इलेक्ट्रॉनिक्सविनिर्माण

शीर्ष 12 नीतिगत कदम जिन्होंने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तेजी लाई

भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ने हाल के वर्षों में तेजी से वृद्धि की है। सरकारी नीतियों ने इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक देश बन चुका है। निर्यात में 47% की वृद्धि हुई है। ये नीतियां न केवल उत्पादन बढ़ा रही हैं बल्कि लाखों नौकरियां भी पैदा कर रही हैं। आत्मनिर्भर भारत का सपना अब साकार हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया। यह बूम जियोपॉलिटिक्स और नीतिगत समर्थन का परिणाम है। हम इस लेख में इन नीतियों को सरल तरीके से समझाएंगे। ताकि आप आसानी से जान सकें कि भारत कैसे इलेक्ट्रॉनिक्स हब बन रहा है।​

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परिचय: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र कैसे बदला

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पहले आयात पर निर्भर था। लेकिन सरकारी नीतियों ने उत्पादन को बढ़ावा दिया। आज भारत मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों का प्रमुख निर्यातक बन गया है। 2014 से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कम था। आयात अधिक था। लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने बदलाव लाया। अब उत्पादन 400% बढ़ा है। निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है।​

यह लेख उन 12 प्रमुख नीतिगत कदमों पर चर्चा करेगा। जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स बूम के पीछे हैं। हम सरल शब्दों में समझाएंगे। ताकि हर पाठक आसानी से समझ सके। इन नीतियों ने नौकरियां पैदा कीं। निवेश आकर्षित किया। और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत को मजबूत किया। 2025 तक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का लक्ष्य 500 बिलियन डॉलर है। कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में 1.15 लाख करोड़ का निवेश आया। ये कदम भारत को ग्लोबल फैक्ट्री बना रहे हैं। नीचे दी गई तालिका इन नीतियों का संक्षिप्त अवलोकन देती है।​

नीति का नाम मुख्य उद्देश्य प्रभाव
मेक इन इंडिया मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा उत्पादन में वृद्धि ​
डिजिटल इंडिया डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्यात बढ़ा ​
पीएलआई स्कीम उत्पादन प्रोत्साहन ₹1.46 लाख करोड़ निवेश ​

1. मेक इन इंडिया: मैन्युफैक्चरिंग की नींव

मेक इन इंडिया 2014 में शुरू हुई। इसका लक्ष्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना था। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में यह पहली बड़ी नीति थी। इसने विदेशी निवेश को आसान बनाया। 100% एफडीआई की अनुमति दी। कंपनियां जैसे एप्पल और सैमसंग ने भारत में प्लांट लगाए।​

यह नीति ने इलेक्ट्रॉनिक्स के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत किया। पहले भारत सिर्फ असेंबली करता था। अब कंपोनेंट्स और डिजाइन भी हो रहा। परिणामस्वरूप उत्पादन बढ़ा। 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात दोगुना हो गया। यह नीति ने अन्य योजनाओं की आधारशिला रखी। सरकारी समर्थन ने उद्योग को गति दी। 11 सालों में पीएम मोदी के विजन से यह संभव हुआ। निवेश बढ़ा और रोजगार के नए अवसर बने।​​

नीचे तालिका में मेक इन इंडिया के प्रमुख प्रभाव दिखाए गए हैं।

वर्ष उत्पादन मूल्य (₹ लाख करोड़) निर्यात वृद्धि (%)
2014 0.5 10 ​
2020 2.13 50 ​
2025 5.25 146 ​

2. डिजिटल इंडिया: डिजिटल क्रांति का प्रारंभ

डिजिटल इंडिया 2015 में लॉन्च हुई। यह ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाओं पर केंद्रित थी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को डिजिटल टूल्स से जोड़ा। इसने इंटरनेट पहुंच बढ़ाई। जिससे स्मार्ट डिवाइस की मांग बढ़ी। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को डिजिटल ट्रेनिंग मिली।​

यह नीति ने ई-गवर्नेंस और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया। यूपीआई जैसी सुविधाओं से स्मार्टफोन की डिमांड बढ़ी। परिणाम: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 6 गुना वृद्धि। निर्यात 8 गुना बढ़ा। यह नीति ने ई-कॉमर्स को बढ़ावा दिया। जिससे स्थानीय उत्पादन की जरूरत पड़ी। अब भारत डिजिटल इंडिया के जरिए ग्लोबल कनेक्टिविटी बढ़ा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स पहुंच आसान हुई।​

तालिका: डिजिटल इंडिया के प्रभाव।

क्षेत्र सुधार लाभ
ब्रॉडबैंड 2.5 लाख गांव कवर डिमांड बढ़ी ​
डिजिटल पेमेंट यूपीआई लॉन्च स्मार्ट डिवाइस बिक्री ​

3. फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (पीएमपी)

पीएमपी 2017 में मोबाइल फोन के लिए शुरू हुई। इसका लक्ष्य आयात घटाना था। स्थानीय उत्पादन बढ़ाना। इसमें चरणबद्ध तरीके से कंपोनेंट्स पर ड्यूटी लगाई। कंपनियों को भारत में असेंबली करने को प्रेरित किया।​

यह नीति ने मोबाइल वैल्यू चेन को मजबूत किया। पहले 95% आयात था। अब 60% लोकल कंटेंट। परिणाम: मोबाइल निर्यात 2025 में ₹1 लाख करोड़ पार। यह नीति ने वैल्यू एडिशन बढ़ाया। भारत अब असेंबली से आगे बढ़ा। आईफोन जैसे प्रोडक्ट्स का बूम इसी का नतीजा। निर्यात रैंकिंग में भारत तीसरा हो गया।​

तालिका: पीएमपी के तहत ड्यूटी बदलाव।

चरण कंपोनेंट ड्यूटी (%)
1 बैटरी 5 ​
2 डिस्प्ले 10 ​
3 प्रोसेसर 15 ​

4. मॉडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (एम-एसआईपीएस)

एम-एसआईपीएस 2012 में शुरू हुई। 2020 में संशोधित। यह कैपिटल सब्सिडी देती है। 20-25% निवेश पर। इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर्स में निवेश आकर्षित किया। नॉन-एसईजेड यूनिट्स को ड्यूटी रिफंड।​

यह नीति ने छोटे उद्योगों को सपोर्ट दिया। एमएसएमई की 60% भागीदारी बढ़ी। परिणाम: 2025 तक ₹59,350 करोड़ निवेश। 91,600 नौकरियां। यह नीति ने छोटे-बड़े मैन्युफैक्चरर्स को मदद की। क्लस्टर्स में कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स बने।​

तालिका: एम-एसआईपीएस लाभ।

लाभ प्रतिशत उदाहरण
कैपिटल सब्सिडी 25% एसईजेड ​
ड्यूटी रिफंड पूर्ण सेंट्रल टैक्स ​

5. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम

पीएलआई 2020 में लॉन्च। लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए। 3-6% इंसेंटिव इनक्रिमेंटल सेल्स पर। यह मोबाइल, कंपोनेंट्स को कवर करती। ₹40,995 करोड़ आउटले।​

यह नीति ने ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित किया। फॉक्सकॉन और पेगाट्रॉन जैसे प्लांट्स लगे। परिणाम: ₹1.46 लाख करोड़ निवेश। ₹4 लाख करोड़ निर्यात। एप्पल, फॉक्सकॉन जैसे ब्रांड्स ने भारत चुना। यह बूम का मुख्य ड्राइवर। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत मजबूत। बजट 2025-26 में 8,885 करोड़ आवंटित।​

तालिका: पीएलआई के आंकड़े।

वर्ष निवेश (₹ लाख करोड़) निर्यात (₹ लाख करोड़)
2020 0.2 0.5 ​
2025 1.46 4 ​

6. एसपीईसीएस: कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर प्रमोशन

एसपीईसीएस 2020 में शुरू हुई। यह स्कीम इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने के लिए बनी। इसका मुख्य फोकस आयात पर निर्भरता कम करना और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकारी इंसेंटिव के तहत 25% कैपिटल एक्सपेंडिचर पर सहायता मिलती है। यह स्कीम लेड, कैपेसिटर्स, रेसिस्टर्स जैसे बेसिक कंपोनेंट्स से लेकर एडवांस्ड सेमीकंडक्टर तक कवर करती।​

इसने ऑटोमोटिव, टेलीकॉम और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सपोर्ट दिया। पहले भारत 80% कंपोनेंट्स आयात करता था। अब लोकल प्रोडक्शन बढ़ रहा। परिणाम: ₹4.56 लाख करोड़ उत्पादन लक्ष्य हासिल। भारत अब ग्लोबल हब बन रहा। इनोवेशन बढ़ा। 75% आयात कम करने का लक्ष्य। यह स्कीम ने छोटे-मध्यम उद्योगों को भी मौका दिया।​​

तालिका: एसपीईसीएस कवरेज।

कंपोनेंट इंसेंटिव (%) लक्ष्य उत्पादन
सेमीकंडक्टर 25 ₹2 लाख करोड़ ​
पैसिव पार्ट्स 25 ₹1 लाख करोड़ ​

7. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी 2.0)

ईएमसी 2.0 2020 में लॉन्च हुई। यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर केंद्रित है। ₹3,762 करोड़ के आउटले से क्लस्टर्स और कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स विकसित किए जाते हैं। यह मैन्युफैक्चरिंग को आसान और सस्ता बनाती। प्लग-एंड-प्ले फैसिलिटी से स्टार्टअप्स और एमएसएमई को फायदा।​

इसमें फैक्ट्री शेड्स, बिजली, पानी, सीवेज ट्रीटमेंट और स्किल सेंटर्स शामिल हैं। हाल ही में यूपी के गौतम बुद्ध नगर में ₹417 करोड़ का क्लस्टर अप्रूव्ड। परिणाम: 7 क्लस्टर्स अप्रूव्ड। $625 मिलियन प्रोजेक्ट्स। नौकरियां और निवेश बढ़ा। स्किल्ड मैनपावर की डिमांड पूरी हो रही। यह योजना यमुना एक्सप्रेसवे जैसे लोकेशन्स पर फोकस करती। कुल 520 कंपनियां जुड़ीं।​​

तालिका: प्रमुख ईएमसी क्लस्टर्स।

क्लस्टर राज्य निवेश (₹ करोड़)
नोएडा यूपी 5,000 ​
चेन्नई तमिलनाडु 4,000 ​
गौतम बुद्ध नगर यूपी 417 ​

8. सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम

सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम 2021 में शुरू हुआ। यह ₹76,000 करोड़ के बजट से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को पूरा करने का प्रयास है। फैब्रिकेशन यूनिट्स, पैकेजिंग और ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकॉन्डक्टर असेंबली एंड टेस्ट) को कवर करता। यह विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप को प्रोत्साहित करता। गुजरात और अन्य राज्यों में फैब्स लगाने का लक्ष्य।​

इस प्रोग्राम ने चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाई दी। भारत अब चिप आयात पर कम निर्भर। परिणाम: नई फैब्स लगीं। इनोवेशन बढ़ा। भारत अब चिप डिजाइन में आगे। 10 परियोजनाओं को मंजूरी। यह योजना 5G और ईवी सेक्टर को सपोर्ट करती। कुल 5 प्लांट्स का लक्ष्य।​

तालिका: सेमिकॉन बजट ब्रेकडाउन।

क्षेत्र बजट (₹ करोड़) लक्ष्य
फैब्स 30,000 5 प्लांट्स ​
ओएसएटी 20,000 10,000 नौकरियां ​
डिजाइन 6,000 इनोवेशन हब ​

9. ईएमसीएमएस: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम

ईएमसीएमएस 2025 में अप्रूव्ड हुई। यह हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स जैसे सेंसर, प्रोसेसर और मॉड्यूल्स पर फोकस करती। ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत को इंटीग्रेट करने का लक्ष्य। सरकारी सहायता से ₹59,350 करोड़ निवेश आकर्षित। एसेंशियल पार्ट्स का लोकल प्रोडक्शन बढ़ाती।​

इस स्कीम ने 249 कंपनियों को मंजूरी दी। 1.15 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव। परिणाम: 2025 में $12.41 बिलियन निर्यात। यूएस, यूएई टॉप डेस्टिनेशन। 1.41 लाख रोजगार सृजन। यह योजना ऑटोमोटिव और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स को मजबूत करती। कुल उत्पादन लक्ष्य 4.56 लाख करोड़।​

तालिका: ईएमसीएमएस प्रभाव।

लक्ष्य मूल्य (₹ लाख करोड़) नौकरियां
उत्पादन 4.56 91,600 ​
निवेश 0.59 अप्रत्यक्ष लाखों ​
निर्यात 1.02 1.41 लाख ​

10. पैसिव इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पीएलआई

2025 में नया पीएलआई लॉन्च। ₹22,919 करोड़ बजट से पैसिव कंपोनेंट्स जैसे रेसिस्टर्स, कैपेसिटर्स और इंडक्टर्स को टारगेट। यह आयात कम करने और लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर फोकस। टर्नओवर-लिंक्ड इंसेंटिव से कंपनियां प्रोत्साहित। एमएसएमई को प्राथमिकता।​

इसने टेलीकॉम, ऑटोमोटिव और पावर सेक्टर को सपोर्ट दिया। पहले 90% आयात था। अब प्रोडक्शन बढ़ रहा। परिणाम: टेलीकॉम, ऑटोमोटिव में उपयोग। ₹1.95-2 ट्रिलियन उत्पादन। ग्लोबल सप्लाई मजबूत। 13 बिलियन डॉलर निवेश प्रस्ताव। यह स्कीम 5G इंफ्रा को बूस्ट देती।​

तालिका: पैसिव कंपोनेंट्स प्रकार।

प्रकार उपयोग उत्पादन लक्ष्य
रेसिस्टर्स सर्किट कंट्रोल ₹50,000 करोड़ ​
कैपेसिटर्स एनर्जी स्टोर ₹1 लाख करोड़ ​
इंडक्टर्स सिग्नल फिल्टरिंग ₹30,000 करोड़ ​

11. नई नॉर्म्स फॉर इन्वेस्टमेंट एंड इनोवेशन

2025 में नई नॉर्म्स लागू। ये निवेश प्रोसेस को स्ट्रीमलाइन करतीं। एफडीआई को आसान अप्रूवल और कम ब्यूरोक्रेसी। इनोवेशन और जॉब्स क्रिएशन पर फोकस। वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए आरएंडडी ग्रांट्स।​

इसने स्किल इंडिया के साथ जुड़कर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स शुरू किए। स्टार्टअप्स को टैक्स बेनिफिट्स। परिणाम: ₹820 बिलियन प्राइवेट निवेश। भारत ग्लोबल हब। फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व बेसिस। ये नॉर्म्स ईवी और स्मार्ट डिवाइस इनोवेशन को प्रोत्साहित। कुल 9.6 बिलियन डॉलर एफडीआई आया।​​

तालिका: नई नॉर्म्स लाभ।

क्षेत्र सुधार प्रभाव
एफडीआई आसान अप्रूवल $9.6 बिलियन ​
इनोवेशन आरएंडडी ग्रांट्स जॉब ग्रोथ ​
स्टार्टअप्स टैक्स छूट 50,000 नई फर्म्स ​

12. एफडीआई और आरएंडडी पॉलिसी

100% एफडीआई ऑटोमैटिक रूट पर। आरएंडडी को प्रोत्साहन देने वाली पॉलिसी 2010 से विकसित। यह हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देती। इंटरनेशनल कॉलेबोरेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर फोकस।​

इसने सेमीकंडक्टर मिशन को सपोर्ट किया। गुजरात जैसे राज्य हब बन रहे। परिणाम: चिप डिजाइन में प्रोग्रेस। निर्यात 47% बढ़ा। भारत अब $500 बिलियन हब। 1.60 लाख करोड़ निवेश। यह पॉलिसी ने 20% टैक्स डिडक्शन आरएंडडी पर दिया। ग्लोबल पार्टनर्स जैसे टाटा-इंटेल से डील्स।​

तालिका: एफडीआई ट्रेंड।

वर्ष एफडीआई (₹ लाख करोड़) क्षेत्र
2020 0.5 इलेक्ट्रॉनिक्स ​
2025 2 सेमीकंडक्टर ​
2026 (अनुमान) 3 इनोवेशन ​

निष्कर्ष: भविष्य की संभावनाएं

इन 12 नीतियों ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स पावरहाउस बनाया। उत्पादन $300 बिलियन का लक्ष्य 2026 तक। निर्यात 63% बढ़ा। नौकरियां लाखों में।​

ये नीतियां आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर हैं। 2030-31 तक 500 बिलियन डॉलर इकोसिस्टम बनेगा। ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत। भविष्य में और इनोवेशन आएंगे। चिप से लेकर स्मार्ट डिवाइस तक। पीएम मोदी के विजन से यह संभव हुआ। लाखों युवाओं को स्किल्ड जॉब्स मिलेंगी। भारत अब दुनिया की इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री बनेगा। ये कदम आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करते। ईएमसी जैसे क्लस्टर्स से ग्रोथ तेज। कुल मिलाकर, यह बूम भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ाएगा।