अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में 10 भारतीय प्रवासी खाद्य उद्यमियों का दबदबा
भारतीय प्रवासी समुदाय दुनिया भर में फैला हुआ है। ये लोग न केवल अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि खाद्य उद्योग में भी क्रांति ला रहे हैं। इस लेख में हम १० ऐसे भारतीय मूल के खाद्य उद्यमियों की कहानियां जानेंगे जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलता हासिल कर चुके हैं। ये उद्यमी पारंपरिक भारतीय स्वाद को वैश्विक स्तर पर ले जा रहे हैं, और इससे न केवल व्यापार बढ़ रहा है बल्कि भारतीय खान-पान की लोकप्रियता भी। भारतीय डायस्पोरा की संख्या १८ मिलियन से अधिक है, जो अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप में बसे हैं।
ये लोग विदेशी भूमि पर भारतीय मसालों, स्नैक्स और व्यंजनों की मांग बढ़ा रहे हैं। वैश्विक खाद्य बाजार में भारतीय निर्यात २०२४ में ५० बिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया, जिसमें डायस्पोरा का बड़ा योगदान है। इस लेख के माध्यम से हम देखेंगे कि कैसे ये उद्यमी छोटे विचारों से बड़े साम्राज्य खड़े कर रहे हैं।
परिचय: भारतीय स्वाद की वैश्विक यात्रा
भारतीय प्रवासी, जिन्हें एनआरआई या डायस्पोरा भी कहा जाता है, दुनिया के कई देशों में बसे हैं। इनकी संख्या १८ मिलियन से अधिक है। ये लोग अपने देश के स्वाद को भूलते नहीं हैं। इसलिए, उन्होंने विदेशों में भारतीय खाद्य व्यवसाय शुरू किए। ये उद्यमी पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक रूप देते हैं। जैसे, मसाले, स्नैक्स और रेडी-टू-ईट फूड। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य निर्यात बढ़ा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक है। २०२१ में भारतीय चावल निर्यात २१.२ मिलियन टन था।
भारतीय डायस्पोरा ने खाद्य उद्योग को नई दिशा दी है। वे न केवल अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हैं, बल्कि स्थानीय बाजारों को भारतीय स्वाद से परिचित कराते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में भारतीय स्नैक्स की मांग ३०% सालाना बढ़ रही है। ये उद्यमी चुनौतियों का सामना करते हुए सफल हुए। महामारी के दौरान भी उन्होंने सप्लाई चेन को मजबूत रखा। इस लेख में हम १० सफल उद्यमियों पर चर्चा करेंगे। प्रत्येक की कहानी प्रेरणादायक है। वे न केवल व्यापार बढ़ा रहे हैं, बल्कि रोजगार भी पैदा कर रहे हैं। सरल शब्दों में, ये कहानियां बताती हैं कि कैसे एक छोटा विचार बड़ा साम्राज्य बन सकता है। भारतीय खाद्य निर्यात का भविष्य उज्ज्वल है, क्योंकि डायस्पोरा वैश्विक ब्रांड बना रहा है।
१. सना जावेरी कादरी: डायस्पोरा कंपनी की मसाला क्रांति
सना जावेरी कादरी मुंबई की रहने वाली हैं। वे अमेरिका में बसीं। २०१७ में उन्होंने डायस्पोरा कंपनी शुरू की। यह कंपनी भारतीय मसालों को सीधे किसानों से खरीदकर बेचती है। सना का उद्देश्य पारदर्शी व्यापार है। सना ने २३ साल की उम्र में यह कंपनी शुरू की। आज यह मल्टी-मिलियन डॉलर का व्यवसाय है। कंपनी दक्षिण एशिया के फार्मों से मसाले लाती है। जैसे, हल्दी और काली मिर्च। ये मसाले अमेरिका के रेस्तरां और घरों में लोकप्रिय हैं।
सना की यात्रा खाद्य उद्योग में दस साल के अनुभव से शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि अमेरिका में भारतीय मसालों की गुणवत्ता कम है। इसलिए, उन्होंने सीधे किसानों से जुड़ने का फैसला किया। डायस्पोरा कंपनी ने उद्योग में बदलाव लाया। पहले मसालों का व्यापार असंगठित था। सना ने किसानों को उचित मूल्य दिया। इससे कंपनी की बिक्री ३००% सालाना बढ़ी। वे ऑनलाइन स्टोर और ग्रॉसरी चेन के माध्यम से बेचती हैं। महामारी के समय सना ने प्री-ऑर्डर मॉडल अपनाया। इससे किसानों को ४२०,००० डॉलर की मदद मिली। सना ने कोविड राहत के लिए भी फंड जुटाया। वे समुदाय से जुड़ी रहती हैं और महिलाओं को सशक्त बनाती हैं।
सना जावेरी कादरी के प्रमुख तथ्य
| विशेषता | विवरण |
| स्थापना | २०१७ |
| मुख्य उत्पाद | हल्दी, काली मिर्च, दालचीनी |
| बाजार | अमेरिका, कनाडा |
| उपलब्धि | ३००% वार्षिक वृद्धि |
सना की कहानी बताती है कि जुनून से कुछ भी संभव है।
२. चित्रा अग्रवाल: ब्रुकलिन दिल्ली का घरेलू स्वाद
चित्रा अग्रवाल भारतीय मूल की अमेरिकी उद्यमी हैं। वे ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में रहती हैं। २०१३ में उन्होंने ब्रुकलिन दिल्ली ब्रांड लॉन्च किया। यह ब्रांड उनके परिवार के व्यंजनों पर आधारित है। चित्रा ने एक ब्लॉग से शुरुआत की। इसमें उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत के रेसिपी शेयर किए। बाद में, उन्होंने सॉस और अचार बनाए। आज ये उत्पाद व्होल फूड्स जैसे स्टोर में मिलते हैं।
चित्रा की पहचान भारतीय-अमेरिकी संस्कृति से जुड़ी है। उन्होंने ब्लॉग के माध्यम से अपनी जड़ों को खोजा। फिर, पति के साथ मिलकर उत्पाद विकसित किए। ब्रुकलिन दिल्ली ने भारतीय-अमेरिकी खान-पान को मुख्यधारा में लाया। कंपनी का मिशन उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद हैं। चित्रा ने क्वारंटाइन में भी समुदाय की मदद की। उन्होंने एक कुकबुक बनाई। महामारी के दौरान मांग बढ़ी, क्योंकि लोग घर पर नई स्वाद आजमाने लगे। कंपनी की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों है। इससे भारतीय स्वाद अमेरिकी घरों तक पहुंचा। चित्रा की पहचान भारतीय विरासत से जुड़ी है। वे कम सोडियम वाले अचार बनाती हैं, जो सैंडविच और अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल होते हैं।
चित्रा अग्रवाल के ब्रांड हाइलाइट्स
| उत्पाद | बाजार पहुंच |
| अचार और सॉस | अमेरिका, कनाडा |
| उपलब्धि | व्होल फूड्स में उपलब्ध |
| फोकस | शाकाहारी व्यंजन |
चित्रा साबित करती हैं कि व्यक्तिगत रेसिपी वैश्विक ब्रांड बन सकती हैं।
३. महालक्ष्मी श्रीनिवासन अय्यर: जानकी फूड्स का दक्षिण भारतीय जादू
महालक्ष्मी श्रीनिवासन अय्यर शिकागो में बसीं। २००८ में उन्होंने जानकी फूड्स शुरू की। यह कंपनी दक्षिण भारतीय बैटर और स्नैक्स बनाती है। शुरुआत में छोटी फैक्ट्री से शुरू हुआ। आज कंपनी गुजराती मिठाइयों और स्नैक्स भी बनाती है। उत्पाद अमेरिका के भारतीय स्टोर में बिकते हैं। महालक्ष्मी ने प्राकृतिक सामग्री पर जोर दिया।
महालक्ष्मी ने डायस्पोरा की जरूरतों को देखा। लोग घर पर इडली-डोसा बनाना चाहते थे, लेकिन बैटर तैयार करना मुश्किल था। इसलिए, उन्होंने रेडी बैटर लॉन्च किया। जानकी फूड्स ने दक्षिण भारतीय खान-पान को आसान बनाया। लोग घर पर इडली-डोसा बना सकते हैं। कंपनी की फैक्ट्री बड़ी हो गई। इससे रोजगार बढ़ा। महामारी में मुरक्कू और रिबन पकोड़ा की मांग दोगुनी हो गई। महालक्ष्मी की भतीजी निथ्या ने व्यवसाय को संभाला। महालक्ष्मी की सफलता कड़ी मेहनत से आई। वे भारतीय डायस्पोरा की जरूरतें समझती हैं। कंपनी ने गुणवत्ता पर फोकस किया, जिससे ग्राहक वफादार बने।
जानकी फूड्स की मुख्य जानकारी
| उत्पाद प्रकार | बाजार |
| बैटर और स्नैक्स | अमेरिका |
| स्थापना | २००८ |
| विशेषता | प्राकृतिक सामग्री |
यह ब्रांड दक्षिण भारतीय स्वाद को वैश्विक बनाता है।
४. हल्दीराम्स: गंगा भसीन और परिवार की वैश्विक सफलता
हल्दीराम्स की शुरुआत १९३७ में गंगा भसीन ने की। यह परिवारिक व्यवसाय है। आज यह भारतीय डायस्पोरा का प्रिय ब्रांड है। १९९३ में अमेरिका निर्यात शुरू हुआ। कंपनी ने २०१६ में यूके में फैक्ट्री खोली। अब यह यूरोप, मिडिल ईस्ट में बिकता है। उत्पाद जैसे भुजिया और समोसे लोकप्रिय हैं। हल्दीराम्स का टर्नओवर अरबों में है।
गंगा भसीन ने बीकानेर में छोटी दुकान से शुरुआत की। परिवार ने इसे विस्तार दिया। आज २० से अधिक देशों में मौजूद। यह ब्रांड पारंपरिक स्नैक्स को पैकेज्ड फॉर्म में लाया। डायस्पोरा समुदाय इसे घर जैसा महसूस करता है। कंपनी ने गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर दिया। महामारी में भी सप्लाई चेन मजबूत रही। हल्दीराम्स ने वैश्विक बाजार में भारतीय स्नैक्स को स्थापित किया।
हल्दीराम्स के विस्तार तथ्य
| वर्ष | उपलब्धि |
| १९९३ | अमेरिका निर्यात |
| २०१६ | यूके फैक्ट्री |
| बाजार | २०+ देश |
हल्दीराम्स भारतीय स्नैक्स का राजा है।
५. लिज्जत पापड़: महिलाओं की सशक्तिकरण कहानी
लिज्जत पापड़ १९५९ में ७ महिलाओं ने शुरू किया। चंदा केवल ८० रुपये था। आज यह १,६०० करोड़ का व्यवसाय है। कंपनी पापड़ के अलावा मसाले और डिटर्जेंट बनाती है। ३०-३५% निर्यात होता है। बाजार एशिया, यूरोप, अमेरिका। लिज्जत ने हजारों महिलाओं को रोजगार दिया।
ये महिलाएं घर से काम करती हैं। कोऑपरेटिव मॉडल ने उन्हें स्वावलंबी बनाया। यह कोऑपरेटिव मॉडल अनोखा है। उत्पाद ५६ देशों में बिकते हैं। भूटान सबसे बड़ा आयातक है। लिज्जत ने भारतीय डायस्पोरा को पारंपरिक पापड़ उपलब्ध कराया। निर्यात से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
लिज्जत पापड़ के आंकड़े
| बाजार | शेयर |
| भारत | ९०% पापड़ बाजार |
| निर्यात | ३०-३५% |
| रोजगार | हजारों महिलाएं |
लिज्जत सशक्तिकरण का प्रतीक है।
६. एमआर सैंडविच: भारतीय स्वाद का वैश्विक विस्तार
एमआर सैंडविच लखनऊ से शुरू हुआ। यह क्विक सर्विस रेस्तरां है। १००+ आउटलेट भारत में हैं। २०२५ में दुबई और कतर में विस्तार। कंपनी भारतीय मसालों वाले सैंडविच बनाती है। स्वाद अनोखा है। अब यह ग्लोबल ब्रांड बन रहा है।
एमआर सैंडविच की शुरुआत उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई। फाउंडर्स ने स्थानीय स्ट्रीट फूड से प्रेरणा ली। शुरुआत में केवल १०-१२ आउटलेट थे। अब यह १६० से अधिक आउटलेट्स के साथ वैश्विक हो गया। कंपनी ने भारतीय स्वाद को आधुनिक फास्ट फूड में बदला। जैसे, मसाला सैंडविच और शेक्स। ग्राहक इसे किफायती और स्वादिष्ट पाते हैं। महामारी के दौरान डिलीवरी मॉडल ने विकास को बढ़ावा दिया। अब दुबई और कतर में भारतीय प्रवासियों की मांग पूरी हो रही है। एमआर सैंडविच ने स्ट्रीट फूड को आधुनिक बनाया। ग्राहक इसे किफायती पाते हैं। दुबई में भारतीय स्वाद की मांग बढ़ रही है। यह ब्रांड फ्रैंचाइजी मॉडल से तेजी से फैल रहा है।
एमआर सैंडविच के विस्तार
| स्थान | आउटलेट |
| भारत | १६०+ |
| अंतरराष्ट्रीय | दुबई, कतर |
| फोकस | भारतीय स्वाद |
यह ब्रांड तेजी से बढ़ रहा है।
नवीन बच्चानी भोपाल से हैं। वे आयरलैंड में बसे। २०१६ में वड़ा पाव कंपनी शुरू की। यह बॉम्बे स्ट्रीट फूड पर आधारित है। उत्पाद वीगन और शाकाहारी हैं। २००+ रिटेल स्टोर में बिकते हैं। लिडल और सुपरवालु जैसे चेन। नवीन को एंटरप्राइज आयरलैंड से फंडिंग मिली।
नवीन की यात्रा भारतीय स्ट्रीट फूड को यूरोपीय बाजार में ले जाने से शुरू हुई। वे बॉम्बे के वड़ा पाव को वीगन रूप में बदलना चाहते थे। कंपनी ने आयरलैंड में लोकप्रिय चेन जैसे लिडल के साथ साझेदारी की। अब २०० से अधिक स्टोरों में उपलब्ध। उत्पाद जैसे स्वीट पोटेटो बर्गर और मुंबई समोसे यूरोपीय वीगन ट्रेंड से मेल खाते हैं। महामारी के बाद स्वास्थ्य जागरूकता ने बिक्री बढ़ाई। कंपनी जर्मनी, यूके में विस्तार की योजना बना रही है। उत्पाद सुविधाजनक हैं। वीगन ट्रेंड ने सफलता बढ़ाई। नवीन ने स्थानीय सामग्री का उपयोग कर उत्पाद को अनुकूलित किया।
वड़ा पाव उत्पाद
| उत्पाद | विशेषता |
| स्वीट पोटेटो बर्गर | वीगन |
| मुंबई समोसा | सोया-मुक्त |
नवीन ने भारतीय स्ट्रीट फूड को यूरोप में पहुंचाया।
८. दीपना आनंद: ब्रिलियंट रेस्तरां की विरासत
दीपना आनंद लंदन में हैं। उनके दादाजी ने १९५० में केन्या में ब्रिलियंट रेस्तरां शुरू किया। आज दीपना इसका मालिक हैं। वे सेलिब्रिटी शेफ हैं। भारतीय व्यंजनों की कुकरी स्कूल चलाती हैं। रेस्तरां साउथॉल में है। दीपना ने लो-फैट भारतीय फूड पर अवॉर्ड जीता।
दीपना की कहानी परिवार की विरासत से जुड़ी है। दादाजी ने केन्या में भारतीय प्रवासियों के लिए रेस्तरां खोला। बाद में लंदन शिफ्ट हुआ। दीपना ने इसे आधुनिक बनाया। वे ब्रिटिश न्यूट्रिशन फाउंडेशन से अवॉर्ड जीत चुकी हैं। रेस्तरां साउथॉल में भारतीय व्यंजनों का केंद्र है। साथ ही, कुकरी स्कूल से हजारों को प्रशिक्षण दिया। दीपना ने लो-फैट रेसिपी विकसित कीं, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छी हैं। महामारी में ऑनलाइन क्लासेस से पहुंच बढ़ाई। ब्रिलियंट ने भारतीय स्वाद को ब्रिटेन में लोकप्रिय बनाया।
दीपना आनंद के योगदान
| उपलब्धि | विवरण |
| अवॉर्ड | ब्रिटिश न्यूट्रिशन फाउंडेशन |
| व्यवसाय | रेस्तरां और स्कूल |
दीपना महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।
९. बक्षीश डीन: जॉनी रॉकेट्स का भारतीय कनेक्शन
बक्षीश डीन जॉनी रॉकेट्स के सीईओ हैं। यह अमेरिकी बर्गर चेन है। भारत में प्राइम गौरमेट फ्रेंचाइजी है। ३३० आउटलेट २७ देशों में। बक्षीश ने भारतीय बाजार में विस्तार किया। वे भारतीय स्वाद जोड़ते हैं।
बक्षीश डीन की यात्रा अमेरिकी फास्ट फूड को भारतीय बाजार में अनुकूलित करने से शुरू हुई। उन्होंने जॉनी रॉकेट्स को भारत में लॉन्च किया। चेन के ३३० आउटलेट २७ देशों में फैले हैं। भारत में भारतीय मसालों वाले बर्गर जोड़े। बक्षीश ने फ्रैंचाइजी मॉडल से विस्तार किया। महामारी के बाद रिकवरी तेज हुई। वे फूड उद्योग में २० वर्षों का अनुभव रखते हैं। भारतीय डायस्पोरा की पसंद को समझते हैं। बक्षीश ने वैश्विक चेन को भारतीय टच दिया।
बक्षीश डीन के तथ्य
| चेन | बाजार |
| जॉनी रॉकेट्स | भारत, वैश्विक |
| आउटलेट | ३३० |
वे फूड उद्योग में विशेषज्ञ हैं।
१०. विक्रम और माशी: मावी’स पैंट्री का कॉम्बुचा
विक्रम और माशी ने मावी’स पैंट्री शुरू की। यह कॉम्बुचा ब्रांड है। अमेरिका यात्रा से प्रेरित। मुंबई में फार्मर्स मार्केट से शुरू। उत्पाद स्वस्थ हैं। स्थायी जीवन का प्रतीक। भारत में लोकप्रिय।
विक्रम और माशी की जोड़ी अमेरिकी ट्रिप से प्रेरित हुई। उन्होंने स्वस्थ ड्रिंक्स की जरूरत देखी। मावी’स पैंट्री मुंबई के फार्मर्स मार्केट से शुरू हुई। अब ऑनलाइन और स्टोर में उपलब्ध। उत्पाद प्राकृतिक सामग्री से बने हैं। जैसे, फ्रूट-बेस्ड कॉम्बुचा। स्वास्थ्य लाभ पर फोकस। महामारी में वेलनेस ट्रेंड ने बिक्री बढ़ाई। वे स्थायी पैकेजिंग का उपयोग करते हैं। विक्रम और माशी ने भारतीय बाजार में कॉम्बुचा को लोकप्रिय बनाया। वे भारतीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
मावी’स पैंट्री
| उत्पाद | फोकस |
| कॉम्बुचा | प्राकृतिक |
| बाजार | भारत |
वे भारतीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
निष्कर्ष: भविष्य की संभावनाएं
ये १० उद्यमी दिखाते हैं कि भारतीय स्वाद वैश्विक है। वे न केवल व्यापार करते हैं, बल्कि संस्कृति फैलाते हैं। भविष्य में और विस्तार होगा। भारतीय डायस्पोरा खाद्य उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। वैश्विक बाजार में मांग बढ़ रही है। ये कहानियां युवाओं को प्रेरित करती हैं। सफलता के लिए जुनून और मेहनत जरूरी है। भारतीय खाद्य ब्रांड दुनिया भर में चमकेंगे। निर्यात २०३० तक दोगुना हो सकता है। ये उद्यमी साबित करते हैं कि घरेलू स्वाद अंतरराष्ट्रीय बाजार जीत सकता है।
