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ब्रिटेन के सबसे अमीर व्यक्ति गोपीचंद हिंदुजा का 85 साल की उम्र में निधन

गोपिचंद हिंदूजा, जिन्हें ब्रिटेन का सबसे अमीर व्यक्ति माना जाता था और हिंदूजा ग्रुप के चेयरमैन थे, का मंगलवार को लंदन में निधन हो गया। परिवार के करीबी स्रोतों के अनुसार, वे कई हफ्तों से बीमार थे और एक अस्पताल में 85 वर्ष की आयु में उनका देहांत हुआ। हिंदूजा परिवार ने एक बयान जारी कर कहा कि उनकी मौत से परिवार के दिल में एक गहरा खालीपन छा गया है, और वे उनकी असाधारण मेहनत और योगदान को हमेशा याद रखेंगे। गोपिचंद को व्यापार जगत में ‘जीपी’ के नाम से जाना जाता था, और वे भारतीय मूल के ब्रिटिश अरबपति थे जिन्होंने अपने परिवार के कारोबार को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया।​

परिवार की संपत्ति और रैंकिंग का विवरण

हिंदूजा परिवार ने हाल ही में जारी संडे टाइम्स रिच लिस्ट 2024 में शीर्ष स्थान हासिल किया था, जहां उनकी कुल संपत्ति का अनुमान £35.3 बिलियन (लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये) लगाया गया। यह संपत्ति 2023 के £37.2 बिलियन से थोड़ी कम है, लेकिन वे लगातार कई वर्षों से ब्रिटेन के सबसे धनी परिवार के रूप में शीर्ष पर बने रहे। फोर्ब्स की 2024 की सूची में हिंदूजा परिवार भारत के 100 सबसे अमीर व्यवसायियों में 11वें स्थान पर था, और उनकी कुल संपत्ति का अनुमान $20.6 बिलियन था। गोपिचंद हिंदूजा चार भाइयों में दूसरे सबसे बड़े थे, जिन्होंने दशकों तक परिवार के कारोबार को संभाला। उनके बड़े भाई श्रीचंद हिंदूजा का 2023 में डिमेंशिया से 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, जिसके बाद गोपिचंद ने चेयरमैन का पद संभाला। परिवार की संपत्ति मुख्य रूप से हिंदूजा ग्रुप के विविध क्षेत्रों से आती है, जो उन्हें एशिया और यूके के सबसे अमीरों में रखती है।​

हिंदूजा ग्रुप का इतिहास और विस्तार

हिंदूजा ग्रुप की स्थापना 1914 में गोपिचंद के पिता परमानंद दीपचंद हिंदूजा ने सिंध क्षेत्र (अब पाकिस्तान) में एक छोटे व्यापारिक उद्यम के रूप में की थी। शुरू में यह टेक्सटाइल, व्यापार और मर्चेंट बैंकिंग पर आधारित था, जो भारत, ईरान और मध्य पूर्व के बीच सक्रिय था। 1979 में ईरानी क्रांति के बाद ग्रुप का मुख्यालय यूरोप स्थानांतरित हो गया, और गोपिचंद ने 1959 में मुंबई में परिवार के कारोबार में प्रवेश कर इसे वैश्विक साम्राज्य में बदल दिया। ग्रुप अब 11 से अधिक क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें ऑटोमोटिव, बैंकिंग और वित्त, मीडिया और मनोरंजन, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, तेल और गैस, आईटी, साइबर सिक्योरिटी, रियल एस्टेट, ट्रेडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। दुनिया भर में ग्रुप के 2,50,000 से अधिक कर्मचारी हैं और यह 100 से ज्यादा देशों में सक्रिय है। प्रमुख कंपनियां जैसे अशोक लेलैंड (ट्रक निर्माण), इंडसइंड बैंक (वित्त), गल्फ ऑयल (तेल और विशेष रसायन), हिंदूजा हेल्थकेयर (चिकित्सा), एनएक्सटी डिजिटल (मीडिया), क्वेकर-हoughton इंटरनेशनल (धातु तरल पदार्थ) और हिंदूजा ग्लोबल सॉल्यूशंस (आईटी सेवाएं) इसकी रीढ़ हैं।​

गोपिचंद ने ग्रुप को महत्वपूर्ण अधिग्रहणों के माध्यम से विस्तार दिया। 1984 में चेवरॉन से गल्फ ऑयल का अधिग्रहण किया गया, जो तेल क्षेत्र में उनकी प्रवेश था। 1987 में ब्रिटिश लेलैंड से अशोक लेलैंड का अधिग्रहण भारत का पहला बड़ा एनआरआई निवेश था, जिसने कंपनी को संकट से उबारकर भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सफल टर्नअराउंड स्टोरी बना दिया। 1990 के दशक में स्विट्जरलैंड और भारत में बैंक स्थापित किए गए, जैसे हिंदूजा बैंक (स्विट्जरलैंड) और इंडसइंड बैंक। 2012 में जेपी मॉर्गन और हेनरी पॉलसन (पूर्व यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी) की मदद से अमेरिकी कंपनी हॉटन इंटरनेशनल का $1.045 बिलियन में अधिग्रहण किया गया, जो दुनिया की सबसे बड़ी धातु तरल पदार्थ निर्माता बनी। हाल के वर्षों में ग्रुप ने ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाया, जैसे भारत में मल्टी-जीडब्ल्यू ऊर्जा उत्पादन क्षमता बनाने की योजना और स्विच मोबिलिटी के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रवेश। ये कदम ग्रुप को टाटा, बिड़ला और अंबानी जैसे नामों के बराबर लाए।​

परिवार और व्यक्तिगत जीवन की झलक

गोपिचंद हिंदूजा का जन्म 29 जनवरी 1940 को ईरान में हुआ था, और वे सिंधी मूल के थे। वे चार भाइयों में दूसरे थे: श्रीचंद (बड़े भाई), गोपिचंद, प्रकाश (जो जेनेवा में आधारित हैं) और अशोक (सबसे छोटे, जो भारत में संचालन देखते हैं)। अशोक वर्तमान में भारत में ग्रुप के प्रमुख व्यवसाय जैसे अशोक लेलैंड का प्रबंधन करते हैं। गोपिचंद की पत्नी सुनीता हिंदूजा हैं, और उनके तीन बच्चे हैं: बेटे संजय और धीरज, तथा बेटी रीता। संजय और धीरज ग्रुप में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जबकि 2015 में संजय की शादी डिजाइनर अनु महतानी से उदयपुर में हुई, जिसकी लागत £15 मिलियन थी और यह एक भव्य समारोह था। परिवार शाकाहारी है, शराब से परहेज करता है, और लंदन में आधारित है। गोपिचंद ने 1997 में ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त की। उनका निवास लंदन के सेंट जेम्स पार्क के पास 18वीं सदी का कार्लटन हाउस महल है, जो 67,000 वर्ग फुट का है और बकिंघम पैलेस से नजदीक है; इसकी अनुमानित कीमत £400 मिलियन है। परिवार के पास व्हाइटहॉल में विंस्टन चर्चिल के पुराने वॉर ऑफिस की संपत्ति भी है, जिसे हाल ही में होटल और रिहायशी परिसर में बदल दिया गया। गोपिचंद गोल्फ के शौकीन थे और दुनिया के प्रतिष्ठित कोर्स पर खेला करते थे।​

भविष्य की नेतृत्व संरचना और विरासत

हिंदूजा ग्रुप के नेतृत्व के भविष्य के बारे में अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। श्रीचंद की 2023 में मौत के बाद गोपिचंद चेयरमैन बने थे, लेकिन अब संभवतः सबसे छोटे भाई अशोक या अगली पीढ़ी के सदस्य जैसे संजय, धीरज या रीता प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। अशोक पहले से ही भारत में ग्रुप के संचालन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें अशोक लेलैंड जैसे प्रमुख व्यवसाय शामिल हैं। परिवार ने कहा कि गोपिचंद की विरासत लाखों नौकरियों और वैश्विक विकास के माध्यम से बनी रहेगी। उन्होंने ग्रुप को भारत से यूके और यूरोप तक फैलाया, विशेष रूप से ऑटोमोटिव, वित्त, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों में। ग्रुप ने भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है, जैसे वित्तीय समावेशन बढ़ाना, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास। गोपिचंद की मेहनत ने ग्रुप को 48 से अधिक देशों में 150,000 से ज्यादा कर्मचारियों वाला साम्राज्य बना दिया, जो एशिया, यूरोप और अमेरिका में सक्रिय है।​

विवादों और सार्वजनिक जीवन का पहलू

गोपिचंद हिंदूजा ने ज्यादातर सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी, लेकिन 2001 में हिंदूजा अफेयर में फंस गए। इसमें उन्होंने ब्रिटिश मंत्री पीटर मंडेलसन को पत्र लिखा था, जिसमें उनके भाई प्रकाश के लिए यूके पासपोर्ट की मांग की गई। हिंदूजा फाउंडेशन (ग्रुप की चैरिटी शाखा) ने मिलेनियम डोम को £1 मिलियन दान दिया था, जिसके बाद मंडेलसन को इस्तीफा देना पड़ा। जांच के बाद मंडेलसन निर्दोष साबित हुए, लेकिन यह कैश-फॉर-पासपोर्ट्स स्कैंडल के रूप में जाना गया। इसके अलावा, 1980 के दशक में बोफोर्स घोटाले में गोपिचंद और उनके भाइयों का नाम आया था, लेकिन कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ। 2021 में परिवार में आंतरिक विवाद हुआ, जब श्रीचंद की बेटियों ने चाचाओं पर फंडिंग रोकने का आरोप लगाया, लेकिन मामला अदालत से बाहर सुलझ गया। इन विवादों के बावजूद, गोपिचंद ने ग्रुप को नैतिक और व्यावहारिक मूल्यों पर चलाया।​

शिक्षा, दर्शन और सामाजिक योगदान

गोपिचंद ने 1959 में मुंबई के जय हिंद कॉलेज से स्नातक किया। उन्हें वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय से कानून में मानद डॉक्टरेट और रिचमंड कॉलेज, लंदन से अर्थशास्त्र में मानद डॉक्टरेट मिला। उनका व्यवसायिक दर्शन ‘कॉमन सेंस’ पर आधारित था, जो सरल, व्यावहारिक और सामान्य बुद्धि वाले निर्णयों पर जोर देता था। उन्होंने ग्रुप को मध्य पूर्व व्यापार से शुरू कर विविध क्षेत्रों में फैलाया, जैसे 1980 के दशक में खाद्य वस्तुओं (प्याज, आलू) और लौह अयस्क के व्यापार से। हिंदूजा फाउंडेशन के माध्यम से परिवार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कला में दान दिया, जैसे कपी हिंदूजा कॉलेज ऑफ कॉमर्स को समर्थन। ग्रुप ने भारत में नौकरियां पैदा कीं, वित्तीय समावेशन बढ़ाया और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया, जो उनकी सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।

यह जानकारी याहू और बी. बी. सी. से एकत्र की गई है।