12 स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड स्वैप जिनका स्वाद उतना ही अच्छा है
भारत में स्ट्रीट फूड से बचना लगभग नामुमकिन है। चाहे आप कॉलेज से घर जा रहे हों या ऑफिस से निकलकर दोस्तों के साथ खड़े हों, चाट-पकौड़े की खुशबू आपको अपनी तरफ खींच ही लेती है। लेकिन उस दो मिनट के स्वाद के बाद जो गिल्ट महसूस होता है, वो हम सबको पता है। अक्सर हमें लगता है कि अगर हेल्दी रहना है तो बाहर का खाना पूरी तरह बंद करना पड़ेगा।
लेकिन सच यह है कि फिटनेस एक सजा नहीं होनी चाहिए। अगर आप सही जानकारी रखें, तो आप बाहर का खाना खाकर भी अपनी सेहत को बिगड़ने से बचा सकते हैं। आपको बस यह पता होना चाहिए कि मेनू में से क्या चुनना है और क्या छोड़ना है।
इस आर्टिकल में हम आपको 12 ऐसे बेहतरीन फूड स्वाप्स (Swaps) बताएंगे जो न केवल आपकी क्रेविंग को शांत करेंगे बल्कि आपके फिटनेस गोल्स को भी पटरी पर रखेंगे। यह गाइड उन लोगों के लिए है जो खाने के शौकीन हैं लेकिन अपनी हेल्थ के साथ समझौता नहीं करना चाहते। चलिए जानते हैं कि कैसे थोड़ी सी समझदारी से आप स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड का आनंद ले सकते हैं।
स्ट्रीट फूड अनहेल्दी क्यों होता है?
हम अक्सर सुनते हैं कि बाहर का खाना सेहत के लिए खराब है, लेकिन क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि ऐसा क्यों है? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण होते हैं जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है रिफाइंड तेल का बार-बार इस्तेमाल होना। जब तेल को बार-बार उबाला जाता है, तो उसमें फ्री रेडिकल्स और ट्रांस-फैट्स बन जाते हैं, जो दिल की बीमारियों और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का मुख्य कारण हैं। दूसरी समस्या है मैदे की अधिकता। ज्यादातर स्ट्रीट फूड आइटम्स जैसे भटूरे, समोसे, या मोमोज मैदे से बनते हैं, जिसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता। यह आंतों में चिपकता है और ब्लड शुगर लेवल को एकदम से बढ़ा देता है।
तीसरा कारण है साफ-सफाई और छिपी हुई कैलोरीज। बाहर मिलने वाली चटनियों और सॉस में चीनी और नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिसका हमें खाते वक्त अंदाजा नहीं लगता। इसके अलावा, कई बार इस्तेमाल होने वाला पानी दूषित हो सकता है, जिससे पेट का इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि हर स्ट्रीट फूड आइटम ऐसा नहीं होता। भारतीय व्यंजनों में कई ऐसे पारंपरिक विकल्प मौजूद हैं जो न केवल पचने में आसान हैं बल्कि पोषण से भी भरपूर हैं। हमें बस उन विकल्पों को पहचानने की जरूरत है।
12 बेस्ट हेल्दी स्ट्रीट फूड स्वाप्स
1. समोसा की जगह → चना चाट
समोसा भारत का सबसे पसंदीदा स्नैक है, लेकिन सेहत के नजरिए से यह काफी भारी पड़ता है। एक समोसे में लगभग 250 से 300 कैलोरी होती है क्योंकि इसकी बाहरी परत मैदे की होती है जो डीप फ्राई करने पर बहुत सारा तेल सोख लेती है। इसके अंदर का आलू भी सिर्फ कार्बोहाइड्रेट है। जब आप इसे खाते हैं, तो आपको थोड़ी देर के लिए एनर्जी मिलती है लेकिन जल्द ही आलस आने लगता है।
इसके मुकाबले चना चाट एक शानदार विकल्प है। इसमें उबले हुए काले चने या काबुली चने का इस्तेमाल होता है, जो प्रोटीन और फाइबर का खजाना हैं। इसमें डाला गया कच्चा प्याज, टमाटर, खीरा और नींबू इसे विटामिन्स से भरपूर बना देता है। यह पचने में समय लेता है, जिससे आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती और आप अगले मील में भी कम खाना खाते हैं। यह उन लोगों के लिए बेस्ट स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड है जो वजन कम करना चाहते हैं।
| विशेषता | समोसा (1 पीस) | चना चाट (1 कटोरी) |
| बनाने का तरीका | तेल में डीप फ्राई किया हुआ | उबला हुआ और ताज़ा मिक्स |
| मुख्य पोषक तत्व | उच्च कार्ब्स और फैट | उच्च प्रोटीन और फाइबर |
| पाचन | भारी, आलस पैदा करता है | हल्का, मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है |
| कैलोरी की मात्रा | लगभग 300 kcal | लगभग 150 kcal |
2. फ्राइड आलू टिक्की की जगह → शकरकंदी चाट
आलू टिक्की चाट का स्वाद सबको लुभाता है, लेकिन इसे कुरकुरा बनाने के लिए डीप फ्राई किया जाता है। टिक्की बनाने में अक्सर कॉर्न फ्लोर या ब्रेड क्रम्ब्स का भी इस्तेमाल होता है, जो इसकी कैलोरी को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा, ऊपर से डाली जाने वाली मीठी चटनी इसे शुगर का बम बना देती है।
शकरकंदी (Sweet Potato) की चाट इसका एक स्मार्ट और टेस्टी विकल्प है। शकरकंदी एक सुपरफूड है जिसमें आलू के मुकाबले ज्यादा फाइबर और विटामिन ए होता है। इसे आमतौर पर भूना या उबाला जाता है, जिससे इसमें फैट की मात्रा न के बराबर होती है। शकरकंदी में कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं जो शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं। जब आप इस पर चाट मसाला और नींबू डालते हैं, तो यह स्वाद में किसी भी आलू टिक्की को पीछे छोड़ देती है।
| विशेषता | फ्राइड आलू टिक्की (2 पीस) | शकरकंदी चाट (1 प्लेट) |
| तेल की मात्रा | बहुत अधिक (तेल सोख लेती है) | शून्य या बहुत कम |
| ग्लाइसेमिक इंडेक्स | उच्च (इंसुलिन बढ़ाता है) | कम से मध्यम (स्थिर ऊर्जा) |
| मुख्य लाभ | केवल स्वाद | विटामिन-ए (इम्यूनिटी बढ़ाता है) |
| उपयोगिता | चीट मील के लिए | वर्कआउट से पहले की ऊर्जा के लिए |
3. पाव भाजी की जगह → मिसल पाव या इडली सांभर
पाव भाजी का नाम सुनते ही ढेर सारे बटर की याद आती है। भाजी में सब्जियों से ज्यादा बटर और मसाले होते हैं, और पाव मैदे से बना होता है जिसे फिर से बटर में सेंका जाता है। यह डिश सैचुरेटेड फैट से भरी होती है जो दिल की सेहत के लिए अच्छी नहीं है। इसे खाने के बाद अक्सर पेट में भारीपन महसूस होता है।
अगर आपको ग्रेवी के साथ कुछ खाना है, तो मिसल पाव एक बेहतर विकल्प है क्योंकि मिसल अंकुरित दालों (Sprouts) से बनता है, जो प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। हालांकि, सबसे सुरक्षित और हल्का विकल्प इडली-सांभर है। इडली भाप में पकती है इसलिए इसमें तेल नहीं होता। यह फर्मेंटेड होती है जो आपके पेट के अच्छे बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद है। सांभर में दाल और सब्जियां मिलकर इसे एक कम्पलीट मील बनाती हैं।
| विशेषता | पाव भाजी | इडली सांभर / मिसल |
| मुख्य सामग्री | मैदा पाव और मक्खन | चावल/दाल और सब्जियां |
| वसा (Fat) की मात्रा | बहुत अधिक (सैचुरेटेड फैट) | कम (दिल के लिए अच्छा) |
| पेट की सेहत | एसिडिटी पैदा कर सकता है | पाचन के लिए अच्छा (प्रोबायोटिक) |
| हेल्थ स्कोर | 2/10 | 9/10 |
4. फ्राइड मोमोज की जगह → स्टीम्ड वीट मोमोज
मोमोज आज के समय में हर गली-नुक्कड़ पर मिलते हैं। लेकिन फ्राइड मोमोज सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। इसकी मैदे की परत को जब डीप फ्राई किया जाता है, तो यह बहुत सख्त हो जाती है और पचने में बहुत मुश्किल होती है। इसके अलावा, सड़क किनारे मिलने वाले मोमोज की स्टफिंग की क्वालिटी भी अक्सर संदिग्ध होती है।
आप मोमोज खाना न छोड़ें, बस तरीका बदल दें। स्टीम्ड मोमोज चुनें, क्योंकि इसमें तेल का इस्तेमाल नहीं होता। अगर आपको ‘वीट मोमोज’ (आटे वाले मोमोज) मिल जाएं, तो यह और भी बेहतर है। स्टीम्ड चिकन या पनीर मोमोज प्रोटीन का अच्छा जरिया हो सकते हैं। यह पेट पर हल्के होते हैं और स्वाद में भी लाजवाब लगते हैं। बस ध्यान रखें कि साथ मिलने वाली तीखी लाल चटनी कम खाएं क्योंकि उसमें सोडियम बहुत ज्यादा होता है।
| विशेषता | फ्राइड मोमोज (6 पीस) | स्टीम्ड वीट मोमोज (6 पीस) |
| तैयारी | डीप फ्राई | भाप में पका हुआ (स्टीम्ड) |
| आटे का प्रकार | रिफाइंड मैदा | साबुत गेहूं (यदि उपलब्ध हो) |
| कैलोरी घनत्व | उच्च (High) | कम (Low) |
| बाद का प्रभाव | भारीपन और प्यास | हल्का और संतोषजनक |
5. पानी पुरी की जगह → आटे की पानी पुरी (घर के पानी के साथ)

पानी पुरी हम सबकी कमजोरी है। लेकिन बाजार में मिलने वाली सूजी की पुरी बहुत ज्यादा तेल सोखती है। उससे भी बड़ी समस्या है उसका पानी। ठेले वाले अक्सर पानी को ठंडा और खट्टा रखने के लिए बर्फ और केमिकल्स का इस्तेमाल करते हैं जो गले और पेट के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
इस क्रेविंग को मिटाने का सबसे हेल्दी तरीका है कि आप आटे की पुरी चुनें। आटा सूजी के मुकाबले कम तेल सोखता है। सबसे अच्छा होगा कि आप सूखी पुरियां खरीद लें और घर पर पुदीना, धनिया, अदरक और जीरा डालकर पानी बनाएं। घर का पानी न सिर्फ हाइजीनिक होता है बल्कि यह पाचन में भी मदद करता है। आलू की जगह उबले हुए मूंग का इस्तेमाल करें, इससे आपको प्रोटीन भी मिलेगा।
| विशेषता | बाज़ार की पानी पुरी (सूजी) | घर के पानी वाली आटे की पुरी |
| तेल सोखना | अधिक (छेददार बनावट के कारण) | कम (घनी बनावट के कारण) |
| स्वच्छता | जलजनित रोगों का खतरा | 100% सुरक्षित |
| स्टफिंग का पोषण | ज्यादातर आलू (कार्ब्स) | मूंग/चना (प्रोटीन) |
| फैसला | अक्सर खाने से बचें | बिना गिल्ट के मज़ा लें |
6. चाऊमीन की जगह → पोहा या उपमा
सड़क किनारे मिलने वाली चाऊमीन में नूडल्स पूरी तरह मैदे के होते हैं। इसमें स्वाद लाने के लिए अजीनोमोटो (MSG) और बहुत सारे अनहेल्दी सॉस डाले जाते हैं। इसमें सब्जियों की मात्रा बहुत कम होती है और तेल बहुत ज्यादा। यह डिश कैलोरी से भरी होती है लेकिन इसमें पोषण के नाम पर कुछ नहीं होता।
अगर आपको भूख लगी है, तो पोहा या उपमा एक शानदार स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड विकल्प है। पोहा चावल से बनता है और इसमें फैट बहुत कम होता है। इसमें मूंगफली, मटर, कड़ी पत्ता और राई का तड़का इसे बहुत पौष्टिक बना देता है। यह आयरन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा सोर्स है जो आपको तुरंत एनर्जी देता है। यह पचने में भी बहुत हल्का होता है।
| विशेषता | चाऊमीन | पोहा / उपमा |
| सामग्री | मैदा नूडल्स, MSG, सॉस | चावल के गुच्छे/सूजी, सब्जियां |
| मिलावट | कृत्रिम रंग और स्वाद | हल्दी जैसे प्राकृतिक मसाले |
| पाचन | पचाने में कठिन | पेट पर हल्का |
| उपयोगिता | खाली कैलोरी | पोषक तत्वों से भरपूर भोजन |
7. ब्रेड पकोड़ा की जगह → मूंग दाल चीला
बारिश के मौसम में ब्रेड पकोड़ा बहुत पसंद किया जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए सबसे खराब स्नैक्स में से एक है। ब्रेड स्पंज की तरह काम करती है और कड़ाही का ढेर सारा तेल सोख लेती है। इसके अंदर का आलू मसाला इसे और भी भारी बना देता है। एक ब्रेड पकोड़ा खाने से आपके पूरे दिन की कैलोरी लिमिट गड़बड़ा सकती है।
इसकी जगह मूंग दाल का चीला या ‘मूंगलेट’ चुनें। मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। चीला बनाने में बहुत कम तेल लगता है क्योंकि इसे तवे पर सेककर बनाया जाता है। इसमें आप पनीर, प्याज और शिमला मिर्च की स्टफिंग भी करवा सकते हैं। यह न सिर्फ टेस्टी लगता है बल्कि इसे खाने के बाद आपको घंटों तक भूख नहीं लगती, जो वेट लॉस में मदद करता है।
| विशेषता | ब्रेड पकोड़ा | मूंग दाल चीला |
| बनाने का तरीका | तेल में डूबा हुआ | कम तेल / तवे पर भुना हुआ |
| मैक्रो पोषक तत्व | उच्च फैट, उच्च कार्ब्स | उच्च प्रोटीन, फाइबर |
| तेल का उपयोग | बहुत भारी | न्यूनतम (नाममात्र) |
| तृप्ति (पेट भरना) | कम समय के लिए पेट भरता है | लंबे समय तक भूख नहीं लगती |
8. छोले भटूरे की जगह → मटर कुलचा
छोले भटूरे उत्तर भारत का एक बहुत भारी नाश्ता है। भटूरे का आटा खमीर उठाकर बनाया जाता है और फिर डीप फ्राई किया जाता है। यह मैदे और तेल का कॉम्बिनेशन है जो धमनियों को ब्लॉक कर सकता है। अक्सर छोले भी बहुत ज्यादा मसालेदार और ऑयली होते हैं जो एसिडिटी का कारण बनते हैं।
इसके मुकाबले मटर-कुलचा एक बहुत लाइट और हेल्दी ऑप्शन है। इसमें इस्तेमाल होने वाले सफेद मटर (Matar) उबाले जाते हैं और इसमें तेल बिल्कुल नहीं डाला जाता। इसमें सिर्फ नींबू, प्याज, टमाटर और सूखे मसाले डाले जाते हैं। कुलचा भी भटूरे की तरह तला नहीं जाता, बल्कि तवे पर सेंका जाता है। यह स्वाद में बहुत चटपटा होता है और इसमें कैलोरी भी भटूरे के मुकाबले आधी होती है।
| विशेषता | छोले भटूरे | मटर कुलचा |
| तेल की मात्रा | बहुत अधिक (भारी) | मटर में शून्य तेल |
| प्रोसेसिंग | तला हुआ खमीरी आटा | उबले हुए मटर और बेक किया ब्रेड |
| सेहत की समस्या | सीने में जलन और एसिडिटी | आमतौर पर कोई नहीं |
| उपयोगिता | कभी-कभार स्वाद के लिए | रोज़ाना लंच के लिए विकल्प |
9. बर्गर की जगह → काठी रोल या फ्रेंकी
इंडियन स्ट्रीट बर्गर में जो टिक्की इस्तेमाल होती है, वो डीप फ्राइड होती है। बन (Bun) मैदे का होता है और अक्सर इसमें सस्ती और अनहेल्दी मेयोनीज भरकर दी जाती है। यह जंक फूड का क्लासिक उदाहरण है जिसमें कैलोरी ज्यादा और पोषण कम होता है।
काठी रोल या फ्रेंकी को आप अपने हिसाब से कस्टमाइज करवा सकते हैं, जो इसे एक बेहतर विकल्प बनाता है। आप मैदे की जगह आटे की रोटी मांग सकते हैं। आलू की जगह पनीर, अंडा या चिकन की स्टफिंग चुनें। सबसे जरूरी बात, दुकानदार से कहें कि वो मेयोनीज और चीज़ न डाले। इसकी जगह दही, हरी चटनी या मस्टर्ड सॉस का इस्तेमाल करवाएं। इस तरह आपको एक टेस्टी और बैलेंस मील मिल जाता है।
| विशेषता | स्ट्रीट बर्गर | काठी रोल (कस्टमाइज्ड) |
| बेस | रिफाइंड मैदे का बन | रोटी (गेहूं का विकल्प उपलब्ध) |
| स्टफिंग | तली हुई आलू की टिक्की | पनीर/चिकन/अंडा |
| सॉस | मेयोनीज से भरपूर | चटनी आधारित |
| प्रोटीन | कम | अधिक |
10. पपड़ी चाट की जगह → स्प्राउट्स भेल या झालमुड़ी
पपड़ी चाट में कुरकुरापन लाने के लिए मैदे की पपड़ी का इस्तेमाल होता है। यह पपड़ी डीप फ्राइड होती है। इसके अलावा, इसमें जो लाल चटनी डलती है वो चीनी से भरी होती है। दही अगर फुल क्रीम दूध का हो, तो कैलोरी और बढ़ जाती है। यह स्वाद में अच्छी लगती है लेकिन डाइट के लिए सही नहीं है।
झालमुड़ी या स्प्राउट्स भेल एक बेहतरीन स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड है। झालमुड़ी में मुरमुरे (Puffed Rice) होते हैं जो हवा से भरे और बहुत हल्के होते हैं। इसमें चना, मूंगफली, खीरा, प्याज और टमाटर डलता है जो इसे क्रंची और फ्रेश बनाता है। इसमें तेल का इस्तेमाल न के बराबर होता है (सिर्फ थोड़ा सा सरसों का तेल खुशबू के लिए)। यह पेट भरने के लिए एक लो-कैलोरी स्नैक है।
| विशेषता | पपड़ी चाट | झालमुड़ी / स्प्राउट्स भेल |
| आधार सामग्री | मैदे की तली हुई पपड़ी | मुरमुरे / अंकुरित अनाज |
| कैलोरी का स्रोत | वसा (Fat) और चीनी | जटिल कार्ब्स और फाइबर |
| सब्जियां | बहुत कम | भरपूर मात्रा में |
| वजन घटाना | सलाह नहीं दी जाती | अत्यधिक अनुशंसित |
11. जलेबी की जगह → फ्रूट चाट
जलेबी भारत की सबसे पुरानी मिठाइयों में से एक है, लेकिन यह शुगर के मरीजों या वेट लॉस करने वालों के लिए ज़हर समान है। यह मैदे की बनी होती है जिसे तलने के बाद चीनी की गाढ़ी चाशनी में डुबोया जाता है। इसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होता, सिर्फ खाली कैलोरीज होती हैं।
मीठा खाने की तलब लगने पर फ्रूट चाट सबसे अच्छा उपाय है। पपीता, तरबूज, अनानास और अमरूद जैसे फलों में नेचुरल मिठास होती है। जब इन पर चाट मसाला और काला नमक डाला जाता है, तो इनका स्वाद दोगुना हो जाता है। फल आपको फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स देते हैं। यह आपकी बॉडी को हाइड्रेट भी रखते हैं। बस ध्यान रखें कि ऊपर से चीनी या सिरप न डलवाएं।
| विशेषता | जलेबी | फ्रूट चाट |
| चीनी का प्रकार | रिफाइंड सफेद चीनी | प्राकृतिक फ्रुक्टोज |
| पोषक तत्व | कोई नहीं | विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट |
| हाइड्रेशन | शरीर को सुखाती है | शरीर को हाइड्रेट रखती है |
| शरीर पर प्रभाव | फैट जमा करती है | शरीर की सफाई (Detox) करती है |
12. फ्रेंच फ्राइज की जगह → भुना हुआ भुट्टा
फ्रेंच फ्राइज बच्चों और युवाओं में बहुत पॉपुलर हैं, लेकिन यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। इनमें ढेर सारा नमक और ट्रांस-फैट होता है। यह हाईली प्रोसेस्ड होते हैं और इनमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता। ज्यादा फ्राइज खाने से ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या हो सकती है।
भुना हुआ भुट्टा (Corn) हमारी अपनी देसी परंपरा है जो फ्राइज से कहीं ज्यादा बेहतर है। मक्का एक सबूत अनाज (Whole Grain) है जो फाइबर से भरपूर होता है। इसे कोयले पर भूनने से इसमें एक स्मोकी फ्लेवर आता है। नींबू और नमक के साथ यह बहुत चटपटा लगता है। इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन तंत्र को साफ रखता है और आपको जल्दी भूख नहीं लगने देता।
| विशेषता | फ्रेंच फ्राइज | भुना हुआ भुट्टा (Corn) |
| प्रोसेसिंग | अत्यधिक प्रोसेस्ड | प्राकृतिक और अनप्रोसेस्ड |
| फैट का प्रकार | अस्वास्थ्यकर ट्रांस फैट | नगण्य फैट |
| फाइबर की मात्रा | बहुत कम | बहुत अधिक |
| संतुष्टि | लत लगाने वाली पर बेकार | पेट भरने वाला और पौष्टिक |
हेल्दी स्ट्रीट फूड चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें
सिर्फ सही डिश चुनना ही काफी नहीं है, उसे खाने का तरीका और जगह भी बहुत मायने रखती है। यहाँ कुछ ऐसी स्मार्ट टिप्स दी गई हैं जो आपको स्ट्रीट फूड एन्जॉय करते हुए भी सुरक्षित रखेंगी। सबसे पहली बात है पोर्शन कंट्रोल (Portion Control)। चाहे खाना कितना भी हेल्दी हो, अगर आप उसे जरूरत से ज्यादा खाएंगे तो कैलोरी बढ़ेगी ही। कोशिश करें कि एक प्लेट चाट को दो लोगों में शेयर करें। इससे स्वाद भी मिलेगा और कैलोरी भी आधी हो जाएगी।
दूसरी जरूरी बात है हाइजीन (Hygiene)। स्ट्रीट फूड खाते समय हमेशा उस जगह को चुनें जहां साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो। देखें कि वेंडर ग्लव्स का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं, और खाना ढककर रखा गया है या नहीं। कच्चे सलाद या कटी हुई फलों की चाट खाते समय यह सुनिश्चित करें कि वे ताजे हों और मक्खियां न बैठी हों। तीसरी बात, अपनी डिश को कस्टमाइज करवाना सीखें। आप दुकानदार को बोल सकते हैं कि वो एक्स्ट्रा बटर, क्रीम, या मेयोनीज न डाले। ये छोटी-छोटी चीजें आपकी डिश को स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड बना सकती हैं।
निष्कर्ष
स्वस्थ रहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी जिंदगी का मजा लेना छोड़ दें। भारतीय खाना अपनी विविधता के लिए जाना जाता है और स्ट्रीट फूड इसका एक बड़ा हिस्सा है। आपको अपनी सोशल लाइफ या स्वाद से समझौता करने की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो बस थोड़ी जागरूकता की। जब आप अगली बार बाहर जाएं, तो अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर इन नए विकल्पों को आजमाएं। समोसे की जगह चना चाट या बर्गर की जगह काठी रोल चुनना एक छोटा बदलाव लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इसके फायदे बहुत बड़े हैं।
याद रखें, फिटनेस एक यात्रा है, कोई मंजिल नहीं। इसमें कभी-कभी रास्ते का आनंद लेना भी जरूरी है। इन स्वस्थ भारतीय स्ट्रीट फूड स्वाप्स के साथ आप ‘चीट डे’ को भी ‘हेल्दी डे’ में बदल सकते हैं। तो, आज आप इनमें से कौन सा स्वाप ट्राई करने वाले हैं? अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और स्वाद के साथ स्मार्ट बनें!
