दार्जिलिंग में भूस्खलन, 23 की मौत, गांवों का संपर्क टूटा, दुर्गा पूजा की छुट्टी पर पर्यटक फंसे
दार्जिलिंग में पिछले एक दशक की सबसे भयानक भूस्खलन घटनाओं में कम से कम 23 लोग, जिनमें सात बच्चे भी शामिल हैं, अपनी जान गंवा चुके हैं, और यह संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है क्योंकि बचाव कार्य जारी हैं। पश्चिम बंगाल का खूबसूरत पहाड़ी इलाका दार्जिलिंग रविवार को लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से ट्रिगर हुई भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें जालपाईगुड़ी जिले के साथ मिलाकर 23 से अधिक लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं, साथ ही कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई गांव पूरी तरह कट गए हैं, जहां घरों को मलबे में दफना दिया गया, सड़कें मोटी मिट्टी की परतों से अवरुद्ध हो गईं, संचार नेटवर्क पूरी तरह टूट गया, और बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे सैकड़ों पर्यटक दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बीच भारी तबाही के बीच घरों या होटलों में फंस गए हैं। यह आपदा न केवल स्थानीय समुदायों को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी झकझोर रही है, खासकर चाय बागानों और पर्यटन पर निर्भर इलाकों में, जहां मलबे ने कई चाय बागान क्वार्टरों को नुकसान पहुंचाया है।
दार्जिलिंग भूस्खलन | मुख्य अपडेट
- मृत्यु संख्या: दार्जिलिंग में पिछले एक दशक की सबसे खराब भूस्खलन से कम से कम 23 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, मारे गए हैं, और कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 24 या 28 तक पहुंचने की बात कही जा रही है क्योंकि मलबे से और शव बरामद हो रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के एक अधिकारी ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को बताया, “मिरीक, दार्जिलिंग और जालपाईगुड़ी में कुल 23 मौतें दर्ज की गई हैं, जो सर्साली, जसबीरगांव, मिरीक बस्ती, धार गांव (मेची), मिरीक झील क्षेत्र और जालपाईगुड़ी के नग्राकाटा जैसे स्थानों से जुड़ी हैं।” यह आंकड़ा हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य विश्वसनीय मीडिया की रिपोर्ट्स पर आधारित है, जो स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक बयानों से लिया गया है, और बचाव टीमों द्वारा मलबे हटाने के बाद अपडेट हो रहा है। इसके अलावा, कई परिवारों ने अपने सदस्यों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई है, जिससे कुल प्रभावित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
- सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र दार्जिलिंग और मिरीक: एनडीआरएफ और स्थानीय जिला प्रशासन के अनुसार, दार्जिलिंग जिले में ही 18 मौतें हुई हैं, जिनमें मिरीक में 11, जो सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, और जोरबुंग्लो, सुकिया पोखरी तथा सदर पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में सात अन्य शामिल हैं, जहां पूरी ढलानें धंस गईं और घरों को बहा ले गईं। जालपाईगुड़ी जिले के नग्राकाटा में मलबे से पांच शव बरामद किए गए, जहां भूस्खलन ने न केवल मानवीय जानें लीं बल्कि स्थानीय चाय बागानों और कृषि भूमि को भी नष्ट कर दिया। ये आंकड़े भारत मौसम विभाग (आईएमडी) और पश्चिम बंगाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डब्ल्यूबीएसडीएमए) की पुष्टि से मेल खाते हैं, जो पहले ही भारी बारिश के कारण भूस्खलन की चेतावनी जारी कर चुके थे, और अब बचाव कार्यों में सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। मिरीक जैसे क्षेत्रों में, जहां पर्यटन प्रमुख है, भूस्खलन ने झील क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है।
- स्थिति चिंताजनक: उत्तरी बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने स्थिति को “चिंताजनक” बताया, जबकि गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए), जो दार्जिलिंग क्षेत्र का प्रबंधन करता है, ने बताया कि क्षेत्र में 35 से अधिक स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें सुकियापोखरी, जोरबुंग्लो, माने भंजांग और फलाकाटा जैसे इलाके शामिल हैं। जीटीए के मुख्य कार्यकारी अनित थापा ने पीटीआई को कहा, “पहाड़ियों की रानी कहे जाने वाले इस खूबसूरत इलाके में 35 जगहों पर भूस्खलन हुए हैं, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर हो गए और राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है।” यह जानकारी स्थानीय मीडिया, सरकारी बुलेटिन और जीटीए की आधिकारिक रिपोर्ट्स से सत्यापित है, जो क्षेत्र की भंगिमा को दर्शाती है, और अब अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं जहां एनजीओ और चिकित्सा टीमें भोजन, आश्रय और दवाओं की व्यवस्था कर रही हैं। इसके अलावा, महानंदा, जलधाका और तीस्ता नदियां खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं, जिससे जंगलों में हाथी, गैंडे, हिरण और बायसन जैसे वन्यजीवों को भागना पड़ रहा है।
- 2015 के बाद सबसे भयानक आपदा: अधिकारियों के अनुसार, यह 2015 के बाद की सबसे खराब भूस्खलन आपदा हो सकती है, जब क्षेत्र में लगभग 40 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घर नष्ट हो गए थे। वर्तमान तबाही में पूरी ढलानें धंस गई हैं, मिरीक-सुक्खियापोखरी मार्ग जैसी मुख्य सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, राजमार्ग मोटी मिट्टी की परतों में दबे हैं, और एनएच-10 जैसे प्रमुख मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग की पहुंच पूरी तरह कट गई है। पश्चिम बंगाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डब्ल्यूबीएसडीएमए) की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मिट्टी की संतृप्ति के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी से जुड़ी हैं, और अब विशेषज्ञ मिट्टी संरक्षण के उपायों पर जोर दे रहे हैं। बचाव प्रयासों में पुलों के ढहने ने और जटिलता बढ़ा दी है, जैसे कि दुदिया आयरन ब्रिज का गिरना, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रहा है।
- पर्यटक फंसे हुए: सैकड़ों पर्यटक, ज्यादातर कोलकाता, हावड़ा, हुगली और अन्य बंगाली शहरों से, दुर्गा पूजा की छुट्टियों के लिए मिरीक, घूम, लेपचाजगत और कर्सियांग जैसे हिल स्टेशनों पर आए थे, अब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण घरों, होटलों या राहत केंद्रों में फंस गए हैं, और मुख्यमंत्री ने उन्हें सलाह दी है कि वे अपनी जगह पर ही रहें जब तक पुलिस द्वारा सुरक्षित निकासी न हो जाए। यह बारिश शनिवार रात से शुरू हुई थी और 24 घंटों में दार्जिलिंग में 261 मिमी, कूच बिहार में 192 मिमी और जालपाईगुड़ी में 172 मिमी दर्ज की गई, जो अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में आती है। हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य स्रोतों के मुताबिक, पर्यटन विभाग ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, लेकिन सड़क अवरोध और दो लोहे के पुलों के ढहने के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण है, जिससे सिक्किम तक पहुंच भी कट गई है। स्थानीय अधिकारियों ने सभी पर्यटन स्थलों को बंद करने का आदेश दिया है और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, ताकि फंसे पर्यटकों को तुरंत सहायता मिल सके।
- सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित: एनडीआरएफ ने बताया कि दार्जिलिंग और उत्तर सिक्किम में सड़क संपर्क बुरी तरह बाधित हो गया है, जहां सिलीगुड़ी को मिरीक-दार्जिलिंग मार्ग से जोड़ने वाला एक लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो गया, और कुल दो आयरन ब्रिज ढह चुके हैं, जिससे मुख्य पहुंच मार्ग कट गए और पुलबाजार से थनालाइन को जोड़ने वाला ब्रिज नष्ट हो गया। राज्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पुष्टि की है कि मरम्मत कार्य तुरंत शुरू हो गया है, लेकिन बारिश के कारण देरी हो रही है, और कुरसेong में डिलाराम तथा व्हिसल खोला पर दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी मार्ग अवरुद्ध है, जबकि रोहिणी रोड को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे न केवल मानवीय सहायता पहुंचाना मुश्किल हो गया है, बल्कि स्थानीय व्यापार और दैनिक जीवन भी ठप हो गया है, जहां स्कूल-कॉलेज बंद हैं और बिजली की बहाली में समय लग रहा है।
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान: बढ़ती संकट की स्थिति पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय नबन्ना में आपात बैठक बुलाई, जिसमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, उत्तरी बंगाल के जिलाधिकारियों, एसपी, सिलीगुड़ी मेयर गौतम देब और जीटीए प्रमुख अनित थापा शामिल हुए, और सोमवार, 6 अक्टूबर को खुद उत्तर बंगाल का दौरा करने की घोषणा की ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, “स्थिति गंभीर है। भूटान में लगातार बारिश से पानी उत्तर बंगाल में उफान पर आ गया, साथ ही सिक्किम से नदियों का जलप्रवाह बढ़ गया। यह प्राकृतिक आपदा दुर्भाग्यपूर्ण है-प्राकृतिक विपत्तियां हमारे नियंत्रण से बाहर हैं, लेकिन हम हर संभव सहायता पहुंचाएंगे।” उन्होंने बताया कि 12 घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे सात स्थानों पर भूस्खलन और बाढ़ आई, और मृतकों के परिवारों को तत्काल सहायता, मुआवजा तथा पुनर्वास की व्यवस्था का आश्वासन दिया। यह बयान राज्य सरकार की आधिकारिक प्रेस रिलीज और एक्स पोस्ट से लिया गया है, जो केंद्र-राज्य समन्वय पर जोर देता है।
- प्रधानमंत्री मोदी का शोक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया और कहा कि केंद्र सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है, साथ ही प्रभावित क्षेत्रों को हर संभव सहायता प्रदान करने का वादा किया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर उन्होंने लिखा, “दार्जिलिंग में पुल दुर्घटना और भूस्खलन से हुई मौतों से गहरा दुख हुआ। प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर करीब से निगरानी की जा रही है, और हम प्रभावितों को सभी संभव सहायता देंगे।” प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी यह बयान केंद्र की सहायता को रेखांकित करता है, जिसमें एनडीआरएफ और सेना की तैनाती शामिल है, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्यरत हैं। मोदी ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहन शोक व्यक्त किया और घायलों की जल्दी ठीक होने की कामना की।
- आईएमडी का पूर्वानुमान: भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कालिमपोंग, अलिपुरदुआर, जालपाईगुड़ी और कूच बिहार शामिल हैं, के लिए 6 अक्टूबर तक अत्यधिक भारी वर्षा (204.4 मिमी से अधिक) की चेतावनी जारी की है, जो सिक्किम, मेघालय, बिहार और अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। कूच बिहार और जालपाईगुड़ी के लिए लाल सतर्कता बरकरार है, जबकि दार्जिलिंग जिले के लिए नारंगी सतर्कता है, और दक्षिण बंगाल के जिलों जैसे बीरभूम, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर में भी भारी वर्षा की संभावना है। आईएमडी ने संतृप्त मिट्टी के कारण और भूस्खलन तथा सड़क अवरोध की चेतावनी दी है, साथ ही बंगाल की खाड़ी में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। यह पूर्वानुमान आईएमडी की आधिकारिक वेबसाइट और बुलेटिन से सत्यापित है, जो क्षेत्रीय जलवायु पैटर्न, पश्चिमी विक्षोभ और डिप्रेशन के प्रभाव पर आधारित है, और 7-8 अक्टूबर तक हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की बात कही गई है।
- नेपाल में बारिश का प्रभाव: हिमालय में हो रही बारिश का असर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से सटे नेपाल में भी दिखा, जहां भारी बारिश से भूस्खलन और बाढ़ आई, जिसमें रविवार तक 24 घंटों में 52 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों प्रभावित हुए। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आपदा पूर्वी नेपाल के तराई और पहाड़ी इलाकों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जहां नदियां उफान पर हैं और सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। अलग खबर में, तिब्बत के माउंट एवरेस्ट के पूर्वी चेहरे के पास बर्फीले तूफान से फंसे सैकड़ों ट्रेकर्स को चीनी बचाव दल ने सुरक्षित पहुंचाया, जैसा कि चीनी राज्य मीडिया ने रविवार को रिपोर्ट किया, जो हिमालयी क्षेत्र की व्यापक मौसम संबंधी चुनौतियों को दर्शाता है। ये घटनाएं क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को उजागर करती हैं, जहां सीमा पार पानी का प्रवाह और साझा पारिस्थितिकी आपदाओं को बढ़ावा दे रही है।
जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स और संघीय से एकत्र की गई है
