भारत ने कॉपीराइट सामग्री के लिए अनिवार्य एआई रॉयल्टी का प्रस्ताव किया
भारत ने मंगलवार को एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों को अपने मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए कॉपीराइटेड सामग्री का उपयोग करने पर रॉयल्टी चुकानी होगी। यह दुनिया का पहला ऐसा कदम है जहां सरकार द्वारा तय दरों पर AI डेवलपर्स के लिए अनिवार्य मुआवजा लागू करने की योजना बनाई जा रही है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 125 पेज का विस्तृत वर्किंग पेपर जारी किया है, जिसका शीर्षक है “वन नेशन, वन लाइसेंस, वन पेमेंट: बैलेंसिंग AI इनोवेशन एंड कॉपीराइट”।
इस प्रस्ताव के तहत AI फर्म्स को सभी कानूनी रूप से उपलब्ध कॉपीराइटेड वर्क्स – जैसे न्यूज आर्टिकल्स, किताबें, संगीत, फिल्में और अन्य क्रिएटिव कंटेंट – पर स्वचालित पहुंच मिलेगी। बदले में उन्हें एक केंद्रीय संग्रहण संस्था को रॉयल्टी का भुगतान करना होगा, जो फिर राइट्स होल्डर्स के बीच पैसे वितरित करेगी। यह सिस्टम रेडियो ब्रॉडकास्टिंग के कंपलसरी लाइसेंसिंग मॉडल से प्रेरित है, जो भारत में पहले से सफलतापूर्वक चल रहा है। DPIIT ने इसे 30 दिनों के सार्वजनिक परामर्श के लिए खोल दिया है, ताकि स्टेकहोल्डर्स अपनी राय दे सकें।
यह कदम AI उद्योग के सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक को संबोधित करता है – ट्रेनिंग डेटा के स्रोत और क्रिएटर्स के अधिकार। भारत तेजी से AI का बड़ा बाजार बन रहा है, जहां ओपनAI जैसे प्लेयर्स की पैठ बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव न केवल भारतीय क्रिएटर्स को न्याय देगा, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में भारत को लीडर बनाएगा।
एक अनोखा वैश्विक मॉडल
प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रॉयल्टी की दरें एक सरकारी नियुक्त समिति तय करेगी, जो AI डेवलपर की कमर्शियलाइज्ड मॉडल्स से होने वाली वैश्विक सकल आय (ग्रॉस ग्लोबल रेवेन्यू) का एक निश्चित प्रतिशत होगी। यह शुल्क ट्रेनिंग स्टेज पर नहीं, बल्कि जब मॉडल बाजार में आकर कमाई करने लगे, तब लागू होगा। दिलचस्प बात यह है कि यह नियम पुराने मॉडल्स पर भी रेट्रोएक्टिव रूप से लागू होगा, यानी जो AI सिस्टम पहले से ट्रेन हो चुके हैं, उनके डेवलपर्स को भी भुगतान करना पड़ेगा। समिति के निर्णय पर न्यायिक समीक्षा का प्रावधान है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
अप्रैल 2025 में गठित आठ सदस्यीय समिति ने वैश्विक मॉडल्स की गहन समीक्षा की। जापान ने AI ट्रेनिंग के लिए व्यापक छूट दी है, जहां कॉपीराइटेड सामग्री का उपयोग बिना अनुमति के संभव है। यूरोपीय संघ (EU) में क्रिएटर्स को ऑप्ट-आउट का विकल्प मिला है, यानी वे अपनी सामग्री को AI ट्रेनिंग से बाहर रख सकते हैं। लेकिन भारत का हाइब्रिड मॉडल इन दोनों को ठुकरा देता है। यहां क्रिएटर्स अपनी सामग्री रोक नहीं पाएंगे, लेकिन उन्हें “कॉपीराइट रॉयल्टीज कलेक्टिव फॉर AI ट्रेनिंग” (CRCAT) नामक नई छतरी संगठन के माध्यम से गारंटीड मुआवजा मिलेगा। यह संगठन सभी रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड राइट्स होल्डर्स को रॉयल्टी वितरित करेगा।
भारत AI मार्केट में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। ओपनAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अगस्त 2025 में कहा था कि भारत उनका दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है और जल्द ही सबसे बड़ा हो सकता है। समिति का स्पष्ट तर्क है कि भारतीय क्रिएटर्स द्वारा बनाई गई सामग्री से AI कंपनियां अरबों डॉलर की वैल्यू निकाल रही हैं, तो भारत को उसका उचित हिस्सा मिलना चाहिए। यह मॉडल छोटे क्रिएटर्स, स्वतंत्र पत्रकारों और क्षेत्रीय कलाकारों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगा, जो व्यक्तिगत रूप से बड़ी टेक कंपनियों से डील नहीं कर सकते।
समिति ने टेक्स्ट एंड डेटा माइनिंग (TDM) एग्जेम्प्शन को भी खारिज किया, क्योंकि इससे क्रिएटर्स बिना मुआवजे के रह जाएंगे। इसके बजाय, मैंडेटरी ब्लैंकेट लाइसेंस को चुना गया, जो इनोवेशन को बाधित किए बिना संतुलन बनाए रखेगा। यह दृष्टिकोण भारत की डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत करेगा, जहां AI सेक्टर 10,300 करोड़ रुपये का है और तेजी से बढ़ रहा है।
उद्योग का विरोध और कानूनी पृष्ठभूमि
टेक इंडस्ट्री ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध शुरू कर दिया है। नास्कॉम (NASSCOM), जो गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इसे “इनोवेशन पर टैक्स या लेवी” करार दिया है। उनका कहना है कि यह AI विकास को महंगा बना देगा और भारत को वैश्विक AI हब बनने से रोकेगा। बिजनेस सॉफ्टवेयर अलायंस (BSA), जिसमें एडोबी, अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट शामिल हैं, ने TDM एग्जेम्प्शन की मांग की है। उनका तर्क है कि अनिवार्य लाइसेंसिंग से डेटा पूल सीमित हो जाएगा, जिससे AI मॉडल्स की क्वालिटी और एक्यूरेसी प्रभावित होगी।
यह विवाद नवंबर 2024 के दिल्ली हाईकोर्ट केस से जुड़ा है, जहां न्यूज एजेंसी ANI ने ओपनAI पर मुकदमा किया। ANI का आरोप है कि ओपनAI ने चैटजीपीटी को ट्रेन करने के लिए उनकी कॉपीराइटेड न्यूज कंटेंट का अनधिकृत उपयोग किया। यह केस भारत में AI ट्रेनिंग के फेयर यूज सिद्धांत का पहला बड़ा परीक्षण बनेगा। इसी तरह, अमेरिका में न्यूयॉर्क टाइम्स और रॉयटर्स जैसे केस चल रहे हैं, जबकि यूरोप में भी कोर्ट कॉपीराइट उल्लंघन पर विचार कर रहे हैं। भारत का प्रस्ताव इन वैश्विक बहसों को प्रभावित कर सकता है।
DPIIT ने 28 अप्रैल 2025 को हीमानी पांडे की अध्यक्षता में यह समिति गठित की थी, जो कॉपीराइट एक्ट 1957 की AI चुनौतियों का मूल्यांकन कर रही थी। समिति ने 19 नवंबर 2025 को वर्किंग पेपर का पहला भाग जारी किया था। गहन अध्ययन के बाद, उन्होंने हाइब्रिड लाइसेंसिंग को चुना, जो क्रिएटिव इंडस्ट्री को मजबूत करेगा। ओपनAI और गूगल जैसी कंपनियों ने अभी तक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इंडस्ट्री लॉबिंग तेज हो रही है।
क्रिएटिव सेक्टर का समर्थन मजबूत है। मीडिया हाउस और आर्टिस्ट्स का कहना है कि ऑप्ट-आउट मॉडल बड़े प्लेयर्स को फायदा पहुंचाता है, क्योंकि छोटे क्रिएटर्स को ट्रैकिंग का पता ही नहीं चलता। मैंडेटरी सिस्टम से सभी को निष्पक्ष हिस्सा मिलेगा, जो भारतीय डिजिटल कंटेंट इकोसिस्टम को समृद्ध करेगा।
प्रस्ताव की मुख्य विशेषताओं को विस्तार से समझें:
- मैंडेटरी ब्लैंकेट लाइसेंस: AI डेवलपर्स को व्यक्तिगत अनुमतियों की जरूरत नहीं, लेकिन सभी उपलब्ध कॉपीराइटेड वर्क्स कवर करने वाला एक लाइसेंस अनिवार्य।
- रॉयल्टी गणना: वैश्विक रेवेन्यू आधारित, छोटे डेवलपर्स के लिए छूट संभव; सरकारी समिति दरें तय करेगी।
- केंद्रीय बॉडी CRCAT: रॉयल्टी संग्रह और वितरण का जिम्मा, पारदर्शी ऑडिट के साथ।
- कोई ऑप्ट-आउट नहीं: क्रिएटर्स की सुरक्षा के लिए, लेकिन मुआवजा गारंटीड।
- रेट्रोएक्टिव प्रभाव: पुराने मॉडल्स पर भी लागू, बैक पेमेंट्स के प्रावधान के साथ।
वैश्विक संदर्भ और भविष्य की संभावनाएं
दुनिया भर में AI ट्रेनिंग पर कॉपीराइट बहस चरम पर है। जापान का उदार मॉडल इनोवेशन को प्राथमिकता देता है, लेकिन क्रिएटर्स को नुकसान पहुंचा सकता है। EU का ऑप्ट-आउट सिस्टम जटिल है और प्रवर्तन मुश्किल। अमेरिका में कोर्ट बैटल्स जारी हैं, जहां जज तय कर रहे हैं कि ट्रेनिंग फेयर यूज के दायरे में आती है या नहीं। भारत का हस्तक्षेपवादी मॉडल इन सबसे अलग है, जो सरकार की सक्रिय भूमिका पर जोर देता है।
भारत का AI बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। 2025 तक यह 10,300 करोड़ रुपये का हो चुका है, और 2030 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकता है। यह प्रस्ताव इनोवेशन को बढ़ावा देगा, लेकिन कंप्लायंस कॉस्ट को नियंत्रित रखेगा। अगर लागू हुआ, तो अन्य विकासशील देश इसे कॉपी कर सकते हैं।
क्रिएटिव इंडस्ट्री – न्यूज, म्यूजिक, फिल्म्स – इसका स्वागत कर रही है। छोटे आर्टिस्ट्स को बड़ी कंपनियों से लड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समिति ने जोर दिया कि AI मानवता का अगला बड़ा आविष्कार है, लेकिन इसे साझा जिम्मेदारी बनाना होगा। सार्वजनिक परामर्श के बाद फाइनल सिफारिशें आएंगी, और फिर संसदीय प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रस्ताव AI और क्रिएटिव इकोनॉमी के बीच नए युग की शुरुआत कर सकता है। भारत वैश्विक लीडर बनने की राह पर है, जहां टेक्नोलॉजी और अधिकार संतुलित रहें।
