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वह एक जीवित किंवदंती बने रहेंगे ‘: असम के पसंदीदा बेटे जुबिन गर्ग के घर लौटने पर राष्ट्र ने पर्दे के कॉल पर धनुष लिया

गुवाहाटी जुबीन गर्ग कभी सिर्फ असम की आवाज नहीं थे; वे पूरे भारत की धड़कन थे, जिनकी संगीत ने न सिर्फ सीमाओं को पार किया बल्कि विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और पहचानों को एक सूत्र में बांधा। उनकी आवाज में एक ऐसी जादुई शक्ति थी जो असम के ग्रामीण इलाकों से लेकर मुंबई की चकाचौंध तक फैली हुई थी, और उनके गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। जब उनके पार्थिव शरीर को गुवाहाटी लाया गया, तो न सिर्फ असम बल्कि कोलकाता, मुंबई और अन्य शहरों में असंख्य गैर-असमिया प्रशंसकों तथा कलाकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जो उन्हें अपना सच्चा साथी और प्रेरणा स्रोत मानते थे। जुबीन की मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया, और उनके प्रशंसक अब भी उनके गीतों में उन्हें जीवित महसूस करते हैं।

‘गोल्डी’, यह उपनाम जुबीन के करीबी दोस्तों और सहयोगियों द्वारा प्यार से इस्तेमाल किया जाता था, जो उनकी सुनहरी आवाज और व्यक्तित्व को दर्शाता था। उन्होंने अपना संगीत सफर 1992 में मात्र 19 साल की उम्र में शुरू किया था, जब उनका पहला एल्बम ‘अनामिका’ रिलीज हुआ, जो असम भर में लोगों के दिलों को छू गया और आज भी एक क्लासिक हिट के रूप में जाना जाता है। इस एल्बम की सफलता ने उन्हें असम के संगीत जगत में एक उभरते सितारे के रूप में स्थापित किया, और जल्द ही उन्होंने विभिन्न भाषाओं में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू की। हालांकि, इस रॉकस्टार ने 1995 में मुंबई की ओर रुख किया, जहां उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, लेकिन 2006 की फिल्म ‘गैंगस्टर’ के गाने ‘या अली’ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपार प्रसिद्धि दिलाई, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गाने ने न सिर्फ बॉलीवुड में उनकी जगह पक्की की बल्कि उन्हें ग्लोबल इंडियन फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार भी दिलाया।

अपनी सफलता के बावजूद, जुबीन आखिरकार असम लौट आए, मुख्यधारा की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के रवैये से निराश होकर। उन्होंने कई मौकों पर खुलकर बताया कि मुंबई में मौजूद एटीट्यूड और राजनीति से वे परेशान थे, और इसलिए उन्होंने असम वापस आने का फैसला किया, जहां उन्होंने कहा था, “मैं यहां (असम में) राजा की तरह मरूंगा”। असम लौटकर उन्होंने स्थानीय संगीत और सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, और बीहू उत्सवों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नियमित रूप से परफॉर्म किया। उनकी यह वापसी न सिर्फ उनके व्यक्तिगत फैसले का परिणाम थी बल्कि असम की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का एक प्रयास भी था।

जुबीन गर्ग का प्रारंभिक जीवन और परिवार

जुबीन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को मेघालय के तुरा में एक असमिया ब्राह्मण परिवार में हुआ था, हालांकि उनका पालन-पोषण मुख्य रूप से असम के जोरहाट में हुआ। उनका असली नाम जीबन बोरठाकुर था, लेकिन उन्हें मशहूर कंडक्टर जुबिन मेहता के नाम पर जुबीन नाम दिया गया। उनके पिता मोहिनी मोहन बोरठाकुर एक मजिस्ट्रेट थे, जो कपिल ठाकुर के नाम से कवि और गीतकार के रूप में जाने जाते थे, जबकि उनकी मां इली बोरठाकुर एक प्रतिभाशाली डांसर, सिंगर और अभिनेत्री थीं। परिवार से मिली इस कलात्मक विरासत ने जुबीन के संगीत प्रेम को बचपन से ही पोषित किया।

जुबीन ने तीन साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था, और उनकी पहली गुरु उनकी मां ही थीं। उन्होंने कई साल तक तबला, ढोल, मैंडोलिन और इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड जैसे वाद्ययंत्रों की ट्रेनिंग ली। स्कूली शिक्षा तामुलपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी करने के बाद, उन्होंने बी. बरूआ कॉलेज में साइंस में ग्रेजुएशन के लिए दाखिला लिया, लेकिन संगीत करियर पर फोकस करने के लिए कॉलेज छोड़ दिया। 4 फरवरी 2002 को उन्होंने असम के गोलाघाट की फैशन डिजाइनर गरिमा सैकिया से शादी की, और उनका एक बेटा गौतम गर्ग है। जुबीन की एक बहन जोनकी बोरठाकुर भी थीं, लेकिन 23 साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी, जो उनके जीवन का एक दुखद अध्याय रहा।

संगीत करियर की प्रमुख उपलब्धियां

जुबीन गर्ग ने अपने करियर की शुरुआत 1992 में एक यूथ फेस्टिवल में वेस्टर्न सोलो परफॉर्मेंस के लिए गोल्ड मेडल जीतकर की। उसी साल उनका पहला असमिया एल्बम ‘अनामिका’ रिलीज हुआ, जिसने उन्हें नॉर्थ-ईस्ट में लोकप्रिय बना दिया। उनका पहला रिकॉर्डेड गाना ‘तुमी जुनु पारिबा हुन’ था, जो 1993 में एल्बम ‘रितु’ में शामिल हुआ। मुंबई जाने से पहले उन्होंने ‘जापुनोर जुर’ (1992), ‘जुनाकी मोन’ (1993), ‘माया’ (1994) और ‘आशा’ (1995) जैसे एल्बम रिलीज किए, और उनका पहला बीहू एल्बम ‘उजान पिरिति’ कमर्शियली बहुत सफल रहा।

मुंबई में उन्होंने अपनी पहली इंडिपॉप सोलो एल्बम ‘चांदनी रात’ से डेब्यू किया, और फिर ‘चंदा’, ‘गद्दार’, ‘दिल से’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘फिजा’, ‘कांटे’ और ‘जाल’ जैसी फिल्मों में गाने गाए। ‘या अली’ के अलावा, उनके अन्य प्रमुख बॉलीवुड गाने जैसे ‘दिल तू ही बता’ और ‘झूम बराबर’ ने उन्हें खूब प्रसिद्धि दिलाई। जुबीन ने 40 से ज्यादा भाषाओं में करीब 32,000 गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें असमिया, बंगाली, हिंदी, नेपाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी और अंग्रेजी शामिल हैं। वे न सिर्फ गायक थे बल्कि संगीत निर्देशक, गीतकार, अभिनेता, निर्देशक और कवि भी थे।

उन्होंने असमिया फिल्मों जैसे ‘मोन जाई’ (2008) और ‘मिशन चाइना’ (2017) में अभिनय किया, और 2009 में फिल्म ‘किस्मत’ के गाने ‘दिलरुबा’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। बंगाली फिल्म ‘सुधु तुमी’ में संगीत निर्देशन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार मिला। जुबीन असम के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सिंगर थे, और उन्होंने सोशल वर्क में भी योगदान दिया, हालांकि वे कुछ विवादों में भी रहे, जैसे राजनीतिक बयानों या इंडस्ट्री के रवैये पर टिप्पणियां।

बॉलीवुड और मराठी प्लेबैक सिंगर रागिनी कवठेकर की यादें

बॉलीवुड और मराठी प्लेबैक सिंगर रागिनी कवठेकर ने जुबीन के साथ अपनी दोस्ती को विस्तार से याद किया, जो चार-पांच साल पहले शुरू हुई थी। मुंबई से फोन पर टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे आखिरी बार 6 सितंबर को मुंबई में भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह से जुड़े एक कार्यक्रम में मिली थीं, जहां उन्होंने हजारिका के गाने गाए थे। रागिनी ने कहा कि यह कार्यक्रम जुबीन के लिए एक विशेष अवसर था, क्योंकि वे हजारिका को अपना आदर्श मानते थे।

फोन पर भावुक होकर रोते हुए रागिनी ने कहा, “मैं बचपन से जुबीन को सुनती आ रही हूं। वे थे, हैं और हमेशा एक जीवंत किंवदंती रहेंगे। संगीत में वे सबके लिए भगवान जैसे थे। जब मैंने जुबीन के असमिया गाने सुने, तो मुझे भी गाने की इच्छा हुई, और मैंने कई बार कोशिश की। संगीत को दिलों को जोड़ने के लिए भाषा की जरूरत नहीं पड़ती, और जुबीन ने यह साबित किया”। उन्होंने आगे जोड़ा कि जुबीन की आवाज में एक अनोखी गहराई थी, जो विभिन्न संस्कृतियों को एकजुट करती थी।

आर्मान मलिक और अन्य बॉलीवुड सितारों की श्रद्धांजलि

इस बीच, बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर आर्मान मलिक ने जुबीन के लोकप्रिय गाने ‘मायाबिनी’ को गाकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिसका वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। उन्होंने पोस्ट के साथ लिखा, “असम के हर दौरे पर मैं इस गाने को गाता था और इसे एकमात्र जुबीन गर्ग को समर्पित करता था। आज इसे गाना पहले से ज्यादा भारी लग रहा है। विश्वास नहीं होता कि वे अब नहीं हैं, और यह मेरे दिल को तोड़ता है कि मुझे उन्हें ठीक से जानने का मौका कभी नहीं मिला, जो हमेशा एक अधूरी इच्छा रहेगी”। आर्मान ने आगे कहा कि जुबीन की संगीत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित किया था।

उनके अलावा, कई बॉलीवुड गायकों ने जुबीन को श्रद्धांजलि दी, जिनमें एआर रहमान, श्रेया घोषाल, महालक्ष्मी अय्यर, अरिजीत सिंह, जीत गांगुली, जुबिन नौटियाल, शान, पापोन और प्रीतम शामिल हैं। एआर रहमान ने ट्वीट कर कहा कि जुबीन की मौत संगीत जगत के लिए एक बड़ा नुकसान है, जबकि श्रेया घोषाल ने उनके साथ किए सहयोग को याद किया। ये श्रद्धांजलियां जुबीन की राष्ट्रीय स्तर की लोकप्रियता को दर्शाती हैं।

पश्चिम बंगाल फिल्म जगत की श्रद्धांजलि

पश्चिम बंगाल के फिल्म जगत ने शनिवार शाम नेताजी इंडोर स्टेडियम में बंगाली फिल्म “रघु डाकात” के ट्रेलर लॉन्च के दौरान जुबीन को विशेष श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में कई कलाकारों ने उनके गीतों को याद किया और उनकी योगदान की सराहना की। वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा: “असम उनका घर था, लेकिन जुबीन के बंगाली गीतों की वजह से बंगाल में उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग थी। बंगाल के फिल्म जगत द्वारा इस किंवदंती कलाकार को श्रद्धांजलि देना हृदयस्पर्शी है”।

संगीत निर्देशक और गायक रथिजीत भट्टाचार्जी वीडियो में कहते हुए सुने गए, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने उन्हें खो दिया। वे बंगाली नहीं थे, लेकिन उनके बंगाली गाने बंगाल के हर घर में बजते हैं। वे बंगला इंडस्ट्री की नई आवाज बन गए थे”। उन्होंने सभा से जुबीन की याद में 30 सेकंड का मौन रखने की अपील की, जिसे सभी ने सम्मानपूर्वक निभाया। यह श्रद्धांजलि जुबीन के बंगाली संगीत में योगदान को उजागर करती है, जहां उन्होंने कई हिट गाने दिए।

अरुणाचल प्रदेश के नेताओं की श्रद्धांजलि

इस बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एनडीए विधायकों के साथ जुबीन की याद में दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने कहा, “असम से लेकर पूर्वोत्तर के दूरदराज के कोनों तक, उनके संगीत ने लाखों लोगों को प्रेरित किया और देश के लिए गर्व का स्रोत बना”। खांडू ने जुबीन के गीतों को पूर्वोत्तर की एकता का प्रतीक बताया।

अरुणाचल के उप-मुख्यमंत्री चौना मेन ने एक्स पर जुबीन के आदि, गालो और न्यिशी भाषाओं में गाए गाने का म्यूजिक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जुबीन न सिर्फ असम के किंवदंती कलाकार थे, बल्कि अरुणाचल प्रदेश के प्रिय मित्र भी थे। उनके गाने हमारी स्थानीय भाषाओं में गूंजते थे और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते थे”। यह श्रद्धांजलि जुबीन की बहुभाषी प्रतिभा को रेखांकित करती है।

जुबीन की मौत का कारण और अंतिम संस्कार

जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान सांस लेने में आई दिक्कत से हुई, जो अंततः डूबने का कारण बनी। वे 52 साल के थे और नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने के लिए सिंगापुर गए थे, जहां यह हादसा हुआ। सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आईसीयू में उनका निधन हो गया। मौत का प्रमाण-पत्र डूबने को मुख्य कारण बताता है, हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुछ अलग विवरण हैं, और असम सरकार इसे प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। यह घटना जुबीन के साहसिक शौक को दर्शाती है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से उनके जीवन का अंत बन गई।

उनका पार्थिव शरीर गुवाहाटी लाया गया, जहां हजारों प्रशंसकों ने सड़कों पर उमड़कर अंतिम विदाई दी, और भावुक दृश्य देखने को मिले। असम सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की, जिस दौरान राज्य में सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहे। उनका अंतिम संस्कार 23 सितंबर 2025 को कामरकुची गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा, जहां विशेष व्यवस्था की गई है।

राजनीतिक नेताओं की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुबीन की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के अचानक निधन से स्तब्ध हूं। उन्हें संगीत में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा, जो पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करता था”। मोदी ने उनके गीतों को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “आज असम ने अपना एक प्रिय पुत्र खो दिया। जुबीन असम के लिए क्या मायने रखते थे, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वे बहुत जल्दी चले गए, यह जाने की उम्र नहीं थी”। सरमा ने जुबीन की आवाज की तारीफ की, जो लोगों को ऊर्जा देती थी, और कहा कि उनका संगीत हमारी संस्कृति, भावनाओं और आत्मा को दुनिया भर में पहुंचाता था। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से जुबीन को पूर्ण सम्मान देने की घोषणा की।

जुबीन का संगीत सफर और विरासत

जुबीन गर्ग ने तीन दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 40 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाए, जिनमें असमिया, बंगाली, हिंदी और नेपाली प्रमुख हैं। वे गायक के साथ-साथ संगीतकार, गीतकार, अभिनेता और फिल्म निर्देशक भी थे, और उन्होंने लोक परंपराओं को आधुनिक पॉप, रॉक और बॉलीवुड के साथ जोड़ा। उनका करियर असम की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, जहां उन्हें ‘लुइटकंठो’ (लुइट की आवाज) और ‘असम का हार्टथ्रोब’ कहा जाता था।

उनके प्रमुख गाने जैसे ‘मायाबिनी’, ‘या अली’, ‘दिल तू ही बता’ और कई बॉलीवुड हिट्स ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वे बीहू उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नियमित परफॉर्मर थे, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असमिया संगीत का प्रतिनिधित्व किया। जुबीन की विरासत न सिर्फ उनके गीतों में बल्कि पूर्वोत्तर की युवा पीढ़ी को प्रेरित करने में भी जीवित रहेगी, और वे हमेशा एक रॉकस्टार के रूप में याद किए जाएंगे।