ओपनएआई ने गूगल को चुनौती देते हुए खोज ब्राउज़र का अनावरण किया
ओपनएआई, जो दुनिया भर में चैटजीपीटी के नाम से मशहूर है, ने मंगलवार को एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए “अटलस” नाम का नया एआई-पावर्ड वेब ब्राउजर पेश किया। यह ब्राउजर सीधे गूगल क्रोम को निशाना बनाता है, जो इंटरनेट ब्राउजिंग का राजा माना जाता है। कंपनी के संस्थापक और सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक लाइव स्ट्रीम्ड प्रेजेंटेशन के दौरान इसकी घोषणा की, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा कि अटलस पूरी तरह से चैटजीपीटी के इकोसिस्टम के इर्द-गिर्द विकसित किया गया है। ओपनएआई की यह पहल एआई की उन्नत क्षमताओं का उपयोग करके यूजर्स को पारंपरिक सर्च इंजनों से आगे की सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास है। हाल के महीनों में ओपनएआई ने गूगल को चुनौती देने के लिए अपनी रणनीति को तेज कर दिया है, जबकि गूगल ने भी अपनी सर्च सर्विसेज और समग्र प्लेटफॉर्म में एआई फीचर्स को तेजी से एकीकृत किया है। यह विकास टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में चल रही तीव्र एआई प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, जहां प्रमुख कंपनियां इंटरनेट यूजर्स के पहले संपर्क बिंदु को नियंत्रित करने के लिए होड़ लगा रही हैं। चैटजीपीटी के 800 मिलियन से अधिक साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स को देखते हुए, ओपनएआई को लगता है कि यह ब्राउजर उनके लिए एक बड़ा बाजार हासिल करने का अवसर साबित हो सकता है।
एजेंट मोड: चैटजीपीटी का स्वायत्त सर्च, जो आपके लिए इंटरनेट नेविगेट करेगा
अटलस ब्राउजर का सबसे आकर्षक और नवीन फीचर इसका “एजेंट” मोड है, जो यूजर्स को एक नया स्तर की सुविधा प्रदान करता है। इस मोड में चैटजीपीटी एक बुद्धिमान चैटबॉट के रूप में कार्य करता है, जो यूजर की क्वेरी के आधार पर स्वतंत्र रूप से इंटरनेट पर सर्च करता है। सैम ऑल्टमैन और उनकी एक्जीक्यूटिव टीम ने लाइव डेमो के दौरान दिखाया कि कैसे एजेंट मोड चालू होने पर चैटजीपीटी ब्राउजर को खुद ही नियंत्रित करता है—वेबसाइट्स पर क्लिक करता है, जानकारी इकट्ठा करता है और अंत में प्रासंगिक परिणाम यूजर तक पहुंचाता है। ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया, “यह आपके सभी डेटा और टूल्स के साथ इंटरनेट पर घूमता-फिरता है, क्लिकिंग करता है और जो जरूरी है, उसे ढूंढ लाता है।” उन्होंने आगे कहा, “आप इस प्रक्रिया को देख सकते हैं या इसे बैकग्राउंड में चलने दे सकते हैं—चाहे जो भी हो, यह आपके लिए इंटरनेट का उपयोग कर रहा होता है।” यह फीचर पारंपरिक सर्च इंजनों से अलग है, जहां यूजर को खुद लिंक्स पर क्लिक करना पड़ता है; यहां एआई एजेंट पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेट करता है, जिससे समय की बचत होती है और अधिक सटीक जानकारी मिलती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अटलस के कुछ फीचर्स गूगल क्रोम और माइक्रोसॉफ्ट एज जैसे मौजूदा ब्राउजर्स में पहले से मौजूद टूल्स से काफी मिलते-जुलते हैं, जैसे कि वॉयस सर्च या ऑटो-कम्पलीट। फिर भी, ओपनएआई का जोर जेनरेटिव एआई पर है, जो न केवल सर्च करता है बल्कि कंटेंट को समझकर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत भी करता है। यह मोड गोपनीयता और सिक्योरिटी के लिहाज से भी डिजाइन किया गया है, ताकि यूजर्स के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
उपलब्धता, प्लेटफॉर्म विस्तार और सब्सक्रिप्शन मॉडल: शुरुआत मैक से, जल्द अन्य डिवाइसेज पर
अटलस ब्राउजर को मंगलवार से ही एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम (macOS) वाले कंप्यूटर्स पर मुफ्त में उपलब्ध करा दिया गया है, जो ओपनएआई की एप्पल इकोसिस्टम के साथ साझेदारी को दर्शाता है। हालांकि, एजेंट मोड जैसी उन्नत सुविधाएं केवल चैटजीपीटी के पेड सब्सक्रिप्शन यूजर्स के लिए खुली रहेंगी, जैसे कि प्लस (मासिक $20) या प्रो (मासिक $200) वर्जन। ये सब्सक्रिप्शन पहले से ही एआई मॉडल्स तक तेज पहुंच, प्राथमिकता सपोर्ट और अतिरिक्त फीचर्स प्रदान करते हैं। सैम ऑल्टमैन ने उत्साह से कहा, “हम इसे विंडोज, एंड्रॉयड और आईओएस जैसे मोबाइल डिवाइसेज पर जल्द से जल्द लाना चाहते हैं,” लेकिन उन्होंने कोई विशिष्ट टाइमलाइन साझा नहीं की। उन्होंने जोर देकर कहा कि “यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरणों में है, और हम फीडबैक के आधार पर इसे बेहतर बनाएंगे।” ओपनएआई की यह रणनीति चैटजीपीटी की जबरदस्त लोकप्रियता पर आधारित है, जिसके 800 मिलियन से अधिक वीकली यूजर्स हैं—यह संख्या गूगल क्रोम के 2 बिलियन मासिक यूजर्स से कम है, लेकिन तेजी से बढ़ रही है। ईमार्केटर के टेक्नोलॉजी एनालिस्ट जैकब बॉर्न ने एएफपी न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि ओपनएआई को चैटजीपीटी की पॉपुलैरिटी का लाभ मिल सकता है, जिससे यूजर्स आसानी से अटलस की ओर रुख कर लें। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि गूगल की मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर—जिसमें अरबों यूजर्स को हैंडल करने की क्षमता है—ओपनएआई के लिए बड़ी चुनौती बनेगी। बॉर्न ने यह भी कहा कि अटलस का प्रदर्शन हाई वॉल्यूम ट्रैफिक में कैसा रहेगा, यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि ओपनएआई अभी मुख्य रूप से एआई मॉडल्स पर फोकस करता रहा है, न कि ब्राउजर इंफ्रास्ट्रक्चर पर।
गूगल पर बढ़ता दबाव: एआई रेस में निवेश और प्रतिस्पर्धा का नया दौर
टेक्नोलॉजी जगत में एआई की होड़ ने एक नया रूप ले लिया है, जहां अमेजन, गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और एलन मस्क की xAI जैसी दिग्गज कंपनियां 2022 के अंत में चैटजीपीटी के ऐतिहासिक लॉन्च के बाद से अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। ओपनएआई का यह ब्राउजर गूगल पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जैसा कि जैकब बॉर्न ने कहा: “यह एआई रेस का एक और महत्वपूर्ण कदम है, जहां कंपनियां अपने एआई इंटरफेस को इंटरनेट यूजर्स का प्राथमिक संपर्क बिंदु बनाना चाहती हैं।” ओपनएआई ने हाल ही में चैटजीपीटी के लिए एक नया इंटीग्रेशन फीचर लॉन्च किया, जो स्पॉटिफाई, बुकिंग.कॉम, अमेजन म्यूजिक और अन्य रोजमर्रा की ऐप्स से सीधे इंटरैक्ट कर सकता है। उदाहरण के लिए, यह फीचर यूजर्स को म्यूजिक प्लेलिस्ट सिलेक्ट करने, रीयल एस्टेट प्रॉपर्टीज सर्च करने या होटल-फ्लाइट बुकिंग साइट्स पर नेविगेट करने में मदद करता है—बिना ब्राउजर स्विच किए। इसी तरह, सिलिकॉन वैली का उभरता स्टार्टअप पर्प्लेक्सिटी एआई ने अगस्त 2025 में एक नया मॉडल पेश किया, जिसमें पब्लिशर्स के साथ सर्च रेवेन्यू शेयरिंग की व्यवस्था है। इसके तहत, जब पर्प्लेक्सिटी का कोमेट ब्राउजर या एआई असिस्टेंट किसी क्वेरी को पूरा करने के लिए मीडिया पार्टनर्स के कंटेंट का उपयोग करता है, तो उन्हें उचित भुगतान मिलता है। पर्प्लेक्सिटी को अक्सर गूगल के लिए संभावित डिसरप्टर के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसका एआई-पावर्ड सर्च इंजन सटीक और संक्षिप्त जवाब देता है। इन कंपनियों के अलावा, माइक्रोसॉफ्ट ने भी बिंग सर्च में एआई को मजबूत किया है, जबकि गूगल ने जेमिनी मॉडल के जरिए अपनी सर्च को अपग्रेड किया।
कानूनी चुनौतियां और बाजार पर प्रभाव: गूगल का मोनोपॉली केस और भविष्य की अनिश्चितता
अटलस के लॉन्च का समय गूगल के लिए और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी अदालत ने हाल ही में उसके खिलाफ एक प्रमुख एंटीट्रस्ट केस में फैसला सुनाया। जज अमित मेहता ने एक साल पहले (2024 में) गूगल को ऑनलाइन सर्च मार्केट में अवैध रूप से मोनोपॉली बनाए रखने का दोषी ठहराया था, लेकिन क्रोम ब्राउजर को बेचने का आदेश नहीं दिया। इसके बजाय, उन्होंने कई उपाय सुझाए, जैसे कि अन्य कंपनियों के साथ डेटा शेयरिंग की अनिवार्यता ताकि वे अपनी सर्च प्रोडक्ट्स विकसित कर सकें, और एक्सक्लूसिव डील्स पर रोक—जिनमें गूगल को किसी डिवाइस या सर्विस पर एकमात्र सर्च इंजन बनाने की अनुमति न मिले। मेहता ने खुद स्वीकार किया कि 2020 में यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट और 11 राज्यों द्वारा शुरू किए गए इस केस के बाद से उद्योग का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है, खासकर एआई के उदय के साथ। गूगल का सर्च मार्केट में 90% से अधिक हिस्सा है, और इसकी ज्यादातर कमाई टारगेटेड विज्ञापनों से आती है—जो अब ओपनएआई, पर्प्लेक्सिटी और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों से खतरे में है। अटलस लॉन्च की खबर के बाद गूगल के शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर लगभग 1.2% गिर गए, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अटलस सफल रहा, तो यह गूगल की विज्ञापन-आधारित मॉडल को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि एआई एजेंट्स डायरेक्ट जवाब देकर क्लिक-थ्रू रेट्स को कम कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह लॉन्च टेक वर्ल्ड में एआई और सर्च के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने वाला साबित हो सकता है, जहां ओपनएआई जैसी इनोवेटिव कंपनियां गूगल की लंबे समय से चली आ रही बादशाही को चुनौती दे रही हैं।
यह जानकारी बी. बी. सी. और एम. एस. एन. से एकत्र की गई है।
