आईफोन 14 और 15 सीरीज के यूजर्स के लिए खुशखबरी है
एप्पल ने आईफोन 14 और आईफोन 15 के यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसमें सैटेलाइट बेस्ड इमरजेंसी एसओएस सर्विस को एक और साल के लिए पूरी तरह फ्री रखा गया है। यह सर्विस सबसे पहले नवंबर 2022 में आईफोन 14 सीरीज के साथ पेश की गई थी, और इसका मुख्य मकसद उन हालातों में मदद पहुंचाना है जहां मोबाइल या वाई-फाई सिग्नल उपलब्ध नहीं होता। इस नए फैसले के बाद, आईफोन 14 और आईफोन 15 के सभी मॉडल्स के यूजर्स नवंबर 2026 तक इस सुविधा का बिना किसी चार्ज के इस्तेमाल कर सकेंगे, जो पहले से ही दो साल की फ्री अवधि को और बढ़ाता है। लेकिन 2026 के बाद क्या होगा, इस पर एप्पल ने अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है, हालांकि कंपनी इसे बार-बार एक्सटेंड कर रही है, जो दर्शाता है कि यह यूजर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। इस फीचर की वजह से यूजर्स दूर-दराज के इलाकों में भी इमरजेंसी सर्विसेज से जुड़ सकते हैं, और यह पहले ही कई लोगों की जान बचा चुका है, जैसे लॉस एंजिल्स में 400 फुट की खाई में गिरी कार के ड्राइवर की मदद या इटली के अपेनाइन पहाड़ों में खोए हाइकर्स को रेस्क्यू करने में।
यह सुविधा खासतौर पर उन स्थितियों के लिए डिजाइन की गई है जहां कोई अन्य तरीके से इमरजेंसी सर्विसेज से संपर्क नहीं किया जा सकता, जैसे जंगल, पहाड़ या समुद्र के बीच में। इस्तेमाल के दौरान, आईफोन सैटेलाइट से कनेक्ट होकर टेक्स्ट मैसेज के जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स को अलर्ट भेजता है, और यह प्रक्रिया पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होती है ताकि यूजर की प्राइवेसी बनी रहे। आईओएस 18 अपडेट के साथ यह फीचर और ज्यादा उपयोगी हो गया है, जिसमें अब मैसेजेस वाया सैटेलाइट का विकल्प शामिल है, यानी यूजर्स ऑफ-ग्रिड होने पर अपने दोस्तों या परिवार से भी टेक्स्ट मैसेज कर सकते हैं, न कि सिर्फ इमरजेंसी सर्विसेज से। इसके अलावा, अगर आईफोन क्रैश डिटेक्शन या फॉल डिटेक्शन के जरिए कोई गंभीर दुर्घटना डिटेक्ट करता है और यूजर रिस्पॉन्स नहीं देता, तो यह ऑटोमैटिकली सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी अलर्ट भेज देता है। एप्पल ने इस फीचर को ग्लोबलस्टार के साथ पार्टनरशिप में विकसित किया है, जो 24 लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स का नेटवर्क इस्तेमाल करता है, और यह मैसेज को ग्राउंड स्टेशन्स तक पहुंचाता है जहां से इसे इमरजेंसी सेंटर्स को फॉरवर्ड किया जाता है।
शुरुआत में दो साल फ्री, फिर एक्सटेंशन
इस सर्विस की शुरुआत में एप्पल ने इसे दो साल के लिए पूरी तरह फ्री रखा था, लेकिन यूजर्स की फीडबैक और जरूरतों को देखते हुए इसे एक साल और बढ़ाया गया। अब लेटेस्ट फैसले के अनुसार, आईफोन 14 और आईफोन 15 सीरीज के सभी यूजर्स 2026 तक फ्री में इसका लाभ उठा सकेंगे, जो कि आईफोन 14 के लॉन्च से कुल चार साल की फ्री अवधि बनाती है। यह एक्सटेंशन उन यूजर्स के लिए लागू होता है जिन्होंने अपना आईफोन 9 सितंबर 2025 से पहले एक्टिवेट किया है, लेकिन कुछ देश जैसे चीन, रूस और बेलारूस में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है क्योंकि वहां सैटेलाइट कम्युनिकेशन के नियम अलग हैं। एप्पल ने इस फीचर को ऐसे डिजाइन किया है कि यह कम बैंडविथ में काम करे, यानी मैसेज भेजने में 15 सेकंड से लेकर कुछ मिनट लग सकते हैं, खासकर अगर आसमान में बादल हों या पेड़ों की वजह से कनेक्शन कमजोर हो। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि ऑफ-ग्रिड जाने से पहले सैटेलाइट कनेक्शन का डेमो ट्राई करें, जो आईफोन सेटिंग्स में उपलब्ध है, ताकि वे असली स्थिति में इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। इसके अलावा, मेडिकल आईडी और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को हेल्थ ऐप में पहले से सेट कर लें, क्योंकि यह जानकारी ऑटोमैटिकली शेयर हो जाती है।
कहां-कहां उपलब्ध है यह फीचर और कैसे इस्तेमाल करें
एप्पल की सैटेलाइट बेस्ड इमरजेंसी एसओएस सर्विस फिलहाल 17 देशों में उपलब्ध है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्विटजरलैंड और यूके शामिल हैं। यह फीचर हाल ही में लॉन्च हुए एप्पल वॉच अल्ट्रा 3 पर भी उपलब्ध है, जहां यूजर्स सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी सर्विसेज से टेक्स्ट कर सकते हैं, अपनी लोकेशन शेयर कर सकते हैं और क्रैश या फॉल डिटेक्शन के साथ ऑटोमैटिक अलर्ट भेज सकते हैं। एप्पल का प्लान है कि भविष्य में यह सुविधा और भी प्रोडक्ट्स जैसे आईपैड या मैक में जोड़ी जाए, ताकि यूजर्स किसी भी डिवाइस से कहीं भी कनेक्टेड रह सकें। इस्तेमाल करने के लिए, यूजर को खुले आसमान के नीचे रहना चाहिए जहां सैटेलाइट से सीधा कनेक्शन बन सके, और आईफोन स्क्रीन पर दिखाए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए, जैसे फोन को बाएं या दाएं घुमाना ताकि सिग्नल मजबूत रहे।
इस फीचर को एक्टिवेट करने के लिए, यूजर को 911 या एसओएस डायल करना होता है, और अगर सिग्नल न हो तो ‘इमरजेंसी टेक्स्ट वाया सैटेलाइट’ का ऑप्शन आता है। फिर, स्क्रीन पर कुछ सवाल पूछे जाते हैं जैसे कि इमरजेंसी का प्रकार (कार एक्सीडेंट, बीमारी, क्राइम, खो जाना या आग लगना), कितने लोग प्रभावित हैं, और क्या कोई घायल है। इन जवाबों को कम्प्रेस करके सैटेलाइट पर भेजा जाता है, साथ में यूजर की लोकेशन, एलिवेशन, बैटरी लेवल और मेडिकल आईडी भी। अगर लोकल इमरजेंसी सर्विस टेक्स्ट सपोर्ट नहीं करती, तो एप्पल का रिले सेंटर मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, जहां ट्रेंड स्पेशलिस्ट्स यूजर और डिस्पैचर्स के बीच कम्युनिकेशन करते हैं। यह प्रक्रिया 20-30 सेकंड में शुरू हो सकती है, लेकिन अगर मौसम खराब हो या पत्तियां ज्यादा हों तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है। एप्पल ने इस फीचर को ऐसे बनाया है कि यह लॉक स्क्रीन से भी काम करे, और यूजर को स्टेप-बाय-स्टेप गाइड मिले ताकि पैनिक की स्थिति में भी आसानी हो। कुल मिलाकर, यह सर्विस यूजर्स की सुरक्षा को बढ़ाती है, खासकर एडवेंचर लवर्स या रिमोट एरिया में रहने वालों के लिए, और एप्पल इसे लगातार अपडेट कर रहा है।
