टैक्स गाइडवित्त

भारत में नवविवाहित जोड़े के लिए 5 कर नियोजन युक्तियाँ

शादी जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत और नया अनुभव होता है। नई शुरुआत के साथ-साथ आपके ऊपर घर, परिवार और भविष्य की कई नई जिम्मेदारियां आ जाती हैं। जब पति और पत्नी दोनों नौकरीपेशा हों, तो घर की कुल आमदनी काफी बढ़ जाती है। आमदनी बढ़ने के साथ ही आयकर का बोझ भी भारी लगने लगता है।

अक्सर नए जोड़े शादी के खर्चों और घूमने-फिरने से लौटने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति का सही तरीके से आंकलन करना भूल जाते हैं। यहीं पर विवाह के बाद कर नियोजन (टैक्स प्लानिंग आफ्टर मैरिज) की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। सही योजना बनाकर आप न सिर्फ अपने कर का बोझ काफी हद तक कम कर सकते हैं, बल्कि अपने भविष्य के लिए एक बहुत ही मजबूत आर्थिक नींव भी तैयार कर सकते हैं। सरकार द्वारा दी गई कई कानूनी छूटों का लाभ उठाकर आप दोनों अपनी मेहनत की कमाई को कटने से बचा सकते हैं।

यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?

शादी से पहले आप सिर्फ अपने लिए पैसे बचाते और निवेश करते हैं। उस समय आपके खर्चे सीमित होते हैं और कर बचाने के तरीके भी व्यक्तिगत होते हैं। लेकिन शादी के बाद घर खरीदना, नई गाड़ी लेना या भविष्य में बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ना जैसे बड़े लक्ष्य सामने आ जाते हैं। ऐसे में जब पति और पत्नी दोनों मिलकर कर बचाने वाले विकल्पों का सही इस्तेमाल करते हैं, तो वे अपनी बचत को सीधे दोगुना कर सकते हैं। सरकार भी कई ऐसे नियम और प्रावधान देती है, जिनका लाभ संयुक्त रूप से लिया जा सकता है। सीधी सी बात है, जितनी जल्दी आप दोनों साथ बैठकर अपनी कमाई और खर्चों का हिसाब लगाएंगे, उतना ही ज्यादा पैसा आप अपने आने वाले कल के लिए बचा पाएंगे।

नवदंपतियों के लिए ५ बेहतरीन उपाय

१. संयुक्त गृह ऋण पर दोहरी कर छूट

अपना खुद का एक सुंदर सा घर खरीदना हर नए जोड़े का सबसे बड़ा सपना होता है। जब पति और पत्नी दोनों काम करते हैं, तो संयुक्त रूप से घर का ऋण (लोन) लेना सबसे समझदारी भरा कदम साबित होता है। इससे न केवल बैंक से एक बड़ी राशि आसानी से मिल जाती है, बल्कि आयकर में भी भारी राहत मिलती है। आयकर अधिनियम की धारा अस्सी-सी के तहत घर के मूलधन को चुकाने पर दोनों लोग अलग-अलग डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

इसके साथ ही, धारा चौबीस-बी के अंतर्गत ऋण के ब्याज पर भी दोनों लोग दो-दो लाख रुपये तक की भारी कटौती का दावा कर सकते हैं। इस प्रकार, एक ही घर पर दोनों जीवनसाथी मिलकर कुल सात लाख रुपये तक की कर बचत कर सकते हैं। यह तरीका आपके मासिक खर्चों को संतुलित करने के साथ-साथ भविष्य के लिए एक बड़ी संपत्ति बनाने में बेहद मददगार होता है। सच कहूं तो इससे बेहतर और सुरक्षित निवेश कोई दूसरा नहीं हो सकता।

संयुक्त गृह ऋण के लाभ एक व्यक्ति के लिए अधिकतम छूट दोनों के लिए कुल छूट
मूलधन की वापसी (धारा ८०-सी) १.५ लाख रुपये ३.० लाख रुपये
ब्याज का भुगतान (धारा २४-बी) २.० लाख रुपये ४.० लाख रुपये
कुल कर बचत ३.५ लाख रुपये ७.० लाख रुपये

२. पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ

विवाह से पहले व्यक्ति अक्सर केवल अपना व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा करवाता है या फिर अपनी कंपनी द्वारा दी गई सुविधा पर ही पूरी तरह निर्भर रहता है। शादी के बाद नई जिम्मेदारियां आती हैं और ऐसे में पूरे परिवार को सुरक्षित करना बहुत आवश्यक हो जाता है। आपको एक ऐसी पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा योजना चुननी चाहिए जो पति और पत्नी दोनों को एक साथ मेडिकल सुरक्षा प्रदान करे। आयकर अधिनियम की धारा अस्सी-डी के तहत आप इस बीमे की किश्त भरने पर हर साल पच्चीस हजार रुपये तक की कर छूट का आसानी से दावा कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, बीमारियों की रोकथाम के लिए किए जाने वाले नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर भी पांच हजार रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है जो इसी सीमा के भीतर आती है। यह कदम न केवल आपकी गाढ़ी कमाई को कर कटने से बचाता है, बल्कि किसी भी मेडिकल आपात स्थिति में आपको किसी के आगे हाथ फैलाने से भी रोकता है।

स्वास्थ्य बीमा छूट (धारा ८०-डी) अधिकतम सीमा
पति-पत्नी के लिए बीमा किश्त २५,००० रुपये तक
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण ५,००० रुपये तक
बीमारी के समय सुरक्षा पूरी तरह कवर

३. अवकाश यात्रा रियायत का समझदारी से उपयोग

अवकाश यात्रा रियायत का समझदारी से उपयोग

नौकरीपेशा लोगों के वेतन में अवकाश यात्रा रियायत (यात्रा भत्ता) एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसका उपयोग देश भर में सपरिवार घूमने पर कर बचाने के लिए किया जाता है। आयकर नियमों के अनुसार, आप चार साल की अवधि में केवल दो बार इस भत्ते पर कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। जब पति और पत्नी दोनों काम कर रहे हों, तो दोनों के पास अपने-अपने कार्यालय से यात्रा भत्ते का विकल्प मौजूद होता है।

आप अपनी छुट्टियों की योजना इस तरह बना सकते हैं कि दोनों की इस सुविधा का बारी-बारी से पूरा उपयोग हो सके। उदाहरण के लिए, पहले दो साल पति अपने कार्यालय से यह छूट प्राप्त कर सकता है और अगले दो साल पत्नी अपने कार्यालय से इसका दावा कर सकती है। इस बेहतरीन और आसान रणनीति से आप हर साल अपने परिवार के साथ बिना कोई कर चुकाए छुट्टियों का आनंद ले सकते हैं और अपनी बचत को भी बढ़ा सकते हैं।

यात्रा भत्ता दावा रणनीति दावा करने वाला कर की स्थिति
पहला और दूसरा साल पहला जीवनसाथी यात्रा खर्च पूरी तरह कर मुक्त
तीसरा और चौथा साल दूसरा जीवनसाथी यात्रा खर्च पूरी तरह कर मुक्त
चार साल के ब्लॉक में दोनों मिलकर ४ बार यात्रा करें अधिकतम कर बचत का लाभ

४. विवाह में मिले उपहारों पर आयकर से राहत

भारतीय शादियों में सगे-संबंधियों, परिवार वालों और मित्रों से भारी मात्रा में नकद राशि, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं उपहार स्वरूप मिलती हैं। अक्सर नए जोड़े इस बात को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं कि क्या उन्हें इन महंगे उपहारों पर भी सरकार को भारी कर देना होगा। आपको यह जानकर बड़ी राहत मिलेगी कि आयकर अधिनियम की धारा छप्पन-दो के अनुसार, विवाह के पावन अवसर पर मिलने वाले किसी भी उपहार पर पूरी तरह से कर छूट होती है।

चाहे वह उपहार आपके किसी करीबी रिश्तेदार ने दिया हो या आपके किसी दूर के मित्र ने, उस पर कोई कर नहीं लगता। हालांकि, आपको यह सावधानी जरूर बरतनी होगी कि यदि आप उस नकद राशि को बैंक में सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) करते हैं या कहीं बाजार में निवेश करते हैं, तो उस निवेश से मिलने वाले ब्याज या लाभ पर आपको अपने आय वर्ग के अनुसार कर चुकाना ही होगा।

उपहार का प्रकार शादी के समय लगने वाला कर निवेश से होने वाली आय पर कर
नकद राशि या चेक पूरी तरह कर मुक्त ब्याज और लाभ पर कर लगेगा
सोना और आभूषण पूरी तरह कर मुक्त बेचने पर मुनाफे पर कर लगेगा
जमीन या संपत्ति कर मुक्त किराये की कमाई पर कर लगेगा

५. निवेश और घरेलू खर्चों का सही विभाजन

जब घर में दो लोग कमाने वाले होते हैं, तो अक्सर उनकी आय का स्तर अलग-अलग होता है, जिससे वे अलग-अलग कर स्लैब में आते हैं। कर बचाने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि जिस जीवनसाथी की आय अधिक है और वह ऊंचे कर स्लैब (जैसे तीस प्रतिशत) में आता है, उसे अधिकतम कर बचत वाली सरकारी योजनाओं में अपना पैसा निवेश करना चाहिए। इससे परिवार की कुल आय पर लगने वाला कर काफी कम हो जाता है।

वहीं दूसरी ओर, जो जीवनसाथी निचले कर स्लैब में आता है, वह घर के दैनिक खर्चों, बिजली के बिलों और किराने के राशन की जिम्मेदारी खुशी-खुशी उठा सकता है। अपनी आय और खर्चों को इस तरह से बांटकर आप न केवल कर के भारी बोझ से बच सकते हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा कोष भी बड़ी आसानी से तैयार कर सकते हैं। यह आपसी तालमेल आपके रिश्ते को मजबूत बनाने के साथ-साथ आपके वैवाहिक जीवन को आर्थिक रूप से बेहद सुरक्षित बनाता है।

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कर स्लैब की स्थिति जिम्मेदारी का सही बंटवारा मुख्य उद्देश्य
ऊंचा कर स्लैब कर बचाने वाली योजनाओं में निवेश अधिक से अधिक कर कटौती पाना
निचला कर स्लैब घर का राशन, बिजली बिल और छोटे खर्च हाथ में नकदी का प्रवाह बनाए रखना
समान कर स्लैब खर्च और निवेश को बराबर बांटें दोनों का समान रूप से वित्तीय विकास

अंतिम विचार

शादी के बाद की जिंदगी में आपसी समझ और आर्थिक स्थिरता बहुत मायने रखती है। सही समय पर की गई योजना आपके वैवाहिक जीवन को आर्थिक तनाव से कोसों दूर रखती है। चाहे वह संयुक्त रूप से घर का ऋण लेना हो, सही पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा चुनना हो, या अपनी छुट्टियों को समझदारी से तय करना हो, आपका उठाया गया हर एक कदम आपके पैसे बचाता है। अपने जीवनसाथी के साथ बैठें, अपनी वित्तीय स्थिति पर खुलकर बात करें और आज से ही टैक्स प्लानिंग आफ्टर मैरिज के इन पांच शानदार उपायों को अपनी जिंदगी में लागू करें।