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चीन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचकर युद्ध का खतरा बढ़ा रहा है।

सार: चीन ने कहा कि ताइवान को अमेरिकी हथियार बिक्री से युद्ध का खतरा “तेज़” हो रहा है, क्योंकि वाशिंगटन ने लगभग 11.1 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित हथियार पैकेज को आगे बढ़ाया है, जो अब अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया में है।​

चीन ने क्या कहा

चीन के रक्षा मंत्रालय ने ताइवान के लिए ताज़ा अमेरिकी हथियार सौदे की आलोचना की और कहा कि यह कदम ताइवान जलडमरूमध्य में संघर्ष के जोखिम को “तेज़” कर रहा है।​

चीन के रक्षा प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने कहा कि अमेरिका हथियार बिक्री बढ़ाकर और ताइवान के साथ संपर्क गहरा करके तनाव बढ़ा रहा है, जिससे अस्थिरता बढ़ती है और युद्ध का जोखिम ऊपर जाता है।​

बीजिंग ने अमेरिका से कहा कि वह ताइवान से जुड़े मुद्दों को “अत्यधिक सावधानी” से संभाले, ताइवान को हथियार देना बंद करे और “एक-चीन सिद्धांत” तथा चीन-अमेरिका के तीन संयुक्त विज्ञप्तियों (Joint Communiqués) के अनुरूप कदम उठाए।​

अलग से, चीन के विदेश मंत्रालय ने प्रस्तावित पैकेज की निंदा की और कहा कि यह उन समझौतों/समझदारियों का गंभीर उल्लंघन है, जिनके आधार पर बीजिंग ताइवान मुद्दे पर चीन-अमेरिका संबंधों को परिभाषित मानता है।​

विदेश मंत्रालय के बयानों में कहा गया कि ये सूचनाएं (notifications) “एक-चीन सिद्धांत” और तीन संयुक्त विज्ञप्तियों का “घोर” उल्लंघन हैं तथा ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाती हैं।​

चीन ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए “दृढ़ और शक्तिशाली कदम” उठाएगा, हालांकि तत्काल बयान में ठोस उपायों का विवरण नहीं दिया गया।​

अमेरिका ने क्या मंज़ूरी दी

अमेरिका ने ताइवान के लिए लगभग 11.1 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित हथियार पैकेज की घोषणा की, जिसे सार्वजनिक रिपोर्टिंग में द्वीप के लिए अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी पैकेज बताया गया है।​

अमेरिकी सूचनाएं कई अलग-अलग मामलों (cases) में हैं और अभी कांग्रेस को सूचित/समीक्षा चरण में हैं, यानी ये अंतिम अनुबंध नहीं हैं।​ ताइवान की सेना ने कहा है कि कांग्रेस की समीक्षा अवधि लगभग 30 दिन होती है; उसके बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर और डिलीवरी/कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।​

अमेरिकी सरकार की सार्वजनिक व्याख्याओं में इन सौदों को ताइवान की सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण, “विश्वसनीय रक्षा क्षमता” बनाए रखने और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के समर्थन से जोड़ा गया है।​

सार्वजनिक सारांशों में यह भी कहा जाता है कि ये कदम अमेरिकी हितों से जुड़े हैं और ताइवान को पर्याप्त आत्म-रक्षा क्षमता बनाए रखने में मदद करते हैं।​

वाशिंगटन के बीजिंग से औपचारिक राजनयिक संबंध हैं, लेकिन ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए रखता है और ताइवान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है।​

पैकेज में क्या शामिल है (सार्वजनिक रूप से बताए गए विवरण)

प्रस्तावित मामलों के सार्वजनिक विवरणों में लंबी दूरी की मारक क्षमता, वायु-रक्षा से जुड़ी सपोर्ट/सस्टेनमेंट, एंटी-आर्मर सिस्टम और “लॉइटरिंग म्यूनिशन्स” जैसी प्रणालियां शामिल बताई गई हैं, जिनका उद्देश्य ताइवान की “असिमेट्रिक” (असमान/कम लागत वाली, अधिक असरदार) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है।​

एक मामले में हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) और संबंधित उपकरण शामिल हैं, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 4.05 अरब अमेरिकी डॉलर बताई गई है।​

रिपोर्टों और केस-सारांशों में ATACMS, सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्ज़र, लॉइटरिंग म्यूनिशन्स और जैवलिन/टOW एंटी-टैंक मिसाइलों जैसे सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।​

सार्वजनिक रूप से बताए गए सिस्टम (उदाहरण) सरल शब्दों में उपयोग सार्वजनिक अनुमान/नोट
HIMARS रॉकेट सिस्टम मोबाइल रॉकेट आर्टिलरी, जो विरोधी की योजना मुश्किल बनाकर प्रतिरोधक प्रभाव बढ़ाती है एक केस का अनुमान 

∼4.05

∼4.05 अरब डॉलर। ​

मिसाइलें (पैकेज विवरण में ATACMS का उल्लेख) लंबी दूरी की मारक क्षमता और प्रतिरोधक क्षमता कई केस-सारांशों में सूचीबद्ध; कुल मूल्य केस के अनुसार बदलता है। ​
सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्ज़र (उल्लेखित) भूमि-आधारित फायर सपोर्ट और अधिक जीवित रहने योग्य आर्टिलरी सार्वजनिक रिपोर्टिंग में बहु-अरब डॉलर स्तर के केस का उल्लेख। ​
एंटी-टैंक मिसाइलें (जैवलिन/TOW) तटीय/भूमि रक्षा; बख्तरबंद वाहनों और लैंडिंग फोर्स के खिलाफ वर्णित मामलों में शामिल। ​
लॉइटरिंग म्यूनिशन्स (उल्लेखित) निगरानी + सटीक हमला करने वाली “वन-वे” प्रणाली वर्णित मामलों में शामिल। ​

ताइवान की प्रतिक्रिया

ताइवान के रक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी कदम का स्वागत किया और इसे रक्षा-उन्मुख (defensive) बताते हुए क्षेत्र में प्रतिरोधक क्षमता और स्थिरता बनाए रखने से जोड़ा।​

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।​

हालिया अलग मामले (लगभग 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर) पर भी ताइवान सरकार ने कहा था कि अमेरिकी रक्षा सहयोग अमेरिकी नीति-प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और तैयारी व लचीलापन बढ़ाने में मददगार है।​

हथियार बिक्री प्रक्रिया कैसे चलती है (सरल रूप में)

अमेरिका में हथियार पैकेज अक्सर “संभावित” Foreign Military Sales (FMS) के रूप में घोषित होते हैं—पहले कार्यपालिका मंज़ूरी और फिर कांग्रेस को सूचना/समीक्षा, न कि तुरंत अंतिम अनुबंध।​

ताइवान की सेना के अनुसार, सूचित किए गए मामलों में लगभग 30 दिन की अनिवार्य समीक्षा अवधि होती है; उसके बाद अनुबंध और क्रियान्वयन शुरू होता है।​

एक व्याख्यात्मक/संकलन स्रोत बताता है कि अमेरिकी कानूनी ढांचा, मूल्य-सीमाएं और समीक्षा विंडो कैसे काम करती है, जिसके दौरान कांग्रेस आपत्ति उठा सकती है।​

चरण क्या होता है वर्तमान मामला किस स्थिति में है
कार्यपालिका मंज़ूरी + DSCA नोटिफिकेशन स्टेट डिपार्टमेंट “संभावित” बिक्री को मंज़ूरी देता है; DSCA कांग्रेस को सूचित करता है इसे कांग्रेस नोटिफिकेशन/समीक्षा चरण में बताया गया है। ​
कांग्रेस समीक्षा कानूनन समय-सीमा में समीक्षा; जरूरत पड़े तो रोकने की कोशिश ताइवान के अनुसार 

∼30

∼30 दिन। ​

अनुबंध + डिलीवरी अनुबंध पर हस्ताक्षर; उत्पादन/ट्रेनिंग/लॉजिस्टिक्स समीक्षा के बाद आगे बढ़ता है। ​

अभी इसका महत्व क्यों बढ़ गया है

यह मामला अमेरिका-चीन संबंधों में दबाव बढ़ाता है, क्योंकि बीजिंग ताइवान को अपने “मुख्य संप्रभुता” मुद्दे के रूप में देखता है, जबकि वाशिंगटन हथियार समर्थन को ताइवान की आत्म-रक्षा क्षमता और प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने से जोड़ता है।​

चीन की चेतावनियां हथियार हस्तांतरण को सीधे ताइवान जलडमरूमध्य में युद्ध जोखिम बढ़ने से जोड़ती हैं, जिससे संकेत मिलता है कि भविष्य की सूचनाओं के जवाब में बीजिंग कूटनीतिक विरोध, सैन्य गतिविधि या अन्य प्रतिकार कदम तेज कर सकता है।​

निकट अवधि में अगला व्यावहारिक पड़ाव यह है कि अमेरिकी कांग्रेस समीक्षा अवधि में इन मामलों को आगे बढ़ने देती है या नहीं; उसके बाद ताइवान अनुबंध और डिलीवरी टाइमलाइन पर काम बढ़ा सकेगा।​

अंतिम विचार

चीन द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहना कि ये बिक्री युद्ध का जोखिम “तेज़” कर रही है, दिखाता है कि ताइवान जलडमरूमध्य में प्रतिरोधक कदम कितनी जल्दी अमेरिका-चीन के बीच राजनीतिक टकराव का कारण बन सकते हैं।​

ताइवान के लिए, यह प्रस्तावित पैकेज लंबे समय से चल रही रणनीति के अनुरूप है, जिसमें तैयारी बनाए रखना और ऐसे सिस्टम अपनाना शामिल है जो कमज़ोरियों को घटाएं और लक्ष्य बनना कठिन करें।​

अमेरिका के लिए, आने वाले दिनों में प्रमुख परीक्षा यह रहेगी कि वह कांग्रेस समीक्षा प्रक्रिया को कैसे संभालता है, जबकि बीजिंग की बढ़ती आपत्तियों के बीच प्रतिरोधक (deterrence) लक्ष्यों पर टिके रहने की कोशिश करता है।​