भारत में सावधि जमा ब्याज पर कर कैसे बचाएं?
हम भारतीय लोगों को सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट से एक खास लगाव हमेशा से रहा है। शेयर बाजार कितना भी ऊपर या नीचे हो जाए, लेकिन जब बात खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को पूरी तरह से सुरक्षित रखने की आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम इसी का आता है। आपको भी यही लगता होगा कि अगर पैसा बैंक में रखा है तो वह एकदम सुरक्षित है और उस पर पहले से तय किया गया ब्याज तो हर हाल में मिलेगा ही। आपकी यह बात काफी हद तक सही भी है और इसमें कोई शक नहीं है।
लेकिन इस पूरी कहानी में एक छोटा सा पेंच है और वह पेंच है सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर का। जब आपकी जमा राशि की अवधि पूरी होती है या जब हर साल ब्याज आपके खाते में जुड़ता है, तो बैंक अपनी तरफ से एक छोटा सा हिस्सा काट लेता है जिसे हम स्रोत पर कर कटौती या टीडीएस कहते हैं। कई बार तो हमें इस बात की भनक तक नहीं लगती कि हमारी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा कर के रूप में कटकर चला गया है। अगर आप भी इस बात से काफी परेशान रहते हैं और हमेशा यही सोचते हैं कि एफडी पर कर कैसे बचाएं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आज हम उन किताबी और उलझी हुई बातों से दूर हटकर, एकदम सीधे, सरल और व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से बात करेंगे जो सच में आम आदमी के काम आते हैं। इसमें कोई भी ऐसा तरीका शामिल नहीं होगा जो गैर-कानूनी हो या जिससे आपको भविष्य में कोई परेशानी हो। हम सिर्फ समझदारी भरे निवेश और कर नियोजन की बात करेंगे ताकि आपकी मेहनत की कमाई का पूरा फायदा सिर्फ और सिर्फ आपको ही मिल सके।
सावधि जमा पर कर के नियम क्या हैं?
इससे पहले कि हम कर बचाने के अलग-अलग तरीकों पर विस्तार से चर्चा करें, हमारे लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि सरकार के नियम इस बारे में क्या कहते हैं। तभी तो हम सही तरीके से आगे की योजना बना पाएंगे और अपना पैसा बचा पाएंगे। आपको अपनी सावधि जमा पर जो भी ब्याज मिलता है, वह पूरी तरह से कर के दायरे में आता है और उस पर कर चुकाना आपकी जिम्मेदारी होती है। आयकर विभाग की भाषा में इस कमाई को अन्य स्रोतों से होने वाली आय कहा जाता है और इसे आपकी कुल कमाई में जोड़ दिया जाता है। बैंक अपनी मर्जी से आपका कोई भी पैसा नहीं काटते हैं, बल्कि उन्हें सरकार की तरफ से ऐसा करने के सख्त निर्देश मिले हुए हैं। आयकर विभाग के नियमों के तहत बैंकों को यह साफ तौर पर कहा गया है कि अगर किसी भी ग्राहक को एक साल के भीतर एक तय सीमा से अधिक ब्याज मिलता है, तो बैंक को उस ब्याज पर टीडीएस काटना ही होगा।
अगर आपकी उम्र साठ साल से कम है और आपको किसी एक बैंक से एक वित्तीय वर्ष में चालीस हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज मिल रहा है, तो बैंक उस पर दस प्रतिशत की दर से कर काटेगा। वहीं अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं यानी आपकी उम्र साठ साल या उससे अधिक हो चुकी है, तो आपके लिए यह छूट की सीमा पचास हजार रुपये तय की गई है। मतलब यह है कि पचास हजार रुपये तक के ब्याज पर आपका कोई भी कर नहीं कटेगा। अगर आपने बैंक में अपना स्थायी खाता संख्या यानी पैन कार्ड जमा नहीं किया है, तो बैंक दस प्रतिशत की जगह सीधा बीस प्रतिशत की दर से कर काट लेगा, इसलिए अपने सभी दस्तावेज पूरे रखना सबसे पहला और जरूरी कदम है।
| करदाता की श्रेणी | उम्र सीमा | कर मुक्त ब्याज की सीमा (सालाना) | दस्तावेज देने पर कर की दर | दस्तावेज न देने पर कर की दर |
| आम नागरिक | साठ साल से कम | चालीस हजार रुपये | दस प्रतिशत | बीस प्रतिशत |
| वरिष्ठ नागरिक | साठ साल या अधिक | पचास हजार रुपये | दस प्रतिशत | बीस प्रतिशत |
कर बचाने के सात असरदार और कानूनी तरीके
सही समय पर फॉर्म पंद्रह जी और पंद्रह एच जमा करें
यह कर बचाने का सबसे पुराना, सबसे लोकप्रिय और सबसे असरदार तरीका माना जाता है जिसका इस्तेमाल लाखों लोग करते हैं। अगर आपकी कुल सालाना कमाई आयकर छूट की मूल सीमा से कम है, तो आप बैंक को यह विशेष फॉर्म देकर अपना पैसा कटने से पूरी तरह रोक सकते हैं। पंद्रह जी नाम का फॉर्म उन सभी आम नागरिकों के लिए बनाया गया है जिनकी उम्र साठ साल से कम है। अगर आपकी कुल सालाना आय सरकार द्वारा तय की गई कर छूट की सीमा से कम है, तो आप हर साल अप्रैल के महीने में ही अपने बैंक की शाखा में जाकर इसे जमा कर दें। आप चाहें तो इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके घर बैठे भी इसे आसानी से भर सकते हैं, जिसके बाद बैंक आपका एक भी पैसा नहीं काटेगा।
वहीं दूसरी तरफ, पंद्रह एच नाम का फॉर्म हमारे घर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए होता है। अगर आपकी उम्र साठ का आंकड़ा पार कर चुकी है और आपकी अनुमानित कर देनदारी शून्य होने वाली है, तो आप यह फॉर्म बेझिझक जमा कर सकते हैं। बस एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि ये फॉर्म आपको हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यानी अप्रैल में ही जमा करने होते हैं ताकि बैंक शुरुआत से ही आपका पैसा न काटे। अगर आप इसे समय पर जमा करना भूल गए और बैंक ने अपना हिस्सा काट लिया, तो फिर आपको पैसा वापस पाने के लिए लंबा इंतजार करना होगा।
| फॉर्म का नाम | किसके लिए है | आयु सीमा | मुख्य उद्देश्य | जमा करने का सही समय |
| फॉर्म पंद्रह जी | आम नागरिक | साठ वर्ष से कम | कर कटौती रोकना | अप्रैल का महीना |
| फॉर्म पंद्रह एच | वरिष्ठ नागरिक | साठ वर्ष या अधिक | कर कटौती रोकना | अप्रैल का महीना |
कर बचाने वाली सावधि जमा में निवेश करें
अगर आप आयकर के दायरे में आते हैं और आपको सिर्फ स्रोत पर कटने वाले कर से नहीं, बल्कि अपनी कुल आय पर लगने वाले कर से भी बचना है, तो यह विशेष योजना आपके बहुत काम आ सकती है। आयकर अधिनियम की धारा अस्सी सी के तहत आप इस विशेष सावधि जमा में एक साल के भीतर डेढ़ लाख रुपये तक का सुरक्षित निवेश कर सकते हैं। आपके द्वारा किए गए इस निवेश पर आपको सरकार की तरफ से कर में सीधी छूट मिल जाती है जो एक बहुत बड़ा फायदा है। हालांकि, इस योजना में निवेश करने से पहले दो बहुत ही जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए ताकि बाद में कोई परेशानी न हो।
पहली बात यह है कि इस योजना में पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है, जिसका सीधा सा मतलब यह है कि आप पांच साल से पहले अपना पैसा किसी भी हालत में बाहर नहीं निकाल सकते। दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जमा राशि पर आपको जो भी ब्याज मिलेगा, वह पूरी तरह से कर के दायरे में आएगा। सरकार आपको सिर्फ आपके द्वारा जमा किए गए मूलधन पर ही कर की छूट देती है, ब्याज पर आपको अपने स्लैब के अनुसार कर चुकाना ही पड़ता है। इसके अलावा, यह फायदा सिर्फ उन लोगों को मिलता है जो पुरानी कर व्यवस्था का चुनाव करते हैं, नई व्यवस्था में यह छूट पूरी तरह से खत्म कर दी गई है।
| योजना का प्रकार | लॉक-इन अवधि | अधिकतम कर छूट की सीमा | ब्याज पर कर की स्थिति | किस व्यवस्था में फायदेमंद |
| कर बचत जमा | पांच वर्ष | डेढ़ लाख रुपये सालाना | पूरी तरह से कर योग्य | पुरानी कर व्यवस्था |
| सामान्य जमा | कुछ नहीं | कोई छूट नहीं मिलती | पूरी तरह से कर योग्य | कोई विशेष फायदा नहीं |
परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर निवेश बांटें

यह अपनी मेहनत की कमाई को बचाने का एक बहुत ही समझदारी भरा और पूरी तरह से कानूनी तरीका है जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए। मान लीजिए कि आपकी कमाई बहुत अच्छी है और आप कर के सबसे ऊंचे स्लैब यानी तीस प्रतिशत वाले दायरे में आते हैं। अगर ऐसी स्थिति में आप अपने नाम पर बड़ी जमा राशि रखेंगे, तो आपको उस पर मिलने वाले ब्याज पर बहुत भारी कर सरकार को चुकाना पड़ेगा। इस भारी नुकसान से बचने के लिए आप अपने माता-पिता के नाम पर पैसा जमा करवा सकते हैं, खासकर अगर वे वरिष्ठ नागरिक हैं और उनकी अपनी कोई खास आय नहीं है।
ऐसा करने से आपको एक साथ दो बड़े फायदे होंगे जो आपके पैसे को तेजी से बढ़ाएंगे। पहला फायदा तो यह होगा कि वरिष्ठ नागरिक होने के नाते उन्हें आम लोगों की तुलना में बैंक से ज्यादा ब्याज मिलेगा जिससे आपका मुनाफा बढ़ेगा। दूसरा और सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उनके लिए पचास हजार रुपये तक के ब्याज पर कोई भी कर नहीं कटेगा और वे आसानी से फॉर्म भरकर बाकी कर भी बचा लेंगे। पति या पत्नी के नाम पर पैसे जमा करते समय आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए क्योंकि ऐसे में आपकी आय एक साथ जोड़ दी जाती है, इसलिए माता-पिता के नाम पर निवेश करना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
| निवेश का तरीका | कर का स्लैब | ब्याज दर का लाभ | कर में छूट का फायदा | सुरक्षा का स्तर |
| अपने नाम पर निवेश | बहुत ऊंचा | सामान्य दर मिलती है | कोई खास छूट नहीं | बहुत कम मुनाफा |
| माता-पिता के नाम पर | बहुत कम या शून्य | वरिष्ठ नागरिक दर (अधिक) | पचास हजार तक कोई कटौती नहीं | सबसे सुरक्षित और फायदेमंद |
कई बार हम बिना सोचे-समझे और बिना किसी योजना के साल के किसी भी महीने में लंबी अवधि के लिए अपना पैसा बैंक में जमा कर देते हैं। अगर आप अपनी जमा राशि का समय इस तरह से तय करें कि उस पर मिलने वाला ब्याज दो अलग-अलग वित्तीय वर्षों में बराबर बंट जाए, तो आप बड़ी आसानी से कर की मार से बच सकते हैं। इसे एक बहुत ही आसान उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं ताकि आपके सारे भ्रम दूर हो सकें। मान लीजिए कि आप एक साल के लिए पैसा जमा कर रहे हैं जिस पर आपको कुल मिलाकर साठ हजार रुपये का ब्याज मिलने वाला है।
अगर आप यह निवेश अप्रैल के महीने में करते हैं, तो आपका पूरा साठ हजार रुपये का ब्याज उसी एक साल के भीतर गिना जाएगा। सीमा पार होने की वजह से बैंक तुरंत आपका पैसा काट लेगा क्योंकि नियम चालीस हजार रुपये तक की ही छूट देते हैं। लेकिन अगर आप यही निवेश थोड़ा रुककर अक्टूबर के महीने में करते हैं, तो आधा ब्याज इस वित्तीय वर्ष में गिना जाएगा और बाकी आधा हिस्सा अगले वित्तीय वर्ष में चला जाएगा। इस शानदार तरीके से दोनों सालों में आपका ब्याज तय सीमा से नीचे ही रहेगा और आपका एक भी रुपया कर के रूप में नहीं कटेगा।
| निवेश का महीना | ब्याज का बंटवारा | कुल ब्याज (उदाहरण) | कर कटने की संभावना | योजना का नतीजा |
| अप्रैल माह में | एक ही वर्ष में पूरा | साठ हजार रुपये | पूरी संभावना है | नुकसानदायक |
| अक्टूबर माह में | दो वर्षों में आधा-आधा | तीस-तीस हजार रुपये | बिल्कुल नहीं कटेगा | बेहद फायदेमंद |
हिंदू अविभाजित परिवार खाते का पूरा लाभ उठाएं
अगर आप शादीशुदा हैं और हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध धर्म से ताल्लुक रखते हैं, तो आपके पास कर बचाने का एक और शानदार हथियार मौजूद है। आप अपना एक हिंदू अविभाजित परिवार नाम से अलग खाता खोल सकते हैं जिसे सरकार भी पूरी तरह से मान्यता देती है। आयकर विभाग की नजरों में एक आम व्यक्ति और उसका यह पारिवारिक खाता, दोनों को बिल्कुल अलग-अलग करदाता माना जाता है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि इस पारिवारिक खाते को भी आम आदमी की तरह ही आयकर की मूल छूट का फायदा अलग से दिया जाता है।
आप अपनी पारिवारिक बचत के पैसे को अपने निजी खाते में रखने की बजाय इस नए पारिवारिक खाते में डालकर वहां सावधि जमा करवा सकते हैं। ऐसा करने से आपकी अपनी व्यक्तिगत आय नहीं बढ़ेगी और आप कर के ऊंचे स्लैब में जाने से पूरी तरह से बच जाएंगे। आप पूरी तरह से कानूनी दायरे में रहकर एक अलग पहचान का फायदा उठाकर अपना हजारों रुपये का कर आसानी से बचा लेंगे। हालांकि, इसके लिए आपको कुछ कानूनी कागजी कार्रवाई करनी पड़ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में होने वाले फायदे को देखते हुए यह थोड़ी सी मेहनत बहुत काम आती है।
| खाते का प्रकार | करदाता की पहचान | मूल कर छूट का लाभ | निवेश पर असर | लंबी अवधि का फायदा |
| व्यक्तिगत खाता | एक अकेला व्यक्ति | सिर्फ एक बार मिलती है | आय जुड़ने से कर बढ़ता है | सीमित फायदा |
| पारिवारिक खाता | एक अलग और नई पहचान | पूरी तरह से अलग से मिलती है | व्यक्तिगत आय पर असर नहीं | बहुत ज्यादा कर बचत |
डाकघर की बेहतरीन योजनाओं की तरफ रुख करें
अगर आप बैंकों के हर रोज बदलते नियमों और कर कटने के लगातार झंझटों से पूरी तरह से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो डाकघर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। डाकघर में मौजूद समय जमा योजना काफी हद तक बैंक की सावधि जमा जैसी ही होती है और इसमें भी आपको तय समय के लिए पैसा रखना होता है। इन योजनाओं की सबसे अच्छी और खास बात यह है कि डाकघर ज्यादातर मामलों में आपके ब्याज पर स्रोत से कर कटौती बिल्कुल भी नहीं करता है। इसके अलावा, अगर आप पांच साल की अवधि के लिए डाकघर में अपना पैसा जमा करते हैं, तो आपको आयकर अधिनियम के तहत कर छूट का पूरा फायदा भी मिलता है।
यहां मिलने वाली ब्याज दरें भी अक्सर कई बड़े और जाने-माने निजी बैंकों की तुलना में थोड़ी बेहतर या कम से कम उनके बराबर तो होती ही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि डाकघर में रखा आपका एक-एक पैसा भारत सरकार की पूरी गारंटी के साथ सुरक्षित रहता है, इसलिए आपको किसी भी तरह के डूबने का डर नहीं सताता। अगर आप बिना किसी चिंता के शांति से अपना पैसा बढ़ाना चाहते हैं, तो एक बार अपने आस-पास के डाकघर में जाकर वहां की योजनाओं के बारे में जरूर पता करें।
| संस्थान का नाम | कर कटौती की नीति | ब्याज दर की स्थिति | सुरक्षा की गारंटी | कर छूट का प्रावधान |
| व्यावसायिक बैंक | नियमों के अनुसार तुरंत कटौती | अक्सर बदलती रहती है | एक सीमा तक ही सुरक्षित | पांच साल की जमा पर |
| सरकारी डाकघर | आमतौर पर कोई कटौती नहीं | अक्सर बैंकों से बेहतर | भारत सरकार की पूरी गारंटी | पांच साल की जमा पर |
कटे हुए पैसे को वापस पाने के लिए रिटर्न जरूर भरें
कई बार इंसान होने के नाते हम अपने रोजमर्रा के कामों में इतने उलझ जाते हैं कि समय पर फॉर्म जमा करना भूल जाते हैं और बैंक हमारा पैसा काट लेता है। ऐसे में आपको बिल्कुल भी घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपका वह कटा हुआ पैसा कहीं गायब नहीं हुआ है। बैंक जो भी पैसा कर के रूप में काटता है, वह सारा का सारा पैसा सीधे सरकार के खजाने में आपके नाम और स्थायी खाता संख्या के साथ सुरक्षित रूप से जमा हो जाता है। जब आप साल के अंत में अपना पूरा हिसाब-किताब करते हैं और अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, तो स्थिति पूरी तरह से साफ हो जाती है।
अगर उस समय आपकी कुल सालाना आय सरकार द्वारा तय की गई कर छूट की सीमा के भीतर ही रहती है, तो आप उस कटे हुए पैसे को वापस मांगने का पूरा हक रखते हैं। आयकर विभाग आपके द्वारा दी गई जानकारी की अच्छी तरह से जांच करता है और सब कुछ सही पाए जाने पर कुछ ही हफ्तों के भीतर वह पूरा पैसा आपके बैंक खाते में वापस भेज देता है। कई बार तो सरकार इस वापस किए जाने वाले पैसे पर अपनी तरफ से थोड़ा ब्याज भी जोड़कर देती है, इसलिए अपना रिटर्न हमेशा समय पर और सही तरीके से भरना चाहिए।
| स्थिति | बैंक की कार्रवाई | आपका अगला कदम | सरकार का काम | परिणाम |
| फॉर्म न भरना | तुरंत कर काट लिया जाता है | समय पर रिटर्न दाखिल करना | जानकारी की जांच करना | पैसा खाते में वापस आना |
| फॉर्म जमा करना | कोई कटौती नहीं होती | रिटर्न में सही जानकारी देना | कोई अतिरिक्त जांच नहीं | पूरा पैसा आपके पास सुरक्षित |
क्या अलग-अलग बैंकों में पैसा रखने से कर बचता है?
हमारे देश में एक बहुत बड़ी गलतफहमी सालों से लोगों के बीच घर कर गई है कि अगर हम अपनी जमा राशि को अलग-अलग बैंकों में बांटकर रखेंगे तो हम कर देने से बच जाएंगे। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि एक बैंक में चालीस हजार रुपये का ब्याज ले लो और दूसरे बैंक में भी चालीस हजार रुपये का ब्याज ले लो, तो कुल अस्सी हजार रुपये तक कोई पैसा नहीं कटेगा। यह बात पहले के पुराने जमाने में कुछ हद तक सच हुआ करती थी जब सारा काम कागजों पर होता था, लेकिन आज के इस पूरी तरह से डिजिटल युग में यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। अब आपका स्थायी खाता संख्या आपके हर एक बैंक खाते से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ है और देश के सभी बैंक एक ही मुख्य प्रणाली पर काम करते हैं।
भले ही अलग-अलग बैंक अपनी सीमा देखते हैं और तुरंत आपका पैसा नहीं काटते, लेकिन आपके हर एक लेनदेन का सारा डाटा आयकर विभाग के पास तुरंत पहुंच जाता है। जब साल के अंत में आपका पूरा सालाना वित्तीय विवरण तैयार होता है, तो सरकार के अत्याधुनिक सिस्टम को पलक झपकते ही पता चल जाता है कि आपने अलग-अलग जगहों से कुल मिलाकर कितना मुनाफा कमाया है। फिर जब आप अपना हिसाब-किताब जमा करेंगे, तो आपको उस पूरे मुनाफे पर अपने स्लैब के हिसाब से पूरा का पूरा कर चुकाना ही पड़ेगा, वरना आपको सरकार की तरफ से कानूनी नोटिस भी आ सकता है।
| पुरानी व्यवस्था के नियम | नई और डिजिटल व्यवस्था के नियम | कर बचने की संभावना | प्रणाली का तरीका | अंतिम परिणाम |
| बैंक आपस में जानकारी नहीं बांटते थे | सभी बैंक एक ही प्रणाली से जुड़े हैं | पहले कर बचाना बहुत आसान था | सिर्फ कागजी कार्रवाई होती थी | कोई पकड़ में नहीं आता था |
| जानकारी तुरंत सरकार तक पहुंचती है | पूरी जानकारी एक जगह जमा होती है | अब कर बचाना बिल्कुल नामुमकिन है | पूरी तरह से आधुनिक और तेज | पूरा कर चुकाना ही पड़ता है |
नई और पुरानी कर व्यवस्था का आपके निवेश पर असर
आजकल अपना सालाना हिसाब-किताब सरकार को देने के दो अलग-अलग तरीके मौजूद हैं, जिनमें से एक को नई व्यवस्था और दूसरे को पुरानी व्यवस्था कहा जाता है। जब आप अपनी मेहनत की कमाई को लंबी अवधि के लिए जमा करते हैं, तो आपको यह समझना बहुत ही ज्यादा जरूरी है कि आपने इन दोनों में से कौन सा तरीका चुना है। अगर आप सरकार की पुरानी व्यवस्था को चुनते हैं, तो आपको पांच साल वाली विशेष योजना पर डेढ़ लाख रुपये तक की भारी छूट का सीधा फायदा मिलेगा। यह तरीका उन सभी लोगों के लिए बहुत ही ज्यादा अच्छा माना जाता है जो अपना पैसा बचाने के लिए हर साल लगातार निवेश करना पसंद करते हैं।
लेकिन अगर आप सरकार द्वारा लाई गई नई व्यवस्था को चुनते हैं, तो आपको इस तरह की किसी भी पुरानी छूट का कोई भी फायदा नहीं मिलने वाला है। नई व्यवस्था में सरकार ने स्लैब को थोड़ा चौड़ा और सस्ता जरूर कर दिया है, लेकिन निवेश पर मिलने वाली लगभग सभी पुरानी कटौतियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसलिए अगर आप इस नई व्यवस्था का पालन कर रहे हैं, तो पांच साल वाली विशेष योजना में अपना पैसा लंबे समय तक फंसाने का कोई खास मतलब नहीं रह जाता है क्योंकि इसमें आपको कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा।
| व्यवस्था का नाम | कर छूट का फायदा | निवेश की उपयोगिता | मुनाफे पर कर का नियम | किसके लिए बेहतर है |
| पुरानी व्यवस्था | डेढ़ लाख तक की पूरी छूट | बहुत ही ज्यादा फायदेमंद | आपके स्लैब के अनुसार लगेगा | ज्यादा निवेश करने वालों के लिए |
| नई व्यवस्था | कोई भी छूट नहीं मिलती | कोई अतिरिक्त फायदा नहीं | आपके स्लैब के अनुसार लगेगा | कम निवेश करने वालों के लिए |
इस विषय से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जब भी बात पैसों की बचत और सरकार को दिए जाने वाले कर की आती है, तो आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठना बहुत ही स्वाभाविक सी बात है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या उनकी जमा राशि पर मिलने वाला मुनाफा पूरी तरह से कर मुक्त हो सकता है। इसका सीधा सा जवाब यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं होता, मुनाफा हमेशा कर के दायरे में आता है जब तक कि आपकी कुल आय सीमा से कम न हो। एक और बहुत बड़ा भ्रम यह है कि पांच साल वाली योजना का मुनाफा भी कर मुक्त होता है, जबकि सच्चाई यह है कि सिर्फ जमा किए गए मूलधन पर ही छूट मिलती है। अगर आप अपना स्थायी खाता संख्या बैंक में जमा नहीं करते हैं, तो बैंक सामान्य दर की बजाय दोगुनी दर से आपका पैसा काट लेता है जिससे आपको बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
इसके अलावा, लोगों को फॉर्म पंद्रह जी और पंद्रह एच के बीच का अंतर भी साफ तौर पर पता होना चाहिए ताकि वे सही समय पर सही फॉर्म भर सकें। पंद्रह जी फॉर्म साठ साल से कम उम्र के लोगों के लिए होता है, जबकि पंद्रह एच फॉर्म साठ साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रूप से बनाया गया है। इन छोटी-छोटी लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर आप अपनी कमाई को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित रख सकते हैं और उसे लगातार बढ़ा सकते हैं।
| सवाल का मुख्य विषय | आम लोगों का भ्रम | असली सच्चाई और नियम | नुकसान से बचने का तरीका | फायदे की बात |
| मुनाफे पर कर | मुनाफा पूरी तरह कर मुक्त है | यह हमेशा कर के दायरे में आता है | कुल आय कम रखें | पूरी जानकारी होना |
| पांच साल की योजना | इसका मुनाफा भी कर मुक्त है | सिर्फ मूलधन पर ही छूट मिलती है | योजना को ध्यान से समझें | सही योजना चुनना |
| दस्तावेज न देना | बैंक कुछ नहीं करेगा | दोगुनी दर से पैसा कटेगा | समय पर दस्तावेज जमा करें | पैसा सुरक्षित रहेगा |
| अलग-अलग फॉर्म | दोनों फॉर्म एक जैसे ही हैं | उम्र के हिसाब से दोनों अलग हैं | अपनी उम्र के अनुसार फॉर्म चुनें | समय की बचत |
अंतिम विचार
सावधि जमा दशकों से हमारे देश में निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका रहा है और इसे हर किसी के पास होना ही चाहिए। जब भी परिवार पर कोई अचानक मुसीबत आती है या तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है, तो सबसे पहले यही जमा किया हुआ पैसा हमारे काम आता है। लेकिन सिर्फ आंख बंद करके पैसा जमा कर देने और फिर उसे भूल जाने से आज के समय में काम बिल्कुल भी नहीं चलता है। अगर आप थोड़ी सी समझदारी दिखाएं और यह अच्छी तरह से जान लें कि एफडी पर कर कैसे बचाएं, तो आप अपने मुनाफे को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं।
सही फॉर्म का सही समय पर इस्तेमाल करना, परिवार के बुजुर्गों के नाम पर निवेश को बांटना और अपनी जमा राशि की टाइमिंग को समझदारी से सेट करना बहुत जरूरी है। ये कुछ ऐसे छोटे लेकिन बहुत ही असरदार कदम हैं जो हर एक जागरूक नागरिक को अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूर उठाने चाहिए। कर की योजना हमेशा साल की शुरुआत में ही कर लेनी चाहिए ताकि बाद में आपको किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े और आप चैन की नींद सो सकें।
