टैक्स गाइडवित्त

आयकर नियमों में 12 बदलाव जो हर भारतीय को जानना चाहिए

हर साल जब भी आमदनी का हिसाब देने का समय आता है, तो हमारे दिमाग में कई सवाल घूमने लगते हैं। वेतन बैंक खाते में आने से पहले ही जब उसका एक हिस्सा कट जाता है, तो किसी को भी अच्छा नहीं लगता। हम सब चाहते हैं कि किसी तरह हमारी मेहनत की कमाई बच जाए और हम उसे अपने भविष्य के लिए सुरक्षित कर सकें।

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लेकिन परेशानी यह है कि सरकार हर साल कर जमा करने के तरीकों में कुछ न कुछ बदलाव कर देती है। यदि आप इन बदलावों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं, तो आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। आज हम बिना किसी जटिल भाषा के सीधे मुद्दे की बात करेंगे। हम उन इनकम टैक्स के नए नियम पर चर्चा करेंगे, जिन्होंने हमारे पैसों के प्रबंधन का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। मैं आपको कोई उलझाने वाली बातें नहीं बताऊंगा, बल्कि इसे बिल्कुल आम और आसान भाषा में समझाऊंगा ताकि आप अपना पैसा सही जगह बचा सकें।

यह विषय आपके लिए क्यों मायने रखता है

पैसा कमाना जितना मुश्किल काम है, उसे बचाना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। हम अक्सर अपना पैसा बचाने के चक्कर में जल्दबाजी में गलत जगह निवेश कर देते हैं और जब तक हमें अपनी गलती का एहसास होता है, तब तक समय निकल चुका होता है। अब जो इनकम टैक्स के नए नियम आए हैं, वे पैसे बचाने के पुराने सारे तरीकों को चुनौती दे रहे हैं। सरकार चाहती है कि यह पूरी प्रणाली बहुत ही सरल और पारदर्शी हो।

इसी वजह से उन्होंने कुछ पुरानी छूट खत्म कर दी हैं और आम आदमी को कुछ नई राहतें भी दी हैं। यदि आप नौकरीपेशा हैं या आपका अपना कोई व्यापार है, तो ये सारे बदलाव सीधा आपकी जेब से जुड़े हुए हैं। इन्हें समझे बिना अगर आप कागजी कार्रवाई पूरी करेंगे, तो या तो आपको रिफंड कम मिलेगा या फिर आप फालतू में ज्यादा पैसे चुका बैठेंगे। इसलिए हर एक बदलाव को बारीकी से समझना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

इनकम टैक्स के बारह नए नियम जिनका आपकी जेब पर असर पड़ेगा

सरकार ने स्लैब से लेकर निवेश योजनाओं तक हर जगह कुछ नए पेंच कसे हैं। आइए विस्तार से देखते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और आपको इनसे कैसे निपटना है।

1. नई कर व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट रिजीम) का लागू होना

जब भी कर चुकाने की बात आती है, तो हम सभी चाहते हैं कि हमारे पैसे किसी तरह बच जाएं। लेकिन नई व्यवस्था के आने के बाद से कई लोगों के मन में भारी उलझन पैदा हो गई है। सरकार ने इस नई व्यवस्था को मुख्य और डिफ़ॉल्ट विकल्प बना दिया है, जिसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आप अपनी कंपनी को समय रहते यह नहीं बताते कि आपको कौन सा विकल्प चुनना है, तो वे अपने आप नई व्यवस्था के अनुसार आपकी कमाई में से पैसे काट लेंगे।

अगर आपको अपने घर के लोन, जीवन बीमा या भविष्य निधि जैसी पुरानी बचतों पर मिलने वाली छूट का फायदा उठाना है, तो आपको खुद आगे बढ़कर पुरानी व्यवस्था का चयन करना होगा। नौकरी करने वाले लोग हर साल अपनी सुविधानुसार इसे बदल सकते हैं, लेकिन अगर आपका अपना व्यापार है, तो आपको यह मौका पूरे जीवन में केवल एक बार ही मिलता है। इसलिए, बिना सोचे-समझे फैसला लेने से बेहतर है कि आप अपने खर्चों और निवेश का सही आकलन करें।

मुख्य बिंदु नई कर व्यवस्था पुरानी कर व्यवस्था
वर्तमान स्थिति डिफ़ॉल्ट रूप से लागू खुद से चुनना अनिवार्य
निवेश पर छूट का लाभ कोई छूट नहीं मिलती सभी तरह की छूट उपलब्ध
किसे चुनना चाहिए बिना निवेश वाले लोगों को जो बहुत ज्यादा निवेश करते हैं

2. कर छूट की सीमा बढ़ाकर सात लाख रुपये करना

यह फैसला नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए अब तक की सबसे बड़ी राहत बनकर आया है। पुराने नियमों के अनुसार, अगर आपकी सालाना कमाई पांच लाख रुपये तक थी, तो आपको सरकार को कोई पैसा नहीं देना पड़ता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में इस सीमा को बढ़ाकर सीधे सात लाख रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर आप साल भर में सात लाख रुपये कमाते हैं, तो आपकी देनदारी बिल्कुल शून्य होगी।

यदि हम इसमें मानक कटौती को भी जोड़ लें, तो असल में साढ़े सात लाख रुपये तक कमाने वाले किसी भी व्यक्ति को अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना है। यह बदलाव उन युवाओं और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा वरदान है, जिनकी आय अभी बहुत ज्यादा नहीं है और जो अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा घर खर्च में ही लगा देते हैं।

आय का स्तर (सालाना) पुरानी व्यवस्था में छूट की सीमा नई व्यवस्था में छूट की सीमा
बिना कर वाली आय सीमा पांच लाख रुपये सात लाख रुपये
मानक कटौती के साथ सीमा साढ़े पांच लाख रुपये साढ़े सात लाख रुपये
जरूरी शर्त निवेश के कागजात देने होंगे बिना किसी कागजात के पूरी छूट

3. नई व्यवस्था में पचास हजार रुपये की मानक कटौती

जब नई कर व्यवस्था पहली बार देश में लागू की गई थी, तो नौकरीपेशा वर्ग के लोगों ने इसे पूरी तरह से नकार दिया था। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि इसमें वह पचास हजार रुपये की मानक कटौती नहीं मिलती थी, जो पुरानी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत हुआ करती थी। नौकरीपेशा लोगों की इस नाराजगी को देखते हुए सरकार ने अपनी गलती सुधारी और नियमों में बदलाव किया।

अब इनकम टैक्स के नए नियम के अनुसार, नई व्यवस्था में भी इस पचास हजार रुपये की कटौती को जोड़ दिया गया है। इसके अलावा, पारिवारिक पेंशन पाने वाले बुजुर्गों को भी पंद्रह हजार रुपये तक की अतिरिक्त राहत दी गई है। इस एक कदम से नौकरीपेशा लोगों के कंधों से आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो गया है और अब ज्यादा से ज्यादा लोग इस नई प्रणाली को अपनाने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

कटौती का प्रकार इसका लाभ कौन उठा सकता है मिलने वाली छूट की रकम
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सभी नियमित कर्मचारी पचास हजार रुपये की सीधी छूट
पेंशन पाने वालों के लिए पारिवारिक पेंशन प्राप्तकर्ता पंद्रह हजार रुपये तक की छूट
कागजी कार्रवाई किसी रसीद की जरूरत नहीं किसी रसीद की जरूरत नहीं

4. छुट्टी के बदले नकद (लीव एनकैशमेंट) की सीमा पच्चीस लाख तक बढ़ी

छुट्टी के बदले नकद (लीव एनकैशमेंट) की सीमा पच्चीस लाख तक बढ़ी

निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के समय या नौकरी छोड़ते समय मिलने वाला यह पैसा बहुत काम आता है। पिछले बीस सालों से इस रकम पर कर छूट की अधिकतम सीमा मात्र तीन लाख रुपये तय थी, जो आज की महंगाई के हिसाब से बहुत कम थी। इतने सालों के लंबे इंतजार के बाद सरकार ने आखिरकार इस सीमा को सीधे तीन लाख से बढ़ाकर पच्चीस लाख रुपये कर दिया है। यह गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है।

अगर आप सालों काम करने के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं और आपकी कंपनी आपको बची हुई छुट्टियों के बदले पैसे देती है, तो अब पच्चीस लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम पर आपको कोई कर नहीं चुकाना पड़ेगा। इससे बुढ़ापे में लोगों के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे वे अपना आगे का जीवन आराम से बिता सकेंगे।

कर्मचारी की श्रेणी पुरानी कर-मुक्त सीमा नई कर-मुक्त सीमा
सरकारी कर्मचारी पूरी रकम कर-मुक्त पूरी रकम कर-मुक्त
गैर-सरकारी कर्मचारी सिर्फ तीन लाख रुपये पच्चीस लाख रुपये तक
लाभ मिलने का समय नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत्ति पर नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत्ति पर

5. डेट म्यूचुअल फंड पर पूंजीगत लाभ कर का नया गणित

अगर आप हमेशा बाजार के जोखिम से बचकर सुरक्षित निवेश करने में विश्वास रखते हैं, तो यह नया नियम आपको थोड़ा निराश कर सकता है। पहले के समय में, अगर आप ऐसे फंड्स को तीन साल से ज्यादा समय तक अपने पास रखते थे, तो आपको महंगाई दर के समायोजन (इंडेक्सेशन) का फायदा मिलता था और कर काफी कम लगता था।

अब नए नियमों के मुताबिक, अप्रैल दो हजार तेईस के बाद खरीदे गए उन सभी फंड्स पर यह शानदार फायदा पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जिनमें शेयर बाजार का हिस्सा पैंतीस प्रतिशत से कम है। अब आपको इन पर जो भी मुनाफा होगा, वह सीधे आपकी उस साल की कुल कमाई में जुड़ जाएगा। इसके बाद आप जिस भी स्लैब में आते हैं, उसी के हिसाब से आपको उस मुनाफे पर कर चुकाना होगा। इससे यह निवेश अब बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट जितना ही सामान्य हो गया है।

निवेश की अवधि पुराना नियम (इंडेक्सेशन के साथ) नया नियम (बिना इंडेक्सेशन के)
छोटा समय (तीन साल से कम) स्लैब के अनुसार कर लगता था स्लैब के अनुसार ही कर लगेगा
लंबा समय (तीन साल से ज्यादा) बीस प्रतिशत कर (राहत के साथ) स्लैब के अनुसार कर लगेगा
निवेश का मुख्य असर लंबे समय के लिए बहुत फायदेमंद था अब एफडी के बराबर ही मुनाफा होगा

6. जीवन बीमा पॉलिसियों की परिपक्वता (मैच्योरिटी) पर कर

हममें से बहुत से लोग जीवन बीमा को सिर्फ सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि पैसे बचाने और निवेश करने का एक बेहतरीन जरिया मानते आए हैं। देश के अमीर लोग भारी-भरकम रकम का प्रीमियम भरते थे और जब पॉलिसी पूरी होती थी, तो सारा पैसा बिना किसी कर के अपने घर ले जाते थे। इस खामी को दूर करने के लिए सरकार ने नियमों में भारी बदलाव किया है।

अब अगर आप कोई ऐसी नई पॉलिसी लेते हैं जिसका सालाना प्रीमियम पांच लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसके पूरा होने पर मिलने वाला पैसा अब कर-मुक्त नहीं होगा। उस मुनाफे पर आपको अपनी आय के अनुसार कर देना ही होगा। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अगर किसी अनहोनी की वजह से पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को मिलने वाली पूरी रकम पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा।

सालाना जमा की जाने वाली रकम पहले की स्थिति क्या थी अब नए नियम के बाद की स्थिति
पांच लाख रुपये तक का प्रीमियम परिपक्वता पर कोई कर नहीं परिपक्वता पर कोई कर नहीं
पांच लाख रुपये से ज्यादा का प्रीमियम परिपक्वता पर कोई कर नहीं मुनाफे पर पूरा कर देना होगा
मृत्यु की स्थिति में मिलने वाला पैसा पूरी तरह से कर-मुक्त पूरी तरह से कर-मुक्त रहेगा

7. ऑनलाइन गेमिंग की कमाई पर तीस प्रतिशत टीडीएस

आजकल मोबाइल फोन पर रमी, फैंटेसी क्रिकेट और अन्य तरह के गेम खेलने का काफी चलन बढ़ गया है और लोग इससे पैसे भी कमा रहे हैं। पहले के नियम के अनुसार, अगर आप एक बार में दस हजार रुपये से ज्यादा जीतते थे, तभी उस पर आपका कर काटा जाता था। लोग इस नियम से बचने के लिए अपनी जीती हुई रकम को थोड़ा-थोड़ा करके निकालते थे ताकि वे कर देने से बच सकें।

इस चालाकी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने बहुत सख्त कदम उठाया है। अब आपकी कुल जीत पर सीधे तीस प्रतिशत की दर से कर काटा जाएगा, चाहे आपने सिर्फ सौ रुपये ही क्यों न जीते हों। इतना ही नहीं, गेम खिलाने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जब भी उपयोगकर्ता अपने खाते से पैसे निकालेगा, तो उन्हें उसी समय यह कटौती करनी होगी।

जीती गई रकम का विवरण पुराना कटौती का नियम नया कटौती का नियम
दस हजार रुपये से कम जीतना कोई पैसा नहीं कटता था सीधे तीस प्रतिशत की कटौती
दस हजार रुपये से ज्यादा जीतना तीस प्रतिशत की कटौती सीधे तीस प्रतिशत की कटौती
हिसाब लगाने का तरीका हर जीत पर अलग से गणना कुल मुनाफे पर एक साथ कटौती

8. वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की सीमा दोगुनी होना

हमारे देश में बुजुर्गों को सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने के लिए डाकघर और बैंकों में खास बचत योजनाएं चलाई जाती हैं, जो उनके बुढ़ापे का सहारा होती हैं। पहले के नियमों के तहत, एक बुजुर्ग व्यक्ति इस योजना के अंतर्गत अपने खाते में अधिकतम पंद्रह लाख रुपये ही जमा कर सकता था। आज की तेजी से बढ़ती महंगाई को देखते हुए और बुजुर्गों को ज्यादा ब्याज का सीधा फायदा पहुंचाने के लिए, सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर एकदम दोगुना कर दिया है।

अब वरिष्ठ नागरिक अपने खाते में तीस लाख रुपये तक की बड़ी रकम सुरक्षित रूप से जमा कर सकते हैं और उस पर नियमित ब्याज पा सकते हैं। इसके साथ ही, डाकघर की मासिक आय योजना की सीमा भी सिंगल खाते के लिए नौ लाख रुपये और जॉइंट खाते के लिए पंद्रह लाख रुपये कर दी गई है, जो उनके लिए एक बहुत बड़ी आर्थिक सहायता है।

योजना का नाम पहले की अधिकतम जमा सीमा अब नई अधिकतम जमा सीमा
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पंद्रह लाख रुपये सीधे तीस लाख रुपये
मासिक आय योजना (सिंगल खाता) साढ़े चार लाख रुपये नौ लाख रुपये
मासिक आय योजना (जॉइंट खाता) नौ लाख रुपये पंद्रह लाख रुपये

9. विदेश पैसा भेजने पर बीस प्रतिशत टीसीएस

अगर आप दुनिया घूमने के शौकीन हैं या दूसरे देशों के बाजार में अपना पैसा लगाना पसंद करते हैं, तो सरकार का यह नया नियम आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। जब हम विदेशी मुद्रा योजना के तहत भारत से बाहर पैसा भेजते हैं, तो उस रकम पर स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) लागू होता है। पहले यह दर सिर्फ पांच प्रतिशत हुआ करती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर सीधे बीस प्रतिशत कर दिया गया है।

इसका मतलब यह है कि अगर आप विदेश में पर्यटन पर जाते हैं या वहां खर्च करते हैं, तो सात लाख रुपये से ऊपर की रकम पर आपका बीस प्रतिशत पैसा पहले ही कट जाएगा। हालांकि, अच्छी बात यह है कि बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर सरकार ने नरमी बरती है और उन पर अभी भी पुराने नियम ही लागू होंगे। यह पैसा बाद में आपकी कुल कर देनदारी में समायोजित किया जा सकता है।

खर्च करने का कारण पुरानी कर संग्रह दर नई कर संग्रह दर
विदेशी पर्यटन या टूर पैकेज पांच प्रतिशत मात्र बीस प्रतिशत की भारी कटौती
विदेशी बाजार में निवेश करना पांच प्रतिशत मात्र बीस प्रतिशत की भारी कटौती
पढ़ाई या इलाज (सात लाख से ऊपर) पांच प्रतिशत मात्र पांच प्रतिशत (कोई बदलाव नहीं)

10. भौतिक सोने को ई-गोल्ड में बदलने पर कर में छूट

हम भारतीयों का सोने के प्रति लगाव दुनिया में किसी से छिपा नहीं है, लेकिन घर की तिजोरी में भारी मात्रा में सोना रखना आज के समय में बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं माना जाता है। सरकार भी यही चाहती है कि लोग सोने के गहनों की बजाय इलेक्ट्रॉनिक रूप में सोना खरीदें ताकि काले धन पर भी रोक लग सके। अगर आपके पास घर में रखा हुआ सोना है और आप उसे मान्यता प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक रसीद में बदलते हैं, तो इनकम टैक्स के नए नियम के तहत इसे किसी तरह का हस्तांतरण या बिक्री नहीं माना जाएगा।

इसका सीधा मतलब यह है कि इस पूरी प्रक्रिया पर आपको कोई पूंजीगत लाभ कर नहीं देना पड़ेगा। इसी तरह, अगर आप इलेक्ट्रॉनिक रसीद को वापस असली सोने में बदलते हैं, तो भी उस पर तुरंत कोई कर नहीं लगेगा। यह कर केवल तभी लगेगा जब आप उस रसीद को बाजार में बेचकर नकद मुनाफा कमाएंगे।

लेन-देन की प्रकृति पूंजीगत लाभ कर का लागू होना इसका सबसे बड़ा फायदा
असली सोने को रसीद में बदलना कर नहीं लगेगा डिजिटल रखने को बढ़ावा मिलेगा
रसीद को वापस सोने में बदलना कर नहीं लगेगा चोरी का डर खत्म होगा
रसीद को मुनाफे पर बेचना हाँ, कर लगेगा सही और पारदर्शी कीमत मिलेगी

11. उच्च आय वालों के लिए अधिभार (सरचार्ज) में भारी कमी

यह बदलाव विशेष रूप से देश के उन चुनिंदा सबसे अमीर लोगों के लिए किया गया है, जिनकी आमदनी करोड़ों में होती है। हमारे देश में जिन लोगों की सालाना आय पांच करोड़ रुपये से ज्यादा होती थी, उन्हें अपने कर के ऊपर सैंतीस प्रतिशत का एक बहुत ही भारी-भरकम अधिभार देना पड़ता था। इसके कारण उनकी कुल कमाई पर लगने वाले कर की दर लगभग बयालीस प्रतिशत तक पहुँच जाती थी, जो पूरी दुनिया में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जाती थी।

सरकार ने नई कर व्यवस्था को ज्यादा आकर्षक और लोकलुभावन बनाने के लिए इस सबसे बड़े अधिभार को सैंतीस प्रतिशत से घटाकर पच्चीस प्रतिशत कर दिया है। इस एक कदम से पांच करोड़ से ज्यादा कमाने वाले बड़े कारोबारियों और अधिकारियों की अधिकतम कर दर अब कम होकर उनतालीस प्रतिशत पर आ गई है, जिससे उन्हें करोड़ों रुपयों की भारी बचत होगी।

सालाना आय का स्तर पुराना अधिभार (सरचार्ज) दर नया अधिभार (नई व्यवस्था में)
पचास लाख से एक करोड़ रुपये दस प्रतिशत दस प्रतिशत
एक करोड़ से दो करोड़ रुपये पंद्रह प्रतिशत पंद्रह प्रतिशत
पांच करोड़ रुपये से ज्यादा सैंतीस प्रतिशत पच्चीस प्रतिशत

12. घर बेचने पर मिलने वाली छूट पर दस करोड़ की सीमा

जमीन और संपत्ति में निवेश करने वाले बड़े खिलाड़ियों के लिए यह नियम एक बहुत बड़ी चेतावनी की तरह है। पहले के समय में लोग अपना करोड़ों का महंगा घर बेचते थे और उस पर लगने वाले कर से पूरी तरह बचने के लिए नियमों के तहत कोई दूसरा और भी भव्य घर खरीद लेते थे। पहले इस तरह के दोबारा निवेश करने पर किसी भी तरह की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं थी, जिसका लोग जमकर फायदा उठाते थे।

अब इनकम टैक्स के नए नियम ने इस खुली छूट पर पूरी तरह से लगाम लगा दी है। सरकार ने यह सख्त नियम बना दिया है कि संपत्ति बेचकर दूसरा घर खरीदने पर मिलने वाली छूट की अधिकतम सीमा अब सिर्फ दस करोड़ रुपये ही होगी। अगर आप नया घर खरीदने में दस करोड़ रुपये से ज्यादा का पैसा लगाते हैं, तो उस अतिरिक्त रकम पर आपको बिना किसी छूट के पूरा कर चुकाना ही होगा।

नियम की धारा छूट का विवरण तय की गई अधिकतम सीमा
धारा चौवन घर बेचकर दूसरा घर खरीदना दस करोड़ रुपये मात्र
धारा चौवन एफ अन्य संपत्ति बेचकर घर खरीदना दस करोड़ रुपये मात्र
बाजार पर असर अमीरों के बड़े सौदों पर रोक कर की बड़ी चोरी रुकेगी

पुरानी या नई: आपके लिए कौन सी कर व्यवस्था सही है?

इतने सारे नए और उलझे हुए नियमों को विस्तार से समझने के बाद हर किसी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर हमारे पैसों के लिए कौन सा रास्ता चुनना सबसे बेहतर रहेगा। इसका हिसाब लगाना उतना मुश्किल नहीं है जितना यह दिखाई देता है। अगर आप अपने घर के किराए के भत्ते, मकान के लोन के ब्याज और भविष्य निधि या जीवन बीमा जैसी चीजों का भरपूर फायदा उठाते आए हैं और इसके सारे सबूत आपके पास हैं, तो आपके लिए पुरानी प्रणाली में बने रहना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।

लेकिन, अगर आपने अपने जीवन में कोई बड़ा लोन नहीं लिया है और आप हर साल निवेश के ढेरों कागजात इकट्ठा करने के झंझट से खुद को दूर रखना चाहते हैं, तो नई प्रणाली आपके लिए एक बहुत बड़े वरदान से कम नहीं है। मेरा सुझाव यही रहेगा कि हर साल अपना ब्यौरा जमा करने से पहले एक बार ऑनलाइन जाकर दोनों प्रणालियों में अपना हिसाब जरूर लगा लें और जिसमें आपके मेहनत के पैसे कम कट रहे हों, उसे बिना किसी हिचकिचाहट के चुन लें।

निष्कर्ष

कर का पूरा मामला अक्सर आम आदमी को बहुत उलझा हुआ और डरावना लगता है। लेकिन अगर आप थोड़ी सी जागरूकता दिखाएं और समय-समय पर आने वाले बदलावों पर नजर रखें, तो आप अपनी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं। इनकम टैक्स के नए नियम साफ़ तौर पर इस बात का इशारा कर रहे हैं कि सरकार आने वाले समय में पुरानी और जटिल व्यवस्था को पूरी तरह से हटाकर एक बहुत ही आसान और स्पष्ट प्रणाली लागू करना चाहती है। अब सही समय आ गया है कि हम सभी अपने पैसों के प्रबंधन को नए सिरे से सोचें और समझें।

सिर्फ कर बचाने के लालच में आकर ऐसी किसी भी जगह अपना कीमती पैसा न फंसाएं जहाँ से आपको भविष्य में कोई मुनाफा ही न मिले। अपनी वास्तविक जरूरत के हिसाब से ही अपना बीमा लें और अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए सही जगह निवेश करें। अगर आपको अभी भी अपने पैसों को लेकर कोई उलझन है, तो आखिरी तारीख का इंतजार बिल्कुल न करें और आज ही किसी विशेषज्ञ के साथ बैठकर अपनी पूरी आर्थिक योजना को दुरुस्त करें। आखिर यह आपकी मेहनत का पैसा है और इसे पूरी समझदारी से बचाना आपका पहला अधिकार है।