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कोलकाता में भारी बारिश से बिजली गिरने से सात लोगों की मौत

कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रात भर हुई अभूतपूर्व बारिश ने मंगलवार को पूरे शहर को घुटनों तक पानी में डुबो दिया, जिससे दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। अधिकारियों के अनुसार, इस बारिश के दौरान कम से कम सात लोग करंट लगने से अपनी जान गंवा बैठे, और शहर में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

बारिश की तीव्रता और प्रभावित इलाके में विस्तार

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता में सोमवार रात 1 बजे से शुरू हुई बारिश सुबह तक जारी रही, और शहर के विभिन्न हिस्सों में 300 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई। यह कोलकाता के मौसम इतिहास में एक दिन की सबसे भारी बारिशों में से एक है, जो सामान्य मानसून सीजन से कहीं ज्यादा तीव्र थी। दक्षिणी और पूर्वी कोलकाता में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखा गया, जहां गारिया कमदहारी इलाके में 332 मिमी, जोधपुर पार्क में 285 मिमी, कालीघाट में 280.2 मिमी, टॉपसिया में 275 मिमी, बालिगंज में 264 मिमी, चेतला में 262 मिमी, मोमिनपुर में 234 मिमी, चिंगरीघाटा में 237 मिमी, पामर बाजार में 217 मिमी, धापा में 212 मिमी, सीपीटी कैनाल में 209.4 मिमी, उल्टाडांगा में 207 मिमी, कुदघाट में 203.4 मिमी, पगलाडांगा (तंगरा) में 201 मिमी, कुलिया (तंगरा) में 196 मिमी और थंतनिया में 195 मिमी बारिश हुई।

आईएमडी की वेबसाइट और उनके मौसम बुलेटिन से मिली जानकारी के आधार पर, यह बारिश बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बने एक गहरे कम दबाव के क्षेत्र से प्रेरित थी, जो एक चक्रवाती तूफान में बदलने की क्षमता रखता है। विभाग ने चेतावनी जारी की है कि यह सिस्टम दक्षिण बंगाल के जिलों जैसे हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मिदनापुर और कोलकाता में अगले 48 घंटों में और भारी बारिश ला सकता है। ऐतिहासिक संदर्भ में, कोलकाता में 1978 में हुई 332 मिमी की बारिश को पार करते हुए यह घटना शहर की बाढ़ प्रबंधन प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, जैसा कि पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट्स में उल्लेख किया गया है।

जनजीवन पर गहरा असर: यातायात, बिजली और इंटरनेट सेवाओं में व्यापक रुकावट

भारी बारिश से कोलकाता की सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई। कोलकाता ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, कई प्रमुख सड़कें जैसे बालिगंज सर्कुलर रोड, रासबिहारी एवेन्यू, ईएम बाइपास और गोलपार्क इलाके घंटों तक पानी में डूबे रहे, और यहां तक कि वे सड़कें भी प्रभावित हुईं जो पहले कभी पानी से नहीं भरी थीं। वाहनों की आवाजाही रुकने से लोग घंटों फंसे रहे, और कई इलाकों में ट्रैफिक जाम इतना भयानक था कि एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं को भी मुश्किल हुई।

ट्रेन सेवाओं पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। ईस्टर्न रेलवे के प्रवक्ता ने पीटीआई को बताया कि सियालदह मेन सेक्शन पर ट्रैक पर पानी भरने से कई लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनें देरी से चलीं, जबकि कम से कम 10 ट्रेनें रद्द कर दी गईं। सियालदह साउथ सेक्शन में भी इसी तरह की समस्याएं देखी गईं, जहां बारासात, बनगांव और हासनाबाद जैसे स्टेशनों पर सेवाएं बाधित रहीं। मेट्रो रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं, खासकर उन स्टेशनों पर जहां पानी घुस गया, जैसे पार्क स्ट्रीट और एस्प्लेनेड, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन ढूंढना पड़ा।

बिजली और इंटरनेट सेवाओं का हाल और बुरा था। कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन (सीईएससी) ने सुरक्षा कारणों से दक्षिण कोलकाता के बड़े हिस्सों में बिजली काट दी, जिससे हजारों घर अंधेरे में डूब गए। इंटरनेट प्रदाताओं जैसे जियो और एयरटेल की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑप्टिकल फाइबर केबल्स पानी में डूबने से कनेक्टिविटी बाधित हुई, जिससे कामकाजी लोगों और छात्रों को ऑनलाइन गतिविधियों में परेशानी हुई। कई आवासीय कॉम्प्लेक्स जैसे साल्ट लेक और न्यू टाउन में पानी घुटनों तक पहुंच गया, जिससे निवासियों को फर्नीचर और सामान बचाने में जूझना पड़ा। अस्पतालों में भी चुनौतियां आईं; एसएसकेएम अस्पताल के सामने की सड़क जलमग्न होने से मरीजों की पहुंच मुश्किल हुई, हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि आंतरिक सेवाएं सामान्य रहीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे मौसम में स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने के लिए आपातकालीन जनरेटर और बैकअप सिस्टम सक्रिय किए गए थे।

मौतें और सुरक्षा उपायों का विस्तृत विवरण

शहर में करंट लगने से हुई सात मौतें बेहद दुखद रहीं, जो नेतुजी नगर, कालीकापुर, मोमिनपुर, बालिगंज प्लेस (दक्षिण कोलकाता) और बेनियापुकुर (उत्तरी कोलकाता) से रिपोर्ट की गईं। ये घटनाएं मुख्य रूप से पानी में डूबे बिजली के खंभों, तारों या घरेलू उपकरणों से संपर्क में आने से हुईं। कोलकाता पुलिस के अनुसार, अधिकांश मौतें सुबह के समय हुईं जब लोग घर से निकलने की कोशिश कर रहे थे। सीईएससी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाकों में बिजली सप्लाई बंद कर दी, जिससे आगे की दुर्घटनाओं को रोका जा सका।

पुलिस और नगर निगम ने लोगों को चेतावनी जारी की है कि वे पानी भरे इलाकों में नंगे पैर न चलें और बिजली के उपकरणों से दूर रहें। एएनआई न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शहर में आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जैसे 100 (पुलिस) और 1075 (आपदा प्रबंधन) को सक्रिय किया गया है, और निवासियों को घर में रहकर मौसम अपडेट्स फॉलो करने की सलाह दी जा रही है। पिछले वर्षों की ऐसी घटनाओं से सीखते हुए, सरकार ने बिजली सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी वायरिंग और अपर्याप्त ड्रेनेज अभी भी जोखिम बढ़ा रहे हैं।

दुर्गा पूजा पर प्रभाव और राहत कार्यों की स्थिति

आगामी दुर्गा पूजा के मौसम को देखते हुए, बारिश से कई पूजा मंडपों को नुकसान पहुंचा, जहां पंडाल की संरचनाएं ढह गईं या पानी में डूब गईं। आयोजकों को भारी असुविधा हुई, क्योंकि पूजा की तैयारी चरम पर है और अब मरम्मत कार्य में अतिरिक्त समय और खर्च लगेगा। केएमसी की टीमों ने सुबह 4 बजे से ही हुगली नदी में पानी निकालने के लिए सभी लॉक गेट खोल दिए हैं, और पंपिंग स्टेशनों को पूर्ण क्षमता पर चला रही हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में लगातार हो रही बारिश से निकासी प्रक्रिया धीमी पड़ रही है।

पश्चिम बंगाल सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत कार्यों को तेज किया है, जिसमें फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ टीमों और स्थानीय स्वयंसेवकों को शामिल किया गया है। एएनआई और पीटीआई की रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य पैकेट, पीने का पानी, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, जैसा कि राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उल्लेखित है।

आगे की मौसम भविष्यवाणी और आवश्यक सावधानियां

आईएमडी ने पूर्वानुमान दिया है कि कम दबाव का क्षेत्र और मजबूत होकर एक डिप्रेशन में बदल सकता है, जिससे बुधवार और गुरुवार को 100-200 मिमी तक की भारी बारिश हो सकती है। यह मौसम प्रणाली पूर्वी भारत में मानसून के अंतिम चरण से जुड़ी है, जो आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में सक्रिय रहती है और बंगाल में बाढ़ का खतरा बढ़ाती है। विभाग की सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि बादल का घना समूह अभी भी सक्रिय है, जिससे कोलकाता के अलावा आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।

लोगों को सलाह है कि वे मौसम ऐप्स या आईएमडी की वेबसाइट पर अपडेट्स चेक करें, आवश्यक यात्रा टालें और आपात स्थिति में सरकारी हेल्पलाइन से संपर्क करें। शहर की दीर्घकालिक तैयारी के तहत, केएमसी ने ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड करने की योजनाएं बनाई हैं, जिसमें नए पंप और बेहतर नालियां शामिल हैं, जैसा कि उनके वार्षिक रिपोर्ट्स में वर्णित है। यह घटना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रेखांकित करती है, जहां विशेषज्ञों जैसे आईआईटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ऐसी चरम मौसम घटनाएं भविष्य में बढ़ सकती हैं।

यह बारिश कोलकाता के निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई है, लेकिन सामूहिक प्रयासों और सरकारी हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। शहर की लचीलापन और बेहतर योजना से ऐसी आपदाओं से निपटने में मदद मिलेगी।