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जुबिन गर्ग मौत मामलाः असम के मुख्यमंत्री को 10 अक्टूबर तक विसरा रिपोर्ट का इंतजार, सिंगापुर से मुख्य संदिग्धों की वापसी का आग्रह किया

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की रहस्यमयी मौत की जांच में महत्वपूर्ण अपडेट दिया है। उन्होंने पुष्टि की है कि विसेरा परीक्षण रिपोर्ट 10 अक्टूबर (शुक्रवार) तक उपलब्ध हो जाएगी, और इसकी पूरी जानकारी 11 अक्टूबर (शनिवार) तक सामने आ जाएगी। यह रिपोर्ट जुबिन की मौत के सच्चे कारणों को उजागर करने में निर्णायक साबित हो सकती है, खासकर उन अफवाहों के बीच जो जहर देने के आरोपों से जुड़ी हैं। सरमा ने स्पष्ट किया कि पुलिस सभी गवाहों के बयानों को बारीकी से दर्ज कर रही है, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक, लेकिन ये बयान पुलिस के आधिकारिक निष्कर्ष नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जुबिन गर्ग का विसेरा परीक्षण रिपोर्ट 10 अक्टूबर को मिल जाएगी, और 11 अक्टूबर तक हम पूरी डिटेल जान लेंगे। पुलिस का काम हर गवाह का बयान दर्ज करना है—चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक। ये पुलिस के बयान नहीं, बल्कि व्यक्तिगत गवाहियां हैं।” विसेरा सैंपल्स 24 सितंबर को सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (सीएफएल) भेजे गए थे, जहां विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया मौत के संभावित विषाक्त पदार्थों या अन्य चिकित्सकीय कारणों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है, जो पहले सिंगापुर में की गई प्रारंभिक रिपोर्ट और गौहाटी में पोस्टमॉर्टम से अलग होगी। हाल की मीडिया रिपोर्टों में जहर देने के दावे एक आरोपी के बयान पर आधारित हैं, न कि पुलिस की जांच पर। सरमा ने जोर देकर कहा कि ऐसी खबरों को सत्यापित न माना जाए, क्योंकि जांच अभी जारी है और कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। असम सरकार की यह अपडेट विश्वसनीय समाचार स्रोतों जैसे हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और असम ट्रिब्यून से सत्यापित है, जो घटना की गहराई से जांच कर रहे हैं।

सिंगापुर से मुख्य संदिग्धों की वापसी पर जोर

जांच की प्रगति के लिए सिंगापुर से मुख्य संदिग्धों और गवाहों की वापसी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मुख्यमंत्री सरमा ने असम के नागरिकों से अपील की है कि वे सिंगापुर में बसे असमिया समुदाय पर नैतिक दबाव डालें, ताकि वे जुबिन गर्ग की आखिरी यॉट यात्रा के दौरान मौजूद लोग जल्दी लौट सकें। उन्होंने कहा, “अगर सिंगापुर वाले लोग वापस नहीं लौटे, तो हम जांच पूरी नहीं कर पाएंगे।” यह अपील इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यॉट यात्रा के दौरान हुई घटना सिंगापुर के लाजरस द्वीप के पास हुई थी, जहां जुबिन तैरते समय अचानक सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगे थे।

असम में पहले से हिरासत में लिए गए लोगों में फेस्टिवल आयोजक श्यामकानू महंता, जुबिन के लंबे समय से मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड मेंबर शेखर ज्योति गोस्वामी और गायिका अमृतप्रवा महंता शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी 1 अक्टूबर को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा की गई थी, और इन्हें 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। श्यामकानू महंता नॉर्थईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक थे, जबकि सिद्धार्थ शर्मा जुबिन के करीबी सहयोगी थे। लेकिन कई अन्य मुख्य गवाह, जो यॉट पर मौजूद थे, अभी भी सिंगापुर में हैं, जो जांचकर्ताओं के लिए बड़ी बाधा पैदा कर रहे हैं। सरमा ने बताया कि सीआईडी ने सिंगापुर में असम एसोसिएशन के सदस्यों को नोटिस जारी किए हैं, जिसमें 6 अक्टूबर तक जांचकर्ताओं के सामने पेश होने का आदेश दिया गया है। अगर वे समय पर नहीं लौटे, तो जांच प्रभावित हो सकती है और नए जांच उपाय अपनाने पड़ सकते हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से। भारतीय पुलिस के विदेशी जांच प्रोटोकॉल के तहत, प्रत्यर्पण या स्वैच्छिक सहयोग ही विकल्प हैं, जो इस मामले में जटिलता बढ़ा रहे हैं।

जहर देने और साजिश के आरोप

जुबिन गर्ग की मौत को लेकर सबसे चौंकाने वाले आरोप बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी के बयान से सामने आए हैं। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, गोस्वामी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 के तहत दिए बयान में दावा किया है कि मौत को दुर्घटना का रूप देने के लिए साजिश रची गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यॉट यात्रा के दौरान मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और आयोजक श्यामकानू महंता ने जुबिन को जहर दिया, और “साजिश छिपाने के लिए जानबूझकर विदेशी जगह चुनी।” गोस्वामी के मुताबिक, घटना से पहले शर्मा ने यॉट का नियंत्रण जबरन नाविक से छीन लिया, जिससे नाव समुद्र में डगमगाने लगी और सभी यात्रियों की जान को खतरा हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि शर्मा ने असम एसोसिएशन के एक सदस्य को ड्रिंक्स की व्यवस्था न करने को कहा, क्योंकि वे खुद संभालेंगे।

एक महत्वपूर्ण पल का वर्णन करते हुए, गोस्वामी ने बताया कि जब जुबिन सांस लेने के लिए तड़प रहे थे और डूबने की कगार पर थे, तब शर्मा चिल्ला रहे थे “जाबो दे, जाबो दे” (उसे जाने दो, उसे जाने दो)। यह बयान एसआईटी के रिमांड नोट में दर्ज है, जो टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे स्रोतों से सत्यापित है। गोस्वामी ने आगे कहा कि साजिश का उद्देश्य जुबिन की मौत को तैराकी दुर्घटना दिखाना था, और सिंगापुर का चयन इसलिए किया गया ताकि सबूत आसानी से छिपाए जा सकें।

हालांकि, मुख्यमंत्री सरमा ने इन आरोपों को सावधानी से देखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ये बयान आरोपी के हैं, जो खुद को बचाने या किसी को फंसाने के लिए दिए गए हो सकते हैं। “अब, इस बयान के पीछे क्या कारण है? क्या यह खुद को बचाने के लिए है या किसी को दोष देने के लिए? यह जांच के दौरान ही पता चलेगा,” सरमा ने कहा। असम पुलिस के प्रारंभिक जांच नोट्स, जो एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स से पुष्ट हैं, इन दावों की अभी पुष्टि नहीं करते। विसेरा रिपोर्ट ही अंतिम सच्चाई सामने लाएगी, जो फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी या अन्य कारणों का परीक्षण करेगी। जुबिन एक तैराकी विशेषज्ञ थे, इसलिए उनकी अचानक सांस की तकलीफ संदेहास्पद लग रही है।

असम पुलिस की क्षेत्रीय सीमाएं

असम पुलिस की सबसे बड़ी समस्या सिंगापुर में जांच की अक्षमता है, जो क्षेत्राधिकार की कमी के कारण है। सरमा ने स्वीकार किया, “असम पुलिस सिंगापुर नहीं जा सकती, इसलिए वहां जांच नहीं ले सकती।” “जब तक मौजूद लोग वापस न लौटें, हम सच्चाई के धागे नहीं जोड़ पाएंगे।” यह स्थिति भारतीय दंड संहिता और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर आधारित है, जहां विदेशी क्षेत्र में प्रत्यक्ष जांच के लिए सिंगापुर पुलिस या इंटरपोल जैसे चैनलों की जरूरत पड़ती है।

मुख्यमंत्री ने विदेश में रहने वाले असम के नागरिकों के परिवारों से विशेष अपील की: “उनके माता-पिता यहां असम में रहते हैं। हमें उनसे अनुरोध करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को वापस लौटने के लिए कहें, ताकि जांच में सहयोग मिले।” यह नैतिक दबाव रणनीति असमिया समुदाय की एकजुटता पर निर्भर कर रही है, क्योंकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। सीआईडी की नौ सदस्यीय टीम वर्तमान में असम में उपलब्ध सबूतों, जैसे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स और गवाह बयानों, पर फोकस कर रही है। पहले सिंगापुर में की गई रिपोर्ट डूबने को कारण बताती है, लेकिन गौहाटी पोस्टमॉर्टम और विसेरा ही निर्णायक होंगे।

जांच की निगरानी के लिए न्यायिक आयोग गठित

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए असम सरकार ने गौहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सैकिया की अगुवाई में एकल सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया है। यह आयोग सीआईडी की चल रही जांच की निगरानी करेगा और छह महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। राजनीतिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार, आयोग के कार्यक्षेत्र में शामिल हैं: (i) जुबिन गर्ग की मौत के तथ्य और परिस्थितियां, (ii) घटना से पहले और बाद की घटनाओं का क्रम, (iii) किसी व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था की ओर से लापरवाही, चूक या कमी की जांच, और (iv) साजिश, फाउल प्ले या अवैध कृत्यों जैसे बाहरी कारकों की भूमिका।

“यह पूरी तरह स्वतंत्र निकाय है,” सीएम ने कहा। “अगर आयोग को लगता है कि जांच गलत दिशा में जा रही है, तो वह हमें और सख्ती से निर्देश दे सकता है। असम में पहली बार किसी बैठे जज को ऐसी जिम्मेदारी सौंपी गई है।” यह कदम असम सरकार की आधिकारिक अधिसूचना से लिया गया है, जो न्यायिक निष्पक्षता के लिए एक मजबूत उदाहरण स्थापित करता है। आयोग की स्थापना 60 से अधिक एफआईआर के बाद हुई, जो पूरे असम में दर्ज की गईं और महंता तथा अन्य 10 लोगों के खिलाफ हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि जांच वित्तीय अनियमितताओं, साजिश या लापरवाही के हर पहलू को कवर करे।

सीएम का परिवार से मिलना, व्यक्तिगत शोक

हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 अक्टूबर को जुबिन गर्ग के परिवार से उनके काहिलीपारा स्थित निवास पर व्यक्तिगत दौरा किया। उन्होंने इसे शोक व्यक्त करने का दौरा बताया, न कि आधिकारिक जांच चर्चा। “मैंने जुबिन के पिता, पत्नी गरिमा और बहन के साथ करीब एक घंटा बिताया। गरिमा कॉटन कॉलेज में मेरी जूनियर थीं, और मैं उन्हें अच्छी तरह जानता था। यह शोक साझा करने का समय था, जांच पर चर्चा का नहीं,” सरमा ने कहा।

यह मुलाकात असम की सांस्कृतिक हस्तियों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। जुबिन की पत्नी को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सौंप दी गई है, जो जांच का हिस्सा है। परिवार का शोक पूरे असम में फैला हुआ है, जहां जुबिन को एक आइकन के रूप में याद किया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्गा पूजा पंडालों में भी उनकी फोटो लगाई गई हैं।

सांस्कृतिक आइकन की रहस्यमयी मौत

असमिया और भारतीय संगीत में अपार योगदान के लिए प्रसिद्ध 52 वर्षीय गायक, संगीतकार और सांस्कृतिक आइकन जुबिन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में रहस्यमय परिस्थितियों में हुई। वे नॉर्थईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे संस्करण के लिए गए थे, जो श्यामकानू महंता की कंपनी द्वारा आयोजित था। फेस्टिवल राजनयिक संबंधों को मजबूत करने का मंच था, लेकिन यॉट आउटिंग के दौरान लाजरस द्वीप के पास तैरते समय वे अचानक गायब हो गए। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में डूबने को मौत का कारण बताया गया, लेकिन अब साजिश के आरोपों ने मामला पलट दिया है।

उनकी मौत के बाद असम भर में 60 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं, जिसके बाद सीआईडी ने साजिश, हत्या, आपराधिक साजिश और लापरवाही से मौत के आरोपों की व्यापक जांच शुरू की। जुबिन की विरासत असम की सांस्कृतिक दुनिया में अमिट है—उनके गाने जैसे “কোনো লগ্ন” और बॉलीवुड हिट्स ने लाखों को प्रभावित किया। उनकी मौत ने पूरे समुदाय को स्तब्ध कर दिया है, जैसा कि बीबीसी, टाइम्स ऑफ इंडिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों ने कवर किया है। आगामी विसेरा रिपोर्ट और विदेश से मुख्य गवाहों का सहयोग ही इस दुखद घटना के सच्चे हालात तय करेगा, और न्यायिक आयोग सुनिश्चित करेगा कि कोई कोताही न रहे।

यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स और न्यूज 18 से एकत्र की गई है