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वॉल स्ट्रीट क्रैश, ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ की घोषणा की, 1.5 ट्रिलियन डॉलर का सफाया

अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को एक बड़ी गिरावट देखे, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले लगभग सभी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के ऐलान के साथ-साथ महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण भी लागू करने की घोषणा की। इस कदम ने वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है और व्यापार युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी हैं। इस नई नीति का असर न केवल अमेरिका और चीन के बीच व्यापार पर पड़ेगा बल्कि विश्व की आर्थिक व्यवस्था और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसके गहरे प्रभाव होंगे।

ट्रंप का 100% टैरिफ योजना: क्‍या है नई नीति?

राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि चीन की “अत्यंत आक्रामक” व्यापार नीति के जवाब में अमेरिकी सरकार 1 नवंबर 2025 से चीन के सभी उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगी, जो कि पहले से लगे अन्य शुल्कों के ऊपर लगेगा। साथ ही, इस तारीख से “महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर” पर भी निर्यात नियंत्रण लगाए जाएंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर चीन की नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं होता है तो यह टैरिफ और भी पहले लागू हो सकता है।

ट्रंप ने चीन पर आरोप लगाया कि उसने विश्व के अन्य देशों को भी प्रभावित करने वाले बड़े पैमाने पर निर्यात नियंत्रण लागू किए हैं, जो व्यापारिक नियमों और साझेदारी के खिलाफ है। उन्होंने इसे “व्यापार में नैतिक कलंक” बताया।

वॉल स्ट्रीट और क्रिप्टोक्यूरेंसी बाजार पर असर

इस घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। प्रमुख सूचकांकों के खुलने पर गिरावट इस प्रकार रही:

  • डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 878.82 अंक (लगभग 1.9%) की गिरावट, 45,479.60 पर बंद
  • एस एंड पी 500 में 182.60 अंक (2.71%) की गिरावट, 6,552.51 पर बंद
  • नैस्डैक इंडेक्स में 820.20 अंक (3.56%) की भारी गिरावट, जो 22,204.43 पर बंद हुआ

इस गिरावट के कारण अमेरिकी शेयर बाजार से लगभग 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार मूल्य ध्वस्त हो गया।

सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी भारी बेचवाली देखी गई, जहां एक दिन की सबसे बड़ी लिक्विडेशन रिकॉर्ड हुई, जिसकी कुल रकम लगभग 19 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई।

चीन की नई ‘दुर्लभ धातु’ निर्यात नियंत्रण नीति

चीन ने हाल ही में अपनी दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Elements) की निर्यात नीति को कड़ा कर दिया है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरियां, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और रक्षा उपकरणों के लिए जरूरी संसाधन हैं।

चीन ने पिछले नियंत्रणों में पांच और तत्व जोड़े हैं — Holmium, Erbium, Thulium, यूरोपियम और यटर्बियम — जिससे कुल 17 दुर्लभ धातुओं में से अब 12 पर चीन ने निर्यात प्रतिबंध लगा दिया है। इससे चीन की वैश्विक आपूर्ति पर कड़ी पकड़ मजबूत होगी।

इसके अलावा, चीन ने दुर्लभ धातु संबंधित खनन, परिष्करण (smelting) और मैग्नेट उत्पादन से जुड़ी तकनीकों पर भी निर्यात लाइसेंसिंग आवश्यक कर दी है। विदेशी कंपनियों को इन तकनीकों के निर्यात के लिए खास अनुमति लेनी होगी और उन्हें बताना होगा कि वे इन संसाधनों का उपयोग किस प्रकार की उत्पाद बनाने में करेंगे।

व्यापार युद्ध की तेज़ी और वैश्विक असर

चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव के तेज़ होने से ट्रेड वार की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये टैरिफ और निर्यात नियंत्रण वैश्विक सप्लाई चेन में भारी बाधाएं पैदा करेंगे, जिससे टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा क्षेत्र समेत कई उद्योग प्रभावित होंगे।

  • कच्चे माल की कमी और महंगाई में वृद्धि
  • निवेश और उत्पादन में अनिश्चितता
  • वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और आर्थिक विकास में सुस्ती

इसके अलावा, यह भी संभावित है कि अन्य देश भी इस व्यापार संघर्ष के प्रभाव से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक तालमेल क्षतिग्रस्त हो सकता है।

आगामी घटनाक्रम और संभावित राजनयिक वार्ता

अमेरिका और चीन के बीच आगामी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के मिलने की संभावना है। हालांकि, इस टैरिफ वृद्धि से बैठक के परिणामों और वार्ता के माहौल पर असर पड़ सकता है। विश्लेषक मानते हैं कि दोनों देशों के लिए स्थिर और विश्वसनीय व्यापार वातावरण बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन वर्तमान स्थिति में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ने के संकेत हैं।

इस पूरी स्थिति का विश्लेषण यह दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा लगाए गए ये टैरिफ तथा चीन द्वारा कड़े निर्यात नियंत्रण वैश्विक व्यापारी, निवेशक और उपभोक्ता के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर रहे हैं। आने वाले महीनों में दोनों देशों के कदमों पर वैश्विक नजरें बनी रहेंगी। यह विस्तृत जानकारी व्यापार, निवेश और आर्थिक रणनीतिकारों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करती है और उपभोक्ताओं तथा कारोबारियों को वैश्विक आर्थिक स्थिति के बदलाव के प्रति जागरूक करती है।

यह जानकारी एएनआई न्यूज और रॉयटर्स से ली गई है