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इंडोनेशिया ने डेटा साझा करने में विफलता पर टिकटॉक का पंजीकरण निलंबित किया

इंडोनेशिया की संचार और डिजिटल मामलों की मंत्रालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें टिकटॉक प्राइवेट लिमिटेड की इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ऑपरेटर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (टीडीपीएसई) को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया गया है। यह कदम प्लेटफॉर्म द्वारा अगस्त के अंत में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनी लाइव स्ट्रीमिंग गतिविधियों से संबंधित पूरी और विस्तृत जानकारी प्रदान न करने के कारण उठाया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह निलंबन टिकटॉक की पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, खासकर जब देश की सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता दांव पर हो।

टिकटॉक, जो चीन की प्रमुख तकनीकी कंपनी बाइटडांस का स्वामित्व वाला लोकप्रिय शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म है, ने इन प्रदर्शनों के दौरान अपनी लाइव स्ट्रीमिंग सुविधा को स्वेच्छा से अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। कंपनी के अधिकारियों ने कहा था कि यह कदम प्लेटफॉर्म को एक सुरक्षित, सभ्य और उपयोगकर्ता-अनुकूल स्थान बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया, जहां घृणा फैलाने वाली या हिंसक सामग्री को रोका जा सके। हालांकि, इंडोनेशियाई सरकार ने कंपनी से विस्तृत डेटा की मांग की, जिसमें ट्रैफिक पैटर्न, स्ट्रीमिंग सत्रों की संख्या, उपयोगकर्ता इंटरैक्शन और मुद्रीकरण से जुड़ी सभी जानकारियां शामिल थीं। यह मांग कानूनी रूप से बाध्यकारी थी, क्योंकि देश का डिजिटल कानून कंपनियों को निगरानी के लिए पूर्ण सहयोग करने का आदेश देता है।

दुर्भाग्य से, टिकटॉक ने केवल आंशिक डेटा ही प्रस्तुत किया, और अपनी आंतरिक गोपनीयता प्रक्रियाओं तथा अंतरराष्ट्रीय डेटा सुरक्षा मानकों का हवाला देकर बाकी जानकारी छिपा ली। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अलेक्जेंडर साबर ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इससे टिकटॉक ने निजी इलेक्ट्रॉनिक सेवा प्रदाता के रूप में अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लंघन किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी लापरवाही न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि उपयोगकर्ताओं के विश्वास को भी कमजोर करती है। इंडोनेशिया का वर्तमान कानूनी ढांचा सख्ती से कहता है कि लाइसेंस प्राप्त कोई भी कंपनी, चाहे वह विदेशी हो या स्थानीय, सरकार को पर्यवेक्षण के उद्देश्य से अपना पूरा डेटा सौंपनी पड़ती है। उल्लंघन करने पर न केवल निलंबन, बल्कि पूर्ण ब्लॉकिंग या जुर्माने की सजा भी हो सकती है। इस घटना पर टिकटॉक की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो स्थिति को और जटिल बना रही है।

इंडोनेशिया में टिकटॉक की भारी लोकप्रियता को देखते हुए यह कदम काफी प्रभावशाली है। यहां के 100 मिलियन से अधिक सक्रिय यूजर्स इसे देश का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाते हैं, जहां युवा पीढ़ी मनोरंजन, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए इस पर निर्भर करती है। निलंबन से प्लेटफॉर्म की सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है, जैसे कंटेंट क्रिएटर्स की आय प्रभावित होना या वैकल्पिक ऐप्स की ओर रुझान बढ़ना। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मामला लंबा खिंचा, तो इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि टिकटॉक डिजिटल विज्ञापन और ई-कॉमर्स के माध्यम से अरबों डॉलर का कारोबार करता है।

विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग का दुरुपयोग

मंत्रालय के विस्तृत बयान में खुलासा किया गया कि अगस्त के अंत से सितंबर की शुरुआत तक चले राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों के दौरान टिकटॉक की लाइव स्ट्रीम फीचर का व्यापक दुरुपयोग हुआ। कुछ संदिग्ध खातों, जो ऑनलाइन जुआ गतिविधियों से सीधे जुड़े थे, ने इस सुविधा का इस्तेमाल करके लाइव सत्रों के माध्यम से अवैध कमाई की। ये खाते न केवल जुआ प्रचार कर रहे थे, बल्कि दर्शकों को लुभाने के लिए आकर्षक स्ट्रीम्स चला रहे थे, जिससे प्लेटफॉर्म पर अनियंत्रित सामग्री का प्रसार हुआ। प्रदर्शन मुख्य रूप से छात्रों, श्रमिक संगठनों और नागरिक समूहों द्वारा आयोजित किए गए थे, जो सरकार के प्रस्तावित रोजगार सृजन विधेयक के खिलाफ थे। इस विधेयक को श्रम कानूनों में बदलाव लाने वाला माना जा रहा था, जो नौकरियों की गुणवत्ता और कार्यकर्ता अधिकारों को प्रभावित कर सकता था।

इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें सुरक्षा बलों की कार्रवाई से कम से कम छह मौतें हुईं और सैकड़ों लोग घायल हुए। सरकार ने तत्काल सुरक्षा उपाय कड़े कर दिए, जिसमें सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी और सोशल मीडिया पर अफवाहों की निगरानी शामिल थी। ऐसे संवेदनशील समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे सूचना प्रसार का माध्यम बनते हैं। लेकिन यदि लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाएं अवैध कार्यों को बढ़ावा दें, तो यह राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। इंडोनेशिया में जुआ एक ऐसा अपराध है जिसे पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है, और ऑनलाइन जुआ को रोकने के लिए विशेष साइबर टास्क फोर्स काम करते हैं। पिछले वर्षों में सरकार ने कई ऐप्स और वेबसाइट्स को ब्लॉक किया है, जो जुआ से जुड़े थे।

टिकटॉक ने प्रदर्शनों के दौरान लाइव फीचर बंद करके एक सकारात्मक कदम उठाया, लेकिन डेटा न देने से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी सामग्री नीतियों को मजबूत करने का दावा किया है, जिसमें एआई-आधारित मॉडरेशन टूल्स का उपयोग शामिल है। फिर भी, स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को राष्ट्रीय कानूनों का पूर्ण पालन करना चाहिए, बिना किसी बहाने के। यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण की बढ़ती मांग को दर्शाती है, जहां उपयोगकर्ता सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।

कानूनी आधार और संभावित प्रभाव

इंडोनेशिया का इलेक्ट्रॉनिक इंफॉर्मेशन एंड ट्रांजेक्शन लॉ (ईआईटी लॉ), जो 2008 में लागू हुआ और बाद में संशोधित किया गया, डिजिटल कंपनियों के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है। इस कानून के तहत, सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ऑपरेटर्स को टीडीपीएसई प्राप्त करने के बाद सरकार के साथ नियमित डेटा साझाकरण करना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों, गलत सूचना और अवैध गतिविधियों पर नजर रखना है। मंत्रालय ने इस मामले में टिकटॉक को कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन अपर्याप्त प्रतिक्रिया मिलने पर निलंबन का फैसला लिया गया। अधिकारी अलेक्जेंडर साबर ने कहा कि यह कार्रवाई प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को मजबूत करने और उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए है, न कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से।

यदि टिकटॉक पूरी जानकारी प्रदान नहीं करता या अपील में असफल रहता है, तो निलंबन स्थायी रूप से बदल सकता है, जिससे देश में इसकी सभी सेवाएं बंद हो जाएंगी। इससे प्रभावित होंगे कंटेंट क्रिएटर्स, जो लाइव स्ट्रीमिंग से लाखों रुपये कमाते हैं, साथ ही विज्ञापनदाता और छोटे व्यवसाय जो टिकटॉक पर निर्भर हैं। वैश्विक स्तर पर देखें तो टिकटॉक पहले भी कई देशों में विवादों का शिकार हुआ है, जैसे अमेरिका में डेटा सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रतिबंध की धमकी। इंडोनेशिया में 2023 में टिकटॉक को ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन पर पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था, जब सरकार ने स्थानीय व्यापारियों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। उस समय कंपनी ने अपनी शॉपिंग फीचर बंद कर दी, लेकिन मुख्य ऐप चला रही थी।

विशेषज्ञों का मत है कि यह घटना अन्य विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है, जहां डेटा गोपनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इंडोनेशियाई सरकार अब अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर भी सख्त निगरानी रख रही है, ताकि ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं। भविष्य में, कंपनियों को स्थानीय कानूनों के अनुपालन के लिए अधिक पारदर्शी नीतियां अपनानी पड़ेंगी। कुल मिलाकर, यह मामला डिजिटल युग में सरकारी नियंत्रण और वैश्विक प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

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