अग्रिम कर को समझनाः किसे और कब भुगतान करने की आवश्यकता है
मार्च का महीना आते ही हम सभी अपने कर को बचाने और उसे चुकाने की भागदौड़ में लग जाते हैं। आमतौर पर हम यही सोचते हैं कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद हम एक साथ अपना पूरा आयकर भर देंगे। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि सरकार पूरे साल देश का कामकाज कैसे चलाती है? देश में सड़कें बनवाने, अस्पताल चलाने, सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कामों के लिए सरकार को हर दिन धन की आवश्यकता होती है।
इसलिए सरकार यह चाहती है कि जैसे-जैसे आप पूरे साल पैसे कमाते हैं, वैसे-वैसे आप अपना कर भी सरकार के खजाने में जमा करते रहें। कर चुकाने की इसी आसान और व्यवस्थित प्रक्रिया को एडवांस टैक्स कहा जाता है। अगर आप एक जिम्मेदार करदाता हैं, तो आपको इस नियम को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। कई बार सही जानकारी न होने के कारण आम लोग इसे समय पर जमा करना भूल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बाद में उन्हें भारी जुर्माना और ब्याज चुकाना पड़ता है। आज मैं आपको बिल्कुल सरल और बोलचाल की हिंदी भाषा में इस विषय से जुड़ी हर वह बारीक जानकारी दूंगा, जो आपके वित्तीय जीवन को आसान बनाने में मदद करेगी।
एडवांस टैक्स क्या होता है?
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, अगर किसी भी वित्तीय वर्ष में आपकी कुल अनुमानित कर देनदारी दस हजार रुपये या उससे अधिक हो जाती है, तो आपको अपना कर साल के अंत का इंतजार किए बिना किस्तों में चुकाना होता है। इसे ही बोलचाल की भाषा में एडवांस टैक्स या कमाई के साथ कर चुकाने वाली योजना कहा जाता है। इसका सीधा और सरल मतलब यह है कि जिस साल आप पैसा कमा रहे हैं, उसी साल आपको उस कमाई पर कर भी देना होगा। मान लीजिए कि आप वर्तमान वित्तीय वर्ष में अच्छी कमाई कर रहे हैं, तो आपको इसी साल के दौरान अपना कर सरकार को जमा करना होगा।
यह व्यवस्था सरकार और करदाता दोनों के पक्ष में बेहतरीन काम करती है। एक तरफ सरकार को पूरे साल नियमित रूप से राजस्व मिलता रहता है, जिससे देश के विकास कार्यों में कोई रुकावट नहीं आती। वहीं दूसरी तरफ, करदाता के ऊपर भी साल के अंत में एक साथ बहुत सारा पैसा भरने का अचानक से कोई भारी आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। जब आप अपना अंतिम आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपके द्वारा पहले ही जमा किए गए इस पैसे को आपकी कुल कर देनदारी में से घटा दिया जाता है और हिसाब बराबर हो जाता है।
| एडवांस टैक्स के मुख्य बिंदु | विस्तृत जानकारी |
| अन्य प्रचलित नाम | कमाई के साथ कर चुकाने की योजना |
| न्यूनतम सीमा का नियम | कर देनदारी दस हजार रुपये या उससे अधिक होने पर |
| मुख्य उद्देश्य | सरकारी खजाने में नियमित धन आना और करदाता पर बोझ कम करना |
| किस समय के लिए देय | जिस वित्तीय वर्ष में आय उत्पन्न हो रही है, ठीक उसी वर्ष में |
एडवांस टैक्स किसे चुकाना होता है?
यह एक बहुत ही आम सवाल है जो अक्सर लोगों के मन में दुविधा पैदा करता है कि क्या देश के हर नागरिक को यह कर देना होता है? इसका जवाब है नहीं। यह केवल उन लोगों को देना होता है जिनकी कर देनदारी एक निश्चित सीमा को पार कर जाती है। अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं और आपको हर महीने वेतन मिलता है, तो आपका नियोक्ता आपके वेतन से पहले ही टीडीएस काटकर सरकार को जमा कर देता है। ऐसे में सिर्फ वेतन से होने वाली कमाई पर आपको अलग से कुछ भी जमा नहीं करना होता। लेकिन, अगर आपके वेतन के अलावा कोई और आमदनी है, जैसे बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज, शेयर बाजार से हुआ भारी मुनाफा, कोई जमीन या मकान बेचने से हुआ लाभ, या फिर किसी संपत्ति से आने वाला किराया, तो आपको सतर्क होना पड़ेगा। इन सभी अतिरिक्त आय को मिलाकर अगर आपका कुल कर दस हजार रुपये से ज्यादा बन रहा है, तो एक वेतनभोगी व्यक्ति होने के बावजूद आपको अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपना खुद का व्यापार करते हैं, एक स्वतंत्र पेशेवर हैं, या डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील जैसे काम करते हैं, तो आपके लिए इसके नियम बहुत ज्यादा मायने रखते हैं। चूँकि आपके पास कोई ऐसा नियोक्ता नहीं होता जो हर महीने आपकी आय पर स्रोत पर कर कटौती करे, इसलिए यह आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बन जाती है कि आप अपनी पूरे साल की संभावित आय का खुद अनुमान लगाएं। इसके अलावा सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। अगर आपकी उम्र साठ साल या उससे अधिक है और आपकी व्यापार या पेशे से कोई आमदनी नहीं है, तो आपको इस झंझट से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। आप सीधे वित्तीय वर्ष के अंत में अपना रिटर्न भरते समय अपना कर जमा कर सकते हैं।
| करदाता की श्रेणी | कर चुकाने की अनिवार्यता और नियम |
| वेतनभोगी कर्मचारी | केवल तब आवश्यक है जब अन्य स्रोतों से आय हो और कर दस हजार से अधिक हो |
| व्यापारी और पेशेवर | पूरी तरह लागू, यदि कुल अनुमानित कर दस हजार रुपये या उससे अधिक है |
| वरिष्ठ नागरिक | व्यापारिक आय न होने पर पूरी तरह से छूट प्राप्त है |
| अनिवासी भारतीय | भारत में होने वाली आय पर कर दस हजार से अधिक होने पर लागू |
एडवांस टैक्स जमा करने की अहम तारीखें
आपको अपना पूरा पैसा एक ही बार में सरकार को नहीं देना होता है, बल्कि आयकर विभाग ने आपकी सुविधा के लिए पूरे वित्तीय वर्ष को चार अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। आपको अपना अनुमानित कर इन चार अलग-अलग किस्तों में सरकार द्वारा तय की गई तारीखों से पहले जमा करना होता है। सभी सामान्य करदाताओं, जिनमें कॉर्पोरेट कंपनियां, नौकरीपेशा लोग और व्यापारी शामिल हैं, के लिए यह शेड्यूल एक जैसा ही काम करता है। आपकी पहली किस्त पंद्रह जून तक जमा हो जानी चाहिए, जिसमें आपके पूरे साल के अनुमानित कर का कम से कम पंद्रह प्रतिशत हिस्सा सरकार के पास पहुंच जाना चाहिए। इसके बाद दूसरी किस्त पंद्रह सितंबर तक आती है, जिस दिन तक आपके कुल कर का पैंतालीस प्रतिशत हिस्सा जमा हो जाना चाहिए।
तीसरी किस्त की देय तिथि पंद्रह दिसंबर निर्धारित की गई है, और इस समय तक आपको अपना पचहत्तर प्रतिशत कर चुका देना होता है। अंत में, चौथी और आखिरी किस्त आपको पंद्रह मार्च तक देनी होती है, जब आपका शत-प्रतिशत कर जमा हो जाना चाहिए। हालांकि, छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए सरकार ने एक विशेष अनुमानित कर योजना भी बनाई है। अगर आप उस विशेष योजना का लाभ उठा रहे हैं, तो आपको साल में चार बार किस्तों का ध्यान रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको अपना पूरा शत-प्रतिशत कर केवल एक ही बार में पंद्रह मार्च तक जमा करने की बहुत बड़ी छूट दी गई है, जिससे आपका कीमती समय और ऊर्जा दोनों बचते हैं।
| किस्त का विवरण | सामान्य करदाताओं के लिए अंतिम तिथि | अनुमानित कर योजना वालों के लिए | जमा करने योग्य राशि का प्रतिशत |
| पहली किस्त | पंद्रह जून | लागू नहीं | कुल कर का पंद्रह प्रतिशत तक |
| दूसरी किस्त | पंद्रह सितंबर | लागू नहीं | कुल कर का पैंतालीस प्रतिशत तक |
| तीसरी किस्त | पंद्रह दिसंबर | लागू नहीं | कुल कर का पचहत्तर प्रतिशत तक |
| चौथी किस्त | पंद्रह मार्च | पंद्रह मार्च | कुल कर का सौ प्रतिशत तक |
अपने एडवांस टैक्स की गणना कैसे करें?

अब तक आप यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि यह व्यवस्था क्या है और इसे कब तक जमा करना है, लेकिन सबसे बड़ी उलझन इसे कैलकुलेट करने में आती है। साल के बीच में ही पूरे साल की कमाई का सटीक अंदाजा लगाना भले ही थोड़ा मुश्किल लगे, लेकिन एक व्यवस्थित तरीके से चलने पर यह काम बेहद आसान हो जाता है। सबसे पहले आपको एक डायरी में अपनी साल भर की सभी संभावित आमदनी का पूरा हिसाब लिखना होगा। इसमें आप अपना अनुमानित वेतन, किराये से होने वाली इनकम, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज और किसी भी तरह के लाभ को ईमानदारी से जोड़ लें। यदि आप एक स्वतंत्र पेशेवर हैं, तो अपने पिछले सालों की कमाई के रुझान को देखकर एक यथार्थवादी आंकड़ा तैयार करें।
इसके बाद, इस कुल अनुमानित आमदनी में से उन सभी निवेशों और खर्चों को घटा दें जिन पर आप छूट लेने वाले हैं। जैसे जीवन बीमा का प्रीमियम, स्वास्थ्य बीमा, या बच्चों की स्कूल फीस। इन कटौतियों को हटाने के बाद जो राशि बचेगी, वह आपकी कर योग्य आय कहलाएगी। अब इस बची हुई आय पर आप सरकार द्वारा तय की गई मौजूदा आयकर दरों के अनुसार अपना कुल कर निकालें और उसमें शिक्षा उपकर भी जोड़ दें। अब तक निकाले गए इस कुल कर में से वह रकम बिल्कुल घटा दें जो आपके बैंक या नियोक्ता द्वारा पहले ही टीडीएस के रूप में काटी जा चुकी है। यदि अंत में बची हुई यह राशि दस हजार रुपये या उससे ज्यादा है, तो ठीक यही आपका वास्तविक एडवांस टैक्स है जिसे आपको तय तारीखों पर अलग-अलग किस्तों में बांटकर सरकार को जमा करना है।
| गणना का क्रम | विवरण और प्रक्रिया |
| पहला कदम | वेतन, व्यापार, ब्याज और किराये की सभी आय का योग करें |
| दूसरा कदम | जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सभी निवेशों की छूट घटाएं |
| तीसरा कदम | शेष बची हुई आय पर मौजूदा स्लैब के अनुसार कर और उपकर निकालें |
| चौथा कदम | पहले से काटे गए टीडीएस को कुल निकाले गए कर में से कम करें |
| पांचवा कदम | शेष राशि दस हजार से अधिक होने पर उसे चार किस्तों में विभाजित करें |
एडवांस टैक्स नहीं चुकाने पर क्या होगा? (जुर्माना और ब्याज)
हमारे देश में बहुत से लोग यह सोचकर इस नियम को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं कि साल के अंत में रिटर्न भरते समय वह अपना सारा बकाया पैसा एक साथ दे देंगे। आपको बता दूँ कि यह सोच आपके लिए एक बहुत बड़ी आर्थिक भूल साबित हो सकती है। आयकर विभाग इस मामले में किसी भी तरह की देरी या कमी होने पर बहुत सख्ती बरतता है और भारी ब्याज वसूलता है। यह दंडात्मक ब्याज मुख्य रूप से आयकर अधिनियम की धारा दो सौ चौंतीस बी और धारा दो सौ चौंतीस सी के तहत लगाया जाता है। अगर आपकी देनदारी दस हजार रुपये से अधिक थी लेकिन आपने पूरे साल में इसे जमा करने की कोई जहमत नहीं उठाई, या फिर कुल कर का नब्बे प्रतिशत से भी कम पैसा जमा किया है, तो आप पर पहले नियम के तहत सीधा जुर्माना लगेगा।
इसमें आपको बचे हुए पैसे पर एक प्रतिशत प्रति माह की दर से साधारण ब्याज देना पड़ता है, जो अप्रैल के महीने से शुरू होकर तब तक लगता रहता है जब तक आप अपना पूरा कर्ज चुका नहीं देते। इसके अलावा, अगर आप तय किस्तों के प्रतिशत के हिसाब से पैसा जमा करने में चूक जाते हैं, तो जो रकम कम रह जाती है, उस पर भी हर महीने एक प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज लगाया जाता है। हर किस्त की कमी पर लगातार तीन महीने का ब्याज जुड़ता है। इन कठोर नियमों को देखकर यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि अपनी किस्तों को समय पर और सही अनुपात में जमा करना कितना ज्यादा जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही या टालमटोल आपके खून-पसीने की कमाई को जुर्माने के रूप में नष्ट कर सकती है।
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| जुर्माने का नियम (धारा) | ब्याज लगने का मुख्य कारण | ब्याज की दर और समय सीमा |
| धारा दो सौ चौंतीस बी | कर बिल्कुल जमा न करना या नब्बे प्रतिशत से कम जमा करना | शेष राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह (भुगतान तक) |
| धारा दो सौ चौंतीस सी | किस्तों की देय तिथियों पर निर्धारित प्रतिशत से कम राशि जमा करना | कम जमा की गई राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह (तीन महीने तक) |
| धारा दो सौ चौंतीस ए | वित्तीय वर्ष के अंत में रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर | कुल कर की राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह |
इंटरनेट के माध्यम से एडवांस टैक्स कैसे जमा करें?
आज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में आपको अपना कर जमा करने के लिए किसी बैंक की लंबी और उबाऊ लाइनों में खड़े होने की कोई जरूरत नहीं रह गई है। आयकर विभाग ने अपनी नई वेबसाइट को इतना आसान और सुविधाजनक बना दिया है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर की मदद से घर बैठे कुछ ही मिनटों में अपना पैसा जमा कर सकता है। सबसे पहले आपको आयकर विभाग की आधिकारिक ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाना होगा। वहां आपको होम पेज पर ही ‘ई-पे टैक्स’ नाम का एक साफ-सुथरा विकल्प दिखाई देगा, जिस पर आपको क्लिक करना है।
अगले पेज पर आपको अपना स्थायी खाता संख्या यानी पैन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा और उसे दोबारा लिखकर उसकी पुष्टि करनी होगी। इसके बाद अपना चालू मोबाइल नंबर भरें। कुछ ही सेकंड में आपके मोबाइल पर एक वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी आएगा, जिसे डालकर आप सिस्टम में सुरक्षित रूप से प्रवेश कर जाएंगे। लॉगिन होने के बाद आपको आयकर वाले बॉक्स में आगे बढ़ने का बटन दबाना है। इसके बाद आपको सही निर्धारण वर्ष चुनना होगा और भुगतान के प्रकार में एडवांस टैक्स वाले विकल्प को सेलेक्ट करना होगा। अपनी निकाली गई कर की राशि भरें और अपनी पसंद के अनुसार इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से भुगतान पूरा करें। भुगतान सफल होते ही आपको कंप्यूटर स्क्रीन पर एक रसीद दिखाई देगी जिसे चालान कहा जाता है, इसे डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें।
| भुगतान के चरण | इंटरनेट पर की जाने वाली प्रक्रिया |
| पोर्टल पर विजिट | सरकारी ई-फाइलिंग वेबसाइट खोलें और ‘ई-पे टैक्स’ विकल्प चुनें |
| पैन कार्ड वेरिफिकेशन | अपना पैन नंबर डालें और मोबाइल पर आए ओटीपी से पुष्टि करें |
| वर्ष और प्रकार का चयन | सही निर्धारण वर्ष चुनें और भुगतान प्रकार में एडवांस टैक्स सिलेक्ट करें |
| भुगतान की प्रक्रिया | राशि दर्ज करें और यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए भुगतान करें |
| रसीद सुरक्षित करना | सफल भुगतान के बाद उत्पन्न हुए चालान को डाउनलोड करके सेव करें |
कर भरते समय याद रखने वाली जरूरी बातें
यह प्रक्रिया भले ही इंटरनेट पर बहुत आसान हो गई है, लेकिन कुछ छोटी-छोटी तकनीकी गलतियां बाद में आपके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं। मैं आपको कुछ ऐसी बेहद महत्वपूर्ण बातें बता रहा हूँ जिन्हें हमेशा अपने दिमाग में रखकर आप किसी भी तरह की सरकारी उलझन से बच सकते हैं। सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि हमेशा अपने निर्धारण वर्ष का चुनाव बहुत ही सावधानी और एकाग्रता के साथ करें। अगर आपने जल्दबाजी में गलती से पिछला या कोई और वर्ष चुन लिया, तो आपका पैसा आयकर विभाग के पास तो चला जाएगा, लेकिन वह आपके मौजूदा साल के खाते में बिल्कुल नहीं जुड़ेगा। इसे सुधारने के लिए आपको रिफंड का दावा करना पड़ेगा जो कि एक बहुत ही लंबी और थकाने वाली प्रक्रिया होती है।
इसके अलावा, अगर साल के बीच में आपकी आमदनी में अचानक कोई बहुत बड़ा उछाल आता है, जैसे आपने अपना कोई पुश्तैनी मकान बेच दिया हो या आपको शेयर बाजार से अचानक बड़ा मुनाफा मिल गया हो, तो अपनी कर देनदारी को दोबारा कागज पर जरूर कैलकुलेट करें। कई बार लोग अपनी पुरानी आय के हिसाब से ही किस्तें भरते रहते हैं और बाद में उन्हें अतिरिक्त आय पर भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। आपको जिस तिमाही में यह बड़ा मुनाफा होता है, उसके ठीक बाद आने वाली किस्त में आपको इस अतिरिक्त आमदनी का कर जोड़कर जमा करना होता है। सबसे अंत में, अपने द्वारा जमा किए गए पैसे की रसीद यानी चालान को कभी भी डिलीट न करें। यह रसीद इस बात का सबसे बड़ा और पक्का सबूत है कि आपने देश के नागरिक के रूप में अपना फर्ज निभा दिया है।
| महत्वपूर्ण सावधानियां | ऐसा करने से होने वाले बड़े लाभ |
| सही निर्धारण वर्ष का चुनाव | आपका मेहनत का पैसा सही सरकारी खाते और सही साल में दर्ज होगा |
| आय बढ़ने पर दोबारा गणना | अचानक लाभ होने पर लगने वाले भारी दंडात्मक ब्याज से पूरी सुरक्षा |
| चालान रसीद को संभालना | भविष्य में रिटर्न दाखिल करते समय एक पक्के कानूनी सबूत के रूप में उपयोग |
| खाते का नियमित मिलान | जमा किया गया पैसा सरकारी रिकॉर्ड में अपडेट हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि |
अंतिम विचार
कुल मिलाकर कहा जाए तो एडवांस टैक्स की व्यवस्था को समझना हर जागरूक करदाता के लिए जरूरी है। यह सिर्फ एक कानूनी मजबूरी नहीं है, बल्कि आपके पर्सनल फाइनेंस को अनुशासित रखने का एक बेहतरीन तरीका भी है। साल के अंत में जब एक साथ हजारों या लाखों रुपये टैक्स के रूप में देने पड़ते हैं, तो हमारा पूरा बजट बिगड़ सकता है। किस्तों में टैक्स चुकाकर आप इस परेशानी से बच सकते हैं।
आपको बस इतना करना है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही अपनी संभावित कमाई का एक रफ आइडिया निकाल लें और हर तीन महीने में उसे रिव्यू करते रहें। 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च की तारीखों को अपने फोन के कैलेंडर में रिमाइंडर के तौर पर सेट कर लें। अगर आप एक फ्रीलांसर या बिजनेसमैन हैं, तो यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि टीडीएस न होने की वजह से आपकी टैक्स देनदारी ज्यादा हो सकती है। सही समय पर और सही गणना के साथ अपना एडवांस टैक्स जमा करें ताकि आप किसी भी तरह के भारी भरकम ब्याज और आयकर विभाग के नोटिस से सुरक्षित रह सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या किसानों को या खेती से होने वाली कमाई पर यह कर देना होता है?
हमारे देश के आयकर कानून के तहत, शुद्ध रूप से खेती किसानी से होने वाली आय पूरी तरह से कर मुक्त रखी गई है। इसलिए अगर आपकी आजीविका और कमाई का एकमात्र साधन सिर्फ खेती है, तो आपको अपनी उपज से होने वाली कमाई पर सरकार को कोई भी पैसा नहीं देना होता और न ही किस्तों वाले ये नियम आप पर किसी भी तरह से लागू होते हैं।
2. अगर मैंने गलती से अपनी वास्तविक देनदारी से ज्यादा पैसा सरकार को भर दिया है तो क्या होगा?
इसमें घबराने या परेशान होने की रत्ती भर भी कोई बात नहीं है। अक्सर साल के बीच में अनुमान लगाने में लोगों से थोड़ी बहुत चूक हो ही जाती है। जब वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद आप अपना अंतिम आयकर रिटर्न दाखिल करेंगे, तब आपकी वास्तविक देनदारी का पक्का हिसाब किया जाएगा। अगर आपका जमा किया गया पैसा ज्यादा निकलता है, तो आयकर विभाग उस फालतू पैसे को पूरे सम्मान के साथ सीधे आपके बैंक खाते में वापस भेज देगा।
3. मैं शेयर बाजार में ट्रेडिंग करता हूँ, जहाँ मुझे मुनाफा और नुकसान दोनों होते हैं, मैं इसका हिसाब कैसे करूँ?
शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स को इस मामले में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। आप अपने हर तीन महीने के शुद्ध मुनाफे का सटीक आकलन कर सकते हैं। अगर आपको किसी तिमाही में भारी नुकसान होता है जिससे आपकी कुल आमदनी घट जाती है, तो आप अपनी आने वाली किस्तों की राशि को बिना किसी डर के उसी अनुपात में कम करके जमा कर सकते हैं।
4. क्या संपत्ति बेचने पर होने वाले लाभ पर यह कर तभी देना होता है जब संपत्ति असल में बिक जाए?
जी हाँ, बिल्कुल ऐसा ही है। चूँकि किसी भी इंसान को यह बात पहले से बिल्कुल नहीं पता होती कि वह अपनी संपत्ति किस महीने में बेचेगा या उस पर उसे भविष्य में कितना मुनाफा होगा, इसलिए इसका अनुमान पहले से लगाना असंभव है। नियम यह कहता है कि जिस तिमाही में आपको वह संपत्ति बेचने से मुनाफा होता है, ठीक उसके बाद आने वाली किस्तों में आपको उस मुनाफे का पैसा सरकार को जमा करना होता है।
