18 जैविक और टिकाऊ भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक स्तर पर भारी मांग
आज की तेज़ रफ्तार वाली दुनिया में लोग स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल भोजन की तलाश कर रहे हैं। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जैविक और टिकाऊ खाद्य उत्पादों की भरमार है, जो न केवल पौष्टिक हैं बल्कि वैश्विक बाजार में भी बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। ये उत्पाद रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से दूर रहकर तैयार किए जाते हैं, जिससे मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा होती है। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने से उपभोक्ता प्राकृतिक और सतत विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, और भारत इनकी आपूर्ति में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
भारत का जैविक खाद्य बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में यह 8.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 2033 तक 21.99 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 10.94% की सालाना वृद्धि दर होगी। वैश्विक स्तर पर भारतीय जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, खासकर अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में। 2024-25 में जैविक निर्यात 35% बढ़कर 665.96 मिलियन डॉलर हो गया, जो वैश्विक मांग को दर्शाता है। एपीडा जैसे संगठन नेचुरल प्रोडक्ट्स एक्सपो वेस्ट 2025 जैसे आयोजनों में भारत की जैविक विविधता को प्रदर्शित कर रहे हैं, जहां चावल, मसाले और तिलहन जैसे उत्पादों की सराहना हुई। ये 18 उत्पाद न केवल स्वास्थ्य लाभ देते हैं बल्कि सतत खेती को बढ़ावा देते हैं, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करता है। इस लेख में हम इन उत्पादों के बारे में विस्तार से जानेंगे, उनके फायदों और वैश्विक अपील को समझेंगे। भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 2 बिलियन डॉलर का जैविक निर्यात है, जो किसानों की आय बढ़ाएगा।
प्रमुख आंकड़े तालिका
| उत्पाद श्रेणी | वैश्विक मांग (2024-25) | निर्यात वृद्धि (%) |
| जैविक अनाज | 161.67 मिलियन USD | 86% |
| जैविक मसाले | 45.42 मिलियन USD | 26% |
| जैविक तेल बीज | 36.20 मिलियन USD | 41% |
| जैविक फल-सब्जियां | 9.2 मिलियन USD | 104% |
अनाज: पौष्टिक और टिकाऊ विकल्प
भारतीय अनाज जैविक खेती से तैयार होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं। ये अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और वैश्विक बाजार में बासमती चावल की मांग सबसे अधिक है। सतत खेती से ये उत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते। विश्व खाद्य दिवस 2025 की थीम “भोजन सर्वप्रथम” के तहत भारत जैविक अनाजों को बढ़ावा दे रहा है, जो पोषण और स्थिरता पर जोर देते हैं। वैश्विक स्तर पर शहरीकरण और स्वास्थ्य चेतना से अनाजों की मांग बढ़ी है, और भारत का निर्यात 2024-25 में 161.67 मिलियन डॉलर तक पहुंचा। ये अनाज न केवल डायबिटीज और हृदय रोगों से बचाव करते हैं बल्कि जलवायु परिवर्तन के बीच सतत विकल्प प्रदान करते हैं। किसान उत्पादक संगठन (FPO) जैविक अनाज खेती को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। इस खंड में हम प्रमुख अनाजों पर चर्चा करेंगे।
1. जैविक बासमती चावल
बासमती चावल भारत का गौरव है। यह लंबा दाना वाला चावल अपनी सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है। जैविक बासमती रासायनिक मुक्त होता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। वैश्विक स्तर पर इसकी मांग यूरोप और अमेरिका में बढ़ रही है। 2025 में वर्ल्ड फूड इंडिया जैसे आयोजनों में बासमती को वैश्विक खाद्य केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया गया। यह चावल ग्लूटेन-फ्री है और कम कैलोरी वाला, जो वजन प्रबंधन में मदद करता है। भारत में सिक्किम जैसी जगहें पूरी तरह जैविक चावल उगाती हैं। निर्यात आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में जैविक अनाज निर्यात 161.67 मिलियन डॉलर तक पहुंचा।
लाभ:
- हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा।
- कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, डायबिटीज रोगियों के लिए उपयुक्त।
बासमती चावल तालिका
| प्रकार | पोषक तत्व प्रति 100g | वैश्विक बाजार |
| सफेद बासमती | 350 कैलोरी, 7g प्रोटीन | यूरोप (40%) |
| ब्राउन बासमती | 370 कैलोरी, 8g फाइबर | अमेरिका (30%) |
2. जैविक क्विनोआ
क्विनोआ भारत में हिमालय क्षेत्र में उगाया जाता है। यह पूर्ण प्रोटीन स्रोत है, जिसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं। सतत खेती से पानी की बचत होती है। वैश्विक मांग स्वास्थ्य जागरूक उपभोक्ताओं में बढ़ रही है। 2025 में जैविक अनाज निर्यात में क्विनोआ की भूमिका बढ़ी, खासकर एशिया और अफ्रीका में। यह अनाज लोह तत्व और मैग्नीशियम से भरपूर है, जो ऊर्जा बढ़ाता है। भारत के किसान अब इसे जैविक तरीके से उगा रहे हैं, जो मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा देता है। वैश्विक बाजार में क्विनोआ को सुपरफूड माना जाता है, और भारत का उत्पादन 2025 में 20% बढ़ा।
लाभ:
- वजन नियंत्रण में मदद।
- एंटीऑक्सीडेंट गुण।
3. जैविक बाजरा (मिलेट)
बाजरा एक प्राचीन अनाज है, जो सूखा प्रतिरोधी है। जैविक बाजरा मिट्टी को पोषण देता है। वैश्विक स्तर पर यह सुपरफूड के रूप में लोकप्रिय है। 2025 में ग्रीन मिलेट निर्यात बढ़ा, जो पर्यावरण अनुकूल खेती को दर्शाता है। इसमें आयरन और फाइबर अधिक होता है, जो एनीमिया रोकता है। भारत सरकार ने मिलेट वर्ष घोषित कर वैश्विक मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखा। 2025 में भारतीय मिलेट निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।
लाभ:
- पाचन सुधार।
- डायबिटीज प्रबंधन।
मिलेट प्रकार तालिका
| मिलेट प्रकार | स्वास्थ्य लाभ | उत्पादन क्षेत्र |
| बाजरा | हड्डियां मजबूत | राजस्थान |
| रागी | कैल्शियम युक्त | कर्नाटक |
| ज्वार | ग्लूटेन फ्री | महाराष्ट्र |
मसाले: स्वाद और स्वास्थ्य का संगम
भारतीय मसाले दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। जैविक मसाले रासायनिक रहित होते हैं, जो स्वास्थ्य लाभ देते हैं। ये सतत खेती से उगाए जाते हैं। वैश्विक मांग में मसालों का निर्यात 2024-25 में 45.42 मिलियन डॉलर पहुंचा, जो अमेरिका और यूरोप में लोकप्रियता दर्शाता है। एपीडा ने 2025 एक्सपो में हल्दी और जीरा जैसे मसालों को प्रमोट किया। ये मसाले एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। सतत खेती से जैव विविधता बनी रहती है, और किसान आय बढ़ती है। नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में खाद्य सुरक्षा और स्थिरता पर जोर दिया गया। भारत का मसाला निर्यात 4.72 अरब डॉलर पहुंचा, 200 से अधिक देशों में। इस खंड में प्रमुख मसालों की चर्चा।
4. जैविक हल्दी
हल्दी को ‘सुनहरा मसाला’ कहा जाता है। इसमें करक्यूमिन होता है, जो सूजन कम करता है। वैश्विक मांग स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स में बढ़ रही है। 2025 में हल्दी निर्यात 26% बढ़ा। भारत तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में जैविक हल्दी उगाता है। बायोफैच 2025 में हल्दी को प्रमुख उत्पाद के रूप में प्रदर्शित किया गया, जो वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देता है। कोविड के बाद इम्यूनिटी बढ़ाने के गुणों से मांग 97% बढ़ी। यह मसाला एंटी-इंफ्लेमेटरी है और आयुर्वेद में उपयोगी। किसान प्राकृतिक खेती से इसे उगाते हैं, जो मिट्टी को स्वस्थ रखता है।
लाभ:
- इम्यूनिटी बूस्ट।
- कैंसर रोकथाम।
5. जैविक जीरा
जीरा पाचन के लिए उत्तम है। जैविक जीरा गुजरात में उगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्य पूर्व में लोकप्रिय। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में जीरे की आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा हुई। 2024-25 में मसाला निर्यात में जीरा का योगदान 88% वृद्धि में महत्वपूर्ण। यह थायमोल युक्त है, जो पाचन एंजाइम्स बढ़ाता है। सतत खेती से गुजरात के किसान आय दोगुनी हो रही। वैश्विक बाजार में जीरा चाय और मसालों में इस्तेमाल होता है।
लाभ:
- वजन घटाना।
- कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण।
6. जैविक काली मिर्च
काली मिर्च ‘काली सोना’ है। केरल में जैविक तरीके से उगाई जाती है। वैश्विक निर्यात बढ़ रहा है। यह एंटीमाइक्रोबियल गुण रखती है। बायोफैच 2025 में काली मिर्च को जैविक उत्पाद के रूप में हाइलाइट किया गया। भारत का मसाला निर्यात 17.9 लाख टन पहुंचा, जिसमें काली मिर्च प्रमुख। पाइपराइन से पोषक तत्व अवशोषण बढ़ता है। प्राकृतिक खेती समिट 2025 में केरल की खेती को सराहा गया। यह मसाला 200 देशों में निर्यात होता है।
लाभ:
- सर्दी-जुकाम में राहत।
- पाचन सहायता।
मसाले तालिका
| मसाला | सक्रिय यौगिक | प्रमुख निर्यात देश |
| हल्दी | करक्यूमिन | अमेरिका |
| जीरा | थायमोल | यूरोप |
| काली मिर्च | पाइपराइन | मध्य पूर्व |
तिलहन और तेल: शुद्ध और पौष्टिक
जैविक तिलहन से निकला तेल स्वास्थ्यवर्धक होता है। ये सतत खेती को बढ़ावा देते हैं। 2024-25 में तिलहन निर्यात 36.20 मिलियन डॉलर हुआ, जो वैश्विक स्वास्थ्य ट्रेंड को दर्शाता है। ये तेल ओमेगा फैटी एसिड प्रदान करते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। भारत की सतत खेती नीतियां किसानों को जैविक प्रमाणन प्रदान करती हैं। वैश्विक बाजार में ये तेल ब्यूटी और कुकिंग में लोकप्रिय। बायोफैच 2025 में खाद्य तेलों को प्रदर्शित किया गया। ये तेल रसायन-मुक्त होते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण करते हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादन 60% बढ़ा। इस खंड में प्रमुख तिलहन।
7. जैविक सरसों का तेल
सरसों का तेल उत्तर भारत में लोकप्रिय है। जैविक संस्करण ओमेगा-3 से भरपूर है। वैश्विक मांग एशिया में। यह हृदय के लिए अच्छा है। नेचुरल प्रोडक्ट्स एक्सपो वेस्ट 2025 में सरसों तेल को हेल्थ प्रोडक्ट के रूप में सराहा गया। 2024-25 में तिलहन निर्यात में 41% वृद्धि। यह तेल जोड़ों के दर्द में राहत देता है। राजस्थान और पंजाब के किसान सतत खेती अपनाते हैं। वैश्विक बाजार में कुकिंग ऑयल के रूप में डिमांड।
लाभ:
- जोड़ों का दर्द कम।
- त्वचा स्वास्थ्य।
8. जैविक नारियल तेल
नारियल तेल दक्षिण भारत से आता है। यह लॉरिक एसिड से युक्त है। वैश्विक बाजार में ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल। बायोफैच 2025 में नारियल तेल को सस्टेनेबल प्रोडक्ट कहा गया। तमिलनाडु और केरल में जैविक खेती बढ़ी। यह तेल वजन नियंत्रण में मदद करता है। निर्यात 2025 में 20% बढ़ा। सतत खेती से पानी की बचत। वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री में लोकप्रिय।
लाभ:
- वजन नियंत्रण।
- बाल मजबूत।
9. जैविक तिल का तेल
तिल का तेल गुजरात से। एंटीऑक्सीडेंट गुण। नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में तिल को मसाला श्रेणी में शामिल किया। यह तेल ओलेइक एसिड से युक्त है। गुजरात के किसान जैविक प्रमाणन प्राप्त कर रहे। वैश्विक मांग मालिश और कुकिंग में। 2024-25 निर्यात वृद्धि 41%। सतत खेती से मिट्टी उर्वरता बनी रहती।
लाभ:
- इम्यूनिटी बढ़ाए।
- पाचन सुधारे।
तेल तालिका
| तेल प्रकार | फैटी एसिड | उपयोग क्षेत्र |
| सरसों | ओमेगा-3 | खाना पकाने |
| नारियल | लॉरिक एसिड | ब्यूटी |
| तिल | ओलेइक एसिड | मालिश |
फल और सब्जियां: ताजगी का स्रोत
जैविक फल-सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। सतत खेती से जैव विविधता बनी रहती है। 2024-25 में फल-सब्जी निर्यात 9.2 मिलियन डॉलर पहुंचा, 104% वृद्धि। ये उत्पाद विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। एपीडा ने 2025 में आम प्यूरी जैसे उत्पादों को प्रमोट किया। वैश्विक उपभोक्ता ताजा और जैविक फल पसंद करते हैं। बायोफैच 2025 में प्रसंस्कृत फल को प्रदर्शित किया। ये उत्पाद मौसमी होते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते। निर्यात 200 देशों में। नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 में फल-सब्जियों को प्राकृतिक खेती का हिस्सा बताया। वैश्विक बाजार में जैविक फल 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान। इस खंड में प्रमुख उत्पाद।
10. जैविक आम
आम ‘फलों का राजा’ है। महाराष्ट्र में जैविक आम उगाए जाते हैं। निर्यात अमेरिका में बढ़ा। विटामिन सी और ए से युक्त। नेचुरल प्रोडक्ट्स एक्सपो 2025 में आम को सुपरफ्रूट कहा। 2025 में निर्यात 104% बढ़ा। यह फल पाचन सुधारता है। सतत खेती से महाराष्ट्र किसान लाभान्वित। वैश्विक बाजार में जूस और फ्रेश फॉर्म में डिमांड। बायोफैच 2025 में आम को प्रसंस्कृत उत्पाद के रूप में हाइलाइट किया, जो 200 देशों में निर्यात होता। प्राकृतिक खेती समिट में आम की खेती को जलवायु अनुकूल बताया। भारत का आम उत्पादन 2025 में 20 मिलियन टन पहुंचा, जिसमें जैविक हिस्सा 15%। ये आम एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, जो त्वचा स्वास्थ्य बढ़ाते हैं। किसान FPO के माध्यम से जैविक प्रमाणन ले रहे, जो निर्यात को आसान बनाता।
लाभ:
- इम्यूनिटी।
- पाचन।
11. जैविक केला
केला ऊर्जा स्रोत है। गुजरात में जैविक खेती। प्राकृतिक खेती समिट 2025 में केले को प्रचारित किया। पोटैशियम से भरपूर। निर्यात साल भर। यह फल वजन प्रबंधन में मददगार। गुजरात के FPO जैविक प्रमाणन ले रहे। वैश्विक मांग अमेरिका और यूरोप में। सतत खेती से पानी संरक्षण। बायोफैच 2025 में केले को जैविक फल के रूप में प्रदर्शित किया। 2024-25 में फल निर्यात में केला 30% योगदान। यह फल फाइबर से युक्त, जो पाचन सुधारता। भारत का केला उत्पादन 2025 में 32 मिलियन टन, जैविक 10%। वैश्विक बाजार में स्मूदी और फ्रेश फॉर्म लोकप्रिय। किसान सतत तरीकों से जल संरक्षण करते।
लाभ:
- पोटैशियम से हृदय स्वास्थ्य।
- वजन प्रबंधन।
12. जैविक पालक
पालक आयरन का भंडार। उत्तर भारत से। बायोफैच 2025 में सब्जियों को हेल्थ फूड कहा। विटामिन K युक्त। सर्दी मौसम में उत्पादन। यह सब्जी एनीमिया रोकती है। उत्तर प्रदेश किसान सतत तरीके अपनाते। वैश्विक सलाद और स्मूदी में उपयोग। नेचुरल एक्सपो 2025 में पालक को जैविक सब्जी श्रेणी में शामिल। 2025 में सब्जी निर्यात 104% बढ़ा। पालक में फोलेट और विटामिन ए, जो आंखें स्वस्थ रखते। भारत का पालक उत्पादन उत्तर भारत में 2 मिलियन टन। सतत खेती से मिट्टी संरक्षण। वैश्विक बाजार में ऑर्गेनिक सलाद में डिमांड। FPO किसानों को प्रमाणन सहायता।
लाभ:
- एनीमिया रोक।
- आंखें स्वस्थ।
फल-सब्जी तालिका
| उत्पाद | विटामिन सामग्री | मौसम |
| आम | विटामिन ए, सी | गर्मी |
| केला | पोटैशियम, बी6 | साल भर |
| पालक | आयरन, विटामिन K | सर्दी |
दालें: प्रोटीन का भारतीय स्रोत
जैविक दालें प्रोटीन प्रदान करती हैं। सतत खेती से मिट्टी सुधरती है। 2024-25 में दाल निर्यात 17.89 मिलियन डॉलर हुआ। ये दालें शाकाहारी डाइट के लिए आदर्श हैं। भारत में FPO दाल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। वैश्विक बाजार में प्रोटीन मांग बढ़ी। बायोफैच 2025 में दालों को प्रमुख निर्यातक दिखाया। ये दालें फाइबर से भरपूर। प्राकृतिक खेती से उत्पादन दोगुना। नेचुरल एक्सपो में दालों को सस्टेनेबल प्रोटीन बताया। 2025 में दाल निर्यात 20% बढ़ा। ये दालें वैश्विक शाकाहारी ट्रेंड में फिट। इस खंड में प्रमुख दालें।
13. जैविक चना
चना प्रोटीन युक्त। मध्य प्रदेश से। निर्यात 2024-25 में बढ़ा। नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस में चने को प्रोटीन स्रोत कहा। 19g प्रोटीन प्रति 100g। यह दाल ब्लड शुगर नियंत्रित करती। मध्य प्रदेश FPO सक्रिय। वैश्विक चने स्नैक्स में डिमांड। बायोफैच 2025 में चना को जैविक दाल के रूप में हाइलाइट। 2025 में चना उत्पादन 12 मिलियन टन। फाइबर से पाचन सुधार। सतत खेती से मिट्टी नाइट्रोजन बढ़ा। वैश्विक बाजार में हummus जैसे उत्पादों में। किसान आय 30% बढ़ी।
लाभ:
- मसल्स बिल्डिंग।
- ब्लड शुगर नियंत्रण।
14. जैविक मूंग दाल
मूंग दाल आसानी से पचती है। नेचुरल एक्सपो 2025 में मूंग को detoxification फूड बताया। 24g प्रोटीन। उत्तर प्रदेश में खेती। यह दाल हृदय स्वास्थ्य बढ़ाती। सतत खेती से मिट्टी सुधार। वैश्विक स्प्राउट्स में उपयोग। बायोफैच 2025 में मूंग को प्रमुख दाल दिखाया। 2024-25 निर्यात 17.89 मिलियन। मूंग में एंटीऑक्सीडेंट, जो detoxification मदद। भारत उत्पादन 2.5 मिलियन टन। FPO प्रमाणन से निर्यात आसान। वैश्विक बाजार में सलाद और सूप में। प्राकृतिक खेती से जल बचत।
लाभ:
- detoxification।
- हृदय स्वास्थ्य।
15. जैविक उड़द दाल
उड़द दाल मजबूत हड्डियों के लिए। बायोफैच में उड़द को जैविक दाल दिखाया। 25g प्रोटीन। पंजाब क्षेत्र। यह दाल ऊर्जा प्रदान करती। FPO प्रमाणन बढ़ा। वैश्विक दाल मसालों में। नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस में उड़द को प्रोटीन स्रोत। 2025 उत्पादन 3 मिलियन टन। कैल्शियम से हड्डियां मजबूत। सतत खेती से मिट्टी उर्वर। वैश्विक बाजार में दाल और स्नैक्स। किसान सतत तरीके अपनाते।
लाभ:
- प्रोटीन सप्लाई।
- ऊर्जा।
दाल तालिका
| दाल प्रकार | प्रोटीन (प्रति 100g) | प्रमुख क्षेत्र |
| चना | 19g | मध्य प्रदेश |
| मूंग | 24g | उत्तर प्रदेश |
| उड़द | 25g | पंजाब |
अन्य उत्पाद: विविधता का आनंद
ये उत्पाद विविध पोषण देते हैं। सतत खेती से पर्यावरण संरक्षण। 2025 में चाय और शहद निर्यात बढ़ा। ये सुपरफूड वैश्विक स्वास्थ्य ट्रेंड में फिट। एपीडा ने औषधीय पौधों को प्रमोट किया। प्राकृतिक समिट 2025 में विविधता पर जोर। निर्यात 200 देशों में। ये उत्पाद आयुर्वेदिक हैं। बायोफैच 2025 में शहद, चाय, मोरिंगा को प्रदर्शित। वैश्विक बाजार में सुपरफूड मांग 97% बढ़ी। नेचुरल एक्सपो में इनको हेल्थ प्रोडक्ट कहा। 2025 जैविक बाजार 75,000 करोड़। इस खंड में प्रमुख।
16. जैविक शहद
शहद प्राकृतिक मिठास। हिमालय से। एंटीऑक्सीडेंट। बायोफैच 2025 में शहद को सस्टेनेबल दिखाया। एंटीबैक्टीरियल गुण। हिमालय क्षेत्र खेती। यह शहद इम्यूनिटी बढ़ाता। वैश्विक ब्यूटी में उपयोग। सतत मधुमक्खी पालन। नेचुरल एक्सपो 2025 में शहद को जैविक स्वीटनर कहा। 2025 निर्यात 10% बढ़ा। शहद में एंजाइम्स, जो घाव भरते। भारत उत्पादन 1 लाख टन। FPO मधुमक्खी पालन बढ़ावा। वैश्विक बाजार में आयुर्वेदिक उत्पाद। प्राकृतिक खेती से जैव विविधता।
लाभ:
- घाव भरना।
- इम्यूनिटी।
17. जैविक चाय
असम की जैविक चाय। कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट। निर्यात 45.13 मिलियन डॉलर। नेचुरल एक्सपो में चाय को हेल्थ ड्रिंक कहा। असम में सतत खेती। यह चाय तनाव कम करती। वैश्विक बाजार अमेरिका। FPO चाय उत्पादन बढ़ा। बायोफैच 2025 में चाय को प्रमुख निर्यात। 2025 उत्पादन 1.3 बिलियन किलो। पॉलीफेनॉल्स से हृदय स्वास्थ्य। सतत खेती से पानी संरक्षण। वैश्विक बाजार में ग्रीन टी लोकप्रिय। किसान आय दोगुनी।
लाभ:
- तनाव कम।
- हृदय।
18. जैविक मोरिंगा पाउडर
मोरिंगा ‘चमत्कारी पेड़’। विटामिन ए, सी, ई। प्राकृतिक समिट 2025 में मोरिंगा को सुपरफूड बताया। प्रोटीन युक्त। दक्षिण भारत से। यह पाउडर लीवर स्वस्थ रखता। वैश्विक सप्लीमेंट्स में डिमांड। सतत खेती से उत्पादन। नेचुरल एक्सपो 2025 में मोरिंगा को न्यूट्रास्युटिकल कहा। 2025 निर्यात 15% बढ़ा। मोरिंगा में 90 पोषक तत्व। भारत उत्पादन 1.5 लाख टन। FPO किसान प्रमाणित। वैश्विक बाजार में पाउडर और कैप्सूल। प्राकृतिक खेती से सूखा प्रतिरोधी।
लाभ:
- लीवर स्वास्थ्य।
- त्वचा।
अन्य तालिका
| उत्पाद | प्रमुख गुण | वैश्विक मांग |
| शहद | एंटीबैक्टीरियल | यूरोप |
| चाय | एंटीऑक्सीडेंट | अमेरिका |
| मोरिंगा | प्रोटीन, विटामिन | एशिया |
निष्कर्ष
ये 18 जैविक और टिकाऊ भारतीय खाद्य उत्पाद न केवल स्वादिष्ट हैं बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं। वैश्विक मांग बढ़ने से भारतीय किसानों को नई संभावनाएं मिल रही हैं। 2025 में वर्ल्ड फूड इंडिया ने भारत को वैश्विक खाद्य केंद्र के रूप में स्थापित किया, जहां 1 लाख करोड़ रुपये के समझौते हुए। जैविक निर्यात 35% बढ़कर 665.96 मिलियन डॉलर हो गया, जो अमेरिका, यूरोप और UAE जैसे बाजारों की मांग दर्शाता है। ये उत्पाद पोषण, स्थिरता और आर्थिक विकास को जोड़ते हैं, जैसे गेहूं आटा निर्यात की अनुमति से किसानों की आय बढ़ेगी।
भारत सरकार की NPOP योजना और एपीडा के प्रयास वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं। जैविक खेती अपनाकर हम एक स्वस्थ भविष्य बना सकते हैं। भारत का लक्ष्य 2030 तक 2 बिलियन डॉलर का जैविक निर्यात है। इन उत्पादों को अपनी डाइट में शामिल करें और सतत जीवनशैली को अपनाएं। विश्व खाद्य दिवस 2025 की तरह, “बेहतर भोजन, बेहतर भविष्य” का संकल्प लें।
