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त्रिपुरा और भारत-बांग्लादेश के दूसरे बॉर्डर इलाकों में 5.2 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया

त्रिपुरा और भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में आए 5.2 मैग्नीट्यूड के भूकंप पर विस्तृत खबर नीचे दी जा रही है, सामग्री को बिना छोटा किए अधिक से अधिक विस्तार में रखा गया है।

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शुक्रवार सुबह त्रिपुरा और भारत-बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में 5.2 मैग्नीट्यूड का भूकंप महसूस किया गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया। भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से लगभग 10 किलोमीटर गहराई पर भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास बताया जा रहा है, जिसके कारण झटके कई राज्यों और बांग्लादेश के अनेक जिलों तक महसूस किए गए।

स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 7 से 10 बजे के बीच आए इस भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों से घबराकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। कुछ ही सेकंड तक चले इन झटकों ने लोगों के मन में पुराने बड़े भूकंपों की याद ताजा कर दी और सोशल मीडिया पर भी अचानक भूकंप से जुड़ी पोस्ट और वीडियो की बाढ़ आ गई।

प्रभावित इलाके: त्रिपुरा, असम, मेघालय और सीमा के पार बांग्लादेश

भूकंप का असर सबसे ज्यादा त्रिपुरा के विभिन्न जिलों, खासकर अगरतला, धलाई, उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और करीमनगर से सटे क्षेत्रों में महसूस किया गया। कई इलाकों में लोग सुबह की दिनचर्या में व्यस्त थे, तभी धरती हिलती महसूस हुई और बहुमंजिला इमारतों में रह रहे लोगों ने स्पष्ट रूप से दीवारों, खिड़कियों और पंखों को हिलते देखा।

अधिकारियों के अनुसार झटके केवल त्रिपुरा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पड़ोसी राज्यों असम, मेघालय और उत्तर-पूर्व के कुछ अन्य हिस्सों में भी महसूस किए गए। भारत-बांग्लादेश सीमा के पार बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया, कुमिल्ला, सिलहट, चटगांव और ढाका तक हल्के से मध्यम झटके दर्ज किए गए, जहां कई बहुमंजिला इमारतों में बैठे लोगों को अचानक चक्कर जैसा महसूस हुआ और वे सीढ़ियों से नीचे उतरकर सड़कों पर आ गए।

लोग घरों से बाहर भागे, कई इलाकों में मची अफरा-तफरी

भूकंप के पहले ही झटके के साथ कई मोहल्लों में लोगों ने बिना समय गंवाए अपने घरों से बाहर निकलना ही बेहतर समझा। बहुमंजिला अपार्टमेंट्स में रहने वाले परिवारों ने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सीढ़ियों से भागते हुए नीचे खुले स्थानों की शरण ली। कई बाजारों और दफ्तरों में भी लोग कुर्सियां और टेबल छोड़कर पार्किंग क्षेत्र या सड़कों की ओर भागते दिखाई दिए।

कुछ इलाकों में दुकानें कुछ समय के लिए बंद कर दी गईं, ताकि व्यापारी और कर्मचारी सुरक्षित रह सकें और इमारतों की दीवारों या छतों से किसी प्रकार के मलबे के गिरने की आशंका से बचा जा सके। कई स्कूलों में उस वक्त प्रार्थना सभा या पहली कक्षा की शुरुआत हो चुकी थी, भूकंप का झटका महसूस होते ही बच्चों को तुरंत मैदान में लाया गया और उपस्थिति गिनकर सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई।

दीवारों में दरारें, सामान गिरा, लेकिन बड़े नुकसान की खबर नहीं

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि राज्य की राजधानी और सीमावर्ती कस्बों में कई इमारतों में हल्की दरारें आने की सूचना है। कई घरों में दीवारों पर टंगे शोपीस, घड़ियां, तस्वीरें और किचन के रैक पर रखे बर्तन नीचे गिरकर टूट गए, जिससे लोगों में घबराहट और बढ़ गई।

कुछ स्थानों पर पुराने मकानों की प्लास्टर की परत झड़कर गिरी और छत से चूने की परतें झड़ने लगीं, लेकिन संरचनात्मक रूप से किसी बड़े भवन के क्षतिग्रस्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बिजली की सप्लाई भी कुछ इलाकों में एहतियातन कुछ समय के लिए रोकी गई, ताकि किसी शॉर्ट सर्किट या तार टूटने की स्थिति से बचा जा सके, हालांकि बाद में निरीक्षण के बाद सप्लाई बहाल कर दी गई।

प्रशासन और एनडीआरएफ अलर्ट पर, नुकसान का आंकलन जारी

भूकंप के झटके महसूस होते ही राज्य सरकार और जिला प्रशासन हरकत में आ गए और तुरंत कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए। जिला मजिस्ट्रेटों को प्रभावित इलाकों से त्वरित रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रही हैं, ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन बल की इकाइयों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान तुरंत शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पतालों को सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्था तैयार रखने को कहा है।

विशेषज्ञों की राय: मध्यम तीव्रता का झटका, पर क्षेत्र संवेदनशील

भूवैज्ञानिकों और भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार 5.2 मैग्नीट्यूड का भूकंप तकनीकी रूप से मध्यम श्रेणी में आता है, लेकिन जब इसका केंद्र जमीन के अपेक्षाकृत कम गहराई पर हो और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास स्थित हो, तो इसके झटके काफी तेज महसूस होते हैं। उत्तर-पूर्वी भारत और भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र तिब्बती पठार, भारतीय प्लेट और बर्मा प्लेट की जटिल भूगर्भीय गतिविधियों के कारण उच्च भूकंपीय जोन में आते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मध्यम तीव्रता वाले भूकंप बड़े विनाश का कारण तो नहीं बनते, लेकिन ये यह याद दिलाते हैं कि क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से कितना संवेदनशील है और यहां के भवनों तथा बुनियादी ढांचे को किस स्तर के भूकंप-रोधी मानकों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। बार-बार आने वाले ऐसे झटके अगर कमजोर या बिना मानक के बने ढांचों पर पड़ते रहें, तो दीर्घकालीन रूप से उनका असर गंभीर भी हो सकता है।

बांग्लादेश में भी झटके, हाईराइज़ इमारतों से नीचे उतरे लोग

सीमा के पार बांग्लादेश में भी इस भूकंप के झटके साफ तौर पर महसूस किए गए, खासकर ऐसे शहरों में जहां बहुमंजिला इमारतों की भरमार है। ढाका, नारायणगंज और गोराशाल क्षेत्र में कई ऊंची इमारतों के निवासियों ने कुर्सियों, पंखों और लाइटों को हिलते देखा, जिसके बाद वे घबराहट में सीढ़ियों की ओर दौड़ पड़े।

कई कार्यालयों और कॉल सेंटरों में काम कर रहे कर्मचारी अचानक कुर्सियां छोड़कर नीचे खुले स्थान की ओर भागते देखे गए। कुछ स्थानों पर अधिकारियों ने औपचारिक रूप से इमारतों को कुछ समय के लिए खाली करा कर स्ट्रक्चरल सेफ्टी की सामान्य जांच करवाई, जिसके बाद ही लोगों को अंदर लौटने की अनुमति दी गई। अब तक किसी गंभीर नुकसान या मौत की खबर सामने नहीं आई है, जो राहत की बात है।

सोशल मीडिया पर भूकंप की चर्चाएं और स्थानीय अनुभव

भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर ट्विटर (अब X), फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘अर्थक्वेक’, ‘Tripura’, ‘Bangladesh’ जैसे शब्द ट्रेंड करने लगे। लोगों ने अपने-अपने इलाकों से वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें पंखे हिलते, पानी से भरी बाल्टियों की सतह पर लहरें बनती और अलमारियों से सामान गिरता दिख रहा है।

कई लोगों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए लिखा कि अचानक उन्हें चक्कर जैसा महसूस हुआ और जैसे ही दीवारें हिलती देखीं, वे समझ गए कि भूकंप आया है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने पुराने भूकंपों की यादें भी साझा कीं और क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता पर चर्चा शुरू हो गई। वहीं, कुछ लोगों ने वैज्ञानिक स्रोतों और आधिकारिक एजेंसियों के लिंक शेयर कर अफवाहों से बचने की अपील की।

सरकार की अपील: घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें

त्रिपुरा सरकार और केंद्र की संबंधित एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे भूकंप के बाद अनावश्यक अफवाहें फैलाने से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही, लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपने घरों और कार्यालयों में हल्की दरारों या संरचनात्मक क्षति की जांच करें और जरूरत पड़ने पर इंजीनियरों से परामर्श लें।

प्रशासन ने यह भी याद दिलाया है कि भूकंप के दौरान और बाद में कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है—जैसे झटके महसूस होते ही भारी अलमारियों, कांच की खिड़कियों और बिजली के खंभों से दूर जाना, लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और खुले मैदान या सुरक्षित स्थान की ओर जाना। लोगों से कहा गया है कि वे अपने परिवार, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को भूकंप के समय क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी बार-बार दें, ताकि अचानक स्थिति आने पर वे घबराएं नहीं।

भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स की आशंका और मॉनिटरिंग

विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम तीव्रता के भूकंप के बाद हल्के झटके (आफ्टरशॉक्स) आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि अब तक कोई बड़े आफ्टरशॉक दर्ज नहीं किए गए हैं। फिर भी, मॉनिटरिंग एजेंसियां लगातार भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और किसी भी नए झटके की स्थिति में तुरंत सूचना जारी की जाएगी।

लोगों को सलाह दी गई है कि वे आने वाले कुछ घंटों तक अतिरिक्त सावधानी बरतें, ढहने योग्य कमजोर संरचनाओं के पास अनावश्यक रूप से खड़े न हों और आधिकारिक भूकंप ऐप्स या वेबसाइटों के माध्यम से अपडेट लेते रहें। इंजीनियरों और स्थानीय निकायों को खास तौर पर पुराने सरकारी भवनों, स्कूलों और अस्पतालों की संरचनात्मक स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

लंबे समय की चिंता: उत्तर-पूर्व के लिए भूकंप-रोधी योजना की जरूरत

यह भूकंप एक बार फिर उत्तर-पूर्वी भारत और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक भूकंप-रोधी रणनीति की आवश्यकता पर जोर देता है। विशेषज्ञ वर्षों से चेतावनी देते रहे हैं कि इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की संभावना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, इसलिए भवन निर्माण मानकों को सख्ती से लागू करना, पुराने ढांचों का रेट्रोफिट करना और लोगों को जागरूक करना समय की मांग है।

शहरी विकास और ग्रामीण आवास योजनाओं में भूकंप-रोधी डिज़ाइन को प्राथमिकता देने, स्कूलों में नियमित मॉक ड्रिल कराने और मीडिया के माध्यम से भूकंप सुरक्षा के संदेश लगातार प्रसारित करने की जरूरत है। इस तरह के मध्यम भूकंपों को चेतावनी की तरह लेते हुए अगर अभी से तैयारी मजबूत की जाए, तो भविष्य में किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।