टैक्स गाइडवित्त

सेक्शन 80E के तहत एजुकेशन लोन पर टैक्स डिडक्शन का क्लेम कैसे करें

आजकल उच्च शिक्षा का खर्च काफी बढ़ गया है। चाहे आपको देश के किसी नामी संस्थान से मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करनी हो या फिर मास्टर्स की पढ़ाई के लिए विदेश का रुख करना हो, बिना बैंक से कर्जा लिए आम इंसान के लिए यह रास्ता तय करना बहुत मुश्किल हो जाता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब नौकरी की शुरुआत होती है, तो हर महीने कटने वाली ईएमआई का बोझ सीधा जेब पर पड़ता है। पर अच्छी बात यह है कि सरकार आपके इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए इनकम टैक्स के नियमों में एक बहुत ही शानदार राहत देती है।

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इनकम टैक्स एक्ट के तहत आपको अपने कर्जे के ब्याज पर भारी छूट मिलती है। अगर आप यह बारीकी से समझना चाहते हैं कि आपका ~सेक्शन 80E एजुकेशन लोन~ कैसे काम करता है और आप अपनी गाढ़ी कमाई को टैक्स में कटने से कैसे बचा सकते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए ही है। मैंने अक्सर देखा है कि लोग कर्जा तो आसानी से ले लेते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से अपना हजारों रुपये का टैक्स बेवजह सरकार को चुकाते रहते हैं। इस गाइड में हम बिना किसी उलझी हुई तकनीकी भाषा के, बिल्कुल सीधी और आसान बातचीत के जरिए समझेंगे कि टैक्स बचाने का यह पूरा गणित असल में कैसे काम करता है।

आखिर क्या है सेक्शन 80E का नियम?

जब आप बैंक से लिया गया कोई भी कर्जा वापस चुकाते हैं, तो आपकी हर महीने की ईएमआई मुख्य रूप से दो हिस्सों से मिलकर बनी होती है। इसका पहला हिस्सा मूलधन कहलाता है, जो असल में वह पैसा है जो आपने अपनी पढ़ाई के लिए बैंक से उधार लिया था। इसका दूसरा हिस्सा ब्याज होता है, जो बैंक आपसे उस पैसे की सुविधा देने के बदले हर महीने वसूलता है। इनकम टैक्स का यह खास नियम आपको यह बड़ी सहूलियत देता है कि आप पूरे साल भर में जितना भी पैसा सिर्फ ब्याज के रूप में बैंक को चुका रहे हैं, उस पूरी रकम को आप अपनी कुल कमाई में से घटाकर दिखा सकते हैं।

जब आपकी कमाई कागजों पर कम दिखेगी, तो यह बिल्कुल साफ है कि आपको उस पर टैक्स भी कम ही भरना पड़ेगा। सरकार ने यह नियम मुख्य रूप से इसलिए बनाया है ताकि देश का आम नागरिक उच्च शिक्षा का खर्च उठाने से डरे नहीं और उसे आर्थिक मदद मिल सके। इस नियम का फायदा उठाकर आप अपनी महीने की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं जिसे आप अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।

नियम की खास बातें विस्तार से जानकारी
छूट का मुख्य हिस्सा यह छूट ईएमआई के सिर्फ ब्याज वाले हिस्से पर मिलती है
मूलधन की स्थिति मूलधन की रकम पर इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं है
मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और युवाओं का आर्थिक बोझ कम करना
कानून का नाम इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत

यह टैक्स बेनिफिट किसे मिल सकता है?

हर इंसान इस नियम के तहत अपने टैक्स की बचत नहीं कर सकता क्योंकि इनकम टैक्स विभाग ने इसके लिए कुछ बहुत ही साफ और सख्त शर्तें तय कर रखी हैं। सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि यह छूट सिर्फ इंडिविजुअल्स यानी आम व्यक्तिगत करदाताओं के लिए ही बनाई गई है। अगर कोई हिंदू अविभाजित परिवार या कोई कारोबारी कंपनी कर्जा लेती है, तो उन्हें इस नियम का कोई फायदा नहीं मिलेगा। दूसरी बड़ी शर्त इस बात से जुड़ी है कि कर्जा असल में किसके लिए लिया गया है।

आप इस टैक्स छूट का फायदा तभी उठा सकते हैं जब आपने कर्जा अपनी खुद की पढ़ाई के लिए, अपने जीवनसाथी की पढ़ाई के लिए, या फिर अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए लिया हो। अगर आप कानूनी रूप से किसी बच्चे के अभिभावक हैं और आपने उसके भविष्य के लिए कर्जा लिया है, तब भी आप पूरा टैक्स बचाने के हकदार हैं। लेकिन अगर आपने भावुक होकर अपने भाई, बहन या किसी दूर के रिश्तेदार की पढ़ाई के लिए कर्जा अपने नाम पर ले लिया है, तो याद रखें कि उस स्थिति में आपको टैक्स में एक रुपये की भी राहत नहीं मिलने वाली है।

पात्रता की शर्तें नियम की स्थिति
करदाता की श्रेणी सिर्फ व्यक्तिगत करदाता के लिए मान्य
किसके लिए लिया गया कर्जा स्वयं, जीवनसाथी, बच्चे या कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे
भाई-बहन के लिए कर्जा इस नियम के तहत पूरी तरह से अमान्य
संस्थाओं के लिए हिंदू अविभाजित परिवार और कंपनियों पर यह नियम लागू नहीं होता

टैक्स डिडक्शन की लिमिट क्या है?

जब भी हमारे देश में टैक्स बचाने की बात होती है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले डेढ़ लाख रुपये वाली पुरानी लिमिट ही आती है। लेकिन आपका ~सेक्शन 80E एजुकेशन लोन~ इस मामले में बहुत ही अलग और करदाताओं के लिए बेहद फायदेमंद है। इस खास नियम के तहत आपके द्वारा चुकाए जाने वाले ब्याज पर टैक्स छूट की कोई भी ऊपरी सीमा तय नहीं की गई है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आप एक वित्त वर्ष में कर्जे पर जितना भी ब्याज बैंक को चुका रहे हैं, चाहे वह साठ हजार रुपये हो या फिर छह लाख रुपये, आप उस पूरी की पूरी रकम को अपनी टैक्सेबल इनकम से आराम से घटा सकते हैं।

मान लीजिए कि आपकी सालाना आय पंद्रह लाख रुपये है और आपने इस साल कर्जे के ब्याज के रूप में चार लाख रुपये चुकाए हैं, तो आपकी टैक्सेबल इनकम सीधे ग्यारह लाख रुपये ही रह जाएगी। इसी ग्यारह लाख रुपये के आधार पर आपका स्लैब तय होगा और टैक्स कटेगा। हालांकि आपको यह बात अपने दिमाग में बिल्कुल साफ रखनी चाहिए कि यह असीमित छूट सिर्फ ब्याज पर है, मूलधन पर आपको यह सुविधा नहीं मिलेगी।

डिडक्शन की सीमा विस्तार से नियम
अधिकतम छूट की सीमा कोई ऊपरी सीमा नहीं है, असीमित है
न्यूनतम छूट की सीमा पूरे साल में जितना ब्याज भरा गया है, वह पूरी रकम
क्या मूलधन इसमें शामिल है नहीं, ईएमआई का मूलधन वाला हिस्सा पूरी तरह से बाहर है
अन्य धाराओं से तुलना यह डेढ़ लाख वाली सीमा से बिल्कुल अलग और अतिरिक्त छूट है

कितने साल तक ले सकते हैं यह फायदा?

कितने साल तक ले सकते हैं यह फायदा?

यह एक बहुत ही जरूरी पहलू है जिसे समझना आपके लिए बेहद आवश्यक है, क्योंकि टैक्स बचाने का यह शानदार सफर आपकी जिंदगी भर नहीं चलता। सरकार के बनाए गए नियमों के मुताबिक, आप अधिकतम आठ साल तक ही अपनी आमदनी पर टैक्स में यह छूट ले सकते हैं। इस आठ साल की समय सीमा की गिनती उस साल से शुरू हो जाती है जिस साल से आप बैंक को अपनी ईएमआई यानी कर्जा चुकाना शुरू करते हैं। अगर आपने अपनी मेहनत से अपना पूरा कर्जा पांच साल में ही खत्म कर दिया है, तो आपको यह टैक्स बेनिफिट सिर्फ उन पांच सालों तक ही मिलेगा।

लेकिन इसके उलट, अगर आपने कर्जे की मियाद लंबी रखी है और आपका कर्जा बारह साल तक चलता है, तो भी आप सिर्फ शुरुआती आठ सालों तक ही अपना टैक्स बचा पाएंगे। आठ साल पूरे होने के बाद नवें साल से आप बैंक को जो भी ब्याज देंगे, उस पर आपको सरकार की तरफ से कोई टैक्स राहत नहीं मिलेगी। इसलिए मैं हमेशा यही सलाह देता हूं कि अपने कर्जे की अवधि को शुरुआत से ही आठ साल के अंदर सीमित रखने की योजना बनाएं।

समय सीमा के नियम नियमों की जानकारी
अधिकतम समय अवधि ईएमआई शुरू होने वाले साल से लेकर आठ साल तक
जल्दी कर्जा चुकाने पर अगर पांच साल में कर्जा खत्म, तो छूट भी सिर्फ पांच साल तक
लंबी अवधि का कर्जा अगर कर्जा दस साल का है, तो छूट सिर्फ पहले आठ साल तक
गिनती की शुरुआत जिस वित्त वर्ष में पहली बार ईएमआई का ब्याज चुकाया गया

कौन से कोर्सेज और बैंक इस दायरे में आते हैं?

सरकार का मुख्य लक्ष्य यही है कि देश के ज्यादा से ज्यादा लोग अच्छी शिक्षा हासिल करें, इसलिए इस नियम के दायरे को जानबूझकर काफी बड़ा रखा गया है। आप बारहवीं कक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कोई भी उच्च शिक्षा का कोर्स करते हैं, तो वह सीधे तौर पर इसके दायरे में आता है। चाहे वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो, मेडिकल की डिग्री हो, मैनेजमेंट का कोर्स हो या फिर आजकल चलन में चल रहा कोई स्किल आधारित वोकेशनल कोर्स ही क्यों न हो। यह कोर्स फुल-टाइम भी हो सकता है और नौकरीपेशा लोगों के लिए पार्ट-टाइम भी हो सकता है।

लेकिन आपको सबसे ज्यादा सावधानी इस बात में बरतनी है कि आपने अपनी पढ़ाई के लिए पैसा असल में कहां से उधार लिया है। आपको टैक्स बेनिफिट सिर्फ और सिर्फ तभी मिलेगा जब आपने कर्जा भारत के किसी मान्यता प्राप्त बैंक या रजिस्टर्ड वित्तीय संस्थान से लिया हो। अगर आपने अपनी पढ़ाई के लिए अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, किसी साहूकार या फिर किसी विदेशी बैंक से सीधे पैसे उधार ले लिए हैं, तो आप उस ब्याज पर बिल्कुल भी टैक्स नहीं बचा सकते हैं।

कोर्स और बैंक के नियम पात्रता की जानकारी
कोर्स की योग्यता बारहवीं कक्षा के बाद का कोई भी रेगुलर या वोकेशनल कोर्स
विदेश में पढ़ाई मान्यता प्राप्त है, ब्याज पर छूट पूरी मिलेगी
मान्य लोन संस्थान भारतीय बैंक, रजिस्टर्ड एनबीएफसी या सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था
अमान्य लोन स्रोत रिश्तेदार, दोस्त, साहूकार या विदेश में स्थित बैंक

अपना इंटरेस्ट सर्टिफिकेट कैसे हासिल करें?

टैक्स बचाने की इस पूरी प्रक्रिया में जो सबसे अहम दस्तावेज आपके काम आता है, वह आपका इंटरेस्ट सर्टिफिकेट होता है। यह सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि आपके बैंक द्वारा दिया गया वह आधिकारिक प्रमाण है जो आपकी टैक्स की बचत तय करता है। इस सर्टिफिकेट में बहुत ही साफ शब्दों में यह लिखा होता है कि पूरे वित्तीय वर्ष में आपने बैंक को कुल कितनी ईएमआई भरी है और उस भारी भरकम पैसे में से कितना हिस्सा बैंक ने मूलधन के रूप में काटा है और कितना हिस्सा ब्याज के खाते में डाला है।

अच्छी बात यह है कि अब इस कागज के लिए आपको बैंक की शाखा में जाकर किसी लंबी लाइन में लगने या मैनेजर के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है। आजकल लगभग सभी छोटे-बड़े बैंक यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा देते हैं। आप बस अपने बैंक की नेट बैंकिंग में लॉग इन करें, लोन वाले हिस्से में जाएं और वहां से चालू वित्त वर्ष का सर्टिफिकेट पीडीएफ के रूप में डाउनलोड कर लें।

सर्टिफिकेट निकालने के स्टेप्स आसान प्रक्रिया
पहला स्टेप अपने बैंक की सुरक्षित नेट बैंकिंग या आधिकारिक मोबाइल ऐप में लॉग इन करें
दूसरा स्टेप लोन एकाउंट या ग्राहक सेवा वाले सेक्शन की पहचान करें
तीसरा स्टेप वहां मौजूद विकल्पों में से इंटरेस्ट सर्टिफिकेट का चुनाव करें
चौथा स्टेप सही वित्त वर्ष चुनकर उसे पीडीएफ के रूप में अपने पास सेव कर लें

डिडक्शन कैसे क्लेम करें?

जब आप साल के अंत में अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, तब इस हजारों रुपये की छूट को क्लेम करना बहुत ही आसान और सीधा काम है। आपको अपने आईटीआर फॉर्म में डिडक्शन का एक पूरा अलग सेक्शन मिलता है जिसे आपको ध्यान से देखना होता है। वहां आपको चैप्टर के अंदर जाना है, जहां टैक्स बचाने के कई सारे विकल्प मौजूद होते हैं, और वहीं आपको यह खास नियम भी लिखा हुआ मिलेगा।

आपको बस इतनी सी मेहनत करनी है कि अपने बैंक से डाउनलोड किए गए सर्टिफिकेट को खोलें, उसमें पूरे साल के दौरान चुकाए गए ब्याज की सटीक रकम को देखें और उसे आईटीआर फॉर्म के उस खाली कॉलम में सही-सही भर दें। आपको फॉर्म भरते समय उस सर्टिफिकेट को स्कैन करके अपलोड करने की कोई जरूरत नहीं होती है। लेकिन एक बहुत ही जरूरी बात हमेशा याद रखें कि उस सर्टिफिकेट को अपने कंप्यूटर या ईमेल में कम से कम सात साल के लिए सुरक्षित जरूर रखें ताकि अगर विभाग आपसे कोई सबूत मांगे तो आप उसे तुरंत दिखा सकें।

क्लेम करने की प्रक्रिया जरूरी कदम
आईटीआर फॉर्म में जगह डिडक्शन सेक्शन के अंदर संबंधित चैप्टर में
फॉर्म में भरी जाने वाली जानकारी पूरे वित्तीय वर्ष में बैंक को चुकाए गए ब्याज की कुल रकम
अपलोड करने वाले दस्तावेज रिटर्न फाइल करते समय कोई भी दस्तावेज अपलोड नहीं करना है
भविष्य के लिए सलाह अगर कोई नोटिस आता है तो उसके लिए सर्टिफिकेट को हमेशा संभाल कर रखें

टैक्स बचाते समय इन गलतियों से बिल्कुल बचें

मैंने अपनी जानकारी में कई ऐसे लोगों को देखा है जो कुछ छोटी-छोटी और मूर्खतापूर्ण गलतियां कर बैठते हैं जिनकी वजह से उनका पूरा क्लेम ही विभाग द्वारा रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसमें सबसे बड़ी गलती समय पर ईएमआई न भरना और बाउंस कर देना है। अगर आप तय तारीख पर अपनी ईएमआई नहीं भरते हैं, तो बैंक नियम के अनुसार आप पर भारी पेनल्टी या लेट फीस लगा देता है।

आपको यह बात अपने दिमाग में अच्छी तरह बैठा लेनी चाहिए कि इनकम टैक्स विभाग सिर्फ आपके सामान्य ब्याज पर ही छूट देता है, बैंक ने आपकी गलती की वजह से जो पेनल्टी लगाई है, उसे आप टैक्स बचाने के लिए बिल्कुल इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके अलावा एक और बहुत बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि कर्जा जानबूझकर ऐसे सदस्य के नाम पर ले लेते हैं जिसकी अपनी कोई आमदनी टैक्स के दायरे में आती ही नहीं है। अगर बच्चा अभी पढ़ रहा है तो उसके नाम पर कर्जा लेने से परिवार का टैक्स नहीं बचेगा, हमेशा कर्जा उस व्यक्ति के नाम पर लेना चाहिए जो ऊंचे टैक्स स्लैब में आता है।

सामान्य गलतियां सुधारने का सही तरीका
पेनल्टी वाले ब्याज को जोड़ना क्लेम करते समय सिर्फ और सिर्फ सामान्य ब्याज को ही शामिल करें
बिना आय वाले व्यक्ति के नाम पर कर्जा हमेशा ज्यादा टैक्स स्लैब वाले माता-पिता के नाम पर ही कर्जा लें
मूलधन को भी ब्याज में मिला देना बैंक के सर्टिफिकेट से हमेशा ब्याज वाले हिस्से को ही देखकर भरें
दोस्तों से उधार लेकर क्लेम करना टैक्स बचाने के लिए हमेशा मान्यता प्राप्त बैंक से ही कर्ज की व्यवस्था करें

नई बनाम पुरानी टैक्स रिजीम: आपको क्या चुनना चाहिए?

आजकल सरकार ने लोगों को टैक्स भरने के लिए दो बिल्कुल अलग-अलग व्यवस्थाएं दे दी हैं, जिनमें से एक पुरानी व्यवस्था है और एक बिल्कुल नई व्यवस्था है। अगर आप अपने ~सेक्शन 80E एजुकेशन लोन~ का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो आपको एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि यह जबरदस्त छूट सिर्फ और सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही काम करती है।

नई टैक्स व्यवस्था में सरकार ने लोगों को लुभाने के लिए टैक्स की दरें तो थोड़ी कम कर दी हैं, लेकिन इसके बदले में उन्होंने इस तरह की लगभग सभी तरह की छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसलिए जब भी आप अपना आईटीआर फाइल करने बैठें, तो उससे पहले हमेशा एक बार रफ कैलकुलेशन जरूर कर लें कि दोनों में से आपके लिए क्या बेहतर है। अगर आप अपने कर्जे का भारी ब्याज चुका रहे हैं, तो बहुत हद तक यह मुमकिन है कि पुरानी व्यवस्था चुनने में ही आपकी हजारों रुपये की बचत होगी और आपका कुल टैक्स कम बनेगा।

टैक्स रिजीम की तुलना नियमों का असर
पुरानी टैक्स व्यवस्था हां, इसमें यह छूट पूरी तरह से लागू है और फायदा मिलता है
नई टैक्स व्यवस्था नहीं, इस व्यवस्था में यह छूट पूरी तरह से खत्म कर दी गई है
टैक्स कैलकुलेशन का तरीका पहले दोनों व्यवस्थाओं में अपना कुल टैक्स गिनें और कम टैक्स वाला विकल्प चुनें
बदलाव की सुविधा नौकरीपेशा लोग हर साल अपनी सुविधानुसार व्यवस्था बदल सकते हैं

अंतिम विचार

पढ़ाई के लिए कर्जा लेना कोई परेशानी या चिंता की बात नहीं है। यह असल में आपके या आपके बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किया गया एक बहुत ही समझदारी भरा निवेश है जो आगे चलकर अच्छे परिणाम देता है। बस जरूरत इस बात की है कि आप टैक्स के इस पूरे सिस्टम को अच्छी तरह समझें और कागजी कार्रवाई में थोड़ा स्मार्ट तरीके से काम करें।

अगर आप अपना सेक्शन 80E एजुकेशन लोन सही तरीके से मैनेज करते हैं, तो आप अपनी ईएमआई के ब्याज को अपना आर्थिक दुश्मन नहीं, बल्कि हर साल टैक्स बचाने वाला अपना सबसे अच्छा दोस्त बना सकते हैं। हमेशा यह बात याद रखें कि कर्जा किसी भरोसेमंद बैंक से ही लें, अपनी ईएमआई समय पर चुकाएं ताकि कोई पेनल्टी न लगे, बैंक से अपना इंटरेस्ट सर्टिफिकेट निकालें और टैक्स फाइल करते समय पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनकर अपनी मेहनत की कमाई को बचाएं। थोड़े से कागजी काम से आप बड़ा आर्थिक फायदा ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या मैं अपने दो अलग-अलग बच्चों की पढ़ाई के लिए लिए गए कर्जे पर एक साथ टैक्स छूट ले सकता हूं?

जी हां, आप बिल्कुल बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकते हैं। अगर आपने अपने दोनों बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग कर्जे लिए हुए हैं, तो आप दोनों कर्जों के ब्याज को जोड़कर एक साथ टैक्स छूट मांग सकते हैं। इस नियम में कोई ऊपरी सीमा नहीं है, इसलिए आपका कुल मिलाकर जितना भी ब्याज बनेगा, उस पूरे ब्याज पर आपको सरकार से पूरी राहत मिलेगी।

मैं नौकरी करने के साथ-साथ ऑनलाइन पार्ट-टाइम एमबीए कर रहा हूं। क्या मुझे इस कर्जे पर छूट मिलेगी?

हां, यह नियम आप पर भी लागू होता है। सरकारी नियमों में यह बिल्कुल साफ लिखा है कि बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए लिया गया कर्जा मान्य है। अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप रोजाना फुल-टाइम कॉलेज जा रहे हैं या फिर रात में कोई ऑनलाइन या पार्ट-टाइम कोर्स कर रहे हैं। बस आपका कॉलेज या यूनिवर्सिटी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

क्या बैंक की प्रोसेसिंग फीस पर भी टैक्स बचाया जा सकता है?

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं किया जा सकता और यह लोगों के बीच एक बहुत ही आम भ्रम है। बैंक जब आपका कर्जा पास करता है तो उस समय जो शुरुआती प्रोसेसिंग फीस आपके खाते से काटता है, वह कानून की नजर में ब्याज का हिस्सा नहीं मानी जाती। इसलिए आप उस फीस पर इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं मांग सकते, आपको सिर्फ ईएमआई वाले ब्याज पर ही छूट मिलती है।

मैं पिछले दस साल से अपना कर्जा चुका रहा हूं, क्या मैं अब यह डिडक्शन क्लेम कर सकता हूं?

दुर्भाग्य से आप अब ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। इनकम टैक्स का यह नियम सिर्फ कर्जा शुरू होने के पहले आठ साल तक ही आपके लिए लागू रहता है। चूंकि आपके कर्जे को शुरू हुए आठ साल से ज्यादा का लंबा समय बीत चुका है, इसलिए अब आप बचे हुए सालों के ब्याज पर कोई भी टैक्स बेनिफिट नहीं ले पाएंगे।

मेरी पत्नी अभी मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हैं और मैंने उनके लिए कर्जा लिया है। क्या मैं अपनी सैलरी से टैक्स बचा सकता हूं?

हां, यह कानूनी रूप से पूरी तरह जायज है। आप अपने जीवनसाथी की पढ़ाई के लिए लिए गए कर्जे की ईएमआई अपनी जेब से चुका रहे हैं, इसलिए आप अपनी टैक्सेबल इनकम में से उस ब्याज की रकम को आसानी से घटाकर अपना टैक्स बचा सकते हैं और इसमें कोई नियम नहीं टूटता।