पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह आज बिहार चुनावी रैलियों में शामिल होंगे
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच चुकी है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। यह रैलियां एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में हैं, जो बिहार की 243 सीटों पर होने वाले चुनावों में वोटरों को प्रभावित करने की महत्वपूर्ण कवायद हैं। चुनाव आयोग ने दो चरणों में मतदान की घोषणा की है – पहला चरण 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरा 11 नवंबर को 122 सीटों पर, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे।
इन रैलियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बिहार का चुनाव हमेशा जाति, विकास, बेरोजगारी और प्रवासन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहता है। एनडीए सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाओं, किसानों की आय दोगुनी करने और बुनियादी ढांचे के विकास का दावा किया है, जबकि विपक्ष आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के नेतृत्व में ‘जंगल राज’ के आरोपों का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय और रोजगार सृजन पर जोर दे रहा है। जन सुराज पार्टी जैसे नए खिलाड़ी भी मैदान में हैं, जो स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा: मुजफ्फरपुर और छपरा में दो रैलियां, विकास पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार चुनाव अभियान के तहत मुजफ्फरपुर और सारण (छपरा) जिलों में दो महत्वपूर्ण जनसभाएं करेंगे। सुबह करीब 11 बजे मुजफ्फरपुर में और दोपहर 12:45 बजे छपरा में वे जनता को संबोधित करेंगे। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में मोदी ने कहा, “बिहार के मेरे परिवार के सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं ताकि भाजपा-एनडीए को बड़ी जीत मिले। इस उत्साहपूर्ण माहौल में मुझे जनता से जुड़ने का सौभाग्य मिलेगा।” उन्होंने आगे जोड़ा, “मैं आश्वस्त हूं कि विधानसभा चुनावों में राज्य के भाई-बहन एक बार फिर भव्य जीत का आगाज करेंगे।”
यह मोदी का बिहार दौरा 24 अक्टूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में रैलियों से शुरू हुआ था, जहां उन्होंने समाजवादी नेता करपूरी ठाकुर के जन्मस्थान का भी दौरा किया। ठाकुर को हाल ही में भारत रत्न से सम्मानित किया गया है, जो पिछड़े वर्ग के वोटरों को लुभाने की रणनीति का हिस्सा है। समस्तीपुर रैली में मोदी ने कांग्रेस और आरजेडी पर छठ मइया का अपमान करने का आरोप लगाया, कहा कि “लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे”। उन्होंने ‘दो युवराजों’ (राहुल गांधी और तेजस्वी यादव) पर निशाना साधा, जबकि एनडीए के संकल्प पत्र में एक करोड़ सरकारी नौकरियां, युवा रोजगार और बिहार को विकास का केंद्र बनाने का वादा किया गया है।
मुजफ्फरपुर और छपरा जैसे क्षेत्रों में प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये जिले कृषि-प्रधान हैं और प्रवासन की समस्या से जूझ रहे हैं। एनडीए का दावा है कि नीतीश कुमार सरकार ने किसानों को धान पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया है, जो चुनावी वादों को पूरा करने का प्रमाण है। इसके अलावा, मोदी पटना में रोड शो भी कर सकते हैं, जो अभियान को और गति देगा।
अमित शाह की व्यस्त दिनचर्या: लखीसराय, मुंगेर, नालंदा और पटना में चार सभाएं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के चार जिलों – लखीसराय, मुंगेर, नालंदा और पटना – में चुनावी सभाएं करेंगे। यह उनका दूसरा लगातार दिन है जब वे एनडीए उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। शाह की रैलियां सुरक्षा, आंतरिक शांति और एनडीए की उपलब्धियों पर केंद्रित रहेंगी, जैसे नक्सलवाद उन्मूलन और बिहार में कानून-व्यवस्था सुधार।
शाह का बिहार दौरा पहले से ही सक्रिय है 23 अक्टूबर को उन्होंने सीवान, बक्सर, नालंदा, मुंगेर और खगड़िया में रैलियां कीं। 16-18 अक्टूबर के बीच भी वे राज्य में थे, जहां उन्होंने गठबंधन की एकजुटता पर जोर दिया। शाह ने हाल ही में जन्मदिन पर पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के संदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि “देश को नक्सल-मुक्त बनाने का संकल्प” पूरा हो रहा है। उनकी सभाओं में भाजपा की संगठनात्मक क्षमता और जेपी नड्डा की नेतृत्व क्षमता को हाइलाइट किया जाता है।
इन जिलों में शाह की उपस्थिति एनडीए को मजबूत करेगी, खासकर नालंदा जैसे क्षेत्रों में जहां जातिगत समीकरण जटिल हैं। शाह ने विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और कहा है कि एनडीए बिहार को “विकास का इंजन” बनाएगा।
राहुल गांधी का अभियान: नालंदा और शेखपुरा में रैलियां, सामाजिक न्याय पर फोकस
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नालंदा और शेखपुरा जिलों में जनसभाएं करेंगे, जो इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को मजबूती देने के लिए हैं। उनकी रैलियां वोटर अधिकारों, बेरोजगारी और ‘मेक इन बिहार’ जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेंगी।
गांधी ने हाल ही में नालंदा में एक सभा में कहा कि “मोदी ट्रंप जैसे मुद्दों पर जवाब देने से डरते हैं” और बिहार को अब एक महत्वपूर्ण राज्य बनाया जाना चाहिए। वे तेजस्वी यादव के साथ संयुक्त रैलियां कर रहे हैं, जहां विपक्ष ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सवाल उठाए हैं। SIR में 65 लाख वोटरों के नाम कथित तौर पर हटाए गए, जिसे विपक्ष एनडीए का हथकंडा बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने आधार, वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को मान्य करने की सलाह दी, लेकिन ईसी ने इंकार कर दिया।
राहुल का बिहार दौरा 29 अक्टूबर से तेज हो गया है, जिसमें दर्जन भर रैलियां शामिल हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा 1 नवंबर से बैचवाड़ा जैसे क्षेत्रों में अभियान शुरू करेंगी, जहां कांग्रेस सीपीआई और आईआईपी के साथ ‘फ्रेंडली फाइट’ लड़ रही है। गांधी ने आरजेडी के ‘जंगल राज’ आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नीतीश सरकार ने भ्रष्टाचार संस्थागत किया है और महिलाओं की योजनाओं का दुरुपयोग चुनावी लाभ के लिए किया।
जेपी नड्डा की रैलियां: बक्सर और पटना में, संकल्प पत्र पर जोर
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा बक्सर और पटना जिलों में सभाएं संबोधित करेंगे, जो पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और एनडीए की एकजुटता दिखाने के लिए हैं। नड्डा ने हाल ही में नालंदा में एक रैली में एनडीए के संकल्प पत्र को पेश किया, जो 31 अक्टूबर को जारी हुआ। इसमें एक करोड़ सरकारी नौकरियां, युवाओं के लिए कौशल विकास, किसानों के लिए एमएसपी गारंटी और महिलाओं के सशक्तिकरण का वादा है। नीतीश कुमार के साथ नड्डा ने इसे “बिहार संकल्प पत्र 2025” नाम दिया, जो मात्र 26 सेकंड में जारी हुआ, जिस पर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने “झूठों का पुलिंदा” कहकर तंज कसा। नड्डा ने कहा कि एनडीए ने 2024 चुनावी वादों को पूरा किया, जैसे ओडिशा में धान का एमएसपी। बक्सर और पटना जैसे क्षेत्रों में नड्डा की सभाएं भाजपा को मजबूत करेंगी, जहां वे हिंदुत्व, विकास और विपक्ष की आलोचना पर फोकस करेंगे।
बिहार चुनाव 2020 के बाद फिर से गठबंधनों की परीक्षा है। नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा का एनडीए सत्ता में है, जबकि 2022 में नीतीश ने महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) जॉइन किया था, लेकिन 2024 में वापस एनडीए में लौट आए। विपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सामाजिक न्याय, जाति जनगणना और आरक्षण पर जोर दे रहा है।
मुख्य विवाद SIR पर है, जहां प्रवासी मजदूरों (75 लाख से अधिक) को वोट डालने में दिक्कत हो रही है। विपक्ष ने इसे चुनौती दी, लेकिन ईसी ने खारिज किया। अन्य मुद्दे: बेरोजगारी, जिसके कारण युवा दूसरे राज्यों में जाते हैं; भ्रष्टाचार, जहां तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाए; और पर्यावरण-अनुकूल अभियान, जहां ईसी ने प्लास्टिक मुक्त चुनाव की सलाह दी।
चुनाव प्रक्रिया में वेबकास्टिंग, वीडियोग्राफी और सीसीटीवी का इस्तेमाल होगा। सीआरपीएफ और एसएपी की तैनाती से कमजोर वर्गों के वोटरों का विश्वास बढ़ेगा। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू है, और जिला चुनाव प्रबंधन योजनाएं तैयार हैं। ये रैलियां बिहार की सियासत को नई दिशा देंगी, जहां महिलाओं का समर्थन नीतीश को मजबूत कर रहा है, लेकिन युवा और पिछड़े वर्ग निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
