कैसे गुड़ (गुड) आपके आहार में परिष्कृत चीनी की जगह ले सकता है
हम सभी की सुबह अक्सर एक कप मीठी चाय या कॉफी से शुरू होती है। मीठे स्वाद के बिना हमारी जिंदगी थोड़ी अधूरी सी लगती है। लेकिन क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि जिस सफेद दानेदार मिठास को हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बना चुके हैं, वह हमारे शरीर के अंदर जाकर क्या तबाही मचा रही है? मैंने अक्सर लोगों को अपने स्वास्थ्य और वजन को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते देखा है, लेकिन जब अपनी थाली से इस सफेद जहर को हटाने की बारी आती है, तो वे बहाने बनाने लगते हैं।
सच कहूं तो यह सफेद मिठास सिर्फ एक खाली ऊर्जा का डिब्बा है जो धीरे धीरे हमें भयानक बीमारियों की तरफ धकेल रही है। हमारे बड़े~बुजुर्ग हमेशा से भोजन करने के बाद थोड़ा सा प्राकृतिक गुड़ खाते आए हैं। उन्हें शायद इसके पीछे का विज्ञान न पता हो, लेकिन वे यह जरूर जानते थे कि यह स्वास्थ्य के लिए एक अनमोल खजाना है। आज हम बिल्कुल निष्पक्ष तरीके से इस बात की पूरी पड़ताल करेंगे कि क्या सच में सफेद मिठास को छोड़कर पारंपरिक गुड़ को अपनाना आपके लिए फायदेमंद है।
सफेद चीनी से हमारी सेहत को आखिर क्या भारी नुकसान है?
जब हम नुकसान की बात करते हैं, तो अक्सर लोग कहते हैं कि थोड़ा बहुत मीठा खाने से क्या बिगड़ जाएगा। लेकिन असल समस्या यह है कि हम सिर्फ सुबह की चाय में यह सफेद जहर नहीं पी रहे हैं। बाजार में मिलने वाले बिस्कुट, डबल रोटी, टमाटर की चटनी, डिब्बाबंद फलों के रस और बाहर के लगभग हर खाने में यह मिठास भारी मात्रा में छुपी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ इंसान को पूरे दिन में बहुत ही कम मात्रा में मीठा खाना चाहिए। लेकिन अनजाने में हम अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा मीठा खा रहे हैं, जो सीधे तौर पर हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है।
वजन का तेजी से बढ़ना और जिद्दी मोटापे की भयंकर समस्या
इस सफेद दानेदार मिठास में शरीर को पोषण देने वाले तत्व बिल्कुल शून्य होते हैं। जब आप इसे खाते हैं, तो यह शरीर को अचानक से बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा देती है। चूंकि इस ऊर्जा को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए शरीर के पास कोई रेशेदार तत्व नहीं होता, इसलिए यह फालतू ऊर्जा सीधे वसा या चर्बी के रूप में आपके शरीर के अलग अलग हिस्सों में जमा होने लगती है। सबसे ज्यादा चर्बी आपके पेट और कमर के आसपास जमा होती है जिसे कम करना सबसे मुश्किल काम होता है। यदि आप व्यायामशाला में घंटों पसीना बहा रहे हैं लेकिन अपने खानपान से इस मीठे जहर को नहीं हटा रहे हैं, तो आपका वजन कभी भी संतुलित नहीं हो पाएगा। यह हमारे दिमाग को गुमराह करती है जिससे हमें यह पता ही नहीं चलता कि हमारा पेट भर चुका है, और हम जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं।
| नुकसान का मुख्य कारण | शरीर पर पड़ने वाला सीधा असर | बचने का सरल उपाय |
| खाली ऊर्जा का शरीर में जाना | पेट के चारों ओर जिद्दी चर्बी का जमाव | आहार से कृत्रिम मिठास को पूरी तरह हटाना |
| तृप्ति बताने वाले स्राव का बिगड़ना | भूख से ज्यादा भोजन खाने की बुरी आदत | भोजन में रेशेदार और प्राकृतिक तत्वों को शामिल करना |
| वसा को जलाने की प्रक्रिया का धीमा होना | व्यायाम के बाद भी वजन कम न होना | शरीर को शुद्ध और पोषण से भरपूर भोजन देना |
रक्त शर्करा का अचानक उछाल और मधुमेह का जानलेवा खतरा
इस सफेद मिठास का अवशोषण शरीर में बहुत तेजी से होता है। जैसे ही यह हमारे पेट में जाती है, तुरंत टूटकर हमारे खून में मिल जाती है। इससे हमारे खून में मिठास का स्तर एकदम से ऊपर की तरफ भागता है। इस अचानक आए तेज उछाल को संभालने के लिए हमारे शरीर की ग्रंथियों को बहुत ज्यादा मात्रा में पाचक रस छोड़ना पड़ता है। जब हम हर दिन भारी मात्रा में मीठा खाते हैं, तो हमारे शरीर की नसें इस पाचक रस के प्रति काम करना पूरी तरह से बंद कर देती हैं। यही वह खतरनाक स्थिति है जिसे हम मधुमेह की बीमारी कहते हैं। आज के समय में बहुत ही कम उम्र के युवाओं को जो यह गंभीर बीमारी जकड़ रही है, उसका सीधा और स्पष्ट कारण हमारे रोजमर्रा के खाने में इसी सफेद मिठास की अत्यधिक मिलावट है।
| शरीर की आंतरिक प्रक्रिया | कृत्रिम मिठास खाने के तुरंत बाद की स्थिति | लंबी अवधि का भयंकर परिणाम |
| खून में मिठास का घुलना | बहुत तेज गति से खून में जाकर मिलना | नसों पर लगातार और भारी दबाव पड़ना |
| पाचक रस का उत्पादन | ग्रंथियों पर आवश्यकता से अधिक कार्यभार | शरीर का पाचक रस बनाने में पूरी तरह विफल होना |
| मिठास सहने की क्षमता | शरीर की कोशिकाओं का सुन्न पड़ जाना | आजीवन मधुमेह की गंभीर बीमारी का शिकार होना |
हृदय के जानलेवा रोग और शरीर में दिनभर छाई रहने वाली सुस्ती
मीठा खाने के तुरंत बाद आपको एक अजीब सी ऊर्जा की लहर महसूस होती है। लेकिन कुछ ही पलों के बाद यह ऊर्जा अचानक से पूरी तरह गिर जाती है और आप खुद को पहले से भी कहीं ज्यादा थका हुआ महसूस करने लगते हैं। इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा मीठा खाने पर हमारा यकृत इस फालतू मिठास को एक प्रकार की खतरनाक चर्बी में बदल देता है। यह गंदी चर्बी हमारे खून में तैरती रहती है और धीरे~धीरे दिल की नसों के अंदर जाकर जमने लगती है। लंबे समय तक अपनी क्षमता से ज्यादा मीठा खाने वाले लोगों में अचानक दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप की समस्या काफी ज्यादा देखी जाती है। यह न केवल आपके दिल की धड़कन को अनियमित करता है, बल्कि पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को भी बाधित करता है जिससे इंसान हमेशा थका~थका रहता है।
| शरीर पर दिखने वाला असर | खाने के तुरंत बाद की स्थिति | भविष्य में होने वाला भारी नुकसान |
| ऊर्जा के स्तर में बदलाव | कुछ देर के लिए बहुत ज्यादा फुर्ती आना | भयानक सुस्ती और पूरे शरीर में भारीपन |
| खून की गुणवत्ता पर प्रभाव | खून का धीरे~धीरे गाढ़ा और चिपचिपा होना | नसों के अंदर रुकावट और खून के थक्के जमना |
| हृदय की कार्यक्षमता | दिल की धड़कन का अस्वाभाविक रूप से तेज होना | दिल का दौरा पड़ने की बहुत अधिक संभावना |
दांतों का पूरी तरह सड़ना और त्वचा का समय से पहले बूढ़ा दिखना
हमारे मुंह के अंदर बहुत सारे सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं। जब हम कृत्रिम मिठास वाली चीजें खाते हैं, तो ये सूक्ष्म जीव उस मिठास को खाकर एक बहुत ही खतरनाक तेजाब बनाते हैं। यह तेजाब हमारे दांतों की सबसे ऊपरी और मजबूत परत को धीरे~धीरे पूरी तरह से गला देता है, जिससे दांतों में गहरे गड्ढे बन जाते हैं और भयंकर दर्द होता है। त्वचा की बात करें तो मीठा खाने से शरीर के अंदर एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया शुरू होती है जो हमारी त्वचा को तानकर रखने वाले प्राकृतिक प्रोटीन को तोड़ देती है। इस प्रोटीन के टूटने से चेहरे पर बहुत ही कम उम्र में झुर्रियां, महीन रेखाएं और बड़े~बड़े दाने निकलने लगते हैं। व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से दस साल ज्यादा बूढ़ा और थका हुआ दिखने लगता है।
| शरीर का बाहरी अंग | मिठास का नकारात्मक प्रभाव | नुकसान की स्पष्ट पहचान |
| दांतों की बाहरी परत | सूक्ष्म जीवों द्वारा भयंकर तेजाब का निर्माण | दांतों में काले रंग के गड्ढे और तेज झनझनाहट |
| चेहरे की कोमल त्वचा | कसाव लाने वाले प्राकृतिक प्रोटीन का टूटना | आंखों के नीचे लटकती त्वचा और गहरी झुर्रियां |
| चेहरे की चमक | खून के अंदर गंदगी का भारी जमाव | चेहरे पर बड़े दाने और काले दाग~धब्बे |
गुड़ क्या है और यह कारखाने वाली सफेद चीनी से कैसे एकदम अलग है?
बाजार में मिलने वाली दानेदार सफेद मिठास और गांव के खेतों में मिलने वाले देसी गुड़ की पूरी कहानी एक ही जगह से शुरू होती है। ये दोनों ही चीजें गन्ने के ताजे रस से बनाई जाती हैं। लेकिन खेत से निकलकर कारखाने तक पहुंचने के बाद दोनों का रास्ता बिल्कुल अलग दिशा में मुड़ जाता है। यही रास्ता यह तय करता है कि कौन सी चीज आगे चलकर शरीर के लिए जहर बनेगी और कौन सी चीज अमृत का काम करेगी। एक तरफ रसायनों का भारी खेल है, तो दूसरी तरफ सदियों पुरानी प्राकृतिक परंपरा है।
दोनों के बनने की जटिल प्रक्रिया में जमीन आसमान का भारी अंतर
कृत्रिम मिठास तैयार करने के लिए गन्ने के रस को बड़े बड़े कारखानों में ले जाया जाता है। वहां इसे साफ करने और बिल्कुल सफेद रंग देने के लिए इसमें कई तरह के खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं। इस भारी रासायनिक धुलाई की वजह से गन्ने के रस में मौजूद सारे प्राकृतिक गुण पूरी तरह से जलकर राख हो जाते हैं। दूसरी तरफ, प्राकृतिक मिठास तैयार करने का तरीका आज भी बहुत ही साधारण और शुद्ध है। गन्ने के रस को निकालकर एक बहुत बड़ी लोहे की कड़ाही में आग पर घंटों तक उबाला जाता है। रस की सारी गंदगी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में एक भी रसायन का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए गन्ने का सारा पोषण इसके अंदर पूरी तरह से सुरक्षित रहता है।
| निर्माण का चरण | कारखाने वाली मिठास का तरीका | प्राकृतिक गुड़ बनाने का तरीका |
| रस की गहरी सफाई | खतरनाक रसायनों और तेजाब का इस्तेमाल | जंगली पौधों की जड़ों का प्राकृतिक उपयोग |
| पकाने की लंबी प्रक्रिया | बड़ी मशीनों में बहुत अधिक तापमान पर पकाना | खुली आग पर लोहे की कड़ाही में धीरे~धीरे उबालना |
| अंतिम रूप और रंग | रसायनों के कारण बिल्कुल सफेद और दानेदार | बिना किसी मिलावट के गहरा भूरा या चॉकलेटी रंग |
शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों की बिल्कुल सीधी और साफ तुलना
अगर हम शरीर को मिलने वाले पोषण की बात करें, तो इन दोनों चीजों की आपस में कोई तुलना ही नहीं की जा सकती। सफेद दानेदार मिठास में सिर्फ और सिर्फ खाली ऊर्जा होती है। इसमें खून बनाने वाले या हड्डियों को मजबूत करने वाले तत्व बिल्कुल शून्य होते हैं। वहीं दूसरी तरफ, प्राकृतिक मिठास में ऊर्जा के साथ~साथ शरीर के लिए जरूरी हर तरह के तत्व प्रचुर मात्रा में भरे होते हैं। इसमें प्राकृतिक लोहा बहुत भारी मात्रा में पाया जाता है जो नया खून बनाता है। इसके अलावा इसमें हड्डियों के लिए जरूरी तत्व भी मौजूद होते हैं। इसीलिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसे सिर्फ एक मीठा पदार्थ नहीं, बल्कि हर घर की एक जरूरी और बहुत शक्तिशाली औषधि माना गया है।
| पोषक तत्व की उपस्थिति | सफेद कृत्रिम मिठास में मात्रा | प्राकृतिक गुड़ में भरपूर मात्रा |
| खून बनाने वाला लौह तत्व | बिल्कुल शून्य प्रतिशत | दिनभर की जरूरत का साठ प्रतिशत |
| हड्डियों को मजबूत करने वाला तत्व | बिल्कुल शून्य प्रतिशत | बहुत ही अच्छी और फायदेमंद मात्रा |
| शरीर साफ करने वाले अन्य तत्व | बिल्कुल शून्य प्रतिशत | भारी मात्रा में उपलब्ध |
अपनी दिनचर्या में चीनी की जगह गुड़ शामिल करने के बेमिसाल और अचूक फायदे
अगर आप आज ही अपने मन में यह पक्का तय कर लें कि आप रोजमर्रा के खानपान में सफेद मिठास को पूरी तरह से त्याग देंगे और उसकी जगह इस पारंपरिक मिठास को अपनाएंगे, तो आपके शरीर में कुछ ही हफ्तों में कई गजब के बदलाव देखने को मिलेंगे। यह सिर्फ एक स्वाद बदलने की बात नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से साफ करने और बीमारियों को जड़ से मिटाने का एक अचूक नुस्खा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह शरीर के हर अंग के लिए क्या कमाल कर सकता है।
पाचन तंत्र को लोहे जैसा मजबूत बनाना और पुरानी कब्ज को जड़ से दूर करना
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बाहर का खाना खाने से हर दूसरे इंसान का पेट खराब रहता है। भोजन करने के बाद पेट का फूलना या खट्टी डकारें आना एक बहुत ही आम बात हो गई है। ऐसे में यह पारंपरिक मिठास हमारे कमजोर पाचन तंत्र के लिए किसी जादू की छड़ी से कम नहीं है। जब आप भारी भोजन करने के बाद इसका एक छोटा सा टुकड़ा अच्छी तरह चबाकर खाते हैं, तो यह पेट के अंदर भोजन पचाने वाले रसों को तुरंत जगा देता है। यह हमारी आंतों के अंदर मल को चिपकने से रोकता है। जो लोग कई सालों से सुबह पेट साफ न होने की समस्या से बुरी तरह परेशान हैं, अगर वे रोज रात को सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन शुरू कर दें, तो सुबह उनका पेट बिना किसी दवा के बिल्कुल साफ होने लगेगा।
| पाचन की समस्या | पारंपरिक मिठास का असरदार समाधान | मिलने वाला तुरंत परिणाम |
| भोजन का पेट में सड़ना | पाचक रसों के बहाव को बहुत तेज करना | भारी से भारी भोजन का आसानी से पचना |
| पुरानी और जिद्दी कब्ज | आंतों के अंदर की खुश्की को पूरी तरह मिटाना | सुबह उठते ही बिना किसी तकलीफ के पेट साफ होना |
| खट्टी डकार और गैस | पेट के अंदर फालतू तेजाब बनने से रोकना | सीने की जलन और पेट फूलने की समस्या खत्म |
खून की कमी का बहुत ही पक्का, सस्ता और पूरी तरह से प्राकृतिक इलाज
हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे शरीर में नया खून न बनने की बीमारी से हर दिन जूझ रहे हैं। शरीर में खून की कमी होने से थोड़ा सा चलने पर भी सांस जल्दी फूलने लगती है, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है और पूरे शरीर में भयंकर कमजोरी छाई रहती है। ऐसे में यह प्राकृतिक मिठास पौधों से मिलने वाले लौह तत्व का सबसे बेहतरीन और सबसे सस्ता स्रोत है। यह लौह तत्व हमारे पूरे शरीर में प्राणवायु ले जाने का बहुत ही महत्वपूर्ण काम करता है। रोज अपने खाने में इसे और भुने हुए चनों को शामिल करने से कुछ ही हफ्तों में शरीर के अंदर नया और लाल खून बहुत तेजी से बनने लगता है। यह बाजार में मिलने वाली भारी~भरकम और महंगी दवाइयों से कहीं ज्यादा असरदार और पेट के लिए सुरक्षित है।
| खून से जुड़ी गंभीर समस्या | प्राकृतिक रूप से मिलने वाला समाधान | शरीर पर दिखने वाला जादुई असर |
| नया खून न बनने की बीमारी | प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक लौह तत्व की प्राप्ति | शरीर में तेजी से लाल खून का नया निर्माण |
| हर समय भयंकर थकान रहना | शरीर के हर अंग तक भरपूर प्राणवायु पहुंचाना | दिनभर बिना थके लगातार काम करने की ऊर्जा |
| आंखों के सामने अचानक अंधेरा छाना | खून के बहाव को बिल्कुल सही और तेज करना | चक्कर आना और घबराहट की समस्या जड़ से खत्म |
सर्दी~खांसी से पक्का बचाव और रोगों से लड़ने की शारीरिक क्षमता में भारी वृद्धि
इस पारंपरिक मिठास की प्रकृति अंदर से बहुत ही गर्म होती है। ठंडे मौसम में इसका सेवन करने से शरीर को अंदरूनी गर्माहट मिलती है जो हमें ठंड के प्रकोप से बचाती है। हमारे फेफड़ों और सांस लेने की नली में जो बाहरी धूल, धुआं या गाढ़ा बलगम जमा हो जाता है, यह उसे काटकर शरीर से बाहर फेंकने का बहुत ही शानदार काम करता है। जब भी मौसम बदलने पर आपको गले में दर्द हो या सूखी खांसी रात भर सोने न दे, तो थोड़ी सी सोंठ या अदरक के साथ इसे आग पर हल्का गर्म करके धीरे~धीरे चूसें। इसमें मौजूद विशेष प्राकृतिक तत्व हमारी बीमारियों से लड़ने वाली शारीरिक फौज को इतना मजबूत कर देते हैं कि मौसमी बुखार और जुकाम हमारे आस पास भी नहीं फटकते।
| मौसम से जुड़ी बीमारी | उपयोग करने का सबसे सही और सटीक तरीका | बीमारी पर होने वाला प्रहार |
| सूखी और लगातार उठने वाली खांसी | अदरक के रस के साथ हल्का गर्म करके चूसना | गले की सूजन कम होना और खांसी तुरंत रुकना |
| छाती में जमा हुआ गाढ़ा बलगम | रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ सेवन | फेफड़ों की पूरी सफाई और सांस लेने में आराम |
| बार~बार जुकाम और बुखार होना | नियमित रूप से खाने में बहुत थोड़ी मात्रा शामिल करना | बीमारियों से लड़ने की ताकत में कई गुना वृद्धि |
चेहरे पर हमेशा दमकती त्वचा और शरीर को सहारा देने वाली मजबूत हड्डियां
आपकी त्वचा पर असली चमक तभी नजर आती है जब आपका खून अंदर से पूरी तरह साफ और शुद्ध होता है। यह प्राकृतिक मिठास हमारे यकृत को अंदर से धोकर शरीर के सारे जहरीले और गंदे तत्वों को छानकर बाहर निकाल फेंकती है। खून की इस शानदार सफाई से चेहरे पर निकलने वाले बड़े बड़े दाने और काले दाग~धब्बे अपने आप हमेशा के लिए खत्म होने लगते हैं। इसके अलावा, इसके अंदर हड्डियों को मजबूत करने वाले कई अनमोल तत्व एक साथ पाए जाते हैं। बढ़ती उम्र के साथ जब हमारे घुटनों और जोड़ों में से कट कट की आवाज आने लगती है और भयंकर दर्द होता है, तब इसका नियमित सेवन अमृत के समान काम करता है और हड्डियों को भीतर से फौलाद जैसा मजबूत बना देता है।
| शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा | अंदरूनी तौर पर होने वाला भारी फायदा | बाहरी रूप से दिखने वाला स्पष्ट बदलाव |
| चेहरे की कोमल त्वचा | खून के अंदर की सारी गंदगी और जहर की सफाई | चेहरे पर निखार आना और सारे दाने खत्म होना |
| शरीर के सभी प्रमुख जोड़ | जोड़ों के बीच आवश्यक चिकनाई का लगातार निर्माण | उठते~बैठते समय घुटनों में होने वाला दर्द गायब होना |
| शरीर का पूरा ढांचा | कमजोर पड़ती हड्डियों को जरूरी पोषण मिलना | बुढ़ापे में भी बिना किसी सहारे के सीधा चलना |
महिलाओं के जटिल स्वास्थ्य के लिए कुछ बहुत ही खास और अनमोल फायदे
हर महीने आने वाले शारीरिक चक्र के दौरान महिलाओं को भयंकर दर्द, पेट में तेज ऐंठन और स्वभाव में अचानक होने वाले बदलावों का भारी सामना करना पड़ता है। ऐसे मुश्किल समय में थोड़ा सा गुड़ खाने से महिलाओं के मस्तिष्क में एक ऐसा विशेष रस निकलता है जो दर्द को प्राकृतिक रूप से दबा देता है और मन को बहुत ज्यादा शांति और आराम पहुंचाता है। इसके अलावा उन दिनों में जो खून शरीर से बाहर निकल जाता है, यह मिठास उसमें होने वाली कमी को तुरंत उसी समय पूरा करने का काम शुरू कर देती है। यह महिलाओं के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए किसी दिव्य वरदान से कम नहीं है।
| महिलाओं से जुड़ी विशेष समस्या | प्राकृतिक तरीके से मिलने वाला बड़ा आराम | शरीर और मन पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव |
| पेट के निचले हिस्से में भयंकर ऐंठन | शरीर के अंदर गर्माहट और शांति पैदा करना | दर्द से तड़पने की जगह पूरी तरह से राहत मिलना |
| स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन आना | मस्तिष्क को शांत करने वाले रस का बहाव | मन का एकदम खुश रहना और गुस्सा न आना |
| शरीर से खून का भारी नुकसान होना | लौह तत्व की मदद से कमी को तुरंत पूरा करना | कमजोरी और चक्कर आने की समस्या से पूर्ण बचाव |
गुड़ के अलग अलग प्रकार जो हर जागरूक व्यक्ति को जरूर जानने चाहिए
जब भी हम प्राकृतिक मिठास की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सिर्फ खेतों में खड़े गन्ने से बना हुआ भूरे रंग का ठेला ही आता है। लेकिन हमारे देश की भौगोलिक विविधता इतनी ज्यादा कमाल की है कि यहां अलग~अलग राज्यों में अलग~अलग तरह के पेड़ों के रस से भी बहुत ही शानदार प्राकृतिक मिठास तैयार की जाती है। इन सबकी अपनी एक अलग अनूठी खासियत और शरीर को पोषण देने की क्षमता होती है। आइए इन सबके बारे में विस्तार से जानते हैं।
गन्ने के रस से बना हुआ सबसे आम और प्राकृतिक गुड़
यह हमारे देश का सबसे मशहूर और आम रूप है जो हर आम भारतीय की रसोई में बहुत ही आसानी से मिल जाता है। इसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे बड़े राज्यों में भारी मात्रा में किसानों द्वारा तैयार किया जाता है। इसका रंग हल्के पीले रंग से लेकर बहुत ही गहरे चॉकलेटी रंग तक कुछ भी हो सकता है। यह हमारी रोजमर्रा की सुबह की चाय, त्योहारों पर बनने वाले हलवे और सादी दाल में मीठा तड़का लगाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला रूप है। इसके अंदर नया खून बनाने की ताकत सबसे ज्यादा होती है।
| इस प्रकार की मुख्य खासियत | रंग और स्वाद की असली पहचान | शरीर के लिए सबसे बड़ा और मुख्य फायदा |
| बनाने का मुख्य स्रोत | हल्का पीला या गहरा भूरा रंग | शरीर में खून की कमी को बहुत तेजी से पूरा करना |
| उपलब्धता की स्थिति | हल्का नमकीन और बहुत ज्यादा मीठा स्वाद | रोजमर्रा की होने वाली थकान को पूरी तरह मिटाना |
| भोजन में उपयोग | भारत के हर छोटे~बड़े गांव और शहर में उपलब्ध | पाचन तंत्र को सुधारना और शरीर को ऊर्जा देना |
खजूर के पेड़ से निकलने वाला बेहद स्वादिष्ट और खास गुड़
कड़ाके की सर्दियों के मौसम में पूर्वी भारत, विशेषकर बंगाल के इलाकों में इस खास प्रकार की मिठास को बहुत ही ज्यादा चाव से खाया जाता है। इसे खजूर के पेड़ से निकलने वाले एकदम ताजे रस को धीमी आंच पर उबालकर बड़ी ही मेहनत से बनाया जाता है। इसका स्वाद गन्ने वाले रूप से बिल्कुल अलग होता है। इसके अंदर एक बहुत ही अनोखी और धुएं जैसी भीनी भीनी महक होती है। बंगाल की सबसे मशहूर मिठाइयां सर्दियों के दौरान इसी से बनाई जाती हैं। यह शरीर को गर्माहट देने के साथ साथ नसों को ताकत देने में बेजोड़ है।
| इस प्रकार की मुख्य खासियत | रंग और स्वाद की असली पहचान | शरीर के लिए सबसे बड़ा और मुख्य फायदा |
| बनाने का मुख्य स्रोत | गाढ़ा और गहरे भूरे रंग का तरल या ठोस रूप | शरीर को भयंकर ठंड से बचाने की अद्भुत क्षमता |
| स्वाद की अनूठी बात | बहुत ही अलग और धुएं जैसी सोंधी महक | शरीर की थकी हुई नसों को नई ताकत और स्फूर्ति देना |
| सबसे ज्यादा इस्तेमाल | बंगाली मिठाइयों का स्वाद कई गुना बढ़ाना | सर्दियों में होने वाले गले के दर्द से तुरंत राहत देना |
ताड़ के विशाल पेड़ के रस से बनने वाला गहरा गुड़

इसे भारत के दक्षिणी राज्यों में बहुत भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। यह ताड़ के पेड़ के प्राकृतिक रस से बहुत ही लंबी प्रक्रिया के बाद बनाया जाता है। यह रंग में बिल्कुल गहरा काला या बहुत गहरा चॉकलेटी होता है और स्वाद में मिठास के साथ साथ थोड़ा सा कड़वापन भी लिए होता है। पारंपरिक चिकित्सा के जानकारों का मानना है कि ताड़ से बनी यह मिठास सांस की गंभीर बीमारियों और छाती के पुराने रोगों के मरीजों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है। यह छाती में जमे हुए सालों पुराने कफ को पिघलाकर बाहर निकाल देती है।
| इस प्रकार की मुख्य खासियत | रंग और स्वाद की असली पहचान | शरीर के लिए सबसे बड़ा और मुख्य फायदा |
| बनाने का मुख्य स्रोत | बिल्कुल गहरा काला और देखने में सख्त | सांस फूलने और छाती के रोगों में भारी राहत पहुंचाना |
| स्वाद में अंतर | मिठास के पीछे छुपा हुआ हल्का कड़वापन | फेफड़ों के अंदर जमी हुई सारी गंदगी को साफ करना |
| चिकित्सीय गुण | पुरानी पारंपरिक चिकित्सा में बहुत ऊंचा स्थान | पूरे शरीर को अंदर से साफ करने की अचूक ताकत |
आयुर्वेद के अनुसार गुड़ खाने का बिल्कुल सही और सटीक तरीका
दुनिया की कोई भी कितनी ही अच्छी चीज क्यों न हो, वह अपना पूरा फायदा तभी दिखाती है जब उसे बिल्कुल सही समय और सही नियम के साथ खाया जाए। हमारी पुरानी चिकित्सा पद्धति में इसे खाने के कुछ बहुत ही सख्त नियम बताए गए हैं। अगर आप इन नियमों का आंख बंद करके पालन करते हैं, तो इसके फायदे आपके शरीर पर कई सौ गुना ज्यादा तेजी से असर करते हैं और यह शरीर के लिए साक्षात अमृत बन जाता है।
सुबह उठते ही खाली पेट खाने के चमत्कारी और हैरान करने वाले फायदे
रात भर लंबी नींद के बाद हमारा पेट बिल्कुल खाली रहता है। सुबह उठकर बिना कुछ खाए~पिए अगर आप बासी मुंह इसका एक बहुत ही छोटा सा टुकड़ा खूब चबा~चबा कर खाते हैं और उसके ठीक ऊपर से एक बड़ा गिलास हल्का गुनगुना पानी पी लेते हैं, तो यह शरीर के लिए किसी जादू की तरह काम करता है। यह आपके पेट के अंदर की सारी जमी हुई गंदगी को खुरच कर आंतों से नीचे की तरफ धकेल देता है। आपके शरीर की भोजन पचाने वाली भट्ठी तुरंत धधकने लगती है, जिससे पूरा दिन आपको नींद या आलस नहीं आता और आप ताजगी से भरे रहते हैं।
| खाने का बिल्कुल सही समय | इसके साथ क्या चीज खानी या पीनी चाहिए | शरीर पर होने वाला सबसे पहला बड़ा असर |
| सुबह बिस्तर से उठते ही | एक गिलास हल्का गर्म और साफ पानी | पेट का पूरी तरह से साफ होना और मल का बाहर निकलना |
| खाली पेट और बासी मुंह | इसे खूब अच्छी तरह चबाकर धीरे~धीरे खाना | शरीर की आंतरिक भट्ठी का तेज गति से चालू होना |
| बिना चाय या कॉफी पिए | पानी पीने के बाद थोड़ी देर पैदल चलना | दिन भर के लिए शरीर में एक नई और शानदार ऊर्जा का आना |
भारी भोजन करने के बाद इसे खाने का सबसे सही और उचित नियम
दोपहर या रात का भारी भोजन करने के बाद अक्सर हमें बहुत ज्यादा आलस और नींद आने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे शरीर की सारी ऊर्जा उस भारी भोजन को पचाने में लग जाती है। भोजन के तुरंत बाद अगर आप सिर्फ दस ग्राम मात्रा में इस मिठास को मुंह में रखकर चूसते हैं, तो भोजन पचाने की पूरी प्रक्रिया बहुत ही तेज हो जाती है। यह पेट के अंदर फालतू का तेजाब बनने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक देता है, जिससे गले में होने वाली जलन या खट्टी डकारें आने की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो जाती है। शरीर भोजन के सारे अच्छे तत्वों को आसानी से सोख लेता है।
| भोजन के बाद का सही समय | कितनी मात्रा में खाना शरीर के लिए सुरक्षित है | पेट के अंदर होने वाली लाभदायक प्रक्रिया |
| भारी खाना खाने के तुरंत बाद | सिर्फ एक बहुत ही छोटा टुकड़ा (दस ग्राम) | भोजन को गलाने वाले रसों का बहुत तेजी से बनना |
| पेट भरकर खाने के बाद | दांतों से चबाने की बजाय मुंह में रखकर चूसना | पेट फूलने और सीने में जलन होने की समस्या का खत्म होना |
| रात को सोने से कुछ देर पहले | हल्के गुनगुने दूध के साथ थोड़ी सी मात्रा | शरीर की सारी थकान मिटना और बहुत गहरी नींद आना |
रोजमर्रा की दिनचर्या में चीनी की जगह गुड़ को शामिल करने के बहुत आसान तरीके
सालों से जो कृत्रिम मिठास हमारे खून और स्वाद में घुल चुकी है, उस आदत को एकदम से एक ही दिन में छोड़ देना थोड़ा मुश्किल और अजीब लग सकता है। हमारा दिमाग उस दानेदार मिठास के स्वाद का पूरी तरह से गुलाम हो चुका है। लेकिन अगर आप थोड़ी सी समझदारी और छोटे~छोटे कदम उठाएं, तो इस खतरनाक मिठास की जगह इस पारंपरिक और प्राकृतिक रूप को अपनी पूरी दिनचर्या में बहुत ही आसानी से शामिल किया जा सकता है।
सुबह की चाय की प्याली के साथ एक बिल्कुल नई और स्वस्थ शुरुआत
हमारे देश में सुबह की शुरुआत बिना उबलती हुई कड़क चाय के नहीं होती। लेकिन सफेद मिठास वाली चाय हमारे पेट के अंदर जाकर सीधा तेजाब बनाती है। अपनी चाय बनाने का पुराना तरीका आज ही थोड़ा सा बदल दें। चाय की पत्ती और कुटी हुई अदरक को पानी में बहुत अच्छे से उबाल लें, फिर उसमें जरूरत के अनुसार दूध डालें। जब चाय पूरी तरह से उबलकर तैयार हो जाए, तो नीचे से आग को पूरी तरह बंद कर दें। आग बंद करने के बाद ही इसमें स्वादानुसार पारंपरिक मिठास मिलाएं और दो मिनट के लिए बर्तन को ढक दें। उबलते हुए पानी में इसे डालने से दूध तुरंत फट जाता है। एक बार आपको इस सोंधी चाय की आदत पड़ गई, तो आपको पुरानी चाय बिल्कुल कड़वी और बेस्वाद लगने लगेगी।
| दिनचर्या का पहला काम | पुराना और नुकसानदायक तरीका | नया, स्वस्थ और बिल्कुल सही तरीका |
| सुबह की पहली चाय बनाना | उबलते पानी में सफेद जहर डालकर पकाना | पूरी चाय बनने और आग बंद करने के बाद मिठास मिलाना |
| स्वाद में आने वाला बदलाव | केवल जीभ को लगने वाला एक तीखा और मीठा स्वाद | एक बहुत ही सोंधा, प्राकृतिक और सुकून देने वाला गहरा स्वाद |
| पेट पर पड़ने वाला सीधा असर | सुबह उठते ही पेट में भयंकर तेजाब का बनना | पेट को गर्मी से बचाना और पाचन क्रिया को सही रखना |
घर में बनने वाले मीठे पकवानों में करें भरपूर और बेझिझक इस्तेमाल
सर्दियों के मौसम में घरों में बनने वाले गाजर के गर्मागर्म हलवे, सावन में बनने वाली चावल की खीर, बेसन के गोल लड्डू या पंजीरी में सफेद मिठास डालना आज से ही बिल्कुल बंद कर दें। इनकी जगह पिघले हुए प्राकृतिक रूप का इस्तेमाल करें। यह आपके किसी भी पकवान को एक बहुत ही खूबसूरत और गहरा भूरा रंग देता है और साथ ही एक ऐसी सोंधी महक देता है जो पूरे घर में फैल जाती है। जो लोग अपने घर पर छोटी भट्टी में बिस्कुट या केक बनाते हैं, वे भी रसायनों से धुली मिठास की जगह इस प्राकृतिक चूर्ण का इस्तेमाल बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं।
| घर में बनने वाला पकवान | कृत्रिम मिठास से होने वाला नुकसान | पारंपरिक मिठास से मिलने वाला गजब का फायदा |
| त्योहारों पर बनने वाला हलवा | खाली ऊर्जा का बढ़ना और स्वाद का साधारण रहना | रंग का बहुत सुंदर होना और एक शाही स्वाद का आना |
| सर्दियों के खास लड्डू | शरीर में गर्मी की बजाय चर्बी का भारी जमाव | शरीर को अंदर से फौलाद जैसी ताकत और गर्माहट मिलना |
| घर पर बनने वाले बिस्कुट | बच्चों के दांतों में भयंकर सड़न पैदा करना | बच्चों की हड्डियों को मजबूत करने वाला अच्छा पोषण मिलना |
बार बार उठने वाली मीठे की तलब को इस शानदार तरीके से करें शांत
अक्सर दोपहर का भोजन करने के बाद या शाम ढलते समय अचानक से कुछ बहुत ज्यादा मीठा खाने की भयंकर इच्छा मन में उठती है। ऐसे में हम खुद को रोक नहीं पाते और डिब्बे खोलकर बाहर का गंदा मीठा खाने लगते हैं। अपनी इस बुरी आदत को तोड़ने के लिए अपनी काम करने की जगह पर या घर में हमेशा भुने हुए चने, मूंगफली और इस पारंपरिक मिठास का एक छोटा सा डिब्बा जरूर रखें। जब भी मीठे की भयंकर तलब लगे, थोड़ा सा गुड़ कुछ दानों के साथ चबाकर खा लें। यह आपके मन की इच्छा को तुरंत शांत करेगा और बाहर का कचरा खाने से पूरी तरह बचा लेगा।
| अचानक उठने वाली इच्छा | हम आमतौर पर जो बड़ी गलती करते हैं | हमें वास्तव में क्या समझदारी भरा काम करना चाहिए |
| शाम के समय मीठे की तलब | बाजार के डिब्बाबंद और रसायनों वाले बिस्कुट खाना | भुने हुए चने या मूंगफली के साथ एक छोटा सा टुकड़ा खाना |
| भूख और मीठे का मिला जुला अहसास | ठंडी और नुकसानदायक चीजें पेट में डालना | चिक्की या प्राकृतिक रूप से बनी हुई गजक का सीमित सेवन |
| खाने के तुरंत बाद की इच्छा | फालतू और बिना पोषण वाली सफेद मिठाइयां खाना | स्वाद कलिकाओं को शांत करने के लिए एक छोटा प्राकृतिक टुकड़ा |
चीनी छोड़कर प्राकृतिक मिठास अपनाने पर शरीर में आते हैं ये अद्भुत बदलाव
जब आप पूरी दृढ़ता के साथ अपने भोजन से रसायनों से धुली मिठास को पूरी तरह निकाल कर बाहर फेंक देते हैं और उसकी जगह इस पारंपरिक मिठास को सम्मान के साथ ले आते हैं, तो आपका शरीर खुद के अंदर की टूट~फूट को ठीक करना शुरू कर देता है। यह बदलाव एक जादुई सफर की तरह होता है। आइए गहराई से देखते हैं कि समय बीतने के साथ आपका शरीर कैसा महसूस करता है।
पहले हफ्ते में दिखने वाले कुछ चुनौतीपूर्ण लेकिन शानदार शुरुआती बदलाव
जब आप इसे छोड़ते हैं तो शुरुआती कुछ दिन आपके लिए थोड़े भारी और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। चूंकि सफेद मिठास हमारे दिमाग के लिए एक नशे की तरह काम करती है, इसलिए इसे छोड़ते ही आपको माथे में हल्का दर्द या बिना बात के चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। लेकिन जैसे ही आप पांचवें या छठे दिन में प्रवेश करेंगे, आप खुद पर ध्यान देंगे कि दोपहर के समय भोजन के बाद आपको जो आंखें बंद कर देने वाली भारी सुस्ती आती थी, वह अब बिल्कुल गायब हो चुकी है। आपकी शारीरिक ऊर्जा सुबह से लेकर रात तक एक समान बनी रहेगी और आपको बार बार थकान नहीं होगी।
| समय का पड़ाव | शरीर के अंदर चलने वाला भारी संघर्ष | आपको बाहर से कैसा महसूस होगा |
| शुरुआती एक से तीन दिन | शरीर का पुराने नशे को मांगने की भयंकर कोशिश | सिर में भारीपन, स्वभाव में चिड़चिड़ापन और तेज इच्छा |
| चौथे से छठे दिन तक | शरीर का नई और प्राकृतिक व्यवस्था के अनुकूल होना | दिमाग का शांत होना और पेट में हल्कापन महसूस होना |
| पहले हफ्ते के अंत में | ऊर्जा के स्तर का एक समान रूप से स्थिर हो जाना | दिनभर बिना थके काम करने की गजब की फुर्ती आना |
एक महीने की कड़ी तपस्या के बाद दिखने वाला जबरदस्त और हैरान करने वाला असर
पूरे एक महीने तक लगातार इस सफेद जहर से दूर रहने और अपनी पारंपरिक मिठास का सीमित मात्रा में सेवन करने पर आप नोटिस करेंगे कि आपके पेट की सूजन और हमेशा बना रहने वाला भारीपन पूरी तरह से खत्म हो गया है। आपके पुराने कपड़े आपको थोड़े ढीले महसूस होने लगेंगे क्योंकि शरीर के अंदर भरा हुआ फालतू और गंदा पानी बाहर निकल चुका होगा। सबसे बड़ा और सुंदर बदलाव आपकी त्वचा पर साफ दिखाई देगा। चेहरे का रूखापन खत्म होकर एक प्राकृतिक लालिमा आ जाएगी। और सबसे बड़ी जीत यह होगी कि अब आपका मन उस रसायनों वाली सफेद मिठास को देखकर खुद ही पीछे हटने लगेगा।
| समय का पड़ाव | शरीर के आंतरिक अंगों में भारी सुधार | आपको बाहर से दिखने वाले बिल्कुल स्पष्ट परिणाम |
| पंद्रह दिन बीतने पर | पेट और आंतों की अंदरूनी सूजन का पूरी तरह कम होना | कपड़ों का कमर से थोड़ा ढीला होना और सांस फूलना बंद |
| बीस से पच्चीस दिन में | खून से सारे जहरीले और गंदे तत्वों का बाहर निकलना | चेहरे पर चमक आना और दाने या मुंहासे पूरी तरह सूख जाना |
| पूरे एक महीने बाद | स्वाद पहचानने वाली ग्रंथियों का पूरी तरह बदल जाना | कृत्रिम मीठा देखते ही मन में उससे दूरी बनाने की इच्छा होना |
आहार में पारंपरिक मिठास: क्या मधुमेह के गंभीर मरीज इसे खा सकते हैं?
यह एक ऐसा पेचीदा सवाल है जिस पर हमारे समाज में लोगों को सबसे ज्यादा और भयंकर गलतफहमी है। मैंने खुद कई ऐसे गंभीर मधुमेह के मरीजों को देखा है जो दानेदार मिठास तो छोड़ देते हैं लेकिन यह सोचकर दिनभर पारंपरिक मिठास खाते रहते हैं कि इससे उनकी बीमारी नहीं बढ़ेगी। उनका यह पक्का मानना होता है कि यह प्राकृतिक है इसलिए यह बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन विज्ञान और सच्चाई की कसौटी पर यह बात पूरी तरह से गलत साबित होती है। आइए इसके पीछे का असली सच जानते हैं।
मिठास के सूचकांक का कड़वा सच और चिकित्सा विशेषज्ञों की स्पष्ट राय
इस बात में रत्ती भर भी शक नहीं है कि रसायनों से धुली मिठास के मुकाबले हमारी पारंपरिक मिठास हजार गुना ज्यादा पौष्टिक और शरीर के लिए अच्छी है। लेकिन अगर हम इसके अंदर की बनावट की बात करें, तो अंत में जाकर यह भी एक प्रकार की मिठास ही है। इसका सूचकांक भी काफी ज्यादा होता है। इसका सीधा सा और साफ मतलब यह है कि जब भी मधुमेह का कोई मरीज इसे खाता है, तो यह उसके खून में जाकर मिठास के स्तर को उसी तरह बहुत तेजी से ऊपर बढ़ाती है जैसे कोई अन्य मीठी चीज बढ़ाती है। चिकित्सा विशेषज्ञ बिल्कुल साफ शब्दों में कहते हैं कि यह मधुमेह के मरीजों के लिए मनमर्जी से खाने की कोई छूट नहीं है। एक स्वस्थ इंसान अपनी सेहत सुधारने के लिए इसे खा सकता है, लेकिन बीमार व्यक्ति को इसका सेवन बहुत ही कम मात्रा में और अपने वैद्य की सलाह के बाद ही करना चाहिए।
| मिठास का प्रकार | खून में मिठास बढ़ाने की गति का सूचकांक | मधुमेह के गंभीर मरीजों के लिए कितना सुरक्षित |
| कारखाने वाली सफेद मिठास | सूचकांक बहुत ज्यादा (पैंसठ के करीब) | बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं, पूरी तरह से जहर के समान |
| खेतों में बनी पारंपरिक मिठास | सूचकांक थोड़ा सा कम (चौवन के करीब) | खून में मिठास बढ़ाएगा, इसलिए बहुत ज्यादा सुरक्षित नहीं |
| निष्कर्ष और सही सलाह | दोनों ही चीजें खून में मिठास को बहुत तेज बढ़ाती हैं | बिना वैद्य या विशेषज्ञ की सलाह के बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए |
बाजार में सही और असली पारंपरिक मिठास की पहचान कैसे करें?
शुद्ध और मिलावटी मिठास में अंतर करने के बहुत ही सटीक और आसान तरीके
आजकल बाजार में मिलने वाली लगभग हर खाने पीने की चीज में मुनाफा कमाने के लिए भयंकर मिलावट की जा रही है। ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए और मिठास को देखने में बहुत ज्यादा सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए व्यापारी इसके अंदर कपड़े धोने वाला सर्फ और कई तरह के खतरनाक रसायन मिला देते हैं। इस मिलावटी चीज को खाने से शरीर को फायदे की जगह बहुत ही भयंकर नुकसान होता है। असली पहचान का सबसे पहला और कड़ा नियम यह है कि इसकी बाहरी सुंदरता पर बिल्कुल न जाएं। जो चीज दिखने में बहुत ज्यादा साफ, हल्के रंग की और चमकीली लग रही है, उसमें सौ प्रतिशत रसायन मिलाए गए हैं। हमेशा वह चीज खरीदें जो देखने में भद्दी, बहुत गहरे भूरे या लगभग काले रंग की हो। दूसरा तरीका है इसे अपनी जीभ पर रखकर थोड़ा सा चखना। अगर आपको मिठास के साथ हल्का सा भी नमकीन स्वाद आ रहा है, तो समझ लें इसे साफ करने के लिए इसमें भारी मिलावट की गई है।
| जांचने का तरीका | असली और प्राकृतिक चीज की पक्की पहचान | नकली और मिलावटी चीज की तुरंत पकड़ |
| आंखों से देखकर रंग पहचानना | बहुत ज्यादा गहरा भूरा, भद्दा और लगभग काला सा रंग | बहुत ज्यादा सफेद, पीला और एकदम चमकीला साफ रंग |
| जीभ पर रखकर स्वाद की जांच | बिल्कुल प्राकृतिक, सोंधा और एक बहुत ही गहरा मीठा स्वाद | मिठास के पीछे छुपा हुआ हल्का कड़वा या नमकीन सा स्वाद |
| पानी में घोलकर जांचना | गिलास के पानी में धीरे~धीरे और पूरी तरह से घुल जाना | नीचे की तरफ सफेद रंग के छोटे~छोटे कणों का जमा होना |
अंतिम विचार
इन सारी बातों को बहुत गहराई से समझने के बाद यह बात शीशे की तरह बिल्कुल साफ हो जाती है कि हमारे रोजमर्रा के आहार में शामिल रसायनों से धुली यह सफेद मिठास हमारे शरीर को अंदर से खोखला करने का भयंकर काम कर रही है। यह सिर्फ हमारी जीभ को कुछ पल का लालच और मजा देती है, लेकिन इसके बदले में हमें आजीवन रहने वाली गंभीर बीमारियों के दलदल में धकेल देती है। इसके बिल्कुल विपरीत, प्रकृति ने हमें गन्ने के रस के रूप में जो अनमोल मिठास दी थी, उसे अगर हम उसके बिना छेड़े गए पारंपरिक रूप में ही ग्रहण करें, तो वह शरीर के लिए एक महा औषधि बन जाती है।
सफेद मिठास की जगह इस पारंपरिक मिठास को अपनाना कोई कुछ दिनों का शौक नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे जीवन को बदलने वाला एक बड़ा फैसला है। आज से ही अपनी रसोई से उस खतरनाक मिठास के डिब्बे को बाहर सड़क पर फेंक दें और एक शुद्ध, गहरे रंग की मिठास को उसकी जगह सम्मान के साथ रखें। आपका पेट, आपकी त्वचा और आपका पूरा शरीर इस एक छोटे से लेकिन महान बदलाव के लिए आपको जिंदगी भर दुआएं देगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भयंकर गर्मी के मौसम में भी इसका रोज सेवन किया जा सकता है?
हां, इसका सेवन पूरे साल किया जा सकता है। हालांकि इसकी प्रकृति अंदर से काफी गर्म होती है, लेकिन गर्मियों में इसे खाने का तरीका थोड़ा सा बदल लेना चाहिए। भयंकर गर्मी के दिनों में इसे सीधा चबाकर खाने की बजाय, इसे एक बड़े बर्तन में ठंडे पानी के साथ घोलकर और उसमें थोड़ा सा पुदीना मिलाकर एक स्वादिष्ट पेय के रूप में पिएं। ऐसा करने से यह शरीर के अंदर बिल्कुल भी अतिरिक्त गर्मी पैदा नहीं करता है और आपको इसके सारे चमत्कारी फायदे आसानी से मिल जाते हैं।
क्या बहुत छोटे बच्चों को कृत्रिम मिठास की जगह यह देना पूरी तरह सुरक्षित है?
चिकित्सा जगत के जानकारों की बिल्कुल साफ सलाह है कि जो बच्चे एक साल से छोटे हैं, उन्हें किसी भी तरह की बाहरी मिठास बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए क्योंकि उनके शरीर के अंदरूनी अंग अभी बहुत नाजुक होते हैं और पूरी तरह से बन रहे होते हैं। लेकिन जैसे ही बच्चा एक साल की उम्र पार कर लेता है, आप उसे बहुत ही सीमित मात्रा में यह प्राकृतिक मिठास देना शुरू कर सकते हैं। यह उनके शरीर की हड्डियों को फौलाद जैसा मजबूत बनाने और उन्हें बार~बार बीमार पड़ने से बचाने के लिए बहुत ही शानदार काम करता है।
क्या शरीर का वजन घटाने के लिए यह शहद से ज्यादा असरदार और बेहतर विकल्प है?
इन दोनों प्राकृतिक चीजों के अपने अलग~अलग और शानदार फायदे हैं। शहद के अंदर रोगों से लड़ने की अद्भुत ताकत होती है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि इसे उबलते हुए गर्म पानी में डालते ही इसके सारे अच्छे तत्व तुरंत नष्ट हो जाते हैं और यह विष बन जाता है। दूसरी तरफ इस मिठास को आप उबलते हुए पानी में बहुत ही आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। शरीर की फालतू चर्बी को गलाने के लिए सुबह~सुबह हल्के गर्म पानी में नींबू के साथ इसका सेवन करना बहुत ही ज्यादा आसान, सुरक्षित और हमारी जेब के लिए बहुत सस्ता विकल्प है।
घर पर इसे लंबे समय तक कीड़ों और नमी से बचाकर कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?
अगर आपके द्वारा खरीदी गई मिठास पूरी तरह से शुद्ध है और उसमें पानी का अंश बिल्कुल नहीं है, तो इसे हवा बंद रहने वाले एक साफ डिब्बे में डालकर नमी से बिल्कुल दूर रखना चाहिए। इस तरीके से इसे पूरे एक साल तक बहुत ही आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है। पुरानी चिकित्सा पद्धति का यह पक्का मानना है कि यह चीज जितनी ज्यादा पुरानी होती जाती है, शरीर के लिए यह उतनी ही ज्यादा गुणकारी और महा~औषधि बनती जाती है। बरसात के चिपचिपे मौसम में इसे खराब होने से बचाने के लिए आप इसे ठंडी जगह पर भी सुरक्षित रख सकते हैं।
