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भारत में फोन सुरक्षा योजनाओं और विस्तारित वारंटी के लिए एक गाइड

आज के समय में जब स्मार्टफोन्स हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं तो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता होना भी बहुत लाजमी है। हम सभी उस डर को अच्छे से जानते हैं जब हाथ से फिसलकर हमारा नया फोन सीधे कठोर जमीन पर जा गिरता है और उसकी स्क्रीन चकनाचूर हो जाती है। आज के प्रीमियम उपकरण इतने ज्यादा महंगे हो गए हैं कि सिर्फ उनकी स्क्रीन या मदरबोर्ड को बदलवाने का खर्च सुनकर ही कई बार ऐसा लगता है कि इससे अच्छा तो एक नया फोन ही खरीद लिया जाए। यहीं से फोन प्रोटेक्शन प्लान इन इंडिया की असली कहानी शुरू होती है जिसके बारे में हर मोबाइल दुकान वाला आपको जरूर बताता है।

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आज बाजार में हर ई कॉमर्स साइट फोन बेचते समय एक अतिरिक्त सुरक्षा योजना जोड़ने की पूरी कोशिश करती है और सेल्समैन आपको डराते हैं कि स्क्रीन टूट गई तो हजारों रुपयों का भारी नुकसान होगा। लेकिन एक आम उपभोक्ता के तौर पर यह समझना बहुत मुश्किल हो जाता है कि क्या सच में आपको इस बीमा योजना की जरूरत है या यह सिर्फ कंपनियों के लिए आपके पैसे ऐंठने का एक और नया तरीका है। मैंने पिछले कुछ सालों में कई फोन्स तोड़े हैं सर्विस सेंटर्स के कई चक्कर काटे हैं और बीमा कंपनियों से क्लेम पास करवाने के लिए लंबी बहस भी की है जिसके आधार पर मैं आपको इस विषय की हर एक बारीक जानकारी देने जा रहा हूं।

फोन प्रोटेक्शन और एक्सटेंडेड वारंटी के बीच का असली अंतर

स्टैंडर्ड मैन्युफैक्चरर वारंटी क्या कवर करती है

जब आप किसी भी दुकान या ऑनलाइन वेबसाइट से एक नया मोबाइल फोन खरीदते हैं तो डब्बे के भीतर आपको एक साल की मुफ्त स्टैंडर्ड वारंटी दी जाती है। यह सुविधा पूरी तरह से मोबाइल बनाने वाली कंपनी की तरफ से होती है और इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहक को निर्माण संबंधी खामियों से बचाना होता है। अगर आपके फोन का कैमरा अचानक से काम करना बंद कर दे या फिर चार्जिंग पोर्ट में कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो सर्विस सेंटर वाले उसे बिना किसी पैसे के ठीक कर देते हैं। इसमें मदरबोर्ड की खराबी स्पीकर फटना या डिस्प्ले का अपने आप सफेद हो जाना जैसी चीजें शामिल होती हैं जो कंपनी की गलती से हुई हैं।

लेकिन इसमें सबसे बड़ी शर्त यह होती है कि फोन पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव खरोंच या पानी का निशान बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अगर आपका फोन गलती से भी हाथ से छूटकर जमीन पर गिर जाता है और उसकी स्क्रीन टूट जाती है तो यह एक साल की वारंटी पूरी तरह से निरस्त मानी जाती है। इसके अलावा बारिश का पानी या पसीना जाने पर भी कंपनी मुफ्त मरम्मत करने से साफ इंकार कर देती है जिसके बाद मरम्मत का सारा खर्च आपको अपनी जेब से ही भरना पड़ता है।

एक्सटेंडेड वारंटी के फायदे

एक्सटेंडेड वारंटी असल में आपकी उसी पुरानी एक साल की वारंटी का एक विस्तार होती है जिसे आप कंपनी को कुछ अतिरिक्त पैसे देकर खरीद सकते हैं। यह विकल्प उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होता है जो एक ही फोन को तीन से चार सालों तक चलाने का विचार रखते हैं। फोन जैसे जैसे पुराना होता जाता है उसके अंदर के छोटे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और महंगे मदरबोर्ड के खराब होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में अगर दूसरे या तीसरे साल में फोन का कोई महंगा अंदरूनी पार्ट खराब हो जाए तो आपको भारी खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

इसी बड़े खर्चे से बचने के लिए एक्सटेंडेड वारंटी काम आती है क्योंकि इसमें भी कंपनी पहले साल की तरह ही मुफ्त मरम्मत की सुविधा लगातार देती रहती है। इसे आप फोन खरीदने के बाद भी तब तक ले सकते हैं जब तक आपकी पहली वारंटी खत्म नहीं हो जाती है। यह मन की शांति के लिए एक बेहतरीन निवेश है लेकिन आपको यह हमेशा याद रखना होगा कि इसमें भी फोन गिरने या पानी जाने से होने वाले किसी भी बाहरी नुकसान की कोई भरपाई नहीं की जाती है।

प्रोटेक्शन प्लान क्यों जरूरी है

आज के समय में जब प्रीमियम स्मार्टफोन्स की कीमत आसमान छू रही है तब एक फोन प्रोटेक्शन प्लान इन इंडिया लेना सबसे ज्यादा समझदारी का काम माना जाता है। इसे आप अपने मोबाइल फोन का असली और संपूर्ण बीमा कह सकते हैं जो आपको वास्तविक जीवन की अप्रत्याशित दुर्घटनाओं से पूरी तरह बचाता है। हम चाहे कितनी भी सावधानी बरत लें लेकिन कभी न कभी फोन हाथ से फिसल ही जाता है और आज के पतले बेजल वाले फोन्स की नाजुक स्क्रीन एक झटके में चकनाचूर हो जाती है। ऐसे मुश्किल समय में यह योजना आपके लिए एक तारणहार बनकर सामने आती है क्योंकि यह हर तरह के एक्सीडेंटल डैमेज का पूरा खर्च उठाती है।

इसके साथ ही अगर बारिश के मौसम में फोन भीग जाए या उस पर गलती से गर्म चाय गिर जाए तो लिक्विड डैमेज कवर के तहत सर्विस सेंटर उसे मुफ्त में ठीक करता है। कुछ बहुत प्रीमियम बीमा कंपनियां तो महानगरों में फोन चोरी होने की स्थिति में भी क्लेम पास करती हैं जो कि यात्रा करने वालों के लिए एक बहुत बड़ा फायदा है। इस प्रकार यह बेहतरीन योजना आपको भारी भरकम रिपेयरिंग बिल से बचाकर आपके मासिक बजट को बिगड़ने से पूरी तरह रोकती है।

फीचर का नाम स्टैंडर्ड वारंटी में क्या है एक्सटेंडेड वारंटी में क्या है फोन प्रोटेक्शन प्लान में क्या है
कवर होने वाली अवधि फोन के साथ पहला एक साल पहले साल के बाद एक या दो साल फोन खरीदने के दिन से शुरू
भीतरी या मैन्युफैक्चरिंग खराबी पूरी तरह से मुफ्त कवर होती है पूरी तरह से मुफ्त कवर होती है आमतौर पर इसमें कवर नहीं होती
अचानक गिरने से स्क्रीन टूटना बिल्कुल भी कवर नहीं होता है बिल्कुल भी कवर नहीं होता है इसके तहत पूरी तरह कवर होता है
पानी या तरल पदार्थ से नुकसान बिल्कुल भी कवर नहीं होता है बिल्कुल भी कवर नहीं होता है लिक्विड डैमेज के तहत कवर होता है
अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता नहीं यह डब्बे में मुफ्त मिलती है हां इसके लिए अलग पैसे देने होते हैं हां इसका प्रीमियम अलग से देना होता है

भारत में उपलब्ध टॉप फोन प्रोटेक्शन और वारंटी प्रोवाइडर्स

ब्रांड स्पेसिफिक प्लान्स

जब बात सबसे बेहतरीन और बिना किसी मानसिक तनाव वाली सर्विस की आती है तो सीधे कंपनी का अपना प्लान लेना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा फैसला माना जाता है। एप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए खास योजनाएं चलाती हैं जो आज बाजार में सबसे ज्यादा भरोसेमंद और तेज मानी जाती हैं। अगर आप एप्पलकेयर जैसी प्रीमियम सर्विस लेते हैं तो फोन टूटने पर आपको किसी थर्ड पार्टी कस्टमर केयर से घंटों तक बहस नहीं करनी पड़ती है। आपको बस अपने टूटे हुए फोन को लेकर सीधे कंपनी के आधिकारिक सर्विस सेंटर पर जाना होता है और वहां बैठे विशेषज्ञ एक बहुत ही छोटी सी सर्विस फीस लेकर आपका फोन ठीक कर देते हैं या फिर आपको एकदम नया फोन दे देते हैं।

इन योजनाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपके फोन में लगाए जाने वाले सभी स्पेयर पार्ट्स सौ प्रतिशत असली होते हैं और मरम्मत का काम कंपनी के प्रमाणित इंजीनियरों द्वारा ही किया जाता है। हालांकि ये योजनाएं बाजार में मिलने वाले अन्य बाहरी विकल्पों की तुलना में थोड़ी ज्यादा महंगी जरूर होती हैं लेकिन जो मानसिक शांति और त्वरित सर्विस ये देती हैं वह इस भारी कीमत को पूरी तरह से जायज ठहराती है।

थर्ड पार्टी प्रोवाइडर्स

थर्ड पार्टी प्रोवाइडर्स

अगर आप ब्रांड के महंगे इंश्योरेंस प्लान पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते हैं तो आज भारतीय बाजार में कई ऐसी बाहरी कंपनियां भी मौजूद हैं जो सस्ते दाम में शानदार कवरेज दे रही हैं। सर्विफाई और ऑनसाइटगो जैसी कंपनियों ने हाल के कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में अपनी एक बहुत ही मजबूत और भरोसेमंद पकड़ बना ली है। इनकी सबसे अच्छी बात यह है कि इनका पूरा क्लेम प्रोसेस घर बैठे इनके मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से हो जाता है और आपको किसी भी सर्विस सेंटर के धक्के नहीं खाने पड़ते हैं।

यह सभी कंपनियां डोरस्टेप सर्विस की सुविधा देती हैं जिसका सीधा सा मतलब है कि उनका कर्मचारी आपके घर आकर आपका टूटा हुआ फोन ले जाएगा और उसे ठीक करवाकर वापस आपके घर सुरक्षित पहुंचा देगा। इनमें से कुछ बड़ी कंपनियां नो क्वेश्चन्स आस्क्ड पॉलिसी पर भी काम करती हैं यानी वे आपसे यह बिल्कुल नहीं पूछती हैं कि फोन कैसे और क्यों टूटा बस वे उसे जल्दी ठीक करने पर ध्यान देती हैं। इनका सालाना प्रीमियम भी काफी बजट के अनुकूल होता है जो इन्हें आम भारतीय आदमी के लिए एक बहुत ही आकर्षक और सुलभ विकल्प बनाता है।

ई कॉमर्स बंडल प्लान्स

आजकल ज्यादातर लोग अपने नए स्मार्टफोन ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स जैसे फ्लिपकार्ट और अमेजन से ही खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। जब आप इन वेबसाइट्स पर अपना मनपसंद फोन चुनकर पेमेंट करने वाले पेज पर पहुंचते हैं तो वहां आपको फोन के साथ एक सुरक्षा योजना जोड़ने का आकर्षक विकल्प दिखाया जाता है। इन ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने विभिन्न सामान्य बीमा कंपनियों के साथ एक बड़ा समझौता किया होता है जिसके तहत वे भारी डिस्काउंट पर यह बंडल सर्विस सीधे ग्राहकों को बेचते हैं।

चूंकि आप नया फोन खरीदते समय ही इसे साथ में ले रहे होते हैं इसलिए यह बाहरी बाजार मूल्य से काफी ज्यादा सस्ता पड़ता है और इसे एक्टिवेट करना भी सिर्फ एक क्लिक का काम होता है। लेकिन इन सस्ती योजनाओं को खरीदते समय आपको थोड़ी ज्यादा सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत होती है क्योंकि सस्ती होने के कारण इनमें कई तरह की छिपी हुई शर्तें होती हैं। कई बार इनमें पूरा सौ प्रतिशत कवरेज नहीं मिलता है या फिर क्लेम पास करवाने के लिए आपको बहुत सारे दस्तावेजी काम पूरे करने पड़ते हैं इसलिए पेमेंट बटन दबाने से पहले इनकी नीतियों को बहुत ध्यान से पढ़ना हमेशा फायदेमंद रहता है।

सर्विस देने वाले का प्रकार सर्विस की सबसे बड़ी खासियत रिपेयर करने की मुख्य जगह कीमत का अनुमान
ब्रांड का अपना ऑफिशियल प्लान बिना किसी झंझट के तुरंत तेज सेवा ब्रांड का अधिकृत सर्विस सेंटर बाजार में सबसे ज्यादा महंगी होती है
जानी मानी थर्ड पार्टी कंपनियां घर से फोन पिकअप और डिजिटल क्लेम अधिकृत या मान्यता प्राप्त सेंटर मध्यम और आम बजट के अनुकूल
ऑनलाइन ई कॉमर्स बंडल योजना फोन के साथ एक क्लिक में त्वरित खरीदारी टाई अप वाले विशेष मरम्मत केंद्र बाजार में सबसे ज्यादा सस्ती

एक अच्छा प्रोटेक्शन प्लान चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें

कवरेज के प्रकार

बाजार में मिलने वाला हर इंश्योरेंस प्लान एक जैसा बिल्कुल नहीं होता इसलिए अपने पैसे निवेश करने से पहले यह जांचना बेहद जरूरी है कि आपको वास्तव में क्या सुविधा मिल रही है। आपको सबसे पहले पॉलिसी के लंबे कागजात में यह देखना चाहिए कि क्या वह योजना केवल सामने की स्क्रीन टूटने का खर्च उठा रही है या फिर उसमें फोन के अंदर और बाहर होने वाले हर तरह के शारीरिक नुकसान को शामिल किया गया है। कुछ बहुत सस्ते प्लान सिर्फ सामने वाले शीशे का कवरेज देते हैं और अगर पीछे का पैनल या कैमरा लेंस टूट जाए तो उसका भारी पैसा आपको खुद अपनी जेब से भरना पड़ता है।

इसके साथ ही आपको पानी से होने वाले नुकसान का कवरेज भी जाचना चाहिए क्योंकि भारत में बारिश के मौसम में फोन खराब होना एक बहुत ही आम बात है। अगर आप अक्सर ट्रेन या बस में सफर करते हैं और आपको हमेशा फोन चोरी होने का डर रहता है तो आपको एक ऐसी विशेष योजना खोजनी चाहिए जिसमें थेफ्ट प्रोटेक्शन पूरी तरह शामिल हो। हालांकि भारत में चोरी के क्लेम पास करवाना काफी मुश्किल और लंबा काम होता है और इसके लिए पुलिस की पक्की एफआईआर रिपोर्ट अनिवार्य होती है।

डेप्रिसिएशन क्लॉज

मोबाइल इंश्योरेंस की जटिल दुनिया में यह सबसे ज्यादा पेचीदा नियम है जिसे ज्यादातर लोग योजना खरीदते समय नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में उन्हें बहुत पछताना पड़ता है। जब आप कोई नया चमचमाता फोन खरीदते हैं तो हर गुजरते महीने के साथ उसकी बाजार कीमत लगातार कम होती जाती है जिसे तकनीकी भाषा में अवमूल्यन कहा जाता है। बीमा कंपनियां हमेशा इसी नियम का फायदा उठाती हैं और अगर आपका फोन पूरी तरह से टूटकर नष्ट हो जाए तो वे आपको फोन की पूरी मूल कीमत वापस बिल्कुल नहीं करती हैं। वे आपके फोन की उम्र के हिसाब से एक तय प्रतिशत पैसा काट लेती हैं और बची हुई थोड़ी रकम आपके बैंक खाते में भेजती हैं।

उदाहरण के तौर पर अगर आपका फोन छह महीने पुराना है तो कंपनी बीस से तीस प्रतिशत तक आपका पैसा काट सकती है। इसलिए कोई भी योजना खरीदते समय आपको हमेशा उस टेबल को बहुत ध्यान से देखना चाहिए जिसमें अवमूल्यन की दरें साफ साफ लिखी होती हैं। हमेशा ऐसा प्लान चुनने की कोशिश करें जिसमें समय के साथ पैसे की कटौती कम से कम हो ताकि भारी नुकसान की स्थिति में आपको सही रिफंड मिल सके।

डिडक्टिबल्स और हिडन कॉस्ट्स

कई बार जब कोई चतुर एजेंट आपको बीमा बेच रहा होता है तो वह बड़े बड़े दावे करता है कि फोन टूटने पर आपका एक भी रुपया खर्च नहीं होगा लेकिन असलियत इससे काफी अलग होती है। जब आपका फोन टूटता है और आप क्लेम फाइल करते हैं तो ज्यादातर कंपनियां आपसे फाइलिंग फीस या प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर कुछ पैसे तुरंत मांगती हैं। यह रकम पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक कुछ भी हो सकती है और इसे दिए बिना आपका क्लेम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता है। इसी छुपे हुए खर्चे को अंग्रेजी में डिडक्टिबल कहा जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को छोटे मोटे नुकसान के लिए बार बार क्लेम करने से सख्ती से रोकना होता है।

इसके अलावा कुछ कंपनियां कैशलेस सर्विस नहीं देती हैं जिसका सीधा मतलब है कि आपको पहले अपनी जेब से मरम्मत का पूरा पैसा सर्विस सेंटर को देना होता है और बाद में बिल पास होने पर कंपनी वह पैसा आपको वापस लौटाती है। आपको हमेशा ऐसी शर्तों से बचना चाहिए और केवल उन योजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए जो पूरी तरह से कैशलेस हों और जिनमें छुपे हुए खर्चे शून्य हों।

आपको क्या जांचना चाहिए एजेंट आपको क्या समझाता है असलियत में आपको क्या देखना है
स्पेयर पार्ट्स की गुणवत्ता हम एकदम बढ़िया ओरिजिनल पार्ट्स लगाएंगे कागजों में असली पार्ट्स की लिखित गारंटी मांगें
पैसे मिलने का पूरा तरीका आप बिल दे देना हम सारा पैसा लौटा देंगे हमेशा कैशलेस रिपेयर वाली सेवा को प्राथमिकता दें
छुपी हुई कोई भी फाइलिंग फीस यह योजना सब कुछ मुफ्त में कवर कर लेगी प्रोसेसिंग शुल्क और अनिवार्य कटौती की जांच करें
फोन का अवमूल्यन नियम पूरा फोन खराब हुआ तो नया फोन मिल जाएगा उम्र के हिसाब से कटने वाले पैसों का प्रतिशत देखें

क्या आपको सच में प्रोटेक्शन प्लान की जरूरत है

महंगे फ्लैगशिप फोन्स के लिए

अगर आपने अपनी जमापूंजी खर्च करके एक लाख रुपये से ऊपर का कोई प्रीमियम फोन या फोल्डेबल उपकरण खरीदा है तो आपको बिना कुछ सोचे एक सुरक्षा योजना तुरंत ले लेनी चाहिए। ऐसे महंगे स्मार्टफोन्स की तकनीक बहुत उन्नत होती है और इनके स्पेयर पार्ट्स बाजार में आसानी से बिल्कुल नहीं मिलते हैं। अगर ऐसे महंगे फोन की सिर्फ डिस्प्ले टूट जाए तो उसे आधिकारिक सेंटर से बदलवाने का खर्च तीस से चालीस हजार रुपये तक आसानी से पहुंच सकता है जो कि किसी आम आदमी की महीने भर की सैलरी के बराबर होता है।

ऐसे में फोन खरीदते समय शुरुआत में ही पांच या दस हजार रुपये देकर बीमा करवाना कोई घाटे का सौदा नहीं है बल्कि यह आपको भविष्य के एक बहुत बड़े आर्थिक झटके से पूरी तरह बचाता है। इन प्रीमियम फोन्स के मदरबोर्ड या कैमरा सेंसर खराब होने पर भी मरम्मत का बिल बहुत लंबा बनता है जिसे चुकाना आसान नहीं होता। इसलिए अगर आपके हाथ में एक बहुत महंगा उपकरण है तो उसकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत फोन प्रोटेक्शन प्लान इन इंडिया होना ही चाहिए ताकि आप बिना किसी डर के उसका बेझिझक इस्तेमाल कर सकें।

बजट और मिड रेंज फोन्स के लिए

दूसरी तरफ अगर आपके फोन की कीमत सिर्फ दस हजार से पच्चीस हजार रुपये के बीच है तो आपके लिए महंगे बीमा पर पैसा खर्च करना शायद कोई समझदारी का काम नहीं होगा। इन मिड रेंज फोन्स के स्पेयर पार्ट्स बाजार में बहुत बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं और इनकी कीमत भी कंपनियों द्वारा काफी कम रखी जाती है। अगर आपके इस सस्ते फोन की स्क्रीन गलती से टूट जाती है तो आप किसी भी स्थानीय बाजार में जाकर उसे मात्र दो या तीन हजार रुपये में आसानी से नई बदलवा सकते हैं।

ऐसे में उस सस्ते फोन के लिए दो हजार रुपये का बीमा खरीदना और फिर क्लेम के समय अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस देना किसी भी दृष्टिकोण से सही या फायदेमंद नहीं लगता है। बीमा पर खर्च किए जाने वाले इस पैसे से आप अपने फोन के लिए एक बहुत अच्छी गुणवत्ता का मजबूत बैक कवर और एक मोटा शानदार टेम्पर्ड ग्लास खरीद सकते हैं। यह ग्लास आपके फोन की स्क्रीन को गिरने के शुरुआती झटके से पूरी तरह बचा लेगा और आपको किसी भी कस्टमर केयर के चक्कर लगाने की कोई जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

आपका लाइफस्टाइल और फोन इस्तेमाल करने का तरीका

आपके फोन की संपूर्ण सुरक्षा की जरूरत काफी हद तक आपके रहने के तरीके और आपकी नौकरी की प्रकृति पर भी निर्भर करती है। अगर आप एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं जिन्हें दिन भर तेज धूप और बारिश में फील्ड में घूमना पड़ता है तो आपके फोन के गिरने और खराब होने की संभावना किसी आम इंसान से बहुत ज्यादा होती है। इसी तरह अगर आप रोज भीड़ भरे सार्वजनिक परिवहन में सफर करते हैं या फिर आपके घर में छोटे और शरारती बच्चे हैं जो अक्सर आपका फोन उठाकर फर्श पर फेंक देते हैं तो आपको एक पूर्ण सुरक्षा बीमा जरूर लेना चाहिए।

एक रफ और टफ तरीके से फोन इस्तेमाल करने वाले इंसान के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं होती है जो उनके पैसे बचाती है। लेकिन अगर आपका जीवन बहुत सीधा है आपका फोन सिर्फ आपके ऑफिस की सुरक्षित डेस्क से लेकर आपके घर के आरामदायक सोफे तक का सफर तय करता है और आपने आज तक कभी कोई फोन नहीं तोड़ा है तो आप इस बीमा खर्चे को पूरी तरह से नजरअंदाज कर सकते हैं और अपने अच्छे खासे पैसे बचा सकते हैं।

फोन का मुख्य प्रकार और उसकी कीमत मरम्मत में लगने वाला अनुमानित खर्च क्या आपको इसके लिए बीमा लेना चाहिए
प्रीमियम और महंगे फोल्डेबल फोन पच्चीस हजार से पैंतालीस हजार रुपये तक हां आपको सौ प्रतिशत यह बीमा लेना चाहिए
मध्यम रेंज के साधारण बजट फोन आठ हजार से पंद्रह हजार रुपये तक हां अगर आप फोन को बहुत लापरवाही से चलाते हैं
दस से बीस हजार वाले सस्ते फोन दो हजार से पांच हजार रुपये के बीच नहीं इसके लिए अच्छा कवर और ग्लास लगाना बेहतर है
बहुत ज्यादा पुराने या सेकंड हैंड फोन रिपेयर से अच्छा बाजार से नया फोन लेना है नहीं क्योंकि पुरानी चीजों पर ऐसी योजनाएं नहीं मिलती

क्लेम रिजेक्ट होने के सबसे आम कारण

अनऑथराइज्ड रिपेयर

बीमा खरीदना दुनिया का सबसे आसान काम है लेकिन जब बात कंपनी से क्लेम पास करवाने की आती है तो ग्राहकों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्लेम खारिज होने का सबसे बड़ा और आम कारण यह होता है कि लोग कुछ पैसे बचाने के चक्कर में अपने फोन को किसी गली मोहल्ले की छोटी स्थानीय दुकान पर खुलवा लेते हैं। मान लीजिए आपके फोन का स्पीकर खराब हुआ और आपने उसे बाहर से ठीक करवा लिया लेकिन कुछ दिन बाद उसी फोन की स्क्रीन टूट गई।

अब जब आप इंश्योरेंस कंपनी के पास उस टूटी स्क्रीन को लेकर जाएंगे तो वहां के इंजीनियर फोन खोलते ही समझ जाएंगे कि इसके साथ पहले किसी अनधिकृत मैकेनिक ने छेड़छाड़ की है। जैसे ही यह बात उनके सामने साबित होती है आपका क्लेम और कंपनी की वारंटी उसी सेकंड हमेशा के लिए खत्म कर दी जाती है। बीमा कंपनियां इस कड़े मामले में बहुत सख्त होती हैं इसलिए अगर आपके फोन में कोई भी छोटी या बड़ी खराबी आती है तो उसे हमेशा केवल और केवल आधिकारिक मान्यता प्राप्त सर्विस सेंटर पर ही ले जाना चाहिए।

क्लेम फाइल करने में देरी

बहुत सारे भोले भाले लोग यह सोचते हैं कि उन्होंने फोन का बीमा करवा लिया है तो वे जब चाहें तब आराम से अपनी मर्जी से कंपनी को फोन टूटने की जानकारी दे सकते हैं। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है जिसके कारण हजारों लोगों के क्लेम हर रोज बिना सुने ही रिजेक्ट होते हैं। लगभग हर सुरक्षा योजना के कागजात में यह नियम साफ तौर पर लिखा होता है कि दुर्घटना होने के चौबीस से अड़तालीस घंटे के भीतर आपको कंपनी को सूचित करना पूरी तरह अनिवार्य है।

अगर आप फोन टूटने के एक हफ्ते बाद उन्हें मेल करते हैं या आराम से कॉल करते हैं तो वे बिना आपकी कोई मजबूरी सुने आपका क्लेम सीधा खारिज कर देंगे। कंपनियों का ऐसा मानना है कि देरी से दी गई जानकारी किसी फर्जीवाड़े या धोखाधड़ी का संकेत हो सकती है। इसलिए जैसे ही आपका फोन किसी दुर्घटना का शिकार होता है आपका सबसे पहला काम किसी दूसरे नंबर से उनके कस्टमर केयर को तुरंत फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करवाना होना चाहिए ताकि आपके पास एक पक्का रेफरेंस नंबर सुरक्षित रहे।

लापरवाही से हुआ नुकसान

एक्सीडेंटल डैमेज का सीधा सा मतलब होता है कि कोई घटना अनजाने में और अचानक से हुई है जिस पर आपका कोई नियंत्रण बिल्कुल नहीं था। लेकिन अगर बीमा कंपनी की जांच टीम को अपनी तहकीकात में यह लगता है कि आपने फोन के साथ जानबूझकर कोई लापरवाही की है तो आपको क्लेम का एक पैसा भी नहीं दिया जाएगा। उदाहरण के लिए अगर आप किसी ऊंची इमारत की छत के किनारे खड़े होकर कोई खतरनाक वीडियो बना रहे हैं और फोन नीचे गिरकर नष्ट हो जाता है तो कंपनी इसे दुर्घटना नहीं बल्कि आपकी घोर लापरवाही मानेगी।

इसी तरह फोन को चलती कार के बोनट पर रखकर गाड़ी चलाना भी इसी लापरवाही की श्रेणी में आता है जिसके लिए कंपनियां कोई हर्जाना नहीं देती हैं। जब आप क्लेम फॉर्म भरते हैं तो आपको बहुत सोच समझकर घटना का सही विवरण देना होता है। आपको यह साबित करना होता है कि नुकसान पूरी तरह से दुर्घटनावश हुआ था और आपने अपनी तरफ से फोन को बचाने की पूरी और सच्ची कोशिश की थी।

क्लेम के खारिज होने का मुख्य कारण यह गलती ग्राहकों से आमतौर पर क्यों होती है इस परेशानी से बचने का सबसे सही तरीका क्या है
जानकारी देने में बहुत ज्यादा देरी करना लोग सोचते हैं कि उनके पास क्लेम करने का बहुत समय है फोन खराब होने के अड़तालीस घंटे के भीतर सूचना दें
फोन को किसी स्थानीय दुकान से खुलवाना पैसे और समय बचाने के चक्कर में बाहर से काम करवाना हर छोटे बड़े काम के लिए हमेशा अधिकृत सेंटर का उपयोग करें
जानबूझकर की गई घोर लापरवाही खतरनाक जगहों पर फोन का बिना सावधानी के इस्तेमाल क्लेम फॉर्म में हमेशा दुर्घटना का स्पष्ट और सही विवरण लिखें
बिना किसी टूट फूट के क्लेम मांगना रंग उड़ने या छोटी खरोंच के लिए नई स्क्रीन की मांग करना सिर्फ काम न करने वाले असली नुकसान पर ही क्लेम करें

मेरी राय

एक समझदार खरीदार कैसे बनें

बाजार में मौजूद सभी छोटे बड़े विकल्पों को देखने और परखने के बाद मेरी अंतिम राय यही है कि कोई भी बीमा योजना पूरी तरह से सिर्फ ग्राहकों के फायदे के लिए नहीं बनाई गई है। हर कंपनी का अंतिम लक्ष्य अपना व्यापार बढ़ाना और मुनाफा कमाना होता है और वे हमेशा यही प्रयास करती हैं कि उन्हें क्लेम के रूप में कम से कम पैसा देना पड़े। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि ये सभी योजनाएं बिल्कुल बेकार हैं या किसी काम की नहीं हैं। अगर आपने अपनी मेहनत की कमाई से एक बहुत ही महंगा उपकरण खरीदा है तो फोन प्रोटेक्शन प्लान इन इंडिया आपके लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

मैंने निजी तौर पर कई लोगों को देखा है जिनका लाखों का फोन पूरी तरह से नष्ट होने के बाद सिर्फ इसी योजना की वजह से दोबारा चालू हो सका और उन्हें नया फोन नहीं खरीदना पड़ा। इसलिए अगर आप एक बजट फोन चला रहे हैं तो इस खर्चे से पूरी तरह बचें लेकिन अगर आपका फोन प्रीमियम है तो कंपनी का आधिकारिक प्लान जरूर लें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पेमेंट करने से पहले सभी नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ें ताकि मुश्किल वक्त में आपको कोई अप्रिय सरप्राइज न मिले।

फोन की श्रेणी बीमा लेने का आपका अंतिम फैसला इस महत्वपूर्ण फैसले का मुख्य कारण
महंगे और फ्लैगशिप उपकरण यह आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है मरम्मत का खर्च अत्यधिक होता है और पार्ट्स असली होने चाहिए
सस्ते और साधारण उपकरण आपको यह बिल्कुल नहीं लेना चाहिए बाजार में मरम्मत बहुत सस्ती और आसानी से हो जाती है

अंतिम विचार

सारी बातों को अगर एक जगह समेटा जाए, तो सच्चाई यही है कि इंश्योरेंस कंपनियां समाज सेवा करने नहीं बैठी हैं। उनका मकसद बिजनेस करना और मुनाफा कमाना है। वे पूरी कोशिश करेंगी कि उन्हें कम से कम क्लेम पास करना पड़े। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Phone Protection Plan in India पूरी तरह से एक स्कैम है।

मैंने अपने एक दोस्त को देखा है जिसका एक लाख का नया आईफोन बाइक से गिरकर पूरी तरह खत्म हो गया था। उस वक्त उसका एप्पलकेयर प्लस प्लान ही था जिसने उसे बचा लिया, वरना उसे एक लाख का चूना लग जाता। वहीं एक और दोस्त ने अपने 15 हजार के रेडमी फोन के लिए 2 हजार का प्लान लिया था और जब फोन की स्क्रीन टूटी, तो कंपनी ने डेप्रिसिएशन और फाइलिंग फीस के नाम पर उससे इतने पैसे मांग लिए जितने में मार्केट से नई स्क्रीन लग जाती।

इसलिए मेरा फाइनल वर्डिक्ट यही है कि अगर आप प्रीमियम सेगमेंट में हैं, तो ब्रांड का ऑफिशियल प्लान लेने में जरा भी संकोच न करें। थर्ड पार्टी प्लान्स भले ही थोड़े सस्ते लगें, लेकिन जरूरत पड़ने पर सर्विस सेंटर वालों से माथापच्ची करने में जो मानसिक तनाव होता है, वह उस बचे हुए पैसे से कहीं ज्यादा भारी पड़ता है। अपनी जरूरत को समझें, फोन की कीमत का आकलन करें और सबसे जरूरी बात – पेमेंट करने से पहले नियम और शर्तों वाले पन्ने को ध्यान से जरूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या ईएमआई पर लिए गए फोन पर यह सुरक्षा योजना लागू होती है?

जी बिल्कुल यह योजना पूरी तरह से काम करती है। आपने अपना फोन किस्तों पर खरीदा है या फिर एक साथ पूरा नकद भुगतान किया है इससे बीमा कंपनी को कोई खास फर्क नहीं पड़ता है। कंपनी केवल आपके फोन के ओरिजिनल बिल और उसकी खरीदारी की तारीख से मतलब रखती है। जब तक आपके पास पक्का और सही बिल मौजूद है आप आसानी से क्लेम कर सकते हैं और कंपनी आपको बिना किसी परेशानी के पूरी सर्विस देगी।

2. अगर मैं अपना फोन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दूं तो योजना का क्या होगा?

ज्यादातर बड़ी और मान्यता प्राप्त बीमा कंपनियां आपको अपनी पॉलिसी नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर करने की शानदार सुविधा देती हैं। अगर आप अपना फोन अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को बेच रहे हैं तो आप कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करके इसे ट्रांसफर करवा सकते हैं। इसके लिए आपको फोन के नए मालिक की पहचान से जुड़े कुछ जरूरी कागजात जमा करने होते हैं जिसके बाद पॉलिसी का लाभ नए मालिक को मिलने लगता है।

3. क्या विदेशी यात्रा के दौरान फोन टूटने पर भी मरम्मत का खर्च मिलेगा?

यह पूरी तरह से उस कंपनी के नियमों पर निर्भर करता है जिससे आपने अपना बीमा खरीदा है। एप्पलकेयर जैसी कुछ बहुत प्रीमियम योजनाएं ग्लोबल कवरेज देती हैं जिसके तहत आप दुनिया के किसी भी देश में अपना फोन आसानी से ठीक करवा सकते हैं। लेकिन ज्यादातर भारतीय थर्ड पार्टी कंपनियां सिर्फ भारत की भौगोलिक सीमा के भीतर ही अपनी सेवाएं और क्लेम सेटलमेंट प्रदान करती हैं और विदेश में हुए नुकसान की कोई भरपाई नहीं करती हैं।

4. क्या केवल छोटे स्क्रैच या खरोंच के लिए स्क्रीन बदलवाने का क्लेम किया जा सकता है?

नहीं आप ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। भारत में कोई भी फोन प्रोटेक्शन प्लान इन इंडिया कॉस्मेटिक डैमेज को बिल्कुल भी कवर नहीं करता है। जब तक कि आपके फोन की स्क्रीन टूटकर चटक न जाए या फिर उसका टच काम करना पूरी तरह से बंद न कर दे तब तक आपको नई स्क्रीन नहीं दी जाएगी। सिर्फ रंग उड़ने या हल्की खरोंच के दावों को कंपनियों द्वारा हमेशा बिना सोचे समझे रद्द कर दिया जाता है।

5. क्या फोन के पुराना होने के कुछ महीनों बाद मैं यह प्लान खरीद सकता हूं?

आम तौर पर बीमा कंपनियां आपको ऐसा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं देती हैं। आपको नया फोन खरीदने के पंद्रह से तीस दिनों के भीतर ही डैमेज सुरक्षा योजना अनिवार्य रूप से खरीदनी होती है ताकि टूटे हुए फोन पर कोई गलत क्लेम न कर सके। हालांकि एक्सटेंडेड वारंटी को आप फोन की एक साल की वारंटी खत्म होने से कुछ महीने पहले तक किसी भी समय आसानी से खरीद सकते हैं जो केवल अंदरूनी खराबी के लिए होती है।