पटियाला के काली माता मंदिर का ₹75 करोड़ का नवीनीकरण शुरू
पंजाब के पटियाला शहर में स्थित प्रसिद्ध श्री काली माता मंदिर के लिए ₹75 करोड़ की महत्वाकांक्षी नवीनीकरण परियोजना 30 अक्टूबर 2025 को औपचारिक रूप से शुरू हुई। इस ऐतिहासिक पहल का उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने संयुक्त रूप से किया, जिन्होंने इस परियोजना को उत्तर भारत के सबसे सम्मानित धार्मिक स्थलों में से एक के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया।
मंदिर का गौरवशाली इतिहास और धार्मिक महत्व
श्री काली माता मंदिर का निर्माण पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंदर सिंह ने 1936 में शुरू करवाया था। मंदिर की नींव महाराजा भूपिंदर सिंह ने रखी, लेकिन इसके निर्माण को पूरा करने का महत्वपूर्ण कार्य महाराजा कर्म सिंह ने किया। पटियाला के माल रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर लगभग 89 वर्ष पुराना हो चुका है और उत्तर भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत तथा शाही संरक्षण का एक जीवंत प्रमाण है।
मंदिर में छह फीट ऊंची मां काली देवी की भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसे विशेष रूप से कलकत्ता (अब कोलकाता) से लाया गया था। महाराजा भूपिंदर सिंह इस पवित्र मूर्ति को रथ पर सवार करके स्वयं चलकर पटियाला लाए थे, जो उनकी गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। मंदिर में जलने वाली अखंड ज्योति भी बंगाल से लाई गई थी, जो आज तक निरंतर प्रज्वलित है। देवी की स्थापना तांत्रिक विधान पद्धति से की गई थी, जिसके कारण यहां बकरे की बलि देने की परंपरा प्रचलित है।
पटियाला रियासत की कुलदेवी राज राजेश्वरी
मंदिर परिसर का मूल केंद्र वास्तव में श्री राज राजेश्वरी जी का प्राचीन मंदिर है, जो पटियाला रियासत की कुलदेवी थीं। यह मंदिर काली माता मंदिर के पीछे स्थित है और इसे एक सिद्ध पीठ माना जाता है। राज राजेश्वरी मंदिर काली मंदिर से भी अधिक प्राचीन है और प्राचीन शैली में निर्मित है। मंदिर की एक विशेष परंपरा यह है कि राज राजेश्वरी देवी के हाथ में स्थित शस्त्र के दर्शन का अधिकार केवल पटियाला रियासत के शाही परिवार के सदस्यों को ही है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालुओं को पहले राज राजेश्वरी माता के दर्शन करने चाहिए, फिर काली माता के दर्शन, और अंत में भैरव जी के दर्शन करने चाहिए – इस विधान से दर्शन पूजन करने पर ही मंदिर की यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र
मंदिर में प्रतिदिन लगभग 10,000 श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं, जबकि हर शनिवार को यह संख्या लगभग 40,000 तक पहुंच जाती है। नवरात्रि के नौ पवित्र दिनों में तो यहां लगभग एक लाख भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है और रात नौ बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर के आसपास विशाल मेला लगता है और माल रोड से नौ दिनों के लिए वाहनों का आवागमन रोक दिया जाता है।
मंदिर की लोकप्रियता केवल पंजाब तक सीमित नहीं है – देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश मात्र से ही भक्तों के कष्टों का नाश होना शुरू हो जाता है। विशेष रूप से हर शनिवार को सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने की मान्यता है।
पंजाब सरकार ने मंदिर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ₹73.52 करोड़ की विभिन्न परियोजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जल आपूर्ति और स्वच्छता सुविधाएं
नवीनीकरण योजना का सबसे महत्वपूर्ण घटक भाखड़ा नहर से मंदिर के पवित्र सरोवर में स्वच्छ जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1.15 करोड़ है। यह पहल सरोवर में पवित्र और स्वच्छ जल बनाए रखने के लिए की जा रही है। इसके साथ ही मंदिर के पुराने सीवेज सिस्टम और वर्षा जल निकासी नेटवर्क को ₹49.06 लाख की लागत से पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है।
मंदिर के सरोवर को पूरी तरह से नवीनीकृत करने की योजना बनाई गई है। इस कार्य में सरोवर से गाद निकालना, उसे जलरोधी (वाटरप्रूफ) बनाना, और नए पत्थर के काम के साथ सुंदर सीमा और मार्ग बनाना शामिल है। यह कार्य सरोवर को न केवल स्वच्छ बल्कि दृश्य रूप से भी अधिक आकर्षक बनाएगा।
आधुनिक मनोरंजन सुविधाएं
सरोवर के पास ₹6.78 करोड़ की लागत से एक आधुनिक लाइट एंड साउंड शो की व्यवस्था की जा रही है, जो मंदिर के इतिहास और धार्मिक महत्व को दृश्य-श्रव्य माध्यम से प्रस्तुत करेगा। इस परियोजना के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। यह आधुनिक सुविधा विशेष रूप से युवा पीढ़ी को मंदिर के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने में सहायक होगी।
स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए ₹25 लाख की लागत से एक आम आदमी क्लिनिक स्थापित की जा रही है। यह क्लिनिक मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधा के रूप में कार्य करेगी।
नई इमारत में वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ₹15.11 लाख की लागत से आधुनिक लिफ्ट स्थापित की जा रही है। यह सुविधा सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं को मंदिर में आसानी से आवाजाही करने में मदद करेगी।
भीड़ प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा
नवरात्रि और शनिवार जैसे भीड़भाड़ वाले दिनों में आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक नया मार्ग, सीमा दीवार, प्रवेश द्वार और गलियारा बनाया जा रहा है। यह बुनियादी ढांचा लाखों श्रद्धालुओं के सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन को सुनिश्चित करेगा।
नेतृत्व की प्रतिबद्धता और दृष्टिकोण
अरविंद केजरीवाल ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार का यह विशेष दायित्व है कि वह अधिक जन महत्व वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे। उन्होंने पिछली प्रदेश सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जन महत्व वाले इन महत्वपूर्ण कार्यों को करने की इच्छा नहीं दिखाई। केजरीवाल ने श्रद्धालुओं को आश्वासन दिया कि यह संपूर्ण नवीनीकरण कार्य एक वर्ष के अंदर पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी इस परियोजना को पंजाब की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह नवीनीकरण न केवल मंदिर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा बल्कि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के अनुभव को भी बेहतर बनाएगा।
मंदिर का राष्ट्रीय स्मारक दर्जा
मंदिर की भव्य वास्तुकला और शिल्पकला के कारण इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिया गया है। मंदिर की दीवारों पर उत्कृष्ट शिल्पकला और डिजाइन महाराजा भूपिंदर सिंह की कला के प्रति विशेष रुचि को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक धरोहर न केवल धार्मिक महत्व का स्थान है, बल्कि स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना भी है।
यह नवीनीकरण परियोजना पंजाब सरकार की धार्मिक विरासत के संरक्षण और आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र स्थल को और भी भव्य रूप में संरक्षित करेगी।
