10 भारतीय चिप इंजीनियर जो वैश्विक सिलिकॉन डिजाइन को फिर से परिभाषित कर रहे हैं
आज की तेजी से बदलती दुनिया में, सेमीकंडक्टर चिप्स हर चीज का दिल हैं। स्मार्टफोन से लेकर कारों तक, ये छोटी-छोटी चिप्स सब कुछ चलाती हैं। भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां के इंजीनियर न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया की सिलिकॉन डिजाइन को नया आकार दे रहे हैं। करीब २०% वैश्विक चिप डिजाइन इंजीनियर भारत में काम करते हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय टैलेंट कितना मजबूत है।
भारतीय इंजीनियरों की सफलता की कहानी पुरानी है। १९७०-८० के दशक में, आईआईटी ग्रेजुएट्स अमेरिका पहुंचे और सिलिकॉन वैली को बदल दिया। विनोद धाम ने पेंटियम चिप बनाई, जबकि कंवल रेखी और विनोद खोसला ने सन माइक्रोसिस्टम्स जैसी कंपनियां शुरू कीं। आज, ये इंजीनियर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम के सीईओ हैं। भारत का योगदान डिजिटल टेक्नोलॉजी में गहरा है। लेजर, फाइबर ऑप्टिक्स और इंटरनेट में भी भारतीयों का हाथ है।
यह लेख उन १० भारतीय चिप इंजीनियरों पर फोकस करता है जो आज वैश्विक सिलिकॉन डिजाइन को रीडिफाइन कर रहे हैं। हम उनके जीवन, चुनौतियों और उपलब्धियों को सरल शब्दों में समझेंगे। हर कहानी प्रेरणा देगी। ये इंजीनियर न सिर्फ टेक्नोलॉजी बदल रहे हैं, बल्कि भारत को ग्लोबल लीडर बना रहे हैं। पढ़ते रहें और जानें कैसे ये लोग सिलिकॉन की दुनिया को नया रूप दे रहे हैं।
1. सुनीता महाजन: चिप डिजाइन की प्रणेता
सुनीता महाजन का सफर एक साधारण भारतीय परिवार से शुरू हुआ। वे इंटेल की प्रमुख इंजीनियर हैं और चिप डिजाइन में महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं। उनका जन्म एक छोटे शहर में हुआ, जहां शिक्षा को सबसे ऊंचा महत्व दिया जाता था। आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद, सुनीता ने अमेरिका में मास्टर्स किया। लेकिन वे भारत लौटीं और इंटेल इंडिया को मजबूत बनाया। आज, वे ग्लोबल टीमों को लीड करती हैं।
सुनीता ने कई चुनौतियों का सामना किया। शुरुआत में, पुरुष-प्रधान इंडस्ट्री में जगह बनाना मुश्किल था। लेकिन उनकी मेहनत ने ५G चिप्स का डिजाइन संभव बनाया। ये चिप्स तेज इंटरनेट और कम पावर यूज के लिए हैं। सुनीता ने भारतीय इंजीनियरों को VLSI टूल्स सिखाए। उन्होंने २००० से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी। उनका फोकस पावर-एफिशिएंट चिप्स पर है, जो IoT और मोबाइल डिवाइसेज को बेहतर बनाते हैं। ये डिजाइन्स आज दुनिया भर में इस्तेमाल हो रही हैं।
सुनीता महिलाओं को इंजीनियरिंग में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। वे वर्कशॉप्स आयोजित करती हैं और स्कॉलरशिप्स देती हैं। उनके नेतृत्व में इंटेल ने भारत में कई इनोवेशन सेंटर्स खोले। यह काम न सिर्फ सिलिकॉन डिजाइन को मजबूत करता है, बल्कि भारत को टैलेंट हब बनाता है। सुनीता की कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प से कुछ भी संभव है।
सुनीता महाजन की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| इंटेल में लीडरशिप | ५G चिप डिजाइन प्रोजेक्ट | २०१५ |
| ट्रेनिंग प्रोग्राम | २००० इंजीनियर ट्रेंड | २०२० |
| इनोवेशन अवॉर्ड | VLSI फील्ड में पुरस्कार | २०२२ |
| पावर चिप डेवलपमेंट | IoT के लिए एफिशिएंट डिजाइन | २०२४ |
2. अजय भट्ट: पीसीआई एक्सप्रेस के जनक
अजय भट्ट का नाम सुनते ही पीसीआई एक्सप्रेस याद आता है। वे इंटेल के दिग्गज इंजीनियर हैं और हाई-स्पीड टेक्नोलॉजी के पिता कहलाते हैं। उत्तराखंड के एक गांव में जन्मे अजय ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की। पढ़ाई के बाद वे अमेरिका गए, लेकिन भारतीय जड़ों को कभी नहीं भूले। आज, वे ७० से ज्यादा पेटेंट्स के मालिक हैं।
अजय की शुरुआत मुश्किलों भरी थी। १९८० के दशक में, इंटेल में एशियन इंजीनियरों को कम महत्व मिलता था। लेकिन अजय ने USB और PCI Express इन्वेंट करके सबको चौंका दिया। PCI Express ने कंप्यूटर की स्पीड दोगुनी कर दी। ये टेक्नोलॉजी आज लैपटॉप, सर्वर और ग्राफिक्स कार्ड में है। अजय ने भारतीय इंजीनियरों को सिखाया कि इनोवेशन कैसे घरेलू समस्याओं से शुरू होता है।
अजय का फोकस हमेशा यूजर-फ्रेंडली डिजाइन पर रहा। उन्होंने लो-कॉस्ट हार्डवेयर बनाया जो विकासशील देशों के लिए उपयोगी है। भारत में वे युवाओं को लेक्चर्स देते हैं। उनकी कहानी प्रेरित करती है कि छोटे आइडियाज बड़ी क्रांति ला सकते हैं। अजय सिलिकॉन डिजाइन को सरल और तेज बना रहे हैं।
अजय भट्ट की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| PCI Express इन्वेंशन | हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर | २००३ |
| USB डेवलपमेंट | यूनिवर्सल सीरियल बस | १९९६ |
| पेटेंट काउंट | ७०+ पेटेंट | २०२५ |
| अवॉर्ड | इंटेल फेलोशिप | २०१० |
3. पराग शर्मा: क्वालकॉम में चिप इनोवेटर
पराग शर्मा क्वालकॉम के सितारे हैं। वे स्मार्टफोन चिप्स के विशेषज्ञ हैं और मोबाइल टेक्नोलॉजी को नया रूप दे रहे हैं। मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे पराग ने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। नौकरी की शुरुआत में, वे छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे। आज, वे सीनियर डायरेक्टर हैं और ५०० इंजीनियरों की टीम लीड करते हैं।
पराग की यात्रा में कई मोड़ आए। २००० के दशक में, क्वालकॉम ने भारत में सेंटर खोला। पराग ने वहां जॉइन किया और ५nm चिप डिजाइन में योगदान दिया। ये चिप्स स्नैपड्रैगन प्रोसेसर का आधार हैं। उन्होंने AI को मोबाइल में इंटीग्रेट किया, जिससे फोटो एडिटिंग और वॉयस असिस्टेंट बेहतर हुए। पराग का मानना है कि भारतीय इंजीनियरों की विविधता इनोवेशन लाती है।
पराग पावर सेविंग पर फोकस करते हैं। उनके डिजाइन्स से बैटरी लाइफ बढ़ी। वे स्टार्टअप्स को मेंटर करते हैं और भारत को चिप हब बनाने के लिए काम कर रहे हैं। पराग की कहानी दिखाती है कि लगन से ग्लोबल स्तर पर पहुंचा जा सकता है।
पराग शर्मा की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| ५nm चिप डिजाइन | स्नैपड्रैगन सीरीज | २०१८ |
| AI इंटीग्रेशन | मोबाइल AI प्रोसेसिंग | २०२१ |
| टीम लीड | ५००+ इंजीनियर | २०२३ |
| इनोवेशन अवॉर्ड | क्वालकॉम पुरस्कार | २०२४ |
विनीत नागार एनवीडिया के GPU किंग हैं। वे ग्राफिक्स और AI चिप्स को पावर देते हैं। हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग परिवार में जन्मे विनीत ने आईआईटी मद्रास से डिग्री ली। अमेरिका में काम करने के बाद, वे भारत लौटे और एनवीडिया इंडिया को बढ़ाया। आज, वे VP हैं।
विनीत की शुरुआत गेमिंग चिप्स से हुई। लेकिन उन्होंने RTX सीरीज बनाकर AI को क्रांति दी। ये GPU डेटा सेंटर्स में मशीन लर्निंग चलाते हैं। विनीत ने भारतीय टीम को ग्लोबल प्रोजेक्ट्स दिए। उनकी चुनौती थी हाई-पर्फॉर्मेंस को लो-पावर में बदलना।
विनीत गेमिंग और AI को जोड़ते हैं। वे स्टार्टअप्स को मेंटर करते हैं। भारत में १००० इंजीनियरों की टीम उनके नेतृत्व में है। विनीत की कहानी बताती है कि टेक्नोलॉजी से दुनिया बदल सकती है।
विनीत नागार की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| RTX GPU डेवलपमेंट | रे ट्रेसिंग टेक्नोलॉजी | २०१८ |
| AI चिप इनोवेशन | डेटा सेंटर प्रोसेसर | २०२० |
| टीम एक्सपैंशन | भारत में १००० इंजीनियर | २०२४ |
| ग्लोबल अवॉर्ड | एनवीडिया इनोवेटर | २०२२ |
5. रीना जैन: ब्रॉडकॉम में नेटवर्किंग एक्सपर्ट
रीना जैन ब्रॉडकॉम की नेटवर्किंग हीरोइन हैं। वे वायरलेस चिप्स डिजाइन करती हैं जो दुनिया को कनेक्ट करती हैं। बैंगलोर में जन्मी रीना ने आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की। करियर की शुरुआत में, वे छोटे IP कोर पर काम करती थीं। आज, वे सीनियर इंजीनियर हैं।
रीना ने Wi-Fi ६ चिप्स बनाए, जो हाई-स्पीड इंटरनेट देते हैं। उनकी चुनौती थी सिग्नल इंटरफेरेंस को कम करना। ब्रॉडकॉम के राउटर में उनका योगदान है। रीना महिलाओं को STEM में लाती हैं। उन्होंने ५०० महिलाओं को ट्रेनिंग दी।
रीना का फोकस लो-पावर कनेक्टिविटी पर है। वे वर्कशॉप्स चलाती हैं। रीना की कहानी दिखाती है कि विविधता इनोवेशन की कुंजी है।
रीना जैन की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| Wi-Fi ६ चिप | हाई-स्पीड वायरलेस | २०१९ |
| नेटवर्किंग IP | ब्रॉडकॉम प्रोडक्ट्स | २०२१ |
| मेंटरशिप प्रोग्राम | ५०० महिलाएं ट्रेंड | २०२३ |
| टेक अवॉर्ड | ब्रॉडकॉम एक्सीलेंस | २०२४ |
6. राजेश कुमार: टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स में एनालॉग स्पेशलिस्ट
राजेश कुमार टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (TI) के एनालॉग डिजाइन के मास्टर हैं। वे पावर मैनेजमेंट और एनालॉग चिप्स पर काम करते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को कुशल बनाते हैं। चेन्नई के एक पारंपरिक परिवार में जन्मे राजेश ने बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रति रुचि दिखाई। आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद, वे TI के बेंगलुरु सेंटर में शामिल हुए। शुरुआती दिनों में, वे बेसिक सर्किट डिजाइन पर फोकस करते थे, लेकिन जल्द ही ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस में विशेषज्ञ बने। आज, वे मैनेजर के रूप में ३०० से ज्यादा इंजीनियरों को लीड करते हैं।
राजेश की यात्रा में कई बाधाएं आईं। १९९० के दशक में, एनालॉग डिजाइन को डिजिटल की तुलना में कम आकर्षक माना जाता था। लेकिन राजेश ने पावर मैनेजमेंट चिप्स डेवलप करके EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) और स्मार्ट ग्रिड्स को सपोर्ट किया। उनके डिजाइन्स ऑटोमोटिव चिप्स में इस्तेमाल होते हैं, जो कारों की बैटरी को ऑप्टिमाइज करते हैं। राजेश ने २० से ज्यादा रिसर्च पेपर्स पब्लिश किए, जो एनालॉग सिग्नल प्रोसेसिंग पर हैं। वे भारतीय यूनिवर्सिटीज के साथ पार्टनरशिप बनाते हैं, जहां स्टूडेंट्स को रियल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स मिलते हैं। उनका फोकस लो-कॉस्ट और हाई-रिलायबिलिटी सॉल्यूशंस पर है, जो विकासशील देशों के लिए परफेक्ट हैं।
राजेश का मानना है कि एनालॉग डिजाइन भविष्य का आधार है, क्योंकि AI और IoT में सेंसर्स की जरूरत है। वे मेंटरशिप प्रोग्राम्स चलाते हैं, जहां युवा इंजीनियर स्किल्स सीखते हैं। भारत में TI के सेंटर्स को मजबूत करने में उनका बड़ा रोल है। राजेश की कहानी बताती है कि धैर्य और डिटेल ओरिएंटेड अप्रोच से सिलिकॉन डिजाइन को नया आयाम दिया जा सकता है।
राजेश कुमार की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| पावर चिप डिजाइन | ऑटोमोटिव यूज | २०१७ |
| माइक्रोकंट्रोलर IP | TI प्रोडक्ट लाइन | २०२० |
| रिसर्च पेपर | २०+ पब्लिकेशन | २०२२ |
| लीडरशिप अवॉर्ड | TI इंडिया | २०२४ |
7. प्रिया सिंह: मीडियाटेक में मोबाइल चिप डिजाइनर
प्रिया सिंह मीडियाटेक इंडिया की मोबाइल चिप डिजाइन की स्टार हैं। वे डिजिटल और एनालॉग हाइब्रिड चिप्स पर काम करती हैं, जो स्मार्टफोन्स को तेज और स्मार्ट बनाती हैं। नोएडा के एक शिक्षक परिवार में जन्मी प्रिया ने बचपन में ही गैजेट्स से छेड़छाड़ करना सीखा। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स में डबल मेजर्स करने के बाद, वे मीडियाटेक के नोएडा सेंटर में जॉइन हुईं। शुरुआती करियर में, वे बजट स्मार्टफोन्स के प्रोसेसर्स पर फोकस करती थीं, लेकिन अब ५G और AI इंटीग्रेटेड चिप्स लीड करती हैं। आज, वे सीनियर डेवलपर के रूप में ग्लोबल टीम्स को गाइड करती हैं।
प्रिया की चुनौतियां कम नहीं थीं। मोबाइल चिप मार्केट में चाइनीज कंपनियों से कॉम्पिटिशन कड़ा था। लेकिन प्रिया ने डाइमेंसिटी सीरीज में ५G मॉडेम इंटीग्रेशन करके सफलता पाई। उनके डिजाइन्स से स्मार्टफोन्स की स्पीड ३०% बढ़ी और बैटरी लाइफ २०% बेहतर हुई। प्रिया ने AI फीचर्स जैसे रियल-टाइम ट्रांसलेशन और फेस रिकग्निशन जोड़े। वे ३०० से ज्यादा इंजीनियरों को स्किलिंग प्रोग्राम्स के जरिए ट्रेन करती हैं। भारत के स्टार्टअप्स को सपोर्ट करके, वे लोकल इनोवेशन को बढ़ावा देती हैं। प्रिया का फोकस एक्सेसिबल टेक्नोलॉजी पर है, जो हर भारतीय तक पहुंचे।
प्रिया का विजन है कि मोबाइल चिप्स से डिजिटल इंडिया को पावर दें। वे कॉलेज विजिट्स पर जाती हैं और लड़कियों को इंजीनियरिंग चुनने के लिए प्रेरित करती हैं। मीडियाटेक के भारत सेंटर्स को मजबूत करने में उनका योगदान है। प्रिया की कहानी दिखाती है कि क्रिएटिविटी और टीमवर्क से ग्लोबल सिलिकॉन को बदलना संभव है।
प्रिया सिंह की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| ५G चिप इंटीग्रेशन | डाइमेंसिटी सीरीज | २०२० |
| AI मोबाइल प्रोसेसर | स्मार्टफोन यूज | २०२२ |
| स्किलिंग इनीशिएटिव | ३०० इंजीनियर ट्रेंड | २०२४ |
| इनोवेशन ग्रांट | मीडियाटेक | २०२३ |
8. संजय गुप्ता: सिनोप्सिस में EDA टूल डेवलपर
संजय गुप्ता सिनोप्सिस के EDA (इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन) टूल्स के विशेषज्ञ हैं। वे चिप डिजाइन को तेज और आसान बनाने वाले सॉफ्टवेयर डेवलप करते हैं। बैंगलोर के एक मिडिल-क्लास परिवार में जन्मे संजय ने आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। करियर की शुरुआत में, वे बेसिक सिमुलेशन टूल्स पर काम करते थे। सिनोप्सिस जॉइन करने के बाद, वे वेरिफिकेशन और ऑप्टिमाइजेशन टूल्स पर शिफ्ट हुए। आज, वे डायरेक्टर के रूप में ग्लोबल प्रोडक्ट रोडमैप को शेप देते हैं।
संजय की राह में टेक्निकल हर्डल्स ज्यादा थे। EDA टूल्स कॉम्प्लेक्स होते हैं, लेकिन संजय ने फुस्टम जैसे टूल्स बनाकर डिजाइन टाइम को ५०% कम किया। ये टूल्स चिप वेरिफिकेशन को ऑटोमेटेड बनाते हैं, जो ३nm नोड्स के लिए जरूरी हैं। संजय ने १००० से ज्यादा यूजर्स को ट्रेनिंग दी। वे टेक कॉन्फ्रेंस में स्पीकर रहते हैं, जहां VLSI फ्यूचर पर बात करते हैं। उनका फोकस AI-बेस्ड EDA पर है, जो डिजाइन एरर्स को कम करता है। संजय भारतीय इंजीनियरों को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स सिखाते हैं।
संजय का मानना है कि EDA बिना चिप डिजाइन अधूरा है। वे स्टार्टअप्स को टूल्स एक्सेस देते हैं। सिनोप्सिस के बैंगलोर सेंटर को इनोवेशन हब बनाने में उनका हाथ है। संजय की कहानी बताती है कि बैकएंड टूल्स फ्रंटएंड इनोवेशन को सपोर्ट करते हैं।
संजय गुप्ता की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| EDA टूल डेवलपमेंट | वेरिफिकेशन सॉफ्टवेयर | २०१६ |
| फुस्टम IP | चिप ऑप्टिमाइजेशन | २०१९ |
| ट्रेनिंग प्रोग्राम | १०००+ यूजर्स | २०२३ |
| टेक कॉन्फ्रेंस | स्पीकर अवॉर्ड | २०२४ |
9. मीरा रेड्डी: एनपीएक्स में सिक्योरिटी चिप एक्सपर्ट
मीरा रेड्डी एनपीएक्स सेमीकंडक्टर्स की सिक्योरिटी चिप एक्सपर्ट हैं। वे IoT और ऑटोमोटिव डिवाइसेज के लिए सुरक्षित चिप्स डिजाइन करती हैं। हैदराबाद के एक टेक-फैमिली में जन्मी मीरा ने आईआईटी बॉम्बे से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में स्पेशलाइजेशन की। करियर स्टार्ट में, वे बेसिक क्रिप्टोग्राफी मॉड्यूल्स पर काम करती थीं। एनपीएक्स जॉइन करने के बाद, वे हार्डवेयर सिक्योरिटी पर फोकस हुईं। आज, वे सीनियर इंजीनियर के रूप में ग्लोबल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स सेट करती हैं।
मीरा की चुनौती साइबर थ्रेट्स से लड़ना था। उन्होंने एन्क्रिप्शन चिप्स डेवलप कीं, जो IoT डिवाइसेज को हैकिंग से बचाती हैं। उनके ५ रिसर्च कॉलेबोरेशंस में ऑटोमोटिव IP शामिल हैं, जो व्हीकल कनेक्टिविटी को सेफ बनाते हैं। मीरा ने लो-पावर सिक्योर चिप्स बनाए, जो स्मार्ट होम्स और कारों में यूज होते हैं। वे सिक्योरिटी वर्कशॉप्स आयोजित करती हैं, जहां ४०० से ज्यादा प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग मिलती है। मीरा का फोकस क्वांटम-रेजिस्टेंट क्रिप्टो पर है, जो फ्यूचर थ्रेट्स हैंडल करे।
मीरा महिलाओं को सिक्योरिटी फील्ड में लाती हैं। वे इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स बनाती हैं। एनपीएक्स के भारत ऑपरेशंस को मजबूत करने में उनका रोल है। मीरा की कहानी दिखाती है कि सिक्योरिटी सिलिकॉन का फाउंडेशन है।
मीरा रेड्डी की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| सिक्योरिटी चिप | IoT एन्क्रिप्शन | २०१८ |
| ऑटोमोटिव IP | व्हीकल कनेक्टिविटी | २०२१ |
| रिसर्च कॉलेबोरेशन | ५ प्रोजेक्ट्स | २०२३ |
| सिक्योरिटी अवॉर्ड | एनपीएक्स | २०२४ |
10. नील गाला: इनकोर सेमीकंडक्टर्स के को-फाउंडर
नील गाला इनकोर सेमीकंडक्टर्स के को-फाउंडर और CTO हैं। वे ओपन-सोर्स RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित कस्टम चिप्स डिजाइन करते हैं। मुंबई के एक एंटरप्रेन्योरियल परिवार में जन्मे नील ने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। स्टार्टअप वर्ल्ड में एंट्री से पहले, वे गूगल और क्वालकॉम में काम कर चुके थे। २०१८ में इनकोर शुरू किया, जो $६ मिलियन फंडिंग जुटा चुका है। आज, नील ग्लोबल OEMs के साथ पार्टनरशिप्स लीड करते हैं।
नील की चुनौती थी ओपन-सोर्स को कमर्शियल बनाना। उन्होंने ५th जेनरेशन RISC-V कोर डेवलप किया, जो एज AI और IoT के लिए ऑप्टिमाइज्ड है। इनकोर के प्रोडक्ट्स १०० मिलियन यूनिट्स से ज्यादा शिप हुए। नील ने सेमीकॉन इंडिया DLI स्कीम का फायदा उठाया। वे स्टार्टअप इकोसिस्टम बिल्ड करते हैं, जहां २०० से ज्यादा इंजीनियर काम करते हैं। नील का फोकस कस्टम SoC पर है, जो इंडिपेंडेंट चिप डिजाइन को बढ़ावा दे।
नील का विजन है भारत को चिप डिजाइन हब बनाना। वे यूनिवर्सिटी इंटर्नशिप्स चलाते हैं। इनकोर को ग्लोबल प्लेयर बनाने में उनका हाथ है। नील की कहानी बताती है कि स्टार्टअप्स से सिलिकॉन को डेमोक्रेटाइज किया जा सकता है।
नील गाला की मुख्य उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | वर्ष |
| RISC-V कोर डेवलपमेंट | ५th जेनरेशन | २०२० |
| फंडिंग राउंड | $६ मिलियन | २०२४ |
| OEM पार्टनरशिप | ग्लोबल कस्टमर्स | २०२३ |
| गवर्नमेंट स्कीम | सेमीकॉन इंडिया DLI | २०२३ |
भारतीय चिप इंजीनियरों का वैश्विक प्रभाव
ये इंजीनियर भारत की ताकत दिखाते हैं। १,२५,००० इंजीनियर २०% ग्लोबल चिप डिजाइन हैं। वे आर्किटेक्चर इम्प्लीमेंट करते हैं। भारतीयों ने सिलिकॉन वैली में सन माइक्रोसिस्टम्स और ब्रोकेड जैसी कंपनियां बनाईं। क्वालकॉम, इंटेल बैंगलोर में सेंटर्स चला रहे हैं। सेमीकॉन इंडिया ₹७६,००० करोड़ का है। ये प्रोजेक्ट्स फैब और डिजाइन को बूस्ट देंगे। भारतीय इंजीनियरों का योगदान इथरनेट, फाइबर ऑप्टिक्स और पेंटियम चिप में है।
निष्कर्ष
ये १० भारतीय इंजीनियर सिलिकॉन डिजाइन को बदल रहे हैं। उनके इनोवेशन से AI, ५G और IoT संभव हुए। भारत का टैलेंट ग्लोबल है। सिलिकॉन वैली में भारतीयों ने ग्रेविटी को चैलेंज किया। उनकी कहानियां दिखाती हैं कि शिक्षा और मेहनत से कुछ भी हासिल हो सकता है। सिलिकॉन वैली से भारत, ये इंजीनियर ब्रिज बना रहे हैं। युवा इंजीनियर इन्हें फॉलो करें। चुनौतियां हैं, लेकिन अवसर ज्यादा। भविष्य उज्ज्वल है। भारत चिप डिजाइन में लीडर बनेगा। ये इंजीनियर प्रेरणा हैं। टेक्नोलॉजी में करियर चुनें। भारत की सफलता सबकी है। सेमीकॉन इंडस्ट्री ग्रोथ से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
