इजरायल को दो और बंधकों के अवशेष मिले, हमास ने कहा-दूसरों तक पहुंचने के लिए समय चाहिए
इज़राइल ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण लेकिन जटिल विकास की घोषणा की, जिसमें बताया गया कि उन्हें दो और बंधकों के शव प्राप्त हुए हैं। यह खबर कुछ घंटों पहले की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें इज़राइली सेना ने स्पष्ट किया कि हमास द्वारा पहले सौंपे गए एक शव में कोई बंधक नहीं था। इस अस्पष्टता ने नाजुक शांति समझौते को और अधिक भ्रमपूर्ण बना दिया है, जो पहले से ही तनावपूर्ण वार्ताओं और विश्वास की कमी से जूझ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की घटनाएं समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं, खासकर जब दोनों पक्षों के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
रेड क्रॉस की मध्यस्थता से हमास ने बुधवार की देर रात ये शव सौंपे। इन्हें इज़राइल पहुंचने के तुरंत बाद तेल अवीव स्थित एक उन्नत फोरेंसिक लैब में भेज दिया गया, जहां डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक विधियों से पहचान की प्रक्रिया शुरू हो गई। इज़राइली सेना ने जनता को चेतावनी दी कि बंधकों की पहचान अभी पूरी तरह सत्यापित नहीं हुई है, और किसी भी तरह की अटकलों से बचने की सलाह दी। यह प्रक्रिया संवेदनशील है, क्योंकि परिवार लंबे समय से अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस प्राप्ति की आधिकारिक पुष्टि की। कार्यालय के बयान में कहा गया कि रेड क्रॉस के माध्यम से बंधकों के शव वाली सील्ड पेटियां प्राप्त हुई हैं, जो अब आधिकारिक पहचान के लिए लैब में हैं। “आईडीएफ जनता से अपील करता है कि वे संवेदनशीलता बरतें और आधिकारिक पहचान का इंतजार करें। यह जानकारी सबसे पहले मृत बंधकों के परिवारों को ही दी जाएगी, ताकि उनकी गोपनीयता और भावनाओं का सम्मान हो,” बयान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया। बीबीसी की कवरेज के मुताबिक, नेतन्याहू सरकार इस मुद्दे पर घरेलू दबाव का सामना कर रही है, जहां विपक्षी दल समझौते की प्रगति पर सवाल उठा रहे हैं।
यह विकास वर्तमान युद्धविराम समझौते का हिस्सा है, जो हाल ही में अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता से हुआ। समझौते के तहत, हमास ने मंगलवार को चार शव सौंपे थे, जबकि सोमवार को चार अन्य शव लौटाए गए थे। ये शव गाजा से अंतिम 20 जीवित बंधकों की रिहाई के महज कुछ घंटों बाद प्राप्त हुए थे। कुल मिलाकर, इज़राइल को 28 बंधकों के शवों का इंतजार है, जिनमें से कई 7 अक्टूबर 2025 के हमास हमले के दौरान या उसके बाद अगवा किए गए थे। AP की रिपोर्ट बताती है कि इन बंधकों में विभिन्न उम्र के लोग शामिल हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी हैं, जो हमले के दौरान इज़राइल के दक्षिणी क्षेत्रों में रहते थे।
हालांकि, इस प्रक्रिया में विवाद की स्थिति तब उत्पन्न हुई जब इज़राइली सेना ने फोरेंसिक जांच के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि “हमास द्वारा सौंपा गया चौथा शव किसी भी ज्ञात बंधक से मेल नहीं खाता।” यह खुलासा बुधवार को किया गया, जिसके बाद तत्काल कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि यह शव किसका है। संभावना है कि यह कोई अन्य व्यक्ति हो सकता है, जो युद्ध के दौरान मारा गया हो, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई। इससे हमास की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठे, क्योंकि समझौते में स्पष्ट रूप से सभी 28 शवों को लौटाने का प्रावधान है। रॉयटर्स के अनुसार, इज़राइली अधिकारियों ने हमास पर “धोखाधड़ी” का आरोप लगाया, जबकि हमास ने इसे “तकनीकी समस्या” बताया।
हमास के सशस्त्र विंग, इज़ एडिन अल-कस्साम ब्रिगेड्स ने बुधवार को एक बयान जारी कर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। “बाकी शवों को खोजने और सुरक्षित निकालने के लिए व्यापक प्रयासों और विशेषज्ञ उपकरणों की आवश्यकता है। हम इस फाइल को पूरी तरह बंद करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन युद्धक्षेत्र की जटिलताओं के कारण इसमें समय लग सकता है,” मीडिया रिपोर्ट्स में उनके बयान का उद्धरण दिया गया। गुरुवार की सुबह तक, हमास के पास लगभग 19 शव अनुत्तरित बताए जा रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा के घनी आबादी वाले इलाकों और मलबे के ढेरों में खोज कार्य चुनौतीपूर्ण है, जहां बमबारी से कई जगहें तबाह हो चुकी हैं।
इधर, इज़राइल ने समझौते के एक अन्य हिस्से के तहत गाजा को 45 और फिलिस्तीनी शव लौटाए। यह कदम युद्धविराम के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने वाला है, जिससे कुल 90 शव अब तक गाजा वापस हो चुके हैं। गाजा की फोरेंसिक टीम ने इन शवों की प्रारंभिक जांच की और पाया कि उनमें स्पष्ट दुर्व्यवहार के निशान हैं, जैसे चोटें, फ्रैक्चर और अन्य हिंसा के प्रमाण। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय, जो हमास-नियंत्रित है, ने इन निष्कर्षों को सार्वजनिक किया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा भी उठाए जा रहे मुद्दों से मेल खाते हैं।
सोमवार को इज़राइल ने लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को रिहा किया था, जो बंधकों की रिहाई के बदले में एक प्रमुख कदम था। इनमें से कई कैदी लंबे समय से जेल में थे, और उनकी रिहाई ने गाजा में उत्साह का माहौल पैदा किया। हालांकि, इज़राइल का कहना है कि ये रिहाइयां चरणबद्ध हैं और सुरक्षा मूल्यांकन के अधीन।
गाजा लौटे शवों में दुर्व्यवहार के निशान, अधिकारियों ने कहा
इज़राइल को आने वाले दिनों में और फिलिस्तीनी शव सौंपने की उम्मीद है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके पास कुल कितने शव हैं या कितने लौटाए जाएंगे। यह अनिश्चितता समझौते की पारदर्शिता पर सवाल खड़ी कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये शव या तो इज़राइली हिरासत में मारे गए फिलिस्तीनियों के हो सकते हैं या इज़राइली सैनिकों द्वारा गाजा के संघर्ष क्षेत्रों से एकत्र किए गए। पूरे युद्ध के दौरान, इज़राइल की सेना ने बंधकों के शव खोजने के लिए सैकड़ों कब्रों को खोदा है, जो एक विवादास्पद प्रक्रिया रही है। IDF के अनुसार, यह अभियान गाजा के तहस-नहस इलाकों में चलाया गया, जहां कई नागरिक और लड़ाकू एक साथ मारे गए।
पहले लौटे शवों की फोरेंसिक जांच के दौरान, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को 32 अज्ञात शवों की तस्वीरें और विवरण जारी किए। इसका उद्देश्य परिवारों को लापता रिश्तेदारों की पहचान में मदद करना है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई शव बुरी तरह सड़े हुए या जल चुके थे, जो युद्ध की भयावहता को दर्शाता है। कुछ शवों के अंग या दांत गायब थे, जबकि अन्य पर मलबे, रेत और धूल की परत चढ़ी हुई थी, जो लंबे समय तक खुले में पड़े रहने का संकेत देती है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने इज़राइल द्वारा गाजा में डीएनए टेस्टिंग उपकरणों और विशेषज्ञों की आवाजाही पर लगाई गई सख्त पाबंदियों का हवाला दिया। इन प्रतिबंधों के कारण मोर्चरी को अक्सर शारीरिक विशेषताओं, जैसे चेहरे की बनावट, टैटू या कपड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो पहचान प्रक्रिया को धीमा और त्रुटिपूर्ण बनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट्स भी इस समस्या को रेखांकित करती हैं, जहां गाजा के स्वास्थ्य ढांचे पर युद्ध का गहरा प्रभाव पड़ा है।
शव प्राप्त करने वाली फोरेंसिक टीम ने विस्तृत जांच में पाया कि कई शव अभी भी हथकड़ियों या बंधनों में थे, या उन पर स्पष्ट शारीरिक दुर्व्यवहार के निशान थे। खान यूनिस के नासर अस्पताल में शव प्राप्त करने वाली आयोग के सदस्य सादेह हमाद ने एसोसिएटेड प्रेस को दिए साक्षात्कार में कहा, “कुछ शव हाथ और पैर बंधे हुए ही पहुंचे। इनमें यातना, पीटने और यहां तक कि फांसी के स्पष्ट निशान दिख रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि ये शव मुख्य रूप से 25 से 70 साल के पुरुषों के थे। ज्यादातर के गलों में रस्सी या पट्टियां बंधी हुई थीं, जो क्रूरता की गवाही देती हैं। एक शव में तो गले के चारों ओर रस्सी का निशान साफ दिख रहा था।
ज्यादातर शव सिविलियन कपड़ों में थे, जो संकेत देता है कि वे आम नागरिक हो सकते थे, लेकिन कुछ वर्दी धारण किए हुए थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे हमास या अन्य उग्रवादी समूहों के सदस्य रहे होंगे। हमाद ने चिंता जताई कि रेड क्रॉस ने केवल तीन मृतकों के नाम और विवरण प्रदान किए, जिसके कारण सैकड़ों परिवार अभी भी अपने रिश्तेदारों की किस्मत के बारे में अनिश्चित हैं। यह स्थिति गाजा में मानसिक तनाव को बढ़ा रही है, जहां युद्ध ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है।
यह दो साल लंबा युद्ध हमास के 7 अक्टूबर 2025 को इज़राइल पर किए गए आश्चर्यजनक हमले से भड़का था। इस हमले में हमास लड़ाकों ने इज़राइल के दक्षिणी सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की, जिसमें रॉकेट हमले, गोलीबारी और अपहरण शामिल थे। परिणामस्वरूप, लगभग 1,200 इज़राइली नागरिक और सैनिक मारे गए, और सैकड़ों को बंधक बनाया गया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जो हमास-नियंत्रित सरकार का हिस्सा है, इस संघर्ष में अब तक लगभग 68,000 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। ये आंकड़े संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स से मेल खाते हैं, जो युद्ध के भयानक मानवीय प्रभाव को उजागर करती हैं, जिसमें विस्थापन, भुखमरी और स्वास्थ्य संकट शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें यूएन और यूरोपीय संघ शामिल हैं, दोनों पक्षों से पूर्ण युद्धविराम और शांति वार्ताओं की मांग कर रहा है, लेकिन भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
