रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बाद पहली बार आइसलैंड में मिले मच्छर
आइसलैंड, जो लंबे समय से दुनिया के उन दुर्लभ स्थानों में से एक माना जाता रहा है जहां मच्छरों का कोई नामोनिशान नहीं था, अब इसकी मिट्टी पर पहली बार इन कीटों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह खोज इस महीने हुई है और वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। पहले, आइसलैंड का कठोर मौसम, जिसमें ठंडी हवाएं, लगातार बर्फीली चोटियां और स्थिर पानी की भारी कमी शामिल है, ने मच्छरों को यहां बसने से रोक रखा था। ये कीट पानी में अंडे देने के लिए निर्भर होते हैं, और आइसलैंड की भौगोलिक स्थिति ने इसकी संभावना को हमेशा कम रखा। अब, एंटार्कटिका ही एकमात्र ऐसी जगह बची है जो पूरी तरह मच्छर-मुक्त मानी जाती है, जहां चरम ठंड और अलग-थलग स्थिति ने इन कीटों को दूर रखा है।
हालांकि, जलवायु परिवर्तन की तेज रफ्तार ने इस स्थिति को बदल दिया है। आइसलैंड उत्तरी गोलार्ध के अन्य हिस्सों की तुलना में चार गुना तेजी से गर्म हो रहा है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। अंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, यह गर्माहट आर्कटिक क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभावी है, जहां तापमान वृद्धि ग्लोबल औसत से दोगुनी से अधिक हो सकती है। परिणामस्वरूप, आइसलैंड के विशाल ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो न केवल समुद्र स्तर को बढ़ा रहे हैं बल्कि नई झीलें और दलदली इलाके बना रहे हैं—जो मच्छरों के लिए आदर्श प्रजनन स्थल हो सकते हैं। इसके अलावा, हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो पहले यहां असामान्य थीं।
इस साल मई में आइसलैंड ने अपना अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया, जब तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ गया। यह रिकॉर्ड ब्रेकिंग तापमान सामान्य से काफी ऊपर था और पूरे देश में गर्मी की लहरें देखी गईं। वसंत ऋतु के दौरान, कई क्षेत्रों में औसत तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊंचा रहा, जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। यूरोन्यूज की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर 2025 में भी भूमि और समुद्र के तापमान लगातार ऊंचे रहे, जो जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम है। विशेषज्ञों का डर है कि यह तेज गर्माहट मच्छरों को न केवल जीवित रहने बल्कि देशभर के मार्शलैंड्स, तालाबों और नई बनी जल स्रोतों में स्थायी रूप से फैलने का अवसर दे सकती है। यदि ऐसा होता है, तो आइसलैंड की अनोखी जैव विविधता पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि मच्छर रोग वाहक भी हो सकते हैं।
आइसलैंड में मच्छरों की खोज: एक अप्रत्याशित खोज
यह रोचक खोज कीटों के उत्साही ब्योर्न हजातासोन ने की, जो रेकजाविक के निकट क्जोस घाटी—एक ग्लेशियरयुक्त क्षेत्र—में घूम रहे थे। वे मॉथ्स (रात्रि में उड़ने वाले कीटों) को आकर्षित करने के लिए पारंपरिक तरीके अपना रहे थे, जिसमें वाइन से भीगे रस्सियां इस्तेमाल की जाती हैं। इन रस्सियों को पेड़ों या चट्टानों पर लटकाया जाता है ताकि कीट उन पर आकर चिपक जाएं। हजातासोन को तीन मच्छर मिले, जो इस क्षेत्र के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थे।
16 अक्टूबर, गुरुवार को उन्होंने अपनी इस खोज को स्थानीय फेसबुक ग्रुप पर साझा किया, जहां उन्होंने पहले पकड़े गए मच्छर को “अजीब मक्खी” करार दिया। उनकी पोस्ट में लिखा था, “मैं तुरंत समझ गया कि यह कुछ ऐसा है जो मैंने पहले कभी नहीं देखा।” यह उत्साह और आश्चर्य का मिश्रण था, क्योंकि आइसलैंड में मच्छरों की कोई ज्ञात आबादी नहीं थी। हजातासोन, जो एक स्थानीय कीट प्रेमी हैं, ने इन नमूनों को तुरंत विशेषज्ञों के पास भेज दिया ताकि उनकी पहचान हो सके।
इन तीन मच्छरों को आइसलैंड के प्रतिष्ठित नेचुरल साइंस इंस्टीट्यूट (संस्कृत: Náttúrufræðistofnun Íslands) में भेजा गया, जहां प्रमुख एंटोमोलॉजिस्ट (कीट विज्ञानी) माथियास अल्फ्रेडसन ने उनकी जांच की। अल्फ्रेडसन ने इन्हें दो मादा और एक नर के रूप में वर्गीकृत किया, जो कुलिसेटा अन्नुलाटा प्रजाति के हैं। यह प्रजाति अन्य मच्छरों से अलग है क्योंकि यह ठंडे मौसम को बेहतर तरीके से सहन कर सकती है। साइबेरिया, अलास्का और उत्तरी यूरोप के कठोर इलाकों में यह आमतौर पर पाई जाती है, जहां सर्दियां लंबी और कड़ी होती हैं। अल्फ्रेडसन के अनुसार, ये मच्छर सर्दियों की मार से बचने के लिए अक्सर मानव बस्तियों के करीब शरण लेते हैं—जैसे अस्तबल, घरों की दीवारों के अंदर या गर्म स्थानों में। यह विशेषता उन्हें आइसलैंड जैसे ठंडे देश में जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती है, खासकर जब ग्लोबल वॉर्मिंग नई स्थितियां बना रही हो।
क्या जलवायु परिवर्तन मच्छरों को आकर्षित कर रहा है? विशेषज्ञों की राय
एंटोमोलॉजिस्ट माथियास अल्फ्रेडसन का मानना है कि मच्छरों के इस आगमन को पूरी तरह जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी देना जल्दबाजी होगी, लेकिन वे स्पष्ट चेतावनी देते हैं: “गर्म होता तापमान अन्य मच्छर प्रजातियों के आइसलैंड में स्थापित होने की संभावना को काफी बढ़ा सकता है, यदि वे कहीं से पहुंच जाएं।” जलवायु परिवर्तन न केवल तापमान बढ़ा रहा है बल्कि मौसम पैटर्न को भी बदल रहा है, जिससे अधिक नमी और स्थिर जल स्रोत बन रहे हैं—मच्छरों के लिए परफेक्ट ब्रिडिंग ग्राउंड। आईपीसीसी (इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि आर्कटिक क्षेत्रों में कीटों का विस्तार तेजी से हो रहा है, और आइसलैंड इसका एक उदाहरण बन सकता है।
हालांकि, मच्छरों का आगमन अन्य तरीकों से भी संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये जहाजों, कंटेनरों या हवाई यात्रा के जरिए अन्य देशों से आ सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ साल पहले केफ्लाविक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक अलग प्रजाति का मच्छर एक विमान से उतरते समय मिला था। उस समय इसे एक संयोग माना गया, लेकिन अब तक वह जंगली इलाकों में कभी नहीं दिखा। आइसलैंड की बढ़ती पर्यटन गतिविधियां—2025 में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक आए हैं—भी इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं, क्योंकि यात्री अनजाने में कीटों को ले जा सकते हैं।
अब, आइसलैंड के पर्यावरण विभाग और वैज्ञानिक संस्थान निगरानी को मजबूत करने की योजना बना रहे हैं। इसमें नियमित सर्वे, जाल लगाना और डीएनए विश्लेषण शामिल है ताकि पता चल सके कि क्या कुलिसेटा अन्नुलाटा प्रजाति वाकई यहां स्थायी रूप से बस गई है या यह एक अस्थायी घटना है। यदि स्थापित हो जाती है, तो यह आइसलैंड की पारिस्थितिकी पर लंबे समय तक असर डाल सकती है, जिसमें स्थानीय वन्यजीवों पर प्रभाव और संभावित स्वास्थ्य जोखिम शामिल हैं। नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के हालिया शोध से पता चलता है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से मच्छरों का विस्तार 50% से अधिक क्षेत्रों में बढ़ सकता है, और ठंडे देश जैसे आइसलैंड अब इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह खोज न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक जलवायु नीतियों के लिए एक चेतावनी है, जहां पेरिस समझौते के 10 साल बाद भी उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे।
