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मध्य प्रदेश में अलग-अलग दुर्गा पूजा विसर्जन दुर्घटनाओं में महिलाओं और बच्चों सहित 14 की मौत

मध्य प्रदेश में दुर्गा पूजा के विसर्जन के दौरान अलग-अलग जिलों में हुए दुखद हादसों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जिसमें महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हैं। ये घटनाएं मुख्य रूप से खंडवा, शहडोल और उज्जैन जिलों में हुईं, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली के पलटने, डीजे वाहन की अनियंत्रित टक्कर, नदी के तेज बहाव में बह जाने और अप्रत्याशित दुर्घटना जैसी वजहों से जानें गईं, जो त्योहार की खुशियों को मातम में बदल गईं।

दुर्गा पूजा विसर्जन की पृष्ठभूमि और महत्व

दुर्गा पूजा भारत में एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मध्य प्रदेश में यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जहां लाखों लोग मां दुर्गा की मूर्ति को नदियों, तालाबों या जलाशयों में विसर्जित करते हैं। लेकिन हर साल ऐसे मौकों पर भीड़, अपर्याप्त सुरक्षा और मौसम की अनिश्चितता के कारण हादसे होते रहते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में मध्य प्रदेश में त्योहारों के दौरान जल-संबंधी हादसों में सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं (स्रोत: मध्य प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट और एनडीटीवी)। इन घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है, जैसे कि विसर्जन स्थलों पर लाइफ जैकेट, बचाव दल और चेतावनी साइनबोर्ड की व्यवस्था। इस साल की घटनाएं गुरुवार को हुईं, जब विसर्जन का मुख्य दिन था, और मौसम ने कई जगहों पर खतरे को बढ़ा दिया।

खंडवा जिले के पंधाना में ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसा: 11 की मौत, कई घायल

खंडवा जिले के पंधाना पुलिस स्टेशन क्षेत्र में स्थित जमली गांव के पास एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब दुर्गा मां की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली एक छोटे बांध में पलट गई। यह घटना शाम करीब 5 बजे हुई, और ट्रैक्टर पर सवार लगभग 20-25 ग्रामीण थे, जो मुख्य रूप से राजगढ़ गांव के निवासी थे। इनमें ज्यादातर बच्चे और महिलाएं शामिल थीं, जो उत्सव की खुशी में शामिल होने के लिए निकले थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि चालक ने पानी की गहराई का सही अनुमान नहीं लगाया और वाहन को ढलान पर धीरे-धीरे उतारने की कोशिश की, लेकिन असंतुलन के कारण यह पलट गया। बांध राज्य के जल संसाधन विभाग के अधीन है, जो सिंचाई और जल संरक्षण के लिए बनाया गया है, लेकिन विसर्जन के समय इसकी गहराई और किनारों की स्थिति खतरनाक साबित हुई।

अब तक 11 शव बरामद किए जा चुके हैं, और राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की टीमें लगातार तालाब में खोजबीन कर रही हैं। बचाव कार्य में स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की मदद ली जा रही है, लेकिन गहराई और कीचड़ के कारण चुनौतियां आ रही हैं। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है, और चिकित्सकों का कहना है कि मौतों की संख्या बढ़ सकती है। मृतकों में 9 साल का एक लड़का सबसे छोटा था, जबकि छह महिलाएं 15 से 25 साल की उम्र की थीं, और बाकी युवा पुरुष थे। इंदौर ग्रामीण के पुलिस महानिरीक्षक अनुराग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा था, और जांच जारी है। परिवारों पर इस त्रासदी का गहरा असर पड़ा है, क्योंकि कई घरों से एक से ज्यादा सदस्य खो गए, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर थे।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा, उन्होंने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए विसर्जन स्थलों पर सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं, जैसे कि वाहनों की जांच और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहनों का इस्तेमाल विसर्जन के लिए खतरनाक है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां सड़कें संकरी और असुरक्षित होती हैं।

खंडवा के अंजनगांव में डीजे वाहन की टक्कर: एक मौत, चार घायल

इसी पंधाना इलाके के अंजनगांव गांव में एक अलग घटना में, विसर्जन जुलूस के दौरान एक अनियंत्रित डीजे वाहन ने दूसरे जुलूस पर चढ़कर तबाही मचा दी। इससे 30 साल के रामदेव चौहान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। डीजे वाहन तेज संगीत और लाइट्स के साथ चल रहा था, जो त्योहारों में आम है, लेकिन चालक ने नियंत्रण खो दिया, संभवतः तेज गति या तकनीकी खराबी के कारण। घटना के बाद चालक मौके से भाग गया, जिससे ग्रामीणों में गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने वाहन को आग लगा दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है, साथ ही वाहन के मालिक से पूछताछ की जा रही है।

ऐसी घटनाएं त्योहारों में भीड़ और वाहनों के अनियंत्रित उपयोग के कारण बढ़ रही हैं। मध्य प्रदेश में पिछले साल दशहरा और अन्य उत्सवों के दौरान समान हादसे हुए थे, जहां डीजे वाहनों ने कई जानें लीं। प्रशासन ने अब जुलूसों में वाहनों की गति को 20 किमी/घंटा तक सीमित करने, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और शोर प्रदूषण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है, और उनके परिवारों को सरकारी सहायता प्रदान की जा रही है।

शहडोल जिले में सोन नदी हादसा: दो युवा बह गए

शहडोल जिले के गोहपरु क्षेत्र में सोन नदी में मूर्ति विसर्जन के समय एक दुखद घटना घटी, जहां 16 साल के शुभम गोंड और 22 साल के हनुमत लाल तेज बहाव में बह गए। नदी में बाढ़ जैसी स्थिति थी, क्योंकि हाल की बारिश ने जल स्तर को बढ़ा दिया था। जुलूस में सैकड़ों लोग शामिल थे, लेकिन बहाव की ताकत का अंदाजा नहीं लगाया गया। बचाव टीमों ने घंटों तलाश की, लेकिन दोनों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि विसर्जन के समय मौसम विभाग की चेतावनी जारी थी, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया।

शहडोल जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में नदियां त्योहारों का मुख्य केंद्र होती हैं, लेकिन सुरक्षा की कमी से हादसे होते हैं। पिछले वर्षों में सोन नदी में कम से कम 20 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि विसर्जन से पहले जल स्तर की जांच, लाइफगार्ड की मौजूदगी और वैकल्पिक सुरक्षित स्थलों का उपयोग जरूरी है। मृतकों के परिवारों को सरकारी सहायता मिल रही है, और जांच समिति गठित की गई है।

उज्जैन जिले में चंबल नदी हादसा: परिवार के तीन सदस्य डूबे

उज्जैन जिले में चंबल नदी के पुल के पास एक अप्रत्याशित दुर्घटना में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई, जिसमें 12 साल का एक लड़का भी शामिल था। घटना तब हुई जब चार लोग नदी में नहा रहे थे, और लड़के ने गलती से पुल पर खड़े ट्रैक्टर को स्टार्ट कर दिया, जो असंतुलित होकर नदी में गिर गया। ट्रैक्टर के गिरने से उत्पन्न लहरों और बहाव ने उन्हें डुबो दिया। अधिकारियों के अनुसार, बचाव प्रयास किए गए, लेकिन तीन की जान नहीं बच सकी। यह हादसा वाहन सुरक्षा की कमी को उजागर करता है।

चंबल नदी में ऐसे हादसे असामान्य नहीं हैं, खासकर त्योहारों के समय जब लोग पुलों और घाटों पर इकट्ठा होते हैं। राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी नदियों के किनारे पर बैरियर, सीसीटीवी और आपातकालीन नावें तैनात की जाएं।

ये सभी घटनाएं दुर्गा पूजा के समापन पर हुईं, जो सामान्यतः खुशी का अवसर होता है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी ने उन्हें त्रासदी में बदल दिया। राज्य स्तर पर जांच चल रही है, और भविष्य में रोकथाम के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है, जिसमें जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।

यह जानकारी द न्यू इंडियन एक्सप्रेस टुडे और मध्यमम से एकत्र की गई थी।