जीवनशैली

भारतीय जीवन शैली के लिए रुक-रुक कर उपवास करने के लिए पूरी मार्गदर्शिका

हम भारतीय लोग खाने-पीने के बेहद शौकीन होते हैं। सुबह की मीठी चाय के साथ बिस्कुट से लेकर रात के भारी भोजन और फिर अंत में कुछ मीठा खाने की हमारी पुरानी आदत है। लेकिन हमारी इसी जीवनशैली के कारण मोटापा, मधुमेह और थायरॉयड जैसी बीमारियां बहुत तेजी से हमारे घरों में अपनी जगह बना रही हैं।

आपने पिछले कुछ समय में इस नए तरह के उपवास का नाम बहुत सुना होगा। आपके कार्यालय में कोई साथी या आपका कोई दोस्त शायद इसे अपना भी रहा हो और उसका वजन भी काफी कम हुआ हो। सच कहूं तो यह कोई नई चीज नहीं है। हमारे दादा-दादी और पुराने लोग सूरज ढलने के बाद खाना नहीं खाते थे और सुबह उठकर सीधा काम पर जाते थे। यह वही पुराना और आजमाया हुआ तरीका है जिसे आज विज्ञान ने एक नया रूप दे दिया है। आज हम बिल्कुल आसान भाषा में सीधी बात करेंगे कि आखिर यह पूरी प्रक्रिया है क्या और आप अपने रोजमर्रा के भारतीय भोजन के साथ एक सही इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट प्लान कैसे अपना सकते हैं।

यह उपवास का तरीका आखिर है क्या?

ज्यादातर आहार योजनाएं आपको यह बताती हैं कि वजन कम करने के लिए आपको क्या खाना है और किन चीजों से पूरी तरह परहेज करना है। लेकिन यह तरीका इस बारे में बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह सिर्फ इस बात पर ध्यान देता है कि आपको अपना भोजन किस समय करना है। इसे आप खाने का एक ऐसा नियम कह सकते हैं जिसमें आप दिन के कुछ तय घंटों में ही खाना खाते हैं और दिन के बाकी बचे हुए घंटों में पूरी तरह से उपवास रखते हैं। आसान शब्दों में समझें तो यह आपके शरीर और पाचन तंत्र को खाना पचाने की लगातार ड्यूटी से कुछ घंटों का आराम देने का एक शानदार तरीका है।

जब शरीर को बाहर से कोई नया भोजन नहीं मिलता तो वह ऊर्जा प्राप्त करने के लिए हमारे शरीर में पहले से जमा अतिरिक्त चर्बी को गलाना शुरू कर देता है। बस यही इसका सबसे मुख्य विज्ञान है। जब आप अपने शरीर को लगातार भोजन देते रहते हैं, तो उसे कभी यह मौका ही नहीं मिलता कि वह पुरानी जमा हुई चर्बी का इस्तेमाल कर सके, इसलिए यह उपवास उस जिद्दी चर्बी को कम करने में जादुई तरीके से मदद करता है।

मुख्य विशेषता पारंपरिक आहार योजना यह नया उपवास तरीका
मुख्य ध्यान किस पर है क्या खाना चाहिए और क्या नहीं दिन में किस समय खाना चाहिए
ऊर्जा की गिनती हर निवाले का हिसाब रखना पड़ता है हमेशा हिसाब रखना जरूरी नहीं होता
खाने का समय दिन भर में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाना सिर्फ कुछ तय घंटों के भीतर ही खाना
चर्बी घटने की गति आमतौर पर काफी धीमी होती है बहुत तेज होती है क्योंकि इंसुलिन कम रहता है

भारत में यह इतना लोकप्रिय क्यों हो रहा है?

अगर हम अपने देश के आंकड़ों की बात करें तो हाल ही के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार भारत में लगभग हर चौथा इंसान मोटापे का शिकार हो चुका है। हमारी भारतीय थाली में रोटी, चावल, आलू और मीठे की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जिससे शरीर को जरूरत से ज्यादा शर्करा मिलती है। सुबह नाश्ते में पोहा या पराठे, दोपहर में चावल-रोटी और रात को फिर से वही भारी खाना खाने की हमारी पुरानी आदत है। लगातार कुछ न कुछ खाते रहने से हमारे शरीर में इंसुलिन का स्तर हमेशा बढ़ा रहता है जिससे चर्बी घटने की प्रक्रिया पूरी तरह से रुक जाती है। एक सही इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट प्लान इंसुलिन के इस स्तर को तेजी से नीचे लाता है।

हमारे देश के लोगों को यह तरीका इसलिए भी बहुत पसंद आ रहा है क्योंकि इसमें उन्हें अपने मनपसंद घर के खाने को पूरी तरह से छोड़ने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। उन्हें बस अपने खाने की घड़ी बदलनी होती है। जिन लोगों के पास व्यायाम करने का समय नहीं है या जो उबला हुआ फीका खाना नहीं खा सकते, उनके लिए यह एक बड़े वरदान की तरह काम कर रहा है।

मुख्य कारण भारतीय जीवनशैली की आम समस्या उपवास से मिलने वाला आसान समाधान
खाने की आदत दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत खाने का एक निश्चित समय तय हो जाना
आहार का प्रकार भारी मात्रा में रोटी, चावल और मीठा खाना इंसुलिन का स्तर नियंत्रण में आ जाना
समय का अभाव व्यस्त दिनचर्या के कारण व्यायाम का समय न मिलना सिर्फ खाने का समय बदलकर वजन कम कर लेना
व्यक्तिगत पसंद अपना मनपसंद और स्वादिष्ट भोजन नहीं छोड़ना चाहते तय समय में अपने घर का बना भोजन खा पाना

सबसे असरदार उपवास के तरीके जिन्हें आप चुन सकते हैं

सबसे असरदार उपवास के तरीके जिन्हें आप चुन सकते हैं

हर इंसान का शरीर, उसकी काम करने की क्षमता और उसकी दिनचर्या बिल्कुल अलग होती है। इसलिए इस उपवास के कई अलग-अलग तरीके बनाए गए हैं ताकि आप अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से सबसे सही तरीका चुन सकें। आपको वह तरीका चुनना चाहिए जो आपकी नौकरी के समय, आपके परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय और आपके सोने के घंटों के साथ आसानी से मेल खाता हो। अगर आप एक ऐसा तरीका चुनते हैं जो आपकी दिनचर्या के बिल्कुल उलट है, तो आप उसे ज्यादा दिनों तक नहीं कर पाएंगे। नीचे कुछ सबसे प्रसिद्ध और असरदार तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

१६/८ का सबसे प्रसिद्ध तरीका

यह तरीका हमारे देश में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है और शुरुआत करने वालों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसमें आपको पूरे चौबीस घंटे में से सोलह घंटे तक पूरी तरह उपवास करना होता है और सिर्फ आठ घंटे के भीतर अपना सारा भोजन करना होता है। सुनने में सोलह घंटे बिना खाए रहना बहुत मुश्किल लग सकता है, लेकिन इसमें आपकी रात की आठ घंटे की गहरी नींद भी शामिल होती है।

५:२ का साप्ताहिक आहार नियम

अगर आप अपने काम की वजह से रोज अपनी खाने की टाइमिंग नहीं बदल सकते तो यह तरीका आपके लिए ही बना है। इसमें आपको हफ्ते के पांच दिन बिल्कुल सामान्य तरीके से खाना खाना होता है जैसे आप हमेशा से खाते आ रहे हैं। लेकिन हफ्ते के बचे हुए दो दिन आपको अपने भोजन की मात्रा बहुत कम कर देनी होती है। इन दो दिनों में आपको सिर्फ हल्का सूप या सलाद ही खाना होता है।

चौबीस घंटे का पूरा उपवास

यह थोड़ा मुश्किल और चुनौती भरा तरीका है और इसे एकदम शुरुआत में आजमाने की सलाह बिल्कुल नहीं दी जाती है। इसमें आपको हफ्ते में एक या दो बार पूरे चौबीस घंटे का कड़ा उपवास रखना होता है। उदाहरण के लिए अगर आपने आज रात आठ बजे अपना भोजन किया है तो आप सीधा कल रात आठ बजे ही अपना अगला भोजन करेंगे और बीच में सिर्फ सादा पानी पिएंगे।

उपवास का तरीका खाली पेट रहने का समय भोजन करने का समय यह तरीका किसके लिए सबसे सही है?
१६/८ का नियम लगातार सोलह घंटे दिन के कोई भी आठ घंटे एकदम शुरुआत करने वालों और नौकरीपेशा लोगों के लिए
५:२ का नियम हफ्ते में दो दिन (बहुत कम भोजन) हफ्ते के पांच दिन सामान्य जो लोग रोज एक ही समय पर खाना नहीं खा सकते
चौबीस घंटे का उपवास पूरे चौबीस घंटे (हफ्ते में एक बार) बाकी के सभी दिन सामान्य जो लोग पहले से उपवास करने के अभ्यस्त हो चुके हैं
१४/१० का नियम लगातार चौदह घंटे दिन के कोई भी दस घंटे महिलाओं के लिए और जिन्हें ज्यादा भूख लगती है

भारतीय खानपान के हिसाब से इसे दिनचर्या में कैसे लाएं?

हम भारतीय लोग पश्चिमी देशों की तरह सिर्फ उबला हुआ मांस या कच्चा सलाद खाकर अपना जीवन नहीं बिता सकते हैं। हमें अपनी थाली में दाल का तड़का, गर्म रोटी और मसालेदार सब्जियां चाहिए ही होती हैं। अच्छी बात यह है कि आप अपने घर के इसी देसी और स्वादिष्ट खाने के साथ भी एक बेहतरीन इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट प्लान बहुत आराम से बना सकते हैं और उसका पालन कर सकते हैं। चलिए सोलह घंटे वाले तरीके को एक आम भारतीय दिनचर्या में ढालकर देखते हैं। सुबह का समय आपके उपवास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

अगर आपका उपवास दोपहर बारह बजे खुलने वाला है तो आपको अपनी सुबह की मीठी चाय की आदत बदलनी होगी क्योंकि दूध और चीनी आपका उपवास तुरंत तोड़ देंगे। सुबह उठकर आप हल्का गर्म पानी या बिना चीनी की काली चाय पी सकते हैं। दोपहर बारह बजे जब आप अपना उपवास तोड़ें तो शुरुआत कुछ हल्की चीजों से करें जैसे दो खजूर या मुट्ठी भर भीगे हुए बादाम। इसके बीस मिनट बाद आप अपना पूरा भोजन कर सकते हैं जिसमें घर की बनी हुई दाल, सब्जी, दो रोटी और सलाद शामिल हो। रात का भोजन आठ बजे से पहले खत्म कर लें और इसे हमेशा दोपहर के भोजन से हल्का रखें।

दिन का समय आपको क्या करना चाहिए / क्या खाना चाहिए भारतीय रसोई के अनुसार बेहतरीन विकल्प
सुबह का समय उपवास का समय (सिर्फ तरल पदार्थ ले सकते हैं) हल्का गर्म पानी, बिना चीनी की काली चाय, जीरा पानी
दोपहर बारह बजे उपवास खोलने का समय और मुख्य भोजन भीगे हुए बादाम, कटोरी भर दाल, दो रोटी, हरी सब्जी, छाछ
शाम चार बजे हल्की भूख के लिए कुछ पौष्टिक खाना मुट्ठी भर मखाना, भुने हुए चने, एक सेब या पपीता
रात आठ बजे से पहले रात का भोजन (सोने से पहले का हल्का खाना) पनीर की भुर्जी, दलिया, ग्रिल्ड चिकन, या मूंग दाल का चीला

इस आहार नियम में क्या खाएं और किन चीजों से बचें?

यह एक बहुत बड़ी और आम गलतफहमी है कि चूंकि हम सोलह घंटे तक भूखे रह रहे हैं तो हम बचे हुए आठ घंटे में कुछ भी कचरा या बाहर का खाना खा सकते हैं। ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। अगर आप अपने खाने वाले आठ घंटों की खिड़की में भटूरे, पिज्जा या मिठाइयां खाएंगे तो आपका वजन कम होने की बजाय और तेजी से बढ़ जाएगा। आपके शरीर को इस समय सही पोषण की बहुत सख्त जरूरत होती है न कि किसी भी तरह के जंक फूड की। आपके हर भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा सबसे ज्यादा होनी चाहिए। हमारे देश के लोगों में वैसे भी प्रोटीन की भारी कमी देखी जाती है।

अपनी थाली में मूंग दाल, मसूर दाल, राजमा, छोले, पनीर और अंडे जैसी चीजों को जरूर शामिल करें। पाचन को अच्छा रखने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे मौसमी फल खूब खाएं। दूसरी तरफ आपको सफेद चीनी और मैदे से बनी चीजों को अपनी रसोई से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाना होगा। बाजार में मिलने वाले बेकरी के सामान और पैकेट बंद फलों के रस से हमेशा दूर रहें क्योंकि इनमें चीनी कूट-कूट कर भरी होती है।

खाने की मुख्य श्रेणी आपको क्या खाना चाहिए (हां) आपको क्या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए (ना)
अनाज और कार्बोहाइड्रेट दलिया, ओट्स, ज्वार, बाजरा, चोकर वाली रोटी सफेद मैदा, सफेद ब्रेड, बाजार में मिलने वाले मीठे सीरियल्स
शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन घर की बनी दालें, राजमा, ताजा पनीर, देसी अंडे डिब्बाबंद मांस, पैकेट वाले कृत्रिम प्रोटीन बार
स्वस्थ और जरूरी वसा शुद्ध देसी घी, बादाम, अखरोट, सूरजमुखी के बीज बार-बार उबाला गया रिफाइंड तेल, डालडा, खराब वसा
हल्की भूख के लिए स्नैक्स घर में भुने मखाने, छिलके वाले चने, ताजे फल बाजार के बिस्कुट, तली हुई नमकीन, आलू के चिप्स

शरीर और दिमाग के लिए इसके असली फायदे

यह प्रक्रिया सिर्फ आपके पेट की चर्बी कम करने या वजन घटाने का कोई साधारण उपकरण नहीं है बल्कि यह आपके पूरे शरीर की अंदर से सर्विसिंग करने का एक प्राकृतिक तरीका है। आधुनिक विज्ञान और कई बड़े शोधों ने भी इसके अनगिनत फायदों पर अपनी पक्की मुहर लगाई है। जब आप अपने शरीर को एक सही इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट प्लान की आदत डाल देते हैं तो आपके भीतर बहुत सारे सकारात्मक बदलाव होने लगते हैं। जब आप अपने शरीर में शर्करा और इंसुलिन का स्तर कम रखते हैं तो शरीर के पास ऊर्जा पैदा करने के लिए अपनी जमा हुई चर्बी को जलाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है।

खासकर हमारे पेट के आसपास जमा होने वाली वह जिद्दी चर्बी जो लाख कोशिशों के बाद भी नहीं जाती, उसे कम करने में यह बहुत तेजी से और असरदार तरीके से काम करता है। इसके अलावा शरीर में कोशिकाओं की सफाई का एक कमाल का वैज्ञानिक काम शुरू होता है जिसमें शरीर अपनी ही खराब हो चुकी कोशिकाओं को नष्ट करके नई और स्वस्थ कोशिकाएं बनाता है। यह आपके दिमाग की एकाग्रता को भी तेज करता है और आपको अंदर से जवां बनाए रखता है।

स्वास्थ्य लाभ यह शरीर के अंदर कैसे काम करता है? आपके शरीर और जीवन पर इसका सीधा असर
तेजी से वजन कम होना इंसुलिन का स्तर काफी नीचे गिर जाता है पेट की चर्बी और पूरे शरीर का वजन तेजी से घटने लगता है
शरीर की अंदरूनी मरम्मत खराब कोशिकाओं को खाने की प्रक्रिया शुरू होती है बीमारियां दूर रहती हैं और चेहरे पर बुढ़ापा जल्दी नहीं आता
रक्त शर्करा पर नियंत्रण शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल करना सीखता है मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है
तेज और स्वस्थ दिमाग दिमाग में नई और स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होता है काम में ध्यान बढ़ता है और भूलने की बीमारी का खतरा टलता है

क्या इसके कोई नुकसान या दुष्प्रभाव भी हैं?

दुनिया की हर अच्छी चीज की तरह इस प्रक्रिया के भी कुछ शुरुआती प्रभाव होते हैं जिनका सामना आपको करना पड़ सकता है। जब आप इसे पहली बार शुरू करेंगे तो शुरुआती कुछ दिनों तक आपका अपना शरीर ही इसका कड़ा विरोध करेगा क्योंकि उसे सालों से बार-बार कुछ न कुछ खाते रहने की बुरी आदत पड़ चुकी है। आपको शुरुआत में हल्का सिरदर्द, बहुत ज्यादा थकान, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और पेट में गैस महसूस हो सकती है। लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह सिर्फ पहले तीन से चार दिन की ही बात होती है।

जैसे ही आपका शरीर इस नए और स्वस्थ रूटीन का आदी हो जाएगा ये सारी परेशानियां अपने आप जड़ से खत्म हो जाएंगी। हालांकि कुछ विशेष लोगों को यह तरीका बिल्कुल नहीं अपनाना चाहिए। अगर कोई महिला गर्भवती है या अपने बच्चे को दूध पिलाती है तो यह उपवास उनके लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। जिन लोगों को गंभीर मधुमेह है या जो रक्तचाप और शर्करा की भारी दवाइयां रोज लेते हैं, उन्हें बिना अपने डॉक्टर से विस्तार से पूछे कभी भी यह उपवास शुरू नहीं करना चाहिए।

शुरुआती समस्या यह समस्या क्यों होती है? इसे ठीक करने का आसान और घरेलू उपाय
सिरदर्द और भारी थकान शरीर इस नए नियम और बदलाव में ढल रहा होता है दिन भर खूब सारा पानी पिएं और थोड़ा नमक का पानी लें
पेट में गैस या जलन लंबे समय तक पेट खाली रहने की वजह से सुबह उठकर खाली पेट जीरा या सौंफ का उबला पानी पिएं
बर्दाश्त न होने वाली भूख पेट को बार-बार भोजन पचाने की पुरानी आदत होना शुरुआत में बारह घंटे भूखे रहें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं
रात को नींद न आना खाली पेट बिस्तर पर जाने की आदत न होना रात के भोजन में थोड़ा दलिया या ओट्स जरूर शामिल करें

उपवास शुरू करने से पहले 5 जरूरी बातें

अगर आपने इस लेख को पढ़कर कल से ही इस बेहतरीन उपवास को शुरू करने का पक्का मन बना लिया है तो मेरी बताई गई कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है ताकि आप बीच में ही परेशान होकर हार न मान लें। सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि आपको दिन भर खूब सारा पानी पीना है। कई बार हमारे शरीर को सिर्फ प्यास लगी होती है और हमारा दिमाग गलती से उसे भूख समझ लेता है, इसलिए दिन भर में कम से कम तीन से चार लीटर सादा पानी जरूर पिएं। अपनी भूखे रहने की क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाएं।

जोश में आकर पहले ही दिन से सीधा सोलह घंटे भूखे रहने की कोशिश ना करें। पहले बारह घंटे से अपनी शुरुआत करें, फिर अगले हफ्ते इसे चौदह घंटे करें और जब आपका शरीर पूरी तरह से तैयार हो जाए तब इसे सोलह घंटे पर लेकर जाएं। अपनी रात की नींद से कभी समझौता ना करें। सात से आठ घंटे की गहरी और शांत नींद आपके शरीर के सभी रसायनों को संतुलित करने के लिए बहुत जरूरी है। खाने वाले घंटों में जरूरत से ज्यादा भोजन ठूंस-ठूंस कर ना खाएं, अपनी भूख से थोड़ा कम ही खाएं।

जरूरी सुझाव आपको क्या करना चाहिए ऐसा करना आपके लिए क्यों बहुत जरूरी है?
पानी पीना दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पिएं यह झूठी भूख को मारता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालता है
धीमी शुरुआत बारह घंटे से शुरू करके सोलह घंटे तक पहुंचें यह आपके शरीर को अचानक लगने वाले झटके से बचाता है
अच्छी नींद रात में सात से आठ घंटे की बिना रुकावट वाली नींद लें यह शरीर की मरम्मत और रसायनों के संतुलन के लिए जरूरी है
सही मात्रा में भोजन खाने के समय अपनी जरूरत से बीस प्रतिशत कम खाएं इसी से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी पिघलनी शुरू होगी
तनाव से दूरी दिमागी तनाव कम लें और खुश रहने की कोशिश करें तनाव बढ़ने से वजन कम करने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाती है

अंतिम विचार

अपना वजन कम करना या जीवन भर स्वस्थ रहना कोई एक दिन या एक महीने का काम नहीं है। यह एक पूरी जीवनशैली है जिसे आपको बहुत लंबे समय तक खुशी-खुशी अपनाना होता है। एक सही और संतुलित इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट प्लान आपको बिना किसी सख्त और उबाऊ नियमों के अपने स्वास्थ्य के लक्ष्य तक पहुंचने में बहुत बड़ी मदद कर सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यह हमारे भारतीय खानपान और हमारी संस्कृति के साथ बहुत आसानी से घुल-मिल जाता है। आपको वजन कम करने के लिए बाजार से महंगे विदेशी फल या अजीबोगरीब सब्जियां खरीदने की कोई जरूरत नहीं है।

बस अपनी रसोई में बनने वाले उसी सादे और स्वादिष्ट खाने के समय को थोड़ा सा बदलना है। शुरुआत में आपको कुछ दिन थोड़ी बहुत दिक्कत जरूर हो सकती है लेकिन कुछ ही हफ्तों में आपको अपने शरीर की ऊर्जा, अपने कपड़ों की फिटिंग और अपने वजन में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक फर्क साफ नजर आने लगेगा। आज ही अपने शरीर की सुनें और एक स्वस्थ जीवन की तरफ अपना पहला मजबूत कदम बढ़ाएं।