बजट फोन में स्पेक्स से ज्यादा सॉफ्टवेयर अपडेट क्यों मायने रखते हैं?
जब भी हम नया फोन खरीदने के लिए किसी दुकान पर जाते हैं या इंटरनेट पर सर्च करते हैं तो हमारी नजर सबसे पहले उन चमकते हुए नंबरों पर जाती है। एक सौ बीस हर्ट्ज का डिस्प्ले आठ जीबी रैम एक सौ आठ मेगापिक्सल का कैमरा और पांच हजार एमएएच की बड़ी बैटरी हर किसी को लुभाती है। खास तौर पर कम कीमत वाले सेगमेंट में हर ग्राहक चाहता है कि उसे कम से कम पैसों में ज्यादा से ज्यादा फीचर्स मिल जाएं। लेकिन फोन खरीदने की इस जल्दबाजी में हम एक ऐसी चीज को पूरी तरह से भूल जाते हैं जो असल में उस फोन की असली उम्र और रफ्तार तय करती है।
आपने शायद ही कभी किसी दुकानदार को यह कहते सुना होगा कि इस फोन का प्रोसेसर तो बहुत ही सामान्य है लेकिन इसमें आपको तीन साल तक नियमित रूप से सिक्योरिटी पैच मिलेंगे। कंपनियों की मार्केटिंग हमेशा हार्डवेयर पर टिकी होती है क्योंकि हार्डवेयर के बड़े नंबरों को ग्राहकों को बेचना बहुत आसान होता है। सच तो यह है कि बेहतरीन हार्डवेयर वाला कोई भी फोन अगर सही सॉफ्टवेयर सपोर्ट के बिना है तो वह बिना इंजन की एक खूबसूरत गाड़ी जैसा है। आज हम विस्तार से यही बात करेंगे कि आखिर क्यों आपके मेहनत की कमाई से खरीदे गए फोन में स्पेक्स से कहीं ज्यादा अहमियत बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अपडेट की होनी चाहिए और कैसे यह आपके डिजिटल अनुभव को पूरी तरह से बदल सकता है।
| हार्डवेयर का आकर्षण | सॉफ्टवेयर की असलियत | भविष्य का परिणाम |
| ज्यादा रैम का होना | मेमोरी मैनेजमेंट का खराब होना | फोन का बार~बार हैंग होना |
| बड़े मेगापिक्सल का कैमरा | इमेज प्रोसेसिंग का कमजोर होना | धुंधली और खराब तस्वीरें आना |
| बड़ी क्षमता वाली बैटरी | बैकग्राउंड ऐप्स का चालू रहना | बैटरी का बहुत जल्दी खत्म होना |
| तेज प्रोसेसर का लालच | पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम का होना | नए ऐप्स का सही से काम न करना |
स्पेक्स का मोह और हमारी सबसे बड़ी भूल
हम अक्सर यह मानकर चलते हैं कि अगर हमारे फोन में रैम बहुत ज्यादा है और उसका प्रोसेसर बिल्कुल नया है तो वह फोन सालों साल बिना रुके बहुत ही शानदार तरीके से चलेगा। यह मोबाइल बाजार का एक बहुत बड़ा मिथक है जिसे कंपनियां अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं। हार्डवेयर केवल वह भौतिक ढांचा है जो आपके फोन को काम करने की क्षमता देता है लेकिन उस पूरे ढांचे को कंट्रोल करने वाला और सही दिशा देने वाला दिमाग उसका सॉफ्टवेयर ही होता है। जब आप कोई ऐसा सस्ता फोन खरीदते हैं जिसमें बहुत भारी भरकम और महंगे स्पेक्स दिए गए हों तो कंपनी अपना मुनाफा कमाने के लिए कहीं न कहीं तो पैसे बचाएगी ही।
अक्सर यह कटौती सॉफ्टवेयर बनाने और उसके लंबे सपोर्ट के हिस्से में आती है। शुरुआत में फोन बॉक्स से निकालते ही आपको बहुत तेज लग सकता है लेकिन कुछ ही महीनों के बाद उसमें छोटे~छोटे सॉफ्टवेयर ग्लिच आना शुरू हो जाते हैं। आपका कैमरा ऐप खुलने में बहुत ज्यादा समय लेने लगता है और फोन बिना किसी वजह के गर्म होने लगता है। फोन का ज्यादा गर्म होना सीधे तौर पर अधिक रेडिएशन का कारण भी बन सकता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह सब किसी खराब हार्डवेयर की वजह से नहीं होता बल्कि एक ऐसे सिस्टम की वजह से होता है जिसे ठीक से बनाया नहीं गया और जिसके लिए कंपनी ने कोई नया सुधार नहीं भेजा।
| स्पेसिफिकेशन | ग्राहकों की आम धारणा | बिना अपडेट के असली सच्चाई |
| डिस्प्ले क्वालिटी | हमेशा बेहतरीन और स्मूथ चलेगी | सॉफ्टवेयर बग्स के कारण स्क्रीन अटकने लगती है |
| स्टोरेज क्षमता | ज्यादा डेटा सुरक्षित रहेगा | जंक फाइल्स और पुराने कैशे से फोन धीमा हो जाता है |
| नेटवर्क कनेक्टिविटी | हमेशा तेज इंटरनेट मिलेगा | नेटवर्क ड्राइवर पुराने होने से इंटरनेट बार~बार कटता है |
| गेमिंग परफॉरमेंस | गेम कभी लैग नहीं करेगा | पुराने सॉफ्टवेयर के कारण फोन ज्यादा गर्म होने लगता है |
आखिर बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अपडेट क्यों जरूरी है
आज के समय में हमारा फोन सिर्फ बात करने या मैसेज भेजने का जरिया नहीं रह गया है बल्कि यह हमारा चलता फिरता बैंक हमारी यादों का एलबम और हमारे काम का सबसे मुख्य हथियार है। इसमें हमारे बैंक अकाउंट्स यूपीआई पिन निजी तस्वीरें और बहुत सारा ऐसा डेटा होता है जिसे हम किसी के साथ साझा नहीं कर सकते। हैकर्स और साइबर अपराधी हर रोज ऐसे नए तरीके ढूंढते रहते हैं जिससे वो आम लोगों के फोन में आसानी से सेंध लगा सकें और उनका कीमती डेटा चुरा सकें। इसी बड़ी वजह से बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अपडेट आपके डिजिटल जीवन की सबसे बड़ी और मजबूत ढाल बन जाता है।
अच्छी कंपनियां नियमित रूप से हर महीने सिक्योरिटी पैच जारी करती हैं ताकि इन नई चुनौतियों और वायरस का डटकर सामना किया जा सके। अगर आपके फोन को समय पर ये सुरक्षा वाले अपडेट नहीं मिलते हैं तो आपका फोन हैकर्स के लिए एक बिना ताले का खुला दरवाजा बन जाता है। एक बहुत ही शानदार और महंगा डिस्प्ले आपके बैंक अकाउंट को हैक होने या खाली होने से कभी नहीं बचा सकता है। इसलिए एक सुरक्षित फोन वही है जिसे लगातार सुरक्षा के पैच मिलते रहें चाहे उसमें रैम थोड़ी कम ही क्यों न हो।
| अपडेट का प्रकार | अपडेट का मुख्य काम | अपडेट न मिलने का भारी नुकसान |
| मासिक सिक्योरिटी पैच | नए तरह के वायरस और हैकिंग से बचाना | बैंक और निजी डेटा चोरी होने का सीधा खतरा |
| सिस्टम बग फिक्सेस | फोन में आ रही रोजमर्रा की रुकावटों को दूर करना | कैमरा फ्रीज होना और कॉल बार~बार कटना |
| प्राइवेसी कंट्रोल अपडेट्स | कैमरा और माइक के एक्सेस को सुरक्षित बनाना | कोई भी ऐप छुपकर आपकी निजी बातें सुन सकता है |
| नेटवर्क स्टेबिलिटी पैच | वाई~फाई और ब्लूटूथ कनेक्शन को मजबूत करना | इंटरनेट का धीमा होना और डिवाइस कनेक्ट न होना |
ओएस अपडेट्स से फोन को नया बनाए रखने का राज

ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां हर साल अपना एक नया वर्जन लॉन्च करती हैं ताकि ग्राहकों को कुछ नया और बेहतर अनुभव मिल सके। हर नए ओएस अपडेट के साथ फोन के अंदर कई सारे नए फीचर्स आते हैं आपकी प्राइवेसी को बचाने के कंट्रोल्स बेहतर होते हैं और फोन चलाने का पूरा डिजाइन बदल जाता है। जब आपके पुराने फोन को एक नया ओएस अपडेट मिलता है तो आपको बिल्कुल वैसा ही महसूस होता है जैसे आपने बाजार से कोई नया फोन खरीद लिया हो। सस्ते फोन के साथ बाजार में सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि कई ब्रांड्स इनमें नया ओएस अपडेट देने में बहुत ज्यादा कंजूसी करते हैं।
आप जिस पुराने वर्जन पर अपना फोन खरीदते हैं आपका वह फोन अपनी पूरी जिंदगी उसी पुराने वर्जन पर खत्म कर देता है जो कि ग्राहकों के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है। इसके विपरीत अगर कोई ब्रांड आपको कम से कम दो या तीन साल के नए ओएस अपडेट का पक्का वादा करता है तो आपका फोन समय बीतने के साथ पुराना और उबाऊ नहीं लगेगा। इससे आपको बार~बार नया फोन खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और आपके काफी पैसे भी बचेंगे।
| पुराने ओएस वाले फोन की स्थिति | नए ओएस अपडेट वाले फोन के फायदे |
| पुराने डिजाइन और बोरिंग इंटरफेस के साथ फंसे रहना | नए विजेट्स थीम्स और अपनी पसंद के अनुसार बदलने के विकल्प |
| नए बैंकिंग और सोशल मीडिया ऐप्स इंस्टॉल नहीं हो पाते | सभी लेटेस्ट ऐप्स बिना किसी दिक्कत और रुकावट के चलते हैं |
| प्राइवेसी की सेटिंग्स बहुत ही ज्यादा सीमित होती हैं | ऐप्स को दी जाने वाली परमिशन पर आपका पूरा नियंत्रण रहता है |
| डार्क मोड और बैटरी सेवर जैसे फीचर्स पुराने तरीके के होते हैं | आधुनिक बैटरी बचाने वाले और आंखों को आराम देने वाले फीचर्स मिलते हैं |
परफॉरमेंस और हार्डवेयर का सही तालमेल
जैसे~जैसे समय बीतता है और तकनीक आगे बढ़ती है हमारे फोन में मौजूद सभी ऐप्स भी आकार में बड़े और भारी होते जाते हैं। सोशल मीडिया ऐप्स वीडियो देखने वाले प्लेटफॉर्म और चैटिंग ऐप्स समय के साथ लगातार अपडेट होते हैं और इन्हें बिना रुके चलाने के लिए फोन के सिस्टम का भी अप~टू~डेट होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। अगर आपका फोन पुराने सिस्टम पर चल रहा है और आप उसमें बिल्कुल नए जमाने के ऐप्स चला रहे हैं तो उनके बीच का तालमेल पूरी तरह से बिगड़ जाता है। लगातार मिलने वाले सुधार पैच आपके फोन के मुख्य प्रोसेसर और रैम के बीच के काम करने के तरीके को हमेशा दुरुस्त रखते हैं।
एक साधारण प्रोसेसर वाला फोन जिसे नियमित रूप से बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अपडेट मिल रहे हैं वह उस महंगे फोन से कहीं ज्यादा बेहतर काम करेगा जिसे पिछले एक साल से कोई भी नया सुधार नहीं मिला है। यह बात गेम खेलने वालों के लिए भी उतनी ही सच है क्योंकि गेम बनाने वाली कंपनियां भी नए सिस्टम के हिसाब से ही अपने गेम को बेहतर बनाती हैं। इसलिए फोन की असली ताकत उसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के सही मिलन में ही छुपी होती है।
| फोन की परफॉरमेंस का हिस्सा | अपडेट न मिलने का बुरा प्रभाव | अपडेट मिलने के बाद होने वाला सुधार |
| ऐप लोडिंग का समय | ऐप्स खुलने में बहुत ज्यादा और लंबा समय लेते हैं | मेमोरी बेहतर तरीके से काम करती है और ऐप्स झटपट खुलते हैं |
| मल्टीटास्किंग की क्षमता | एक ऐप से दूसरे ऐप पर जाने में फोन बुरी तरह अटकता है | रैम का सही इस्तेमाल होता है और फोन बहुत ही स्मूथ चलता है |
| फोन का तापमान | सामान्य रूप से फोन चलाने में भी डिवाइस गर्म होता है | प्रोसेसर पर पड़ने वाला फालतू लोड कम होता है और फोन ठंडा रहता है |
| बैटरी की खपत | बैकग्राउंड प्रोसेस के कारण बैटरी बहुत तेजी से गिरती है | सिस्टम खुद तय करता है कि किस ऐप को कितनी बैटरी देनी है |
ई~वेस्ट और सस्टेनेबिलिटी पर सॉफ्टवेयर का असर
हम आम लोग शायद फोन खरीदते समय इस बहुत ही जरूरी नजरिए से कभी सोचते नहीं हैं लेकिन सॉफ्टवेयर अपडेट्स का सीधा और बहुत गहरा असर हमारे आसपास के पर्यावरण पर भी पड़ता है। जब कोई फोन केवल इसलिए कबाड़ बन जाता है क्योंकि उसका अंदरूनी सिस्टम बहुत पुराना हो गया है और उसमें आजकल के नए ऐप काम नहीं कर रहे हैं तो हम अनजाने में ही इलेक्ट्रॉनिक कचरा बढ़ा रहे होते हैं। आज के समय में पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाने और चीजों को लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर बहुत ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
एक ऐसा फोन जिसे कंपनी की तरफ से लंबे समय तक अपडेट्स मिलते हैं उसे आप आराम से तीन से चार सालों तक बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सकते हैं। यह न सिर्फ आपके मेहनत से कमाए गए पैसों को बचाता है बल्कि हमारे पर्यावरण के नजरिए से भी यह एक बेहद समझदारी भरा और अच्छा कदम है। दुनिया भर में हर साल लाखों टन फोन कचरे में फेंके जाते हैं और अगर कंपनियां सही सपोर्ट दें तो इस कचरे को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
| पर्यावरण और फोन का पहलू | कम अपडेट वाले फोन का भयानक परिणाम | लंबे अपडेट सपोर्ट वाले फोन का शानदार लाभ |
| फोन इस्तेमाल करने की अवधि | सिर्फ एक या दो साल में ही नया फोन खरीदना पड़ता है | तीन से चार साल तक पुराना फोन ही बेहतरीन तरीके से काम करता है |
| इलेक्ट्रॉनिक कचरे में इजाफा | फोन जल्दी खराब होकर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाता है | कचरे में भारी कमी आती है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है |
| बाजार में फोन की रीसेल वैल्यू | पुराना सॉफ्टवेयर होने से फोन बेचने पर अच्छी कीमत नहीं मिलती | हमेशा अप~टू~डेट रहने से फोन की रीसेल वैल्यू काफी अच्छी बनी रहती है |
| खनिजों का दोहन | नए फोन बनाने के लिए धरती से और ज्यादा खनिज निकाले जाते हैं | एक ही फोन लंबे समय तक चलने से संसाधनों की अच्छी बचत होती है |
बाजार का सच सैमसंग बनाम अन्य ब्रांड्स
जब बात बहुत महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन्स की आती है तो एप्पल आईफोन पंद्रह प्रो या गूगल पिक्सेल आठ प्रो जैसे ब्रांड्स पांच से सात साल तक का बहुत ही शानदार सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी सपोर्ट अपने ग्राहकों को देते हैं। लेकिन सस्ते और मिड~रेंज सेगमेंट में कहानी एकदम अलग हो जाती है और यहां दो साल का अपडेट मिलना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। हालांकि अब बाजार धीरे~धीरे ग्राहकों की जागरूकता के कारण बदल रहा है। अगर हम बड़े ब्रांड्स की तुलना करें तो सैमसंग अपने गैलेक्सी ए पैंतीस पांच जी जैसे मिड~रेंज और बजट फोन्स में लंबी अवधि के अपडेट्स की गारंटी दे रहा है जो इसे बाजार में बहुत ही ज्यादा भरोसेमंद बनाता है।
दूसरी तरफ कई चीनी ब्रांड्स सिर्फ अच्छे कैमरे और चमकते हुए डिस्प्ले पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उनके फोन्स शुरुआत में तो बहुत तेज चलते हैं लेकिन उनके सिस्टम में अक्सर गैर~जरूरी ऐप्स और विज्ञापनों की भरमार होती है जो लंबे समय में फोन की परफॉरमेंस को बुरी तरह धीमा कर देते हैं। एक समझदार ग्राहक होने के नाते आपको विज्ञापनों वाले सस्ते फोन और साफ~सुथरे अनुभव वाले फोन के बीच का यह बड़ा अंतर समझना ही होगा।
| स्मार्टफोन बनाने वाले ब्रांड | सस्ते फोन में अपडेट देने की नीति | फोन चलाने का असली अनुभव |
| सैमसंग गैलेक्सी सीरीज | आमतौर पर दो से चार साल के ओएस और चार साल के सिक्योरिटी पैच | इनका यूआई काफी साफ~सुथरा है और इसमें काम के फीचर्स भरे होते हैं |
| मोटोरोला सीरीज | एक से दो साल के ओएस अपडेट और तीन साल तक के सिक्योरिटी पैच | बिल्कुल शुद्ध और बिना फालतू ऐप्स वाला एक बहुत ही शानदार अनुभव |
| शाओमी और रेडमी सीरीज | एक से दो साल के अपडेट लेकिन कई बार इन्हें मिलने में बहुत देरी होती है | भारी सिस्टम बहुत सारे पहले से मौजूद फालतू ऐप्स और ढेरों विज्ञापन |
| रियलमी और ओप्पो | लगभग दो साल के ओएस अपडेट और तीन साल तक के सुरक्षा पैच | कस्टमाइजेशन के बहुत विकल्प हैं लेकिन अक्सर बग्स की भारी समस्या आती है |
नया स्मार्टफोन खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगली बार जब आप पंद्रह हजार या बीस हजार रुपये का अपना फिक्स बजट लेकर नया फोन खरीदने के लिए बाजार निकलें तो आपको किन खास चीजों पर ध्यान देना चाहिए। केवल चमकती हुई स्पेक्स शीट देखकर अपना फैसला कभी न लें बल्कि फोन के अंदर की सच्चाई को जानने की कोशिश करें। सबसे पहले फोन के डिब्बे पर या कंपनी की वेबसाइट पर यह जरूर ध्यान से पढ़ें कि वह ब्रांड कितने साल के ओएस अपग्रेड देने का पक्का वादा कर रहा है।
इसके साथ ही साफ~सुथरे सॉफ्टवेयर वाले फोन्स को हमेशा अपनी पहली पसंद बनाएं क्योंकि ये हल्के होते हैं और इन्हें चलाने में बहुत हैवी प्रोसेसर की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती। कीमत को कम दिखाने के लिए कई ब्रांड्स थर्ड~पार्टी ऐप्स पहले से ही फोन में भरकर देते हैं जिन्हें आप हटा भी नहीं सकते। ऐसे फोन से हमेशा दूरी बनाकर रखें जो आपको काम के अपडेट देने की बजाय सिर्फ नए विज्ञापन थोप रहे हों। अगर आप इन छोटी लेकिन बहुत ही जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका खरीदा हुआ फोन लंबे समय तक आपका बेहतरीन साथ निभाएगा।
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| खरीदारी की चेकलिस्ट | आपको क्या देखना और जाँचना चाहिए | यह जांचना आपके लिए क्यों जरूरी है |
| ऑपरेटिंग सिस्टम का वर्जन | क्या आपका नया फोन डिब्बे के बाहर बिल्कुल लेटेस्ट सिस्टम पर चल रहा है | पुराना सिस्टम मतलब आपका फोन खरीदने से पहले ही एक साल पुराना हो चुका है |
| सिक्योरिटी पैच का वादा | क्या कंपनी कम से कम तीन साल के सुरक्षा अपडेट का लिखित वादा कर रही है | आपके बैंकिंग और यूपीआई ऐप्स की सुरक्षा को हमेशा पक्का करने के लिए |
| यूजर इंटरफेस का प्रकार | क्या यह फोन एक साफ सिस्टम देता है या इसमें बहुत भारी कस्टम स्किन डाली गई है | साफ सिस्टम फोन की स्पीड को तेज और बैटरी लाइफ को लंबे समय तक बेहतर रखता है |
| ब्लोटवेयर की मौजूदगी | फोन चालू करते ही उसमें कितने फालतू और बिना काम के ऐप्स पहले से मौजूद हैं | फालतू ऐप्स बैकग्राउंड में आपकी बहुत सारी कीमती बैटरी और इंटरनेट पीते रहते हैं |
अंतिम विचार
स्मार्टफोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। रोज नए प्रोसेसर और कैमरा सेंसर लॉन्च हो रहे हैं। लेकिन एक आम यूजर के तौर पर आपको यह समझना होगा कि एक अच्छी मशीन बिना अच्छे सॉफ्टवेयर के किसी काम की नहीं है। सिर्फ 120Hz डिस्प्ले या 108MP कैमरे की चकाचौंध में आकर अपने पैसे खर्च करना कोई समझदारी नहीं है।
आपके फोन की असल ताकत, उसकी सुरक्षा और उसकी लंबी उम्र सिर्फ और सिर्फ उसके सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती है। इसलिए अगली बार जब भी आप या आपका कोई जानने वाला फोन ले, तो स्पेक्स के साथ~साथ बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अपडेट की गारंटी को सबसे ऊपर रखें। एक अच्छा सॉफ्टवेयर सपोर्ट आपके फोन को सालों तक एकदम नए जैसा और सुरक्षित बनाए रखेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल बजट स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर अद्यतन के बारे में
1. क्या सॉफ्टवेयर अपडेट करने से पुराना फोन जानबूझकर स्लो कर दिया जाता है
यह बाजार में फैली हुई एक बहुत ही आम और गलत धारणा है जिसे लोग सच मान लेते हैं। कुछ बहुत ही पुराने मामलों को अगर हम छोड़ दें तो अपडेट्स हमेशा फोन की कमियों को दूर करने और बैटरी को सुधारने के लिए ही कंपनियों द्वारा भेजे जाते हैं। कभी~कभी कोई बिल्कुल नया सॉफ्टवेयर बहुत पुराने प्रोसेसर के लिए थोड़ा सा भारी साबित हो सकता है लेकिन अपडेट न करने से फोन नए ऐप्स के साथ अपना तालमेल पूरी तरह से खो देता है और वह और भी ज्यादा स्लो होकर हैंग होने लगता है।
2. मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे फोन को आगे कोई नया अपडेट मिलेगा या नहीं
आप अपने फोन बनाने वाले ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उनकी सॉफ्टवेयर सपोर्ट पॉलिसी को बहुत ही आसानी से पढ़ और चेक कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने फोन के अंदर सेटिंग मेन्यू में जाकर सॉफ्टवेयर अपडेट वाले हिस्से में यह देख सकते हैं कि आपका फोन फिलहाल अप~टू~डेट है या नहीं। अगर वहां महीनों से कोई नया पैच नहीं आया है तो समझ लीजिए सपोर्ट खत्म हो चुका है।
3. क्या बाहर से कस्टम रोम डलवाना सस्ते फोन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है
जब फोन बनाने वाली कंपनियां पुराने फोन में अपडेट देना हमेशा के लिए बंद कर देती हैं तो कुछ बहुत ज्यादा जानकार लोग इंटरनेट से अनऑफिशियल सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके इंस्टॉल कर लेते हैं। हालांकि इससे फोन के अंदर एक नया ओएस जरूर आ जाता है लेकिन यह एक आम इस्तेमाल करने वाले ग्राहक के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं माना जाता है। इसमें आपके जरूरी बैंकिंग ऐप्स काम करना बंद कर सकते हैं और हैकर्स द्वारा फोन का निजी डेटा चोरी होने का बहुत बड़ा रिस्क हमेशा बना रहता है।
4. क्या मुझे अपने फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए इंटरनेट की जरूरत है
जी हां किसी भी नए सिस्टम पैच या ओएस अपग्रेड को डाउनलोड करने के लिए आपको एक बहुत ही स्थिर और तेज वाई~फाई या मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन की सख्त जरूरत होती है। ये पैच आकार में काफी बड़े हो सकते हैं और बिना अच्छे इंटरनेट के ये बीच में ही रुक सकते हैं जिससे आपका फोन खराब होने का डर रहता है इसलिए हमेशा तेज वाई~फाई का ही उपयोग करें।
5. अगर मेरे फोन की स्टोरेज पूरी भर गई है तो क्या मुझे सॉफ्टवेयर अपडेट करना चाहिए
किसी भी नए सॉफ्टवेयर को अच्छे से इंस्टॉल होने के लिए फोन के अंदर खाली जगह की बहुत ज्यादा जरूरत होती है जो आमतौर पर एक जीबी से तीन जीबी तक हो सकती है। अगर आपके फोन की स्टोरेज पूरी तरह से फुल हो चुकी है तो अपडेट बीच में ही अटक सकता है और आपका फोन पूरी तरह से क्रैश भी हो सकता है। इसलिए हमेशा कोई भी नया अपडेट शुरू करने से पहले अपनी पुरानी और फालतू फाइल्स को डिलीट करके स्पेस खाली करना न भूलें।
