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कल्याणी न्यूज़ अपडेट: कल्याणी ब्लास्ट साइट पर BJP MLA को विरोध का सामना करना पड़ा, ‘वापस जाओ’ के नारे लगे; 6 लोगों की मौत का दावा

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का शांत और योजनाबद्ध शहर कल्याणी शुक्रवार की दोपहर एक भीषण धमाके से दहल उठा। लेकिन धमाके की गूंज थमने से पहले ही वहां सियासी शोर शुरू हो गया। कल्याणी के रथतला इलाके में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने न केवल कई जिंदगियों को लील लिया, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नया उबाल भी ला दिया है।

घटना के कुछ ही घंटों बाद जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय विधायक अंबিকা रॉय (Ambika Roy) स्थिति का जायजा लेने घटना स्थल पर पहुंचे, तो उन्हें भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा। ‘वापस जाओ’ (Go Back) के नारों, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस मानवीय त्रासदी को एक कुरुक्षेत्र में बदल दिया है।

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि उस काली दोपहर को क्या हुआ, क्यों विधायक को विरोध का सामना करना पड़ा, और कैसे मौत के आंकड़ों को लेकर प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने हैं।

वह काली दोपहर: जब धुएं के गुबार में गुम हो गईं जिंदगियां

शुक्रवार की दोपहर करीब 1:30 बजे, जब रथतला के घनी आबादी वाले इलाके में लोग अपने दिनचर्या में व्यस्त थे, तभी एक कान फोड़ देने वाले धमाके ने धरती हिला दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक लोगों को लगा जैसे भूकंप आया हो।

विस्फोट एक घर के भीतर चल रही पटाखा फैक्ट्री में हुआ था। धमाका इतना जबरदस्त था कि जिस इमारत में यह फैक्ट्री चल रही थी, उसकी छत पूरी तरह से उड़ गई। आस-पास के घरों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए और दीवारों में दरारें आ गईं। देखते ही देखते पूरा इलाका काले धुएं और बारूद की गंध से भर गया।

स्थानीय निवासी सुष्मिता सेन (काल्पनिक नाम) बताती हैं, “मैं अपने घर की छत पर कपड़े सुखा रही थी। अचानक एक जोरदार आवाज आई और मुझे लगा जैसे मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो। जब मैंने धुएं की तरफ देखा, तो वहां सिर्फ आग और चीख-पुकार थी।”

दमकल की गाड़ियां जब तक संकरी गलियों से जूझते हुए मौके पर पहुंचतीं, तब तक स्थानीय लोग ट्यूबवेल से बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन बारूद के ढेर में रुक-रुक कर हो रहे छोटे धमाकों ने राहत कार्य को मुश्किल बना दिया था।

मानवीय त्रासदी: मौत के आंकड़े और बिखरते परिवार

इस हादसे ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। पुलिस और दमकल विभाग द्वारा बरामद किए गए शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा था।

प्रशासनिक आंकड़ा बनाम विपक्ष का दावा: आधिकारिक तौर पर पुलिस ने 4 लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं जो इस अवैध फैक्ट्री में काम करती थीं। मृतकों की पहचान भारती चौधरी, रूमा सोनार, अंजलि विश्वास और दुर्गा साहा के रूप में हुई है। वहीं, एक अन्य महिला उज्ज्वला भुइयां गंभीर रूप से घायल हैं और जीवन-मौत से जूझ रही हैं।

हालाँकि, यहीं से विवाद की शुरुआत होती है। भाजपा विधायक अंबिका रॉय ने दावा किया है कि मरने वालों की संख्या 6 है और प्रशासन असली आंकड़ों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि मलबे के नीचे और भी शव दबे हो सकते हैं या उन्हें गुपचुप तरीके से हटा दिया गया है।

सियासत का अखाड़ा: विधायक का विरोध और ‘गो बैक’ के नारे

घटना की गंभीरता को देखते हुए कल्याणी के भाजपा विधायक अंबिका रॉय जब अपनी टीम के साथ घटनास्थल का मुआयना करने और पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, तो वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया। विधायक की गाड़ी जैसे ही रथतला के पास पहुंची, वहां मौजूद स्थानीय लोगों के एक समूह, जिनमें कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थक भी शामिल थे, ने उनका रास्ता रोक लिया।

“वापस जाओ” का शोर: भीड़ ने विधायक को घेर लिया और “अंबिका रॉय गो बैक” (Ambika Roy Go Back) के नारे लगाने शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विधायक “लाशों पर राजनीति” करने आए हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने चिल्लाते हुए कहा, “जब यह अवैध फैक्ट्री चल रही थी, तब विधायक कहां थे? अब जब लोग मर गए हैं, तो वे यहां फोटो खिंचवाने और राजनीति करने आ गए हैं। हमें उनकी सहानुभूति नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए।”

विधायक की तीखी प्रतिक्रिया: विरोध के बीच विधायक अंबिका रॉय भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग उनका विरोध कर रहे हैं, वे “तृणमूल के गुंडे” और “अपराधी” हैं जो अपने काले कारनामों को छिपाना चाहते हैं।

मीडिया से बात करते हुए विधायक ने कहा, “ये लोग डरे हुए हैं कि अगर मैं वहां गया तो सच सामने आ जाएगा। पुलिस सब जानती थी। पुलिस की नाक के नीचे यह मौत का कारखाना चल रहा था। प्रशासन को हर महीने हफ्ता मिलता था, इसलिए उन्होंने कभी कार्रवाई नहीं की। अब जब 6 लोगों की जान चली गई, तो ये मुझे रोकने के लिए गुंडे भेज रहे हैं।”

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को विधायक को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। विधायक और पुलिस अधिकारियों के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली, जहां विधायक ने पुलिस पर सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता की तरह काम करने का आरोप लगाया।

प्रशासन की भूमिका और लापरवाही के सवाल

इस पूरी घटना ने कल्याणी नगर पालिका और स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याणी, जिसे एक ‘प्लान्ड सिटी’ माना जाता है, वहां रिहायशी इलाके के बीचों-बीच बारूद का जखीरा कैसे जमा था?

नगर पालिका की सफाई: कल्याणी नगर पालिका के चेयरमैन और तृणमूल नेता निलीमेश रॉय चौधरी ने बचाव की मुद्रा अपनाते हुए कहा कि जिस जगह विस्फोट हुआ, उसके पास पटाखों के ‘व्यापार’ का लाइसेंस था, न कि निर्माण का।

उन्होंने कहा, “हमें जानकारी थी कि वहां पटाखों का गोदाम है, जिसके लिए लाइसेंस जारी किया गया था। लेकिन अगर वे वहां अवैध रूप से पटाखे बना रहे थे, तो यह गैरकानूनी है। हमने जांच के आदेश दे दिए हैं।”

हालाँकि, अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इस दावे की हवा निकाल दी। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले इलाके में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण के लिए कोई ‘फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी नहीं किया गया था। यह पूरी तरह से अवैध संचालन था।

मालिक की गिरफ्तारी: दबाव बढ़ता देख पुलिस ने कार्रवाई तेज की और फैक्ट्री मालिक खोखन विश्वास (उर्फ साधन विश्वास) को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि धमाके के बाद वह खुद भी घायल हो गया था और भागने की फिराक में था। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है कि उसे बारूद कहां से मिलता था और क्या इस धंधे में और भी लोग शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल: ‘बारूद के ढेर’ पर बैठा राज्य?

कल्याणी की यह घटना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। यह पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में हुए सिलसिलेवार धमाकों की एक और कड़ी है। इससे पहले एगरा (Egra), दत्तापुकुर (Duttapukur), और महेशतला में भी इसी तरह के भीषण विस्फोट हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई थी।

हर बार पैटर्न एक जैसा होता है:

  1. घनी आबादी वाले इलाके या किसी घर के अंदर चोरी-छिपे फैक्ट्री का संचालन।
  2. गरीब महिलाओं और मजदूरों को कम वेतन पर काम पर रखना।
  3. स्थानीय पुलिस और नेताओं की कथित मिलीभगत।
  4. धमाका होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और फिर सब कुछ सामान्य।

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने भी इस घटना पर राज्य सरकार को घेरते हुए NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) से जांच की मांग की है। भाजपा का तर्क है कि सीमावर्ती जिला होने के कारण नदिया में ऐसे विस्फोटकों का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए भी हो सकता है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा का “गिद्ध भोज” (vulture politics) करार दे रही है।

जमीनी हकीकत: डर के साये में स्थानीय लोग

राजनीतिक शोरगुल से दूर, रथतला के लोग अब भी दहशत में हैं। धमाके की तीव्रता ने कई घरों की नींव हिला दी है। लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं।

पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग, जिनका घर विस्फोट स्थल से सटा हुआ था, ने नम आंखों से बताया, “हमने कई बार पुलिस को शिकायत की थी कि यहाँ बारूद की गंध आती है और अजीब आवाजें आती हैं। लेकिन पुलिस आती थी, मालिक से बात करती थी और चली जाती थी। आज हमारा घर टूट गया, हमारे पड़ोसी मर गए। अब नेता आ रहे हैं, लेकिन क्या इससे हमारे वो लोग वापस आएंगे?”

यह सवाल आज पूरे बंगाल के सामने खड़ा है। रोजी-रोटी की मजबूरी में मौत के सामान के साथ खेलने वाली उन गरीब महिलाओं का क्या कसूर था? और क्या ‘गो बैक’ के नारों या मुआवजे के ऐलानों से भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा?

निष्कर्ष: आगे क्या?

फिलहाल, कल्याणी ब्लास्ट साइट को पुलिस ने सील कर दिया है और फोरेंसिक टीम मलबे की जांच कर रही है ताकि विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। घायल उज्ज्वला भुइयां की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक रूप से, यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने के आसार हैं। भाजपा इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताकर राज्य भर में प्रदर्शन की योजना बना रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को ढाल बनाकर बचाव कर रही है।