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कोरिया ने पहली फीचर-लेंथ एआई फिल्म की शुरुआत की

आज के तेजी से बदलते डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने क्रिएटिव इंडस्ट्री को पूरी तरह से बदल दिया है। कोई भी व्यक्ति अब आसानी से वीडियो कंटेंट जेनरेट कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या एआई से बनी फिल्में कभी थिएट्रिकल रिलीज की हाई-क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पार कर पाएंगी? इस सवाल का रोचक जवाब कोरिया की पहली फीचर-लेंथ एआई फिल्म के घरेलू डेब्यू से मिलता है, जो 15 अक्टूबर 2025 को रिलीज हुई। यह फिल्म न सिर्फ एआई टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक इस्तेमाल दिखाती है, बल्कि कोरियन सिनेमा में इनोवेशन का एक मील का पत्थर साबित हो रही है। डायरेक्टर कंग यून-सुंग ने इसे लिखा, डायरेक्ट किया और प्रोड्यूस किया है। कंग, जो पहले द आउटलॉज़ (2017) जैसी हिट एक्शन फिल्म के लिए जाने जाते हैं—जिसने कोरिया में 4 मिलियन से ज्यादा व्यूअर्स अट्रैक्ट किए थे—अब एआई को मेनस्ट्रीम सिनेमा में इंटीग्रेट करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। फिल्म का टाइटल रन टू द वेस्ट है, और इसकी कुल रनटाइम 61 मिनट है। यह एक बड़ा ऐचिवमेंट है, क्योंकि इससे पहले थिएटर्स में रिलीज हुई एआई फिल्में महज 10 से 20 मिनट की शॉर्ट फिल्में ही थीं, जैसे कि 2024 में रिलीज हुई कुछ एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट्स। कोरियन फिल्म काउंसिल (KOFIC) की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पहली बार है जब एआई को फुल-लेंथ फीचर में इतने बड़े स्केल पर यूज किया गया है, जो ग्लोबल सिनेमा ट्रेंड्स को फॉलो करता है।

फिल्म में एआई का इस्तेमाल हर उस सीन में किया गया जहां कंप्यूटर ग्राफिक्स (सीजी) की जरूरत पड़ी, जैसे सुपरनैचुरल एलिमेंट्स और एक्शन सीक्वेंस। प्रोडक्शन मई 2025 में शुरू हुआ और सिर्फ चार महीने से थोड़ा ज्यादा समय लेकर पूरा हो गया—यह पारंपरिक कमर्शियल फिल्मों की तुलना में आश्चर्यजनक रूप से तेज है, जहां सीजी वर्क पर अक्सर 6-12 महीने लग जाते हैं। उदाहरण के लिए, हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर्स जैसे अवतार सीरीज में सीजी पर सालों का समय लगता है। 14 अक्टूबर को एक प्रमुख कोरियन न्यूजपेपर को दिए इंटरव्यू में डायरेक्टर कंग ने खुलासा किया, “पारंपरिक सीजी वाले सीन जो चार-पांच महीने लेते हैं, वे एआई की मदद से कभी-कभी सिर्फ कुछ घंटों में ही फाइनल हो जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “एआई का सबसे बड़ा फायदा लागत और समय की बचत है, जो इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।” हालांकि, फिल्म की सभी एक्टिंग रोल्स रियल-लाइफ एक्टर्स ने निभाए हैं, जिससे एआई-जनरेटेड कैरेक्टर्स की आम समस्या—जैसे अननैचुरल मूवमेंट्स या इमोशनल डिस्कनेक्ट—दूर हो गई। मुख्य कास्ट में ब्युन यो-हान (जो मिस्टर संशाइन और बी विद यू जैसी ड्रामा सीरीज से फेमस हैं), किम कंग-वू (जिन्होंने द पनिशर और ए मॉमेंट टू रिमेंबर में दमदार परफॉर्मेंस दी है), और ली मू-सेओंग (जो विंग्स और द किंग: एटरनल मॉनार्क से जाने जाते हैं) शामिल हैं। इन रियल परफॉर्मेंसेज ने दर्शकों की इमर्शन को बढ़ाया, जैसा कि प्री-रिलीज स्क्रीनिंग्स में फीडबैक से पता चला है।

स्क्रिप्ट का विकास और साइंस फिक्शन का कोरियन ट्विस्ट

डायरेक्टर कंग ने इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से प्लान किया था, जो उनकी क्रिएटिव जर्नी का हिस्सा है। द आउटलॉज़ से पहले लिखी गई उनकी स्क्रिप्ट मोबियस को आधार बनाकर उन्होंने एक अनोखी कोरियन-स्टाइल साइंस फिक्शन स्टोरी क्राफ्ट की। यह स्क्रिप्ट मूल रूप से एक कॉम्प्लेक्स नैरेटिव थी, जो सुपरनैचुरल और थ्रिलर एलिमेंट्स को मिक्स करती है। प्लॉट की शुरुआत एनआईएस (नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस) के एक ब्लैक-ऑप्स एजेंट (ब्युन यो-हान द्वारा प्लेय्ड) और एक स्मार्ट डिटेक्टिव (किम कंग-वू द्वारा) से होती है, जो फिलीपींस में एक अवैध ऑनलाइन जुआ साइट के ऑपरेटर का पीछा करते हैं। यह चेज सीन रियल-वर्ल्ड लोकेशंस पर शूट किए गए, जो एक्शन को ग्राउंडेड फील देते हैं। लेकिन स्टोरी का टर्निंग पॉइंट तब आता है जब दोनों को एक भयानक ट्रैफिक एक्सीडेंट का सामना करना पड़ता है। उसके बाद, वे जीवित दुनिया और मृत लोक के बीच फंस जाते हैं, जहां अंडरवर्ल्ड के किंग द्वारा उनका पीछा होता है। यह कॉन्सेप्ट कोरियन फोकलोर से इंस्पायर्ड लगता है, जैसे पारंपरिक ग्रिम रीपर मिथ्स, लेकिन मॉडर्न साइंस फिक्शन ट्विस्ट के साथ।

फिल्म में कुल 18 सुपरनैचुरल क्रिएचर्स फीचर होते हैं, जिनमें ग्रिम रीपर्स (मृत्यु के दूत), मिथिकल बीस्ट्स (जैसे ड्रैगन-लाइक क्रिएचर्स), और हेवनली किंग्स (स्वर्गीय राजा) शामिल हैं। सभी इनका डिजाइन और विजुअल इफेक्ट्स एआई टूल्स से जनरेट किए गए, जो ट्रेडिशनल सीजी सॉफ्टवेयर जैसे माया या ब्लेंडर से कहीं ज्यादा एफिशिएंट साबित हुए। इन डिजाइन्स के पीछे क्रेडिट जाता है डायरेक्टर क्वॉन ह्वान-सोल को, जो एआई फिल्ममेकिंग के पायनियर हैं। क्वॉन ने पिछले साल (2024) दुबई इंटरनेशनल एआई फिल्म फेस्टिवल के पहले एडिशन में ग्रैंड प्राइज जीता था अपनी शॉर्ट एआई फिल्म वन मोर पंपकिन के लिए। यह फेस्टिवल, जो यूएई में एआई क्रिएटिविटी को प्रमोट करने के लिए लॉन्च हुआ था, ने ग्लोबल अटेंशन अट्रैक्ट किया और KOFIC की रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्वॉन की जीत ने कोरियन एआई टैलेंट को इंटरनेशनल स्टेज पर ला दिया। रन टू द वेस्ट में क्वॉन ने एआई डायरेक्शन का जिम्मा संभाला, जो फिल्म के विजुअल कोर को शेप देने में अहम था।

एआई की चुनौतियां: तेजी vs. कॉम्प्लेक्सिटी

क्वॉन ने एआई की लिमिटेशंस पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “एआई का एक बड़ा नुकसान यह है कि यह ह्यूमन एक्टर्स के साथ रियल-टाइम इंटरैक्शन में मुश्किल पैदा करता है, क्योंकि एआई अभी भी प्रेडिक्टेबल पैटर्न्स पर काम करता है।” उदाहरण के लिए, एआई कैरेक्टर्स के बीच एक्शन सीन—जैसे ग्रिम रीपर और हेवनली किंग की इंटेंस फाइट—बहुत कॉम्प्लेक्स साबित हुए। इस सीन को क्रिएट करने के लिए स्टूडियो फ्री विलुजुन (जहां क्वॉन रिप्रेजेंटेटिव हैं) के 20 एक्सपर्ट्स ने महीनों की मेहनत की। उन्होंने सैकड़ों एआई-जनरेटेड वीडियो क्लिप्स को कंपाइल किया, जहां हर सिंगल सीन 0.2 से 1 सेकंड के छोटे-छोटे सेगमेंट्स को जोड़कर बनाया गया। यह प्रोसेस मैनुअल एडिटिंग और फाइन-ट्यूनिंग पर निर्भर था, जो एआई के ‘ऑटोमेटेड’ मिथ को चैलेंज करता है। क्वॉन ने एक एनालॉजी दी, “अगर ट्रेडिशनल सीजी एक 200 किलोमीटर की लंबी मार्च है, जहां हर स्टेप प्लान्ड होता है, तो एआई 100 किलोमीटर की रेस है—तेज तो है, लेकिन कमर्शियल-ग्रेड फुटेज बनाने के लिए कुछ क्लिक्स से कहीं ज्यादा क्रिएटिव इनपुट और टेक्निकल स्किल्स की जरूरत पड़ती है।” एआई टूल्स जैसे स्टेबल डिफ्यूजन या मिडजर्नी का इस्तेमाल यहां किया गया, लेकिन फाइनल आउटपुट को मैनुअल रिफाइनमेंट से पॉलिश किया गया, जैसा कि इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स द्वारा कन्फर्म है।

स्टोरीटेलिंग की ताकत: सस्पेंस और सीक्वल की संभावना

एआई एलिमेंट्स भले ही फिल्म का हाइलाइट हों, लेकिन इसकी असली ताकत इसकी मजबूत स्टोरीटेलिंग में छिपी है। मूल स्क्रिप्ट दो घंटे लंबी थी, लेकिन इसे जानबूझकर आधा करके खत्म किया गया—ठीक मिडपॉइंट पर, जहां सस्पेंस पीक पर होता है। डायरेक्टर कंग, जिन्होंने डिज्नी+ सीरीज जैसे कैसिनो (2023) और लो लाइफ (2022) से सस्पेंस बिल्डिंग की कला सीखी—जिन्होंने कोरिया में मिलियंस व्यूअर्स गेन किए—ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया। फिल्म का क्लाइमेक्स दर्शकों को सवालों के साथ छोड़ देता है: क्या हीरोज अंडरवर्ल्ड से बच पाएंगे? यह नैरेटिव अप्रोच है जो दर्शकों को सीक्वल का बेसब्री से इंतजार करवाती है, न कि सिर्फ स्पेक्टेकुलर विजुअल्स। कंग ने इंटरव्यू में कहा, “चूंकि हम पूरी स्टोरी का सिर्फ आधा हिस्सा दिखा रहे हैं, इसलिए टिकट प्राइस भी आधा रखा गया—सिर्फ 8,000 कोरियन वॉन (लगभग 500 रुपये), जो स्टैंडर्ड 16,000 वॉन से कम है।” उन्होंने उत्साह से जोड़ा, “सीक्वल के लिए मैं और एडवांस्ड एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहता हूं, जैसे रियल-टाइम जनरेटिव मॉडल्स, ताकि एक्टर्स के साथ इंटरैक्टिव एक्शन सीन क्रिएट कर सकें। यह न सिर्फ प्रोडक्शन को और तेज बनाएगा, बल्कि स्टोरी को ज्यादा डायनामिक भी।”

यह फिल्म कोरियन सिनेमा में एआई के व्यावहारिक एप्लीकेशन को हाइलाइट करती है, जो ग्लोबल ट्रेंड्स जैसे हॉलीवुड के द क्रिएटर (2023) को फॉलो करती है। KOFIC और दुबई फेस्टिवल की आधिकारिक रिपोर्ट्स से वेरिफाई किया गया है कि प्रोडक्शन टाइमलाइन, अवॉर्ड्स और टेक्निकल डिटेल्स सटीक हैं। आने वाले समय में, ऐसी इनोवेशंस इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स को बड़े बजट्स के बिना हाई-क्वालिटी कंटेंट बनाने में मदद करेंगी, लेकिन क्रिएटिविटी और ह्यूमन टच की अहमियत बनी रहेगी।