अमेरिका ने चार संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया
अमेरिका ने चार ईरान-समर्थित मिलिशिया समूहों को अपनी विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ब्रिटिश समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों में हरकत अल-नुजबा, कताएब सैयद अल-शुहदा, हरकत अंसार अल्लाह अल-अवफिया और कताएब अल-इमाम अली शामिल हैं, जो मुख्य रूप से इराक में सक्रिय हैं और ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से समर्थन प्राप्त करते हैं।
यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक बयान में की, जिसमें इन समूहों की पिछली स्थिति का भी जिक्र किया गया। इनमें से कुछ समूह पहले से ही विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) की सूची में थे, और कताएब सैयद अल-शुहदा को 2023 में भी इस सूची में बनाए रखा गया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ये ईरान-समर्थित मिलिशिया समूह बगदाद में अमेरिकी दूतावास और अमेरिकी तथा गठबंधन सेनाओं के ठिकानों पर हमलों में शामिल रहे हैं, अक्सर झूठे नामों या प्रॉक्सी समूहों का इस्तेमाल करके अपनी असली पहचान छिपाते हुए। रुबियो ने जोर दिया कि ऐसे हमलों से अमेरिकी हितों को खतरा है और अमेरिका इन गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इन संगठनों की विस्तृत पृष्ठभूमि और स्थापना
ये चारों समूह इराक के शिया मिलिशिया नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो ईरान के प्रभाव में काम करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और रॉयटर्स की जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, हरकत अल-नुजबा की स्थापना 2013 में हुई थी, जब इराक में आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई तेज हो रही थी। यह समूह ईरान की आईआरजीसी से हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्राप्त करता है। इसके नेता अकरम अल-काबी हैं, जो खुले तौर पर ईरान की नीतियों का समर्थन करते हैं। समूह ने न केवल इराक में बल्कि सीरिया में भी अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ अभियान चलाए हैं, जिसमें रॉकेट लॉन्चर और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल शामिल है। 2020 से 2024 तक, इस समूह को कम से कम 50 से अधिक हमलों से जोड़ा गया है, जैसा कि वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स में दर्ज है।
कताएब सैयद अल-शुहदा की स्थापना 2013 में हुई और यह भी शिया मिलिशिया है जो ईरान के समर्थन से चलती है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समूह आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में शुरुआत में सक्रिय रहा, लेकिन बाद में इसका फोकस अमेरिकी सेनाओं पर हमलों की ओर मुड़ गया। समूह ने इराक में कई रॉकेट हमले किए, जिनमें अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। इसके अलावा, यह समूह इराक की राजनीति में भी हस्तक्षेप करता है, स्थानीय चुनावों और विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करने की कोशिश करता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2019-2021 के बीच इस समूह ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर कई हमले आयोजित किए, जिसमें प्रॉक्सी ग्रुप्स का इस्तेमाल किया गया।
हरकत अंसार अल्लाह अल-अवफिया एक अपेक्षाकृत छोटा समूह है, लेकिन इराक के दक्षिणी इलाकों में इसकी मजबूत पकड़ है। यह 2014 के आसपास उभरा और ईरान से हथियार तथा लॉजिस्टिकल सपोर्ट प्राप्त करता है। समूह मुख्य रूप से अमेरिकी उपस्थिति के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भर्ती और विरोध प्रदर्शन आयोजित करता है। अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, यह समूह इराक में ईरान की रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने में लगा रहता है, जैसे कि तेल क्षेत्रों की सुरक्षा और राजनीतिक प्रभाव। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस समूह ने 2022-2024 में कम से कम 20 हमलों में हिस्सा लिया, मुख्य रूप से अमेरिकी काफिलों को निशाना बनाते हुए।
कताएब अल-इमाम अली भी 2014 में स्थापित हुआ और ईरान के साथ इसके गहरे संबंध हैं। यह समूह इराक और सीरिया में सक्रिय है, जहां यह ईरान की आईआरजीसी के साथ मिलकर काम करता है। समूह के सदस्यों को ईरान में प्रशिक्षण दिया जाता है, और यह अमेरिकी ठिकानों पर आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमलों में शामिल रहा है। बीबीसी और सीएनएन जैसी विश्वसनीय स्रोतों की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समूह ने 2021 में इराक में अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन हमले किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
इन संगठनों की गतिविधियां और अमेरिकी हितों पर प्रभाव
ये समूह न केवल हमलों में शामिल हैं बल्कि इराक की आंतरिक राजनीति को भी प्रभावित करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया है कि ये संगठन प्रॉक्सी ग्रुप्स का इस्तेमाल करके अपनी संलिप्तता छिपाते हैं, जैसे कि छोटे-छोटे गुटों के नाम से हमले करना। उदाहरण के लिए, 2020 में अमेरिकी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद, इन समूहों ने बदले की कार्रवाई के रूप में इराक में 150 से अधिक हमले किए, जैसा कि पेंटागन की रिपोर्ट्स में दर्ज है। इन हमलों में रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ, जिससे दर्जनों अमेरिकी और गठबंधन सैनिक घायल या मारे गए।
रॉयटर्स की जांच से पता चलता है कि हरकत अल-नुजबा ने सीरिया में भी अमेरिकी सेनाओं को निशाना बनाया, जहां यह असद शासन के साथ मिलकर काम करता है। इसी तरह, कताएब सैयद अल-शुहदा ने इराक के तेल क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को धमकियां दी हैं, जिससे आर्थिक हित प्रभावित हुए हैं। हरकत अंसार अल्लाह अल-अवफिया स्थानीय स्तर पर युवाओं की भर्ती करता है, उन्हें ईरान की विचारधारा से प्रभावित करता है, जबकि कताएब अल-इमाम अली ने सोशल मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार किया है, जिसमें अमेरिका-विरोधी संदेश फैलाए जाते हैं। ये विवरण अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे अल जजीरा से लिए गए हैं, जो इन समूहों की गतिविधियों को ट्रैक करती हैं।
इस घोषणा के प्रभाव और वैश्विक महत्व
इस नामांकन से इन समूहों पर कई प्रतिबंध लगेंगे। अमेरिकी कानून के तहत, इनके सदस्यों पर यात्रा प्रतिबंध होंगे, उनकी संपत्तियां अमेरिकी क्षेत्र में जब्त की जा सकेंगी, और कोई भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी इनके साथ व्यापार नहीं कर सकेगी। विदेश विभाग का कहना है कि यह कदम ईरान की क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए है। मार्को रुबियो ने बयान में कहा कि अमेरिका ऐसे प्रॉक्सी हमलों को बेनकाब करेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग मांगेगा।
व्यापक संदर्भ में, यह घोषणा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का हिस्सा है। 2020 के बाद से इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़े हैं, और ये समूह ईरान की रणनीति का हिस्सा हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इन मिलिशिया को हथियार सप्लाई करता है, जिसमें उन्नत ड्रोन और मिसाइल शामिल हैं। इस घोषणा से इराक सरकार पर भी दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ये समूह इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) का हिस्सा हैं। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को बल मिलेगा।
आगे की चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस फैसले से ईरान-अमेरिका संबंध और जटिल हो सकते हैं। ईरान ने पहले भी ऐसी घोषणाओं की निंदा की है, उन्हें “एकतरफा और अवैध” बताते हुए। तेहरान का कहना है कि ये समूह आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट्स इससे असहमत हैं। भविष्य में, अमेरिका अपने सहयोगियों जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और इराक सरकार के साथ मिलकर इन समूहों की गतिविधियों पर नजर रखेगा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स भी इन मिलिशिया की गतिविधियों को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताती हैं।
इसके अलावा, यह घोषणा इराक की आंतरिक स्थिरता पर असर डाल सकती है, जहां ये समूह राजनीतिक प्रभाव रखते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप हैं और आतंकवाद को रोकने के लिए आवश्यक हैं। कुल मिलाकर, यह कदम मध्य पूर्व की जियोपॉलिटिक्स में एक नया अध्याय जोड़ता है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच प्रॉक्सी युद्ध जारी है।
