चीन ने भारत के साथ सीमा पर तनाव कम करने के पेंटागन के दावे को खारिज किया
चीन ने भारत के साथ सीमा पर तनाव घटने (de-escalation) को लेकर पेंटागन के दावे को खारिज किया, जब अमेरिकी रक्षा विभाग की एक नई आकलन रिपोर्ट में कहा गया कि बीजिंग LAC पर तनाव कम होने का फायदा उठाकर भारत-अमेरिका नजदीकी को कमजोर करना चाहता है। चीन ने इस आकलन को “बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना” बताया।
पेंटागन रिपोर्ट में क्या कहा गया
अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) की हालिया वार्षिक रिपोर्ट (कांग्रेस को प्रस्तुत) में चीन की सैन्य और सुरक्षा गतिविधियों का आकलन करते हुए कहा गया कि बीजिंग संभवतः भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control—LAC) पर तनाव में आई कमी का रणनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन भारत के साथ रिश्तों को स्थिर दिखाकर या सीमित “शांति” बनाकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की गति को धीमा करने की कोशिश कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि LAC पर तनाव कम होना जरूरी नहीं कि चीन की दीर्घकालिक सैन्य स्थिति या दृष्टिकोण में मूलभूत बदलाव का संकेत हो।
मुख्य दावे: एक नजर में
| मुद्दा | पेंटागन रिपोर्ट का दावा | इसका मतलब/संकेत |
| “सीमा पर शांति” | चीन LAC पर तनाव घटाकर भारत के साथ संबंध स्थिर करना चाहता है, ताकि भारत-अमेरिका नजदीकी सीमित रहे। | यह “रणनीतिक बदलाव” से ज्यादा “टैक्टिकल (तात्कालिक) शांति” हो सकती है। |
| संदर्भ बिंदु | रिपोर्ट ने 2024 के अक्टूबर में कुछ विवादित क्षेत्रों में disengagement/पैट्रोलिंग व्यवस्था का हवाला दिया। | सीमा प्रबंधन और कूटनीति को व्यापक रणनीति से जोड़ा जा रहा है। |
| भरोसे का संकट | रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चीन की मंशा को लेकर सतर्क रह सकता है। | रिश्तों का पूर्ण सामान्यीकरण (normalization) धीमा रह सकता है। |
चीन की प्रतिक्रिया: “तीसरे पक्ष की टिप्पणी” का विरोध
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को गलत तरीके से पेश करती है और चीन-भारत संबंधों में फूट डालने की कोशिश करती है। बीजिंग ने दोहराया कि चीन-भारत सीमा विवाद एक द्विपक्षीय मामला है और इसे दोनों देश संवाद व बातचीत से सुलझाएं, न कि कोई तीसरा पक्ष इसकी व्याख्या करे।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के मुताबिक, चीन-भारत सीमा पर स्थिति “कुल मिलाकर स्थिर” है और दोनों पक्षों के बीच संवाद के चैनल “सुगम/सक्रिय” हैं। चीन ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को “रणनीतिक ऊंचाई” और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है।
भारत-चीन सीमा पर मौजूदा स्थिति क्या है
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत और चीन ने पिछले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कुछ क्षेत्रों में मुक्ति (सेना को पीछे करना/टकराव रोकना) और जोखिम-प्रबंधन उपायों पर काम किया है, हालांकि व्यापक विश्वास बहाली अब भी बड़ी चुनौती है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने संसद से जुड़े एक जवाब में कहा था कि भारत और चीन के बीच Depsang और डेमचोक क्षेत्रों में LAC पर पैट्रोलिंग व्यवस्थाओं को लेकर 21 अक्टूबर 2024 को एक समझ बनी थी और उसके आधार पर सहमत तौर-तरीके और इस समय के अनुसार मुक्ति लागू हुआ। भारत ने यह भी बताया कि अन्य क्षेत्रों में पहले से बने विघटन व्यवस्था कायम रहे और दोनों पक्ष विभिन्न स्तरों पर बातचीत करते रहे।
प्रमुख घटनाक्रम: टाइमलाइन
| तारीख/समय | घटना | महत्व |
| मई–जून 2020 | LAC पर तनाव बढ़ा और गलवान क्षेत्र में घातक झड़प हुई। | यह रिश्तों में बड़ा मोड़ बना और लंबे समय तक बातचीत/तनाव का आधार बना। |
| 21 अक्टूबर 2024 | Depsang और Demchok में पैट्रोलिंग/व्यवस्था पर समझ और disengagement का क्रियान्वयन। | कुछ शेष विवादित बिंदुओं पर प्रगति के रूप में देखा गया। |
| अक्टूबर 2024 (BRICS) | सीमा समझ के बाद BRICS के दौरान शीर्ष नेतृत्व स्तर पर संपर्क/बैठक। | रिश्तों को स्थिर करने के राजनीतिक संकेत मिले। |
| 23–24 दिसंबर 2025 | अमेरिका की 2025 वार्षिक रक्षा रिपोर्ट सामने आई। | LAC “शांति” को बड़े भू-राजनीतिक संदर्भ में जोड़कर देखा गया। |
| 24–25 दिसंबर 2025 | चीन ने रिपोर्ट की भाषा/दावों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया। | चीन ने दोहराया कि अमेरिका जैसे तीसरे पक्ष की व्याख्या स्वीकार्य नहीं। |
यह मुद्दा सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि LAC पर तनाव कम हुआ या नहीं, बल्कि इस बात से भी जुड़ा है कि इसे स्थायी स्थिरता की दिशा में कदम माना जाए या बड़े रणनीतिक मुकाबले में “अस्थायी/टैक्टिकल” कदम।
अमेरिकी आकलन के अनुसार, सीमा पर कम तनाव भारत की रणनीतिक पसंदों और भारत-अमेरिका सहयोग की दिशा पर असर डाल सकता है। वहीं चीन के लिए प्राथमिक लक्ष्य यह दिखाना है कि सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंध तीसरे देशों के हस्तक्षेप से अलग रखे जाएं, और बातचीत के जरिए प्रबंधन हो।
अंतिम विचार
चीन का कड़ा खंडन संकेत देता है कि वह भारत के साथ सीमा संबंधी घटनाक्रम को अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा की कहानी में समाहित होने से रोकना चाहता है और इसे द्विपक्षीय मुद्दे के रूप में बनाए रखना चाहता है।
दूसरी ओर, पेंटागन की रिपोर्ट बताती है कि वॉशिंगटन LAC पर किसी भी “कमी/शांति” को भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में देख रहा है, और इसे एक महत्वपूर्ण संकेतक मान रहा है।
आगे ध्यान इस पर रहेगा कि भारत-चीन संवाद तंत्र सीमा पर जोखिम घटाने और de-escalation को कितना आगे बढ़ाते हैं, और क्या मौजूदा “स्थिरता” भरोसे में ठोस सुधार में बदलती है या नहीं।
