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एलन मस्क की अरबों डॉलर की कंपनी के पृथ्वी पर जीवन को खतरे में डालने पर मानवता को चेतावनी

प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक जोनाथन मैकडॉवेल ने पूरी मानवता को चेतावनी दी है कि एलन मस्क की अरबों डॉलर की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक उपग्रह पृथ्वी के जीवन को गंभीर खतरे में डाल सकते हैं। ये उपग्रह वर्तमान में प्रतिदिन एक या दो की दर से डी-ऑर्बिट होकर पृथ्वी की ओर गिर रहे हैं, और इससे पृथ्वी के स्ट्रेटोस्फियर, यानी उपरी वायुमंडल को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। स्ट्रेटोस्फियर में ओजोन परत एक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कवच की तरह काम करती है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से रोकती है। यदि यह परत क्षतिग्रस्त हो गई, तो यूवी किरणों की मात्रा बढ़ जाएगी, जिससे मनुष्यों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, आंखों की अन्य क्षतियां और यहां तक कि पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ओजोन क्षति से त्वचा कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ सकते हैं, जो पहले से ही एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती है।

मैकडॉवेल, जो 37 वर्षों तक हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स में काम कर चुके हैं और अंतरिक्ष मलबे पर विशेषज्ञता रखते हैं, ने चिंता जताई है कि स्टारलिंक उपग्रहों की बढ़ती संख्या से अंतरिक्ष में मलबा (स्पेस जंक) का संकट और गहरा सकता है। वर्तमान में पृथ्वी की कक्षा में 25,000 से अधिक कक्षीय मलबे के टुकड़े घूम रहे हैं, जो मृत उपग्रहों, पुराने रॉकेट चरणों, टकराव के परिणामस्वरूप बिखरे टुकड़ों और अन्य अपशिष्टों से बने हैं। ये टुकड़े छोटे-छोटे पेंच से लेकर बड़े उपग्रह अवशेषों तक हो सकते हैं, और वे 28,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से घूमते हुए किसी भी सक्रिय उपग्रह या अंतरिक्ष यान को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी जैसे संगठनों के अनुसार, यह स्पेस जंक समस्या अंतरिक्ष यात्रा को असुरक्षित बना रही है, और यदि नियंत्रण न किया गया, तो यह भविष्य की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को रोक सकती है।

स्टारलिंक उपग्रहों का विस्तार और लॉन्च की तेज रफ्तार

स्पेसएक्स के स्टारलिंक प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में 8,000 से अधिक उपग्रह कम पृथ्वी कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जो वैश्विक इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से तैनात किए गए हैं। लेकिन मस्क की कंपनी के अलावा अन्य कंपनियां और देश भी इसी तरह के मेगा-कॉन्स्टेलेशन लॉन्च करने की दौड़ में हैं, जिससे कुल संख्या हजारों में पहुंच सकती है। स्पेसफ्लाइट नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल इस साल 2025 में स्पेसएक्स ने 2,000 से अधिक स्टारलिंक उपग्रह लॉन्च किए हैं, जो फाल्कन 9 रॉकेटों के माध्यम से नियमित रूप से कक्षा में भेजे जा रहे हैं। यह लॉन्च दर इतनी तेज है कि कंपनी का लक्ष्य 30,000 से अधिक उपग्रहों का एक विशाल नेटवर्क बनाना है, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाएगा।

हालांकि, इस विस्तार ने नियामकों को चिंतित कर दिया है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने 2023 में एलन मस्क को एक स्पष्ट चेतावनी जारी की थी कि उनके स्टारलिंक उपग्रह 2035 तक किसी व्यक्ति को गंभीर चोट या यहां तक कि मौत का कारण बन सकते हैं। एफएए की विस्तृत रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि अगले कुछ वर्षों में डी-ऑर्बिटिंग (कक्षा से हटाने) वाले उपग्रहों से उत्पन्न 28,000 खतरनाक टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकेंगे, जो जमीन पर गिरकर जानलेवा साबित हो सकते हैं। यह अनुमान उपग्रहों के पुनःप्रवेश के दौरान उत्पन्न होने वाले मलबे के विश्लेषण पर आधारित था, जहां उपग्रह पूरी तरह जलने के बावजूद कुछ मजबूत भाग बचे रह सकते हैं।

मस्क और स्पेसएक्स ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए एफएए और अमेरिकी कांग्रेस को पत्र लिखा, जिसमें विश्लेषण को ‘अभाग्यपूर्ण, असमर्थित और गलत’ करार दिया गया। कंपनी के तत्कालीन मुख्य इंजीनियर डेविड गोल्डस्टीन ने रिपोर्ट को ‘गहराई से दोषपूर्ण’ बताया, तर्क देते हुए कि यह वास्तविक डेटा पर आधारित नहीं है। स्पेसएक्स ने जोर देकर कहा कि उनके उपग्रहों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि वे जीवन चक्र के अंत में वायुमंडलीय पुनःप्रवेश के दौरान पूरी तरह विघटित (डिमाइज) हो जाएं। पत्र में लिखा गया, “स्पष्ट रूप से कहें तो, स्पेसएक्स के उपग्रहों को वायुमंडलीय पुनःप्रवेश के दौरान पूर्ण रूप से नष्ट होने के लिए बनाया और डिजाइन किया गया है, और वे ऐसा ही करते हैं।” फिर भी, इस साल फरवरी में स्पेसएक्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्वीकार किया कि सभी उपग्रह पूरी तरह विघटित नहीं होते, विशेष रूप से वे पुराने मॉडल जो मूल रूप से पांच वर्षों के लिए डिजाइन किए गए थे। कंपनी ने कहा कि वे सक्रिय उपग्रहों को बदलने के लिए पुराने उपग्रहों को पहले ही डी-ऑर्बिट कर रही है, भले ही वे अभी भी उपयोगी हों। “यह सक्रिय उपयोगकर्ताओं को सेवा देने वाले उपग्रहों को खोने का खर्च है, लेकिन अंतरिक्ष को सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह सही कदम है। हम सभी उपग्रह मालिकों और संचालकों से अपील करते हैं कि वे अपने उपग्रहों को गैर-चालित होने से पहले सुरक्षित डी-ऑर्बिट करें,” कंपनी के बयान में उल्लेख किया गया। यह कदम अंतरिक्ष स्थिरता को बढ़ावा देने का प्रयास है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है।

उपग्रह पुनःप्रवेश की बढ़ती दर और केसलर सिंड्रोम की आशंका

जैसे-जैसे उपग्रहों का नेटवर्क विस्तार पा रहा है, उनकी आयु सीमा (लगभग पांच से सात वर्ष) के कारण पुनःप्रवेश की दर में भारी वृद्धि होने वाली है। मैकडॉवेल के अनुसार, आने वाले वर्षों में यह दर प्रतिदिन पांच तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान एक-दो से कहीं अधिक है। अर्थस्काई को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया, “जब सभी कक्षाएं पूरी तरह तैनात हो जाएंगी, तो हम लगभग 30,000 लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों की उम्मीद कर सकते हैं, और 1,000 किमी ऊंचाई पर चीनी प्रणालियों के अतिरिक्त 20,000 उपग्रह। लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों के लिए पांच वर्ष का प्रतिस्थापन चक्र होने से यह प्रतिदिन पांच पुनःप्रवेशों के बराबर होगा।” यह गणना स्टारलिंक, वनवेब और अन्य कॉन्स्टेलेशनों के वर्तमान लॉन्च डेटा पर आधारित है, जो अंतरिक्ष में यातायात को अभूतपूर्व स्तर पर ले जा रही है।

इस उच्च संख्या से सबसे बड़ा खतरा केसलर सिंड्रोम का है, जो नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड केसलर द्वारा 1978 में प्रस्तावित एक सैद्धांतिक परिदृश्य है। इसमें कम पृथ्वी कक्षा में वस्तुओं की अधिकता से एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है: एक टकराव से मलबा बढ़ता है, जो अन्य टकरावों को जन्म देता है, और यह डोमिनो प्रभाव कक्षा को अप्रवेश्य बना देता है। रजिस्टर को दिए साक्षात्कार में मैकडॉवेल ने चेतावनी दी, “यदि स्टारलिंक के योजनाबद्ध 30,000 उपग्रहों में से केवल एक प्रतिशत कक्षा में मर जाए या खराब हो जाए, तो भी 300 बड़े उपग्रह होंगे। ये 300 उपग्रह कम पृथ्वी कक्षा को केसलर सिंड्रोम की ओर धकेल सकते हैं, जहां टकरावों की बाढ़ आ जाएगी।” उन्होंने बताया कि सबसे जोखिम वाला क्षेत्र 600 से 1,000 किमी की ऊंचाई है, जो पुराने सोवियत रॉकेट चरणों, अमेरिकी और अन्य देशों के अपशिष्टों से भरा पड़ा है। “यह क्षेत्र पहले से ही मलबे से लबालब है, और जितना अधिक हम नई वस्तुएं जोड़ेंगे, उतना ही टकराव की संभावना बढ़ेगी,” मैकडॉवेल ने कहा।

स्टारलिंक और अमेजन कुइपर जैसे प्रोजेक्ट मुख्य रूप से 500-600 किमी की निचली कक्षा का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन मैकडॉवेल ने चीन के हजारों उपग्रहों पर विशेष चिंता जताई, जो 1,000 किमी से ऊपर तैनात हो रहे हैं। “यदि 1,000 किमी ऊपर कोई समस्या हुई, जैसे कोई अप्रत्याशित टकराव, तो हम शायद पूरी तरह फंस जाएंगे। वायुमंडल की घर्षण शक्ति वहां इतनी कम है कि मलबा सदियों तक कक्षा में घूमता रहेगा। मैंने चीन की ओर से कोई स्पष्ट रिटायरमेंट या डी-ऑर्बिटिंग योजना नहीं देखी, जो स्थिति को और जटिल बनाती है,” उन्होंने जोड़ा। नासा के अनुसार, केसलर सिंड्रोम यदि हुआ, तो यह जीपीएस, मौसम पूर्वानुमान, संचार और अंतरिक्ष अन्वेषण को ठप कर सकता है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अरबों डॉलर का असर पड़ेगा।

वायुमंडल प्रदूषण: धातु वाष्पों से स्ट्रेटोस्फियर को खतरा

स्टारलिंक उपग्रहों के पुनःप्रवेश से उत्पन्न मलबे के अलावा, एक और गंभीर समस्या वायुमंडल में धातुओं का प्रदूषण है। ये उपग्रह पृथ्वी पर वापस आने पर घर्षण से जल जाते हैं, जिससे एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम, टाइटेनियम जैसी धातुओं की वाष्प निकलती हैं। ये वाष्प ठंडे होकर एरोसोल कण बनाती हैं, जो स्ट्रेटोस्फियर में उतर आती हैं। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के केमिकल साइंसेज लेबोरेटरी के वायुमंडलीय रसायनज्ञ डैनियल मर्फी ने साइंस पत्रिका को बताया, “अंतरिक्ष उद्योग की तेज वृद्धि के बावजूद, लगभग कोई भी स्ट्रेटोस्फियर पर इसके पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में नहीं सोच रहा। यह एक अनदेखी जोखिम है जो ओजोन परत और जलवायु को प्रभावित कर सकता है।”

मर्फी और उनके सहयोगियों का एक विस्तृत अध्ययन, जो प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) जर्नल में प्रकाशित हुआ, ने पाया कि पुनःप्रवेश से उत्पन्न एरोसोल कणों में लगभग 10% धातु-आधारित होते हैं, जिनमें एल्यूमीनियम, लिथियम, तांबा और अन्य विषैले तत्व शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार, “अगले कुछ दशकों में लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों की योजना के अनुसार संख्या बढ़ने से स्ट्रेटोस्फियर के सल्फ्यूरिक एसिड कणों का आधा हिस्सा पुनःप्रवेश से आने वाली धातुओं से भर सकता है।” ये कण ओजोन परत के रासायनिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। उदाहरणस्वरूप, एल्यूमीनियम क्लोराइड या हाइड्रॉक्साइड बन सकता है, जो हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया कर क्लोरीन मुक्त करता है। क्लोरीन ओजोन अणुओं (O3) को नष्ट करने में सक्षम है, जैसा कि 1980-90 के दशक में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) प्रदूषण से हुआ था।

इसके अलावा, ये धातु कण ध्रुवीय स्ट्रेटोस्फेरिक बादलों (पीएससी) का निर्माण कर सकते हैं, जो सर्दियों में अंटार्कटिका और आर्कटिक में बनते हैं। ये बादल विनाशकारी क्लोरीन यौगिकों को सक्रिय करते हैं, जो ओजोन छिद्र को और बड़ा बना सकते हैं। अध्ययन अभी सट्टा है, लेकिन शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि अगले कुछ वर्षों में प्रभाव स्पष्ट हो सकते हैं, खासकर जब उपग्रह लॉन्च 10 गुना बढ़ जाएंगे। साइंस रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में स्टारलिंक के पुनःप्रवेश से प्रति वर्ष टन भर धातु वाष्प उत्सर्जित हो रही हैं, जो प्राकृतिक उल्कापिंडों से कहीं अधिक है।

अन्य कंपनियों की महत्वाकांक्षाएं और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता

यह समस्या केवल स्पेसएक्स तक सीमित नहीं है। जेफ बेजोस की अमेजन ने इस साल अप्रैल में 27 उपग्रह लॉन्च कर प्रोजेक्ट काइपर शुरू किया, जिसका लक्ष्य 3,236 उपग्रहों का ब्रॉडबैंड नेटवर्क बनाना है। यह स्टारलिंक का सीधा प्रतियोगी है और वैश्विक इंटरनेट पहुंच को लक्षित करता है। इसी तरह, वनवेब, चाइना सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप और अन्य खिलाड़ी हजारों उपग्रह तैनात करने की योजना बना रहे हैं।

विशेषज्ञ समाधान की मांग कर रहे हैं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के सामग्री इंजीनियर एडम मिशेल ने साइंस को बताया, “अंतरिक्ष में सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाना जरूरी है: उपग्रहों को ईंधन भरना, मरम्मत करना, रिसाइक्लिंग, अंतरिक्ष में ही निर्माण और पुनःप्रक्षेपण। इससे मलबा कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।” एएसडी यूरोस्पेस के प्रबंध निदेशक पियरे लियोनेट ने सवाल उठाया, “क्या स्पेसएक्स जैसी कंपनियां 30 वर्ष बाद कोई बड़ी पर्यावरणीय समस्या पैदा कर रही हैं? हमें अभी से नियमन और तकनीकी नवाचार पर ध्यान देना चाहिए।”

मैकडॉवेल ने रजिस्टर को बताया कि स्थिति अभी अस्पष्ट है, लेकिन चिंताजनक। “जवाबों की रेंज ‘यह समस्या से बहुत छोटा है’ से लेकर ‘हम पहले ही फंस चुके हैं’ तक फैली हुई है। अनिश्चितता इतनी बड़ी है कि ऊपरी वायुमंडल को नुकसान पहुंचाने की संभावना पहले से मौजूद है। कुछ संकेत मिल रहे हैं कि चीजें खराब हो रही हैं, लेकिन यह अभी धुंधला है, और यही मुझे सबसे ज्यादा डराता है।” एफएए, एनओएए, पीएनएएस और नासा जैसे विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित ये तथ्य दर्शाते हैं कि अंतरिक्ष उद्योग को टिकाऊ बनाना वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए, अन्यथा पृथ्वी का जीवन ही खतरे में पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जैसे संयुक्त राष्ट्र के स्पेस डेब्रिस मिटिगेशन गाइडलाइंस को मजबूत करना, इस संकट से निपटने का रास्ता हो सकता है।

जानकारी एमएसएन और डेली मेल से एकत्र की जाती है