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लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का कहना है कि जुबिन के अंतिम संस्कार में प्रशंसकों की भारी भीड़ देखी गई, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सभा है

असम के मशहूर गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को गुवाहाटी लाया गया, जहां हजारों प्रशंसकों ने उन्हें भावुक विदाई दी। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इस घटना को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी जनसभा के रूप में दर्ज किया है, जो जुबिन के संगीत के गहरे प्रभाव और असमिया संस्कृति में उनके योगदान को उजागर करता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जुबिन के जीवन, उनके अंतिम संस्कार की घटनाओं, प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं और ऐतिहासिक महत्व पर गहराई से नजर डालेंगे, विश्वसनीय स्रोतों जैसे इंडियन एक्सप्रेस, असम ट्रिब्यून, बीबीसी और टाइम्स ऑफ इंडिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर।

जुबिन गर्ग का जीवन और संगीत करियर: एक अविस्मरणीय यात्रा

जुबिन गर्ग, जिन्हें असमिया संगीत जगत का सितारा माना जाता है, का जन्म 18 नवंबर 1972 को असम के जोरहाट जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआत लोकल बैंड्स से की और जल्द ही असमिया लोक संगीत को आधुनिक रूप देकर लोकप्रिय बनाया। जुबिन ने न केवल असमिया भाषा में बल्कि हिंदी, बंगाली और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाने गाए, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले थे। उनके कुछ मशहूर गीतों में “या अली” (फिल्म गैंगस्टर से), “यारियां” टाइटल ट्रैक और असमिया हिट्स जैसे “बिहू” और “माया” शामिल हैं।

जुबिन का संगीत असम की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा था। उन्होंने असमिया सिनेमा को मजबूती दी और बॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी। उनके गीतों में असम की लोक परंपराओं, प्रेम और सामाजिक मुद्दों का मिश्रण था, जो युवाओं को खासतौर पर आकर्षित करता था। करियर के दौरान उन्होंने कई पुरस्कार जीते, जिसमें असम सरकार के सम्मान और राष्ट्रीय स्तर के अवॉर्ड्स शामिल हैं। उनके निधन की खबर से न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत और बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई। सिंगापुर में इलाज के दौरान उनका निधन हुआ, जहां वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे (स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया और विकिपीडिया की जीवनी प्रोफाइल)। जुबिन की विरासत असमिया संगीत को वैश्विक स्तर पर ले जाने में है, जहां उन्होंने पारंपरिक धुनों को रॉक और पॉप के साथ मिलाकर नई पीढ़ी को जोड़ा।

प्रशंसकों की भावुक विदाई और अंतिम संस्कार की घटनाएं

रविवार सुबह, 21 सितंबर 2025 को सिंगापुर से जुबिन का पार्थिव शरीर गुवाहाटी हवाई अड्डे पर पहुंचा। यहां से अर्थी को सफेद फूलों की मालाओं से सजाया गया, जो असम की सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक था। हजारों प्रशंसक सड़कों पर जमा हो गए, कई दूर-दराज के गांवों से आए थे। वे जुबिन के लोकप्रिय गीत गाते हुए अर्थी के साथ चल रहे थे, जैसे “ओ जाने जाना” और “बिहू” की धुनें हवा में गूंज रही थीं। आंसुओं से भरी आंखों वाले प्रशंसक अपने प्रिय गायक को छूने या अंतिम नजर डालने के लिए आगे बढ़ रहे थे।

यह दृश्य इतना भावुक था कि असम के लोगों ने कहा, “हमने पहले कभी ऐसी एकजुटता नहीं देखी।” स्थानीय निवासियों के अनुसार, भीड़ में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी शामिल थे, जो जुबिन के संगीत के व्यापक प्रभाव को दिखाता है। पुलिस और प्रशासन ने ट्रैफिक कंट्रोल के लिए विशेष व्यवस्था की, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि सड़कें घंटों जाम रहीं। कुछ प्रशंसकों ने जुबिन की तस्वीरें और पोस्टर्स हाथ में लिए हुए थे, जबकि अन्य ने उनके गीतों की रिकॉर्डिंग प्ले की। यह नजारा असम की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण था, जहां संगीत ने लोगों को एक सूत्र में बांधा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मौके पर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “हमारे प्रिय जुबिन को अंतिम बार देखने की इच्छा रखने वाले इतने सारे लोग यहां हैं। हम इस भावना को पूरी तरह समझते हैं। यह मानवता का एक विशाल सागर है, जहां हर कोई असम की मिट्टी के इस लाल को विदाई देने आया है। जुबिन ने राजा की तरह जीवन जिया, इसलिए हम उन्हें राजा की तरह स्वर्ग की ओर विदा कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने खुद भी श्रद्धांजलि दी और राज्य सरकार की ओर से जुबिन को सम्मान देने की घोषणा की।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में ऐतिहासिक स्थान: वैश्विक तुलना

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने जुबिन के अंतिम संस्कार को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी जनसभा के रूप में मान्यता दी है। इस सूची में पहले स्थान पर माइकल जैक्सन का 2009 का अंतिम संस्कार है, जहां लॉस एंजेलिस में लाखों प्रशंसक जमा हुए थे और वैश्विक मीडिया कवरेज ने इसे ऐतिहासिक बनाया। दूसरे स्थान पर पोप फ्रांसिस का हालिया निधन, जिसने कैथोलिक दुनिया को एकजुट किया। तीसरे पर ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का 2022 का अंतिम संस्कार, जिसमें लंदन की सड़कों पर करोड़ों लोग शामिल हुए।

जुबिन का स्थान इन वैश्विक हस्तियों के बाद आना असम के लिए गर्व की बात है, क्योंकि यह स्थानीय कलाकार के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाता है। लिम्का बुक के अनुसार, भीड़ की गिनती आधारित थी सड़कों पर जमा लोगों, सोशल मीडिया की भागीदारी और आधिकारिक रिपोर्ट्स पर। असम में यह पहली बार है जब किसी कलाकार के निधन पर इतनी बड़ी भीड़ उमड़ी, जो पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक गहराई को उजागर करता है (स्रोत: बीबीसी, गार्जियन और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट)। इस रिकॉर्ड ने जुबिन को अमर बना दिया, क्योंकि यह उनके संगीत की शक्ति को मापने का एक तरीका है।

असम सरकार का योगदान, सुरक्षा व्यवस्था और जुबिन की विरासत

असम सरकार ने जुबिन के अंतिम संस्कार के लिए व्यापक इंतजाम किए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि अंतिम संस्कार 23 सितंबर 2025 को गुवाहाटी के कमरकुची एनसी गांव में होगा, जहां जुबिन का पैतृक घर है। सरकार ने राज्य सम्मान के साथ उन्हें विदाई देने का फैसला किया, जिसमें सैन्य सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, साथ ही मेडिकल टीम्स और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुनिश्चित किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

जुबिन के परिवार ने प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके गीत हमेशा जीवित रहेंगे। असम के सांस्कृतिक विभाग ने जुबिन की स्मृति में एक संगीत अकादमी स्थापित करने की योजना बनाई है, जो युवा कलाकारों को प्रशिक्षित करेगी। उनके निधन से संगीत जगत में खालीपन आ गया है, लेकिन उनकी रचनाएं असमिया लोक संगीत को नई दिशा देती रहेंगी। जुबिन ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि सामाजिक मुद्दों जैसे पर्यावरण संरक्षण और युवा सशक्तिकरण पर भी गाने गाए, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दिखाते हैं (स्रोत: असम सरकार की आधिकारिक वेबसाइट, इंडियन एक्सप्रेस और सांस्कृतिक रिपोर्ट्स)।

इस घटना ने असम को वैश्विक मानचित्र पर मजबूत किया, जहां एक स्थानीय गायक की लोकप्रियता ने इतिहास रचा। जुबिन की यादें उनके गीतों में हमेशा गूंजती रहेंगी, और यह रिकॉर्ड उनकी अमरता का प्रमाण है।