संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायली बस्तियों से जुड़ी 158 कंपनियों को चिह्नित किया गया
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 158 कंपनियां, जिनमें एयरबीएनबी, बुकिंग.कॉम, एक्सपीडिया और ट्रिपएडवाइजर जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों में काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार ये बस्तियां अवैध हैं, हालांकि इजरायल इस व्याख्या से असहमत है और इन्हें विवादित क्षेत्र मानता है।
रिपोर्ट का विस्तृत अवलोकन और नई कंपनियों की एंट्री
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय द्वारा जारी की गई है, जो 2023 की पिछली सूची का अपडेट है। इसमें कुल 158 कंपनियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 68 नई कंपनियां जोड़ी गई हैं। ये कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों जैसे पर्यटन, निर्माण, बैंकिंग और रियल एस्टेट में सक्रिय हैं, और इनकी गतिविधियां बस्तियों के विस्तार, संसाधनों के उपयोग और फिलिस्तीनी समुदायों पर प्रभाव डालती हैं। उदाहरण के लिए, पर्यटन कंपनियां जैसे एयरबीएनबी और ट्रिपएडवाइजर बस्तियों में स्थित संपत्तियों को लिस्ट करती हैं, जिससे फिलिस्तीनियों की भूमि पर कब्जा मजबूत होता है। रिपोर्ट में शामिल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में अमेरिकी फर्में जैसे जनरल मिल्स और मोटोरोला सॉल्यूशंस, जर्मन कंपनी हाइडेलबर्ग मटेरियल्स एजी, फ्रांसीसी बैंक बीएनपी पारिबा, और चीनी कंपनियां जैसे अलीबाबा ग्रुप शामिल हैं। हाइडेलबर्ग मटेरियल्स ने दावा किया है कि वह 2020 से फिलिस्तीनी इलाकों में अपनी खदानें बंद कर चुकी है, लेकिन यूएन ने सबूतों के आधार पर इसे सूची में रखा है। वहीं, सात कंपनियों को हटाया गया है, जैसे कुछ इजरायली फर्में जिन्होंने अपनी गतिविधियां समाप्त कर दीं, जो यूएन के सत्यापन प्रक्रिया पर आधारित है। यह डेटाबेस यूएन गाइडिंग प्रिंसिपल्स ऑन बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स के तहत तैयार किया गया है, जो कंपनियों को मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए बाध्य करता है।
पुरानी कंपनियों की निकासी और सत्यापन प्रक्रिया
रिपोर्ट में सात कंपनियों को हटाने का फैसला विश्वसनीय स्रोतों से मिले सबूतों पर आधारित है। इनमें से कुछ कंपनियां पहले बस्तियों में निर्माण सामग्री आपूर्ति या सेवाएं प्रदान करती थीं, लेकिन अब उन्होंने अपनी भागीदारी समाप्त कर दी है। यूएन की टीम ने सरकारी दस्तावेजों, सिविल सोसाइटी रिपोर्टों और कंपनियों के खुद के बयानों की जांच की है। यह प्रक्रिया पारदर्शी है और कंपनियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी ने साबित किया कि उसने बस्ती-संबंधी परियोजनाओं से हाथ खींच लिया है, जिससे मानवाधिकार चिंताएं कम हुईं। यह अपडेट दर्शाता है कि यूएन का डेटाबेस गतिशील है और नई जानकारी के आधार पर बदलता रहता है, जो ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों द्वारा सराहा गया है।
इजरायल का विरोध और अंतरराष्ट्रीय कानून की विस्तृत स्थिति
इजरायल ने इस रिपोर्ट को कड़ी आलोचना की है, इसे “ब्लैकलिस्ट” और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज किया है। इजरायली विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह रिपोर्ट वैध कारोबारों को निशाना बनाती है और अंतरराष्ट्रीय कानून में संघर्ष वाले क्षेत्रों में कारोबार पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है। वे दावा करते हैं कि वेस्ट बैंक विवादित भूमि है, न कि कब्जे वाली, और बस्तियां सुरक्षा जरूरतों पर आधारित हैं। हालांकि, यह रुख अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के 2024 के फैसले से विरोधाभासी है, जिसमें कहा गया कि इजरायली बस्तियां जेनेवा कन्वेंशंस का उल्लंघन करती हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। आईसीजे का यह सलाहकारी फैसला यूएन महासभा के अनुरोध पर आया था और इसे 143 देशों का समर्थन मिला, जिसमें यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और कनाडा शामिल हैं। रिपोर्ट में 1967 के छह-दिवसीय युद्ध का ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया गया है, जब इजरायल ने वेस्ट बैंक पर कब्जा किया था, और तब से बस्तियां बढ़कर 700,000 से अधिक इजरायली निवासियों तक पहुंच गई हैं। यह विस्तार फिलिस्तीनी क्षेत्रों को विभाजित करता है और दो-राज्य समाधान को जटिल बनाता है, जैसा कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2334 में उल्लेखित है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन बस्तियों से जुड़ी कंपनियां अपने द्वारा किए गए नुकसान को पहचानें और सुधार में योगदान दें। उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी बस्तियों में निर्माण के लिए सामग्री प्रदान करती है, तो यह फिलिस्तीनियों की भूमि जब्ती में योगदान दे सकती है। यूएन प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि संघर्ष क्षेत्रों में कंपनियों को “उन्नत due diligence” अपनानी चाहिए, अर्थात अपनी गतिविधियों के मानवाधिकार प्रभाव की गहन जांच। यह सिद्धांत यूएन के 2011 के गाइडिंग प्रिंसिपल्स से आता है, जो दुनिया भर में कॉरपोरेट जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है। सिविल सोसाइटी संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रिपोर्ट का स्वागत किया है, इसे कंपनियों पर दबाव बनाने का उपकरण बताते हुए। उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे कुछ कंपनियां बस्तियों में सेवाएं देकर फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को कमजोर करती हैं, जैसे पानी और बिजली संसाधनों का असमान वितरण। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया है कि कंपनियां निवेशकों और उपभोक्ताओं से बढ़ते दबाव का सामना कर रही हैं, जो बॉयकॉट, डिवेस्टमेंट और सैंक्शंस (बीडीएस) आंदोलन से जुड़े हैं।
व्यापक संदर्भ: गाजा और वेस्ट बैंक में बढ़ती जांच और वैश्विक प्रभाव
रिपोर्ट का जारी होना इजरायल के लिए चुनौतीपूर्ण समय पर हुआ है, जब गाजा और वेस्ट बैंक में उसकी कार्रवाइयों की वैश्विक जांच बढ़ रही है। अक्टूबर 2023 के बाद से वेस्ट बैंक में इजरायली छापेमारी में सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे गए हैं, और बस्तियों का विस्तार तेज हुआ है। यूएन की जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इजरायली नीतियां बस्तियों को बढ़ाने, फिलिस्तीनियों को विस्थापित करने और वेस्ट बैंक को पूरी तरह annexation करने का इरादा दिखाती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय अपराध हो सकता है। इजरायल ने इसे पूर्वाग्रही बताकर खारिज किया है, लेकिन आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट) इसकी जांच कर रहा है। रिपोर्ट में गाजा संघर्ष का भी जिक्र है, जहां 40,000 से अधिक मौतें हुईं हैं, और यह वेस्ट बैंक की स्थिति को जोड़ती है। वैश्विक स्तर पर, यूरोपीय संघ ने बस्ती उत्पादों पर लेबलिंग नियम लागू किए हैं, और कई देशों ने आयात प्रतिबंध लगाए हैं। यह डेटाबेस कंपनियों को जोखिमों से अवगत कराता है, जैसे कानूनी मुकदमे या प्रतिष्ठा हानि, और उन्हें नैतिक कारोबार अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
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इस रिपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों और इजरायल की नीतियों के बीच की खाई और गहरी होती दिख रही है। यह वैश्विक कंपनियों को एक कठिन स्थिति में डालती है, जहां उन्हें कारोबारी हितों और मानवाधिकार जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह डेटाबेस न केवल पारदर्शिता बढ़ाता है, बल्कि कंपनियों को अपनी गतिविधियों की समीक्षा करने और संभावित उल्लंघनों से बचने में मदद करता है। लंबे समय में, यह फिलिस्तीनी राज्य की संभावनाओं को मजबूत करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक कदम हो सकता है, जैसा कि ओस्लो समझौतों में कल्पना की गई थी।
