ऑस्ट्रेलिया ने कड़े वीजा नियमों के बावजूद विदेशी छात्रों के लिए 17,500 अध्ययन स्थल जोड़े
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 2026 के लिए 32 प्रमुख सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 17,500 अतिरिक्त अध्ययन सीटें जोड़ने का फैसला किया है। यह योजना तब लागू हो रही है जब देश में कड़े आव्रजन और वीजा नियमों के कारण अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा आवेदनों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय ने 14 अक्टूबर, 2025 को इसकी आधिकारिक घोषणा की, जो देश की नई अंतरराष्ट्रीय शिक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रणनीति का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र को टिकाऊ बनाना है, ताकि आर्थिक लाभ के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को अपनी अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ माना है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, यह क्षेत्र देश को लगभग 48 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 32 अरब अमेरिकी डॉलर) का राजस्व प्रदान करता है। शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने घोषणा के दौरान कहा, “अंतरराष्ट्रीय शिक्षा हर साल अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान देती है। यह न केवल पैसे लाती है, बल्कि दुनिया भर में दोस्ती, सहयोग और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते भी बनाती है। लेकिन हमें इसे संतुलित और टिकाऊ तरीके से प्रबंधित करने की जरूरत है, और ये विश्वविद्यालयों के लिए विशेष आवंटन ठीक यही सुनिश्चित करते हैं।” क्लेयर के अनुसार, ये अतिरिक्त सीटें विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता सुधारने और छात्रों की बेहतर देखभाल करने में मदद करेंगी, जैसे कि आवास और समर्थन सेवाओं को मजबूत करना।
राष्ट्रीय नामांकन सीमा और विश्वविद्यालयों की चयन प्रक्रिया
अगस्त 2025 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 2026 शैक्षणिक वर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के कुल नामांकन पर राष्ट्रीय सीमा 2,95,000 तय की थी। यह सीमा आव्रजन दबाव को कम करने के लिए लगाई गई है, क्योंकि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी थी, जिससे आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय नौकरियों पर असर पड़ा। हालांकि, विश्वविद्यालय इस सीमा से ऊपर अतिरिक्त सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सख्त मानदंड पूरे करने पड़ते हैं। इनमें नए छात्रों के लिए पर्याप्त आवास व्यवस्था सुनिश्चित करना, भर्ती बाजारों को विविध बनाना (जैसे यूरोप या अफ्रीका से अधिक छात्र लाना), और विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम) से छात्रों की संख्या बढ़ाना शामिल है।
इन कठिन मानदंडों को पूरा करने वाले 32 विश्वविद्यालयों को अतिरिक्त सीटें आवंटित की गई हैं, लेकिन कुल राष्ट्रीय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई, जिसमें विश्वविद्यालयों को अपनी योजनाएं जमा करनी पड़ीं। उदाहरण के लिए, आवास की कमी को दूर करने के लिए कई विश्वविद्यालयों ने नए छात्रावासों का निर्माण या साझेदारियों की योजना पेश की। डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन के अनुसार, ये बदलाव 2023-2024 में आई आवास संकट को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, जब कई शहरों में छात्रों को फ्लैट शेयरिंग या महंगे किराए का सामना करना पड़ा।
प्रमुख विश्वविद्यालयों को आवंटित सीटें
अतिरिक्त सीटों का वितरण प्रमुख विश्वविद्यालयों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने में पहले से ही अग्रणी हैं। सिडनी विश्वविद्यालय को सबसे अधिक 11,900 अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कोटा मिली है, जो इसकी मजबूत अनुसंधान सुविधाओं और विविध कोर्सेस के कारण है। उसके बाद मोनाश विश्वविद्यालय को 11,300 सीटें, मेलबर्न विश्वविद्यालय को 10,500, और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय को 10,350 सीटें आवंटित की गई हैं। ये चार विश्वविद्यालय मिलकर कुल अतिरिक्त सीटों का लगभग 60% हिस्सा कवर करते हैं।
बाकी विश्वविद्यालयों को 1,000 से 8,000 सीटें मिली हैं, जैसे क्वींसलैंड विश्वविद्यालय (लगभग 7,500) और एडिलेड विश्वविद्यालय (5,200)। छोटे संस्थानों जैसे नॉट्रे डेम ऑस्ट्रेलिया और न्यू इंग्लैंड विश्वविद्यालय को 1,000 से कम सीटें दी गई हैं, जो उनकी सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए है। यूनिवर्सिटीज़ ऑस्ट्रेलिया के एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये आवंटन विश्वविद्यालयों को क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने में मदद करेंगे, क्योंकि कई सीटें ग्रामीण या क्षेत्रीय कैंपसों के लिए आरक्षित हैं।
वीजा नीतियों में सख्ती और उनके दूरगामी प्रभाव
पिछले दो वर्षों से ऑस्ट्रेलिया सरकार ने वीजा नीतियों को लगातार सख्त किया है ताकि अनियंत्रित प्रवास को रोका जा सके। 2023 से शुरू हुई इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय स्नातकों के लिए पोस्ट-स्टडी वर्क राइट्स को 4-6 वर्षों से घटाकर 2-4 वर्ष कर दिया गया, जिससे छात्रों को जल्दी नौकरी ढूंढने का दबाव बढ़ गया। अंग्रेजी भाषा दक्षता की न्यूनतम आवश्यकता को आईईएलटीएस स्कोर 5.5-6.0 से बढ़ाकर 6.0-6.5 कर दिया गया, जो विशेष रूप से गैर-अंग्रेजी बोलने वाले देशों के छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, छात्र वीजा के लिए न्यूनतम वित्तीय प्रमाण को 29,710 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 19,230 अमेरिकी डॉलर) कर दिया गया, जो पिछले स्तर से 20% अधिक है। यह बदलाव मुद्रास्फीति और जीवनयापन लागत को ध्यान में रखते हुए किया गया।
छात्र वीजा शुल्क को भी दोगुना कर 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कर दिया गया, जो अब दुनिया के सबसे ऊंचे शुल्कों में से एक है—कनाडा (1,000 कैनेडियन डॉलर) और अमेरिका (510 अमेरिकी डॉलर) से कहीं अधिक। डिपार्टमेंट ऑफ होम अफेयर्स के आंकड़ों के अनुसार, इन बदलावों से 2024-2025 शैक्षणिक वर्ष के लिए वीजा आवेदनों में 26% की तेज गिरावट आई है। पहले महीनों में आवेदन 1,20,000 से घटकर 88,000 रह गए। फिर भी, जुलाई 2025 तक ऑस्ट्रेलिया में कुल 7,98,000 अंतरराष्ट्रीय छात्र मौजूद थे, जो 2024 के 7,65,000 से थोड़ी वृद्धि दर्शाता है।
राष्ट्रीयताओं के आधार पर, चीनी छात्र पहले स्थान पर हैं (28% हिस्सा), उसके बाद भारतीय (18%), नेपाली (10%) और वियतनामी (4%)। वियतनामी छात्रों की संख्या 2024 में 31,000 के आसपास थी, जो दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाले कुल छात्रों का एक बड़ा हिस्सा है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कड़े नियमों के बावजूद एशियाई बाजार मजबूत बने हुए हैं, लेकिन यूरोपीय और अफ्रीकी छात्रों की संख्या बढ़ाने की कोशिश जारी है।
इन बदलावों के पीछे की वजहें और छात्रों पर असर
ये नीतियां 2022-2023 के कोविड के बाद के प्रवास उछाल से प्रेरित हैं, जब अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 50% बढ़ गई थी, जिससे सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में आवास संकट पैदा हो गया। ऑस्ट्रेलियाई ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, इससे स्थानीय छात्रों को भी प्रभावित किया, क्योंकि किराए 15-20% बढ़ गए। सरकार का मानना है कि सख्त नियम गुणवत्ता वाले छात्रों को आकर्षित करेंगे और ‘शिक्षा पर्यटन’ को रोकेंगे, जहां कुछ छात्र केवल वीजा के लिए आते थे।
छात्रों के लिए ये बदलाव चुनौतीपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए, बढ़े हुए वित्तीय प्रमाण से मध्यम वर्ग के परिवारों पर बोझ बढ़ा है, और छोटे वीजा शुल्क से प्रक्रिया महंगी हो गई। हालांकि, पोस्ट-स्टडी वर्क राइट्स अभी भी आकर्षक हैं, खासकर आईटी, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य क्षेत्रों में। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लंबे समय में ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा प्रणाली अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।
भविष्य की दिशा और संभावनाएं
नई रणनीति ऑस्ट्रेलिया को एक जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। विश्वविद्यालयों को अब नामांकन के अलावा छात्रों के समग्र विकास पर फोकस करना होगा, जैसे मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और सांस्कृतिक एकीकरण। 2026 तक, यदि ये सीटें पूरी तरह भरी गईं, तो शिक्षा क्षेत्र का आर्थिक योगदान 50 अरब डॉलर को पार कर सकता है। लेकिन चुनौतियां बनी रहेंगी, जैसे वैश्विक आर्थिक मंदी या अन्य देशों (जैसे कनाडा) की प्रतिस्पर्धा। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है: शिक्षा को लाभदायक रखते हुए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना, जो अंततः सभी पक्षों के हित में हो।
जानकारी MSN.Com और VnExpress International से एकत्र की गई है।
