भोजन

14 भारतीय जीआई-टैग खाद्य पदार्थ जो दुनिया भर में मान्यता प्राप्त कर रहे हैं

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध भौगोलिक परिस्थितियां देश को अनोखे स्वादों से भरपूर बनाती हैं। जीआई-टैग, यानी भौगोलिक संकेतक, ऐसे उत्पादों को विशेष पहचान देते हैं जो किसी खास क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और परंपराओं से जुड़े होते हैं। यह लेख १४ ऐसे भारतीय जीआई-टैग वाले खाद्य पदार्थों पर केंद्रित है जो न केवल देश में लोकप्रिय हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इनकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग निर्यात को बढ़ावा दे रही है और स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचा रही है।​

जीआई-टैग प्रणाली भारत में २००३ से लागू है, जो उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करती है। विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत यह टैग नकली उत्पादों से बचाव करता है। २०२५ तक भारत में ६०० से अधिक जीआई-टैग हैं, जिनमें से कई खाद्य पदार्थ वैश्विक स्तर पर निर्यात हो रहे हैं, जैसे दार्जिलिंग चाय और बासमती चावल। यह लेख सरल शब्दों में इन १४ उत्पादों की कहानी बताएगा, उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पोषण मूल्य और वैश्विक सफलता पर प्रकाश डालेगा। हम तालिकाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण तथ्यों को आसानी से समझाएंगे। जीआई टैग न केवल उत्पादों की गुणवत्ता को प्रमाणित करता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत भी बनाता है। भारत के ये खाद्य पदार्थ विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति का स्वाद बिखेर रहे हैं, और इनकी लोकप्रियता निर्यात आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देती है।​

1. दार्जिलिंग चाय: पहाड़ों की सुगंध

दार्जिलिंग चाय भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त उत्पाद है, जो २००४ में मिला। यह पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के ऊंचे पहाड़ों में उगाई जाती है। यहां की ठंडी जलवायु, कोहरे भरी हवा और समुद्र तल से ६०० से २००० मीटर की ऊंचाई इसे अनोखी बनाती है। ब्रिटिश काल से यह चाय विश्व प्रसिद्ध रही है, और आज भी पारंपरिक चाय बागान स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं। दार्जिलिंग चाय की हर पत्ती में हिमालय की शुद्धता झलकती है, जो इसे अन्य चायों से अलग करती है। वैश्विक बाजार में इसकी मांग इतनी है कि नकली उत्पादों की समस्या आम हो गई, लेकिन जीआई टैग ने इसे सुरक्षित किया।​

दार्जिलिंग चाय को ‘चैंपियन ऑफ टेस्ट’ कहा जाता है। इसके पत्ते हल्के हरे से सुनहरे रंग के होते हैं। यह चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। वैश्विक स्तर पर, यह ब्रिटेन, जापान और अमेरिका में बहुत लोकप्रिय है। २०२४ में इसके निर्यात में १५% की वृद्धि हुई।​

स्थानीय किसान पारंपरिक तरीके से इसे चुनते और प्रोसेस करते हैं। नकली चाय से बचाव के लिए जीआई-टैग महत्वपूर्ण है। यह चाय न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देती है। दार्जिलिंग के चाय बागान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जहां वे ताजा चाय बनते देख सकते हैं।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००४
मुख्य गुण हल्का स्वाद, मस्केटी सुगंध
पोषण मूल्य एंटीऑक्सीडेंट, कैफीन कम
वैश्विक निर्यात यूरोप, अमेरिका; वार्षिक १० मिलियन किलो

2. बासमती चावल: सुगंधित चावल की रानी

बासमती चावल उत्तर भारत के उपजाऊ मैदानों से आता है, मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से। २०१६ में इसे जीआई-टैग मिला। इसकी लंबी अनाज और सुगंध इसे खास बनाती है। हिमालय की नदियों का पानी और रेतीली मिट्टी बासमती को उसकी अनोखी सुगंध देती है। सदियों से यह चावल भारतीय भोजन का अभिन्न हिस्सा रहा है, खासकर बिरयानी और पुलाव में। बासमती की खेती किसानों के लिए आजीविका का स्रोत है, और जीआई टैग ने इसे वैश्विक ब्रांड बनाया।​

बासमती चावल पकने पर २ गुना लंबा हो जाता है और चिपचिपा नहीं होता। यह कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है, जो डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद है। विश्व में, यह मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका में पसंद किया जाता है। भारत इसका ७०% निर्यात करता है।​

किसान पारंपरिक सिंचाई से इसे उगाते हैं। जीआई-टैग ने पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा में मदद की। २०२५ में इसके निर्यात मूल्य ५० लाख टन से अधिक हो गया। बासमती की लोकप्रियता ने भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१६
मुख्य गुण लंबे अनाज, सुगंधित
पोषण मूल्य फाइबर, विटामिन बी
वैश्विक निर्यात मध्य पूर्व; वार्षिक ५० लाख टन

3. कश्मीर केसर: लाल सोने की चमक

कश्मीर का केसर दुनिया का सबसे महंगा मसाला है। २०२० में जीआई-टैग मिला। पीली घाटी की विशेष मिट्टी और जलवायु इसे अनोखा बनाती है। कश्मीर की ऊंची घाटियां और ठंडी हवाएं केसर की फसल को पोषण देती हैं। यह मसाला प्राचीन काल से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में उपयोग होता रहा है। केसर की हर डली में कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता समाई है, जो इसे वैश्विक बाजार में मूल्यवान बनाती है।​

केसर को फूलों से हाथ से निकाला जाता है। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है और डिप्रेशन कम करने में मदद करता है। वैश्विक बाजार में, स्पेन और ईरान के बाद कश्मीर का केसर तीसरा स्थान रखता है। निर्यात में २०% वार्षिक वृद्धि हो रही है।​

स्थानीय कारीगर पारंपरिक विधि अपनाते हैं। जीआई-टैग ने नकली केसर से सुरक्षा दी। यह खाने, दवा और कॉस्मेटिक्स में उपयोग होता है। केसर की खेती ने स्थानीय महिलाओं को रोजगार प्रदान किया।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००० (अपडेटेड २०२०)
मुख्य गुण गहरा लाल रंग, मजबूत सुगंध
पोषण मूल्य एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी
वैश्विक निर्यात यूरोप, अमेरिका; ३-५ टन/वर्ष

4. अल्फांसो आम: महाराष्ट्र का राजा

अल्फांसो आम को ‘हापूस’ भी कहते हैं। २००८ में जीआई-टैग मिला। कोकण क्षेत्र की मिट्टी इसे मीठा और रसीला बनाती है। अरब सागर की नमी और उष्णकटिबंधीय जलवायु अल्फांसो को स्वादिष्ट फल बनाती है। यह आम मुगल काल से राजसी भोज का हिस्सा रहा है। अल्फांसो की हर फली में महाराष्ट्र की उर्वर भूमि की कहानी है, जो इसे निर्यात के लिए आदर्श बनाती है।​

यह आम विटामिन ए और सी से समृद्ध है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है। विश्व स्तर पर, यूरोप और मध्य पूर्व में इसकी मांग है। भारत १००% अल्फांसो का निर्यात करता है।​ किसान जैविक खेती अपनाते हैं। जीआई-टैग ने ब्रांडिंग में मदद की। २०२४ में २५,००० टन निर्यात हुआ। अल्फांसो ने भारतीय फलों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००८
मुख्य गुण मीठा स्वाद, पीला गूदा
पोषण मूल्य विटामिन ए, फाइबर
वैश्विक निर्यात यूरोप; २५,००० टन/वर्ष

5. नागपुर संतरा: विटामिन सी का खजाना

नागपुर संतरा महाराष्ट्र का गौरव है। २०१३ में जीआई-टैग मिला। अमरावती के मैदानों में यह उगता है। विदर्भ क्षेत्र की काली मिट्टी और नदियों का पानी संतरे को रसीला बनाता है। यह फल स्थानीय बाजारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मेजों तक पहुंचा है। नागपुर संतरा की चमकदार भुजा और मीठा रस इसे परिवारों का पसंदीदा बनाता है।​

इसका रस मीठा और बीज रहित होता है। विटामिन सी से भरपूर, यह हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। निर्यात दुबई और सिंगापुर में हो रहा है। २०२५ में १०,००० टन निर्यात लक्ष्य है।​ किसान ड्रिप इरिगेशन का उपयोग करते हैं। जीआई-टैग ने स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत की। नागपुर अब ‘ऑरेंज सिटी’ के नाम से जाना जाता है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१३
मुख्य गुण मीठा रस, पतला छिलका
पोषण मूल्य विटामिन सी, पोटैशियम
वैश्विक निर्यात एशिया; १०,००० टन/वर्ष

6. हैदराबाद हलीम: रमजान का स्वाद

हैदराबाद हलीम एक पारंपरिक व्यंजन है, जो गेहूं, मांस और दाल से बनता है। २०१० में जीआई-टैग मिला। निजाम शासन की विरासत से जुड़ा यह व्यंजन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। रमजान के महीने में हैदराबाद की गलियां हलीम की सुगंध से महक उठती हैं। यह व्यंजन धीमी आंच पर लंबे समय तक पकने से अपनी क्रीमी बनावट प्राप्त करता है, जो इसे अन्य दालों से अलग करता है। हलीम की क्रीमी बनावट और मसालों का संतुलन इसे अनुभव करने लायक बनाता है। निजामों के दरबार से निकलकर यह अब वैश्विक व्यंजनों में स्थान बना रहा है, जहां मुस्लिम समुदाय इसे विशेष रूप से पसंद करता है। जीआई टैग ने इसकी प्रामाणिक रेसिपी को संरक्षित किया, ताकि नकली संस्करण बाजार में न आएं।​

यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है। रमजान में प्रसिद्ध, यह धीमी आंच पर १२ घंटे पकता है। वैश्विक मुस्लिम समुदाय में लोकप्रिय, दुबई में निर्यात हो रहा है।​ निजाम की विरासत से जुड़ा यह व्यंजन अब अंतरराष्ट्रीय त्योहारों में बनता है। जीआई-टैग ने प्रामाणिकता सुनिश्चित की। हलीम ने हैदराबाद को खानपान का केंद्र बनाया।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१०
मुख्य गुण क्रीमी बनावट, मसालेदार स्वाद
पोषण मूल्य प्रोटीन, आयरन
वैश्विक निर्यात मध्य पूर्व; सीमित लेकिन बढ़ता

7. तिरुपति लड्डू: भगवान का भोग

तिरुपति लड्डू आंध्र प्रदेश के तिरुमाला मंदिर का प्रसाद है। २००९ में जीआई-टैग मिला। लाखों तीर्थयात्रियों के लिए यह आस्था का प्रतीक है। मंदिर की रसोई में पारंपरिक तरीके से बनने वाले ये लड्डू घी और बेसन की मिठास से भरपूर होते हैं। तिरुमाला की पवित्र भूमि और मंदिर की प्राचीन परंपराएं इन लड्डुओं को विशेष महत्व देती हैं, जो दान और प्रसाद के रूप में वितरित होते हैं। तिरुपति लड्डू की हर कटाई में भक्ति की मिठास समाई है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय हो रहा है, जो मंदिर दर्शन के बाद इसे स्वाद लेने आते हैं। जीआई टैग ने मंदिर की गोपनीय रेसिपी को सुरक्षित रखा, ताकि बाहरी नकली उत्पाद न बिकें।​

यह बेसन, घी और चीनी से बनता है। वसा और कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा देता है। तीर्थयात्रियों के अलावा, विदेशी पर्यटक इसे पसंद करते हैं। अमेरिका और यूरोप में निर्यात शुरू हुआ।​ मंदिर की पारंपरिक रेसिपी का पालन होता है। जीआई-टैग ने नकली लड्डू रोके। यह लड्डू धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देता है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००९
मुख्य गुण नरम, मीठा
पोषण मूल्य कार्बोहाइड्रेट, वसा
वैश्विक निर्यात अमेरिका; धार्मिक बाजार

8. बनारसी पान: मसालेदार पान

बनारसी पान उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक प्रतीक है। २०१७ में जीआई-टैग मिला। वाराणसी की गलियों में पान की दुकानें सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं। ताजे पत्ते और मसालों का मिश्रण बनारसी पान को अनोखा बनाता है। गंगा नदी के किनारे उगाए गए पान के पत्ते अपनी कोमलता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं, जो स्थानीय कारीगरों द्वारा विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। बनारसी पान चबाने का आनंद भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। यह न केवल पाचन के लिए फायदेमंद है, बल्कि सामाजिक सभाओं में भी आदान-प्रदान का माध्यम बनता है। जीआई टैग ने वाराणसी के पान उद्योग को वैश्विक पहचान दी, जिससे एनआरआई समुदाय में इसकी मांग बढ़ी।​

यह सुपारी, चूना और मसालों से बनता है। पाचन में सहायक। वैश्विक एनआरआई समुदाय में लोकप्रिय, अमेरिका में निर्यात।​ पारंपरिक विधि से तैयार। जीआई-टैग ने ब्रांड वैल्यू बढ़ाई। बनारसी पान अब वैश्विक मंच पर चमक रहा है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१७
मुख्य गुण ताजा पत्ते, मसालेदार
पोषण मूल्य पाचन एंजाइम्स
वैश्विक निर्यात यूएसए; सांस्कृतिक

9. ढाका मसिनद राम मिठाई: बंगाल का मिठास

मुर्शिदाबाद का ढाका मसिनद राम २०१७ में जीआई-टैग प्राप्त। चीनी और दूध से बनी यह मिठाई महीन है। बंगाल की मिठाई परंपरा में यह विशेष स्थान रखती है। हाथ से रोल की जाने वाली यह मिठाई त्योहारों की शान है। भावर नदी के किनारे बनी यह मिठाई अपनी नाजुक बनावट के लिए जानी जाती है, जो पारंपरिक बंगाली कला को दर्शाती है। ढाका मसिनद राम की नाजुक बनावट बंगाली कला को दर्शाती है। दुर्गा पूजा और अन्य उत्सवों में यह मिठाई अनिवार्य होती है, और अब वैश्विक बंगाली डायस्पोरा में भी लोकप्रिय हो रही है। जीआई टैग ने स्थानीय कारीगरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की, ताकि यह परंपरा जीवित रहे।​

यह कैल्शियम से भरपूर। बंगाली त्योहारों में प्रसिद्ध, अब यूरोप में निर्यात।​ हाथ से बनाई जाती है। जीआई-टैग ने स्थानीय कारीगरों को लाभ दिया। यह मिठाई बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१७
मुख्य गुण महीन बनावट, मीठा स्वाद
पोषण मूल्य कैल्शियम, प्रोटीन
वैश्विक निर्यात यूरोप; मिठाई बाजार

10. कूर्ग अरेबिका कॉफी: कर्नाटक की सुगंध

कूर्ग अरेबिका कॉफी कर्नाटक के पश्चिमी घाट से। २००९ में जीआई-टैग। कोडागु की पहाड़ियां और वर्षा इसे समृद्ध बनाती हैं। कॉफी बागान स्थानीय जीवन का हिस्सा हैं। पश्चिमी घाट की जैव विविधता और छायादार वृक्षों के बीच उगाई जाने वाली यह कॉफी अपनी समृद्ध सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। कूर्ग कॉफी की हर घूंट में दक्षिण भारत की ताजगी है। स्थानीय किसान पारंपरिक तरीके से फसल चुनते हैं, जो इसे जैविक और शुद्ध बनाता है। जीआई टैग ने कूर्ग को कॉफी पर्यटन का केंद्र बनाया, जहां पर्यटक बागानों का दौरा करते हैं।​

कम एसिडिटी वाली यह कॉफी एंटीऑक्सीडेंट देती है। यूरोप और अमेरिका में निर्यात, स्टारबक्स जैसी चेन में उपयोग।​ छायादार खेती से उगाई जाती है। जीआई-टैग ने प्रीमियम मूल्य सुनिश्चित किया। यह कॉफी पर्यटन को भी बढ़ावा देती है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००९
मुख्य गुण समृद्ध स्वाद, कम कड़वाहट
पोषण मूल्य एंटीऑक्सीडेंट
वैश्विक निर्यात यूरोप; ५,००० टन/वर्ष

11. नवार राइस: केरल का औषधीय चावल

नवार राइस केरल का आयुर्वेदिक चावल है। २००७ में जीआई-टैग। केरल की नदियां और उष्णकटिबंधीय जलवायु इसे औषधीय बनाती हैं। आयुर्वेद में इसका उपयोग सदियों से होता है। केरल के खेतों में विशेष रूप से उगाया जाने वाला यह चावल अपनी लाल भूसी और पोषक गुणों के लिए जाना जाता है, जो स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। नवार राइस स्वास्थ्य के लिए चावल से अधिक है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा सुझाया जाने वाला यह चावल जोड़ों के दर्द और पोषण की कमी को दूर करता है। जीआई टैग ने केरल की पारंपरिक खेती को संरक्षित किया, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य बाजार में इसकी पहुंच बढ़ी।​

यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, जोड़ों के दर्द कम करता है। जापान और अमेरिका में निर्यात, स्वास्थ्य उत्पाद के रूप में।​ पारंपरिक खेती से तैयार। जीआई-टैग ने वैश्विक मान्यता दी। यह चावल केरल की चिकित्सा परंपरा को संरक्षित करता है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २००७
मुख्य गुण लाल भूसी, चिपचिपा नहीं
पोषण मूल्य प्रोटीन, आयरन
वैश्विक निर्यात एशिया, यूएस; स्वास्थ्य बाजार

12. चक हाओ ब्लैक राइस: मणिपुर का काला मोती

चक हाओ मणिपुर का काला चावल है। २०२० में जीआई-टैग। पूर्वोत्तर की पहाड़ियां इसे पोषक बनाती हैं। स्थानीय जनजातियां इसे विशेष अवसरों पर खाती हैं। मणिपुर की घाटियों में उगाया जाने वाला यह काला चावल अपनी एंथोसायनिन सामग्री के कारण एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर है। चक हाओ की काली चमक स्वास्थ्य का प्रतीक है। जनजातीय संस्कृति में यह चावल उत्सवों और औषधीय उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। जीआई टैग ने पूर्वोत्तर की जैव विविधता को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय किसानों को लाभ हुआ।​

एंथोसायनिन से भरपूर, यह एंटी-एजिंग है। ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में निर्यात।​ पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है। जीआई-टैग ने जैव विविधता संरक्षित की। यह चावल मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०२०
मुख्य गुण काला रंग, नट्टी स्वाद
पोषण मूल्य एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर
वैश्विक निर्यात यूरोप; १,००० टन/वर्ष

13. त्रिपुरा क्वीन पाइनएप्पल: पूर्वोत्तर का राजा

त्रिपुरा क्वीन पाइनएप्पल २०१५ में जीआई-टैग प्राप्त। त्रिपुरा की उपजाऊ भूमि और वर्षा इसे मीठा बनाती है। पूर्वोत्तर भारत का यह फल जैव विविधता का उदाहरण है। त्रिपुरा की उष्णकटिबंधीय जलवायु और नदियों का पानी इस पाइनएप्पल को रसीला और स्वादिष्ट बनाता है। क्वीन पाइनएप्पल की रसीली फली त्रिपुरा की समृद्धि दर्शाती है। स्थानीय किसान पारंपरिक विधियों से इसे उगाते हैं, जो पर्यावरण अनुकूल है। जीआई टैग ने पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, निर्यात के नए अवसर खोले।​

विटामिन सी और ब्रोमेलेन से भरपूर, पाचन सुधारता है। दुबई और सिंगापुर में निर्यात।​ उष्णकटिबंधीय जलवायु में उगता है। जीआई-टैग ने किसानों को लाभ दिया। यह फल पूर्वोत्तर अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०१५
मुख्य गुण मीठा, रसीला
पोषण मूल्य विटामिन सी, एंजाइम्स
वैश्विक निर्यात मध्य पूर्व; ५,००० टन/वर्ष

14. स्वादेशी इंडी लाइम: नया निर्यात सितारा

स्वादेशी इंडी लाइम कर्नाटक का है। २०२४ में जीआई-टैग। कर्नाटक की मिट्टी और जलवायु इसे तीखा स्वाद देती है। यह नींबू जैविक खेती का प्रतीक है। कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में उगाया जाने वाला यह लाइम अपनी हरी रंगत और ताजगी के लिए जाना जाता है। इंडी लाइम की हर बूंद स्वास्थ्य लाभ देती है। जैविक विधियों से तैयार यह नींबू इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उपयोग होता है। जीआई टैग ने इसे वैश्विक बाजार में प्रवेश दिलाया, खासकर यूरोपीय देशों में।​

विटामिन सी से भरपूर, यह इम्यूनिटी बढ़ाता है। २०२५ में यूके को पहला निर्यात।​ जैविक खेती से तैयार। जीआई-टैग ने वैश्विक बाजार खोला। यह नींबू भारतीय कृषि की नई उम्मीद है।​

विशेषता विवरण
जीआई-टैग वर्ष २०२४
मुख्य गुण हरा, तीखा स्वाद
पोषण मूल्य विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट
वैश्विक निर्यात यूके, यूएई; नया लेकिन बढ़ता

निष्कर्ष: जीआई-टैग का वैश्विक प्रभाव

ये १४ जीआई-टैग वाले खाद्य पदार्थ भारत की विविधता को दर्शाते हैं। वे न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी। वैश्विक मान्यता से निर्यात बढ़ा है, जो किसानों की आय दोगुनी कर रहा है। सरकार की योजनाएं जैसे एपीडा निर्यात को प्रोत्साहित कर रही हैं। जीआई टैग ने न केवल उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित की, बल्कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया। भविष्य में और अधिक उत्पाद वैश्विक पटल पर चमकेंगे, सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हुए।

ये खाद्य पदार्थ भारत की नरम शक्ति का उदाहरण हैं, जो स्वाद के माध्यम से विश्व को जोड़ रहे हैं। निर्यात आंकड़ों से साफ है कि जीआई टैग भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। इन उत्पादों की सफलता से प्रेरित होकर, अधिक क्षेत्र जीआई टैग के लिए आवेदन कर रहे हैं, जो देश की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगा।