा सा जवाब आपकी अपनी पारिवारिक जरूरतों और आपके भविष्य के लक्ष्यों पर पूरी तरह निर्भर करता है। चलिए इसे थोड़ा आसान बनाते हैं ताकि आप आज ही अपना सही फैसला ले सकें।
अगर लक्ष्य सिर्फ बेटी की शिक्षा और शादी है
अगर आपके घर में एक छोटी और प्यारी सी बेटी है जिसकी उम्र अभी दस साल से कम है तो आपको ज्यादा सोचने या किसी से पूछने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपका एकमात्र लक्ष्य उसकी आगे की पढ़ाई और शादी के भारी खर्चों के लिए एक बड़ा और सुरक्षित कोष तैयार करना होना चाहिए। ऐसे में आपको सीधा सुकन्या खाते में अपना पैसा निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। इसका ऊंचा मुनाफा आपके पैसे को बहुत तेजी से और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाएगा। पैसे निकालने के सख्त नियम आपको अनुशासन में रखेंगे और आपका पैसा आपकी बेटी के ही काम आएगा। बेटी के भविष्य को पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए मौजूदा समय में इससे बेहतरीन कोई और सरकारी योजना मौजूद नहीं है।
| आपका लक्ष्य | सुझाव | कारण |
| बेटी की शिक्षा | सुकन्या योजना | ऊंचा ब्याज और सुरक्षा |
| बेटी का विवाह | सुकन्या योजना | बड़ी रकम का निर्माण |
अगर आप अधिक लचीलापन चाहते हैं
अगर आप एक ऐसा कोष बनाना चाहते हैं जिसे आप पंद्रह साल बाद अपने बुढ़ापे के समय भी इस्तेमाल कर सकें या बीच में जरूरत पड़ने पर कुछ पैसे आसानी से निकाल सकें तो यह पुराना भविष्य निधि खाता आपके लिए एकदम सही जगह है। अगर आपके घर में बेटा है या आपकी बेटी की उम्र दस साल से ज्यादा हो चुकी है तब भी यह खाता आपके लिए कर बचाने का सबसे अच्छा और सुरक्षित जरिया है। आप अपने छोटे बच्चों के नाम पर भी यह खाता खोलकर उनके लिए एक अच्छा खासा पैसा धीरे धीरे जमा कर सकते हैं। यह योजना आपको हर कदम पर ढील देती है और आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है।
| आपका लक्ष्य | सुझाव | कारण |
| अपनी बचत | भविष्य निधि | लचीलापन और विस्तार |
| आपातकालीन उपयोग | भविष्य निधि | कर्ज और आंशिक निकासी |
क्या दोनों में निवेश करना सही रणनीति है
यह एक बहुत ही शानदार और समझदारी भरी रणनीति है जिसे हर वित्तीय जानकार अपनाने की सलाह देता है। एक समझदार व्यक्ति हमेशा अपने पैसे को अलग अलग जगह पर बांटकर रखता है ताकि उसका जोखिम कम हो सके। अगर आपकी आमदनी अच्छी है और आप ज्यादा बचत कर सकते हैं तो आपको इन दोनों ही बेहतरीन योजनाओं का भरपूर फायदा एक साथ उठाना चाहिए। आप अपनी बेटी के नाम पर पहली योजना खोल सकते हैं जिससे उसकी शिक्षा और शादी का खर्च पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा और आपको उस हिस्से पर सबसे ज्यादा मुनाफा मिलेगा।
साथ ही आप अपने खुद के नाम पर दूसरा भविष्य निधि खाता भी खोल सकते हैं जो आपके अपने भविष्य के लिए या परिवार में अचानक आने वाली किसी मुसीबत के समय तुरंत काम आएगा। बस आपको एक छोटी सी बात का ध्यान रखना होगा कि आयकर नियमों के अनुसार आप एक साल में दोनों खातों को मिलाकर केवल डेढ़ लाख रुपये तक की ही कर छूट मांग सकते हैं उससे ज्यादा नहीं।
| रणनीति | खाता | मुख्य लाभ |
| पहला निवेश | बेटी के नाम पर सुकन्या | अधिकतम मुनाफा और सुरक्षा |
| दूसरा निवेश | खुद के नाम पर भविष्य निधि | आपातकाल में पैसा निकालना |
अंतिम विचार
मैंने पिछले कई सालों में ढेरों माता पिता को अपने बच्चों के भविष्य के लिए सही जगह पैसा लगाने के फैसले में संघर्ष करते देखा है। जब हम Sukanya Samriddhi Yojana vs PPF को करीब से परखते हैं तो एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि कोई भी एक अकेली योजना हर परिवार के लिए एकदम सही नहीं हो सकती है। अगर आपकी प्राथमिकता बिना किसी समझौते के सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी की आगे की पढ़ाई और उसके विवाह के लिए एक विशाल कोष बनाना है तो सुकन्या योजना का ऊँचा मुनाफा आपकी पहली पसंद होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर अगर आप जीवन के हर उतार चढ़ाव में काम आने वाला एक लचीला निवेश चाहते हैं जिसे आप अपने बुढ़ापे तक आगे बढ़ा सकें तो सार्वजनिक भविष्य निधि से बेहतर कोई और सरकारी विकल्प नहीं है।
मेरा निजी सुझाव यही रहेगा कि अगर आपकी मासिक आमदनी आपको इजाजत देती है तो आप इन दोनों बेहतरीन योजनाओं का मिलाजुला लाभ एक साथ उठाएं। बेटी के नाम पर पहला खाता खोलकर उसकी चिंता खत्म करें और अपने नाम पर दूसरा खाता खोलकर परिवार की अचानक आने वाली जरूरतों का पक्का इंतजाम करें। सही समय पर शुरू किया गया एक छोटा सा निवेश भी समय के साथ बहुत बड़ा रूप ले लेता है इसलिए ज्यादा सोचने में अपना कीमती समय बर्बाद न करें और आज ही अपने परिवार की जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनकर निवेश की शुरुआत कर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत सरकार की इन दोनों योजनाओं को लेकर लोगों के मन में कई तरह के उलझे हुए सवाल होते हैं। मैंने यहां कुछ ऐसे अहम और अलग सवाल चुने हैं जो अक्सर माता पिता को परेशान करते हैं और उनके सही जवाब विस्तार से दिए हैं।
1. क्या मैं एक ही बेटी के नाम पर दोनों अलग अलग खाते एक साथ खोल सकता हूं
जी बिल्कुल आप अपनी एक ही बेटी के नाम पर सुकन्या योजना का खाता और साथ ही उसी के नाम पर एक दूसरा भविष्य निधि खाता भी खोल सकते हैं। सरकार के नियमों में ऐसी कोई भी मनाही या रोक नहीं है। बस आपको यह ध्यान रखना है कि आपके बच्चे के खाते और आपके खुद के खाते का कुल निवेश एक साल में डेढ़ लाख रुपये की सीमा को पार नहीं करना चाहिए अन्यथा आपको कर में कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।
2. क्या इन योजनाओं की ब्याज दर पूरी अवधि के लिए एक समान रहती है
जी नहीं सरकार इन दोनों ही योजनाओं की ब्याज दरों की हर तीन महीने में समीक्षा करती है और देश की आर्थिक स्थिति के अनुसार इन्हें घटा या बढ़ा सकती है। हालांकि अगर हम पुराने आंकड़े उठाकर देखें तो सरकार ने हमेशा सुकन्या योजना पर दूसरी योजना के मुकाबले थोड़ा ज्यादा ही मुनाफा दिया है। इसलिए आपको ब्याज दरों में होने वाले इस बदलाव के लिए हमेशा मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
3. अगर कोई लड़की देश की नागरिकता छोड़ दे तो खाते का क्या होगा
अगर सुकन्या योजना चलने के दौरान लड़की भारत की नागरिकता छोड़ देती है और किसी दूसरे देश की निवासी बन जाती है तो नियम के अनुसार उस खाते को उसी समय तुरंत बंद करना पड़ता है। नागरिकता बदलने की स्थिति में उस खाते में आगे कोई भी पैसा जमा नहीं किया जा सकता है और तब तक जमा किए गए पैसे को साधारण ब्याज के साथ वापस लौटा दिया जाता है।
4. अगर मैं किसी साल पैसे जमा करना भूल जाऊं तो कितना जुर्माना लगता है
अगर आप किसी वजह से सुकन्या खाते में न्यूनतम ढाई सौ रुपये या दूसरे खाते में न्यूनतम पांच सौ रुपये एक पूरे साल में जमा नहीं कर पाते हैं तो आपका खाता निष्क्रिय कर दिया जाता है। इसे दोबारा चालू करने के लिए आपको बहुत ही मामूली सा जुर्माना देना होता है। आपको हर छूटे हुए साल के लिए केवल पचास रुपये का जुर्माना और उस साल की न्यूनतम जमा राशि देनी होगी जिसके बाद आपका खाता फिर से सामान्य तरीके से काम करने लगेगा।
5. क्या माता और पिता दोनों अपनी एक ही बेटी के लिए अलग अलग सुकन्या खाते खोल सकते हैं
जी नहीं यह पूरी तरह से नियम के खिलाफ है। एक बेटी के नाम पर पूरे देश में केवल एक ही सुकन्या खाता खोला जा सकता है। माता और पिता दोनों मिलकर या अलग अलग उसी एक खाते में पैसे जमा कर सकते हैं लेकिन वे एक ही बच्ची के लिए दो अलग अलग खाते बिल्कुल नहीं खोल सकते हैं। अगर गलती से ऐसा हो भी जाता है तो दूसरे खाते को तुरंत बंद कर दिया जाता है और उसमें जमा पैसा बिना किसी ब्याज के वापस कर दिया जाता है।
