श्रीधर वेम्बू का व्हाट्सएप पर निशाना, कहा-जोहो अराट्टई पर एकाधिकार नहीं होगा
अरट्टई, जोहो की घरेलू मैसेजिंग ऐप, भारत में इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही है। इस ऐप में रोजाना साइन-अप्स की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हो रही है, जिसमें सिर्फ तीन दिनों के अंदर ही करीब 100 गुना का उछाल देखा गया है, और नए यूजर्स की संख्या 3,000 से बढ़कर 350,000 प्रतिदिन हो गई है। भारत सरकार की ओर से इसका समर्थन मिल रहा है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जैसे प्रमुख अधिकारियों ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अपनाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा जोरों पर है, और कई यूजर्स इसे व्हाट्सएप का असली किलर मान रहे हैं। लेकिन क्या यह ऐप मेटा की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप से वाकई अलग या बेहतर है? इसके निर्माताओं के मुताबिक, अरट्टई एक पूरी तरह से सुरक्षित, गोपनीय और मेड-इन-इंडिया ऐप है, जो यूजर्स की प्राइवेसी को सबसे ऊपर रखती है। वास्तव में, जोहो के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में साफ-साफ कहा है कि अरट्टई वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों की तरह एकाधिकार की राह पर कभी नहीं चलेगी।
श्रीधर वेम्बू ने व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निशाना साधते हुए कहा कि जोहो कभी भी ऐसा एकाधिकार नहीं बनना चाहता, जहां यूजर्स एक ही ऐप में कैद हो जाएं। ऐप के पीछे की पूरी सोच के बारे में बात करते हुए, वेम्बू ने अपने हालिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट्स में स्पष्ट किया कि अरट्टई खुलेपन, इंटरऑपरेबिलिटी और यूजर ट्रस्ट के मजबूत सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने लिखा, “ये सिस्टम यूपीआई और ईमेल की तरह इंटरऑपरेबल होने चाहिए, न कि आज के व्हाट्सएप की तरह बंद और सीमित। हम कभी भी एकाधिकार नहीं बनना चाहते”। वेम्बू ने यह भी बताया कि जोहो ने यूपीआई फ्रेमवर्क के पीछे थिंक टैंक आईस्पिर्ट के साथ मैसेजिंग प्रोटोकॉल को स्टैंडर्डाइज करने और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए चर्चा शुरू कर दी है, ताकि अलग-अलग ऐप्स के बीच आसानी से कम्यूनिकेशन हो सके।
वेम्बू के मुताबिक, जोहो अरट्टई को सिर्फ एक साधारण चैट ऐप से कहीं ज्यादा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी इसे एक बड़े मैसेजिंग इकोसिस्टम के रूप में विकसित कर रही है, जो विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी रुकावट के काम करे, ठीक वैसे ही जैसे ईमेल या यूपीआई पेमेंट्स काम करते हैं। इससे यूजर्स को एक ही प्रोवाइडर में लॉक होने की बजाय स्वतंत्रता मिलेगी, और वे अपनी पसंद के ऐप्स के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे। इस दृष्टिकोण से अरट्टई न सिर्फ भारत में डिजिटल स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बंद सिस्टम्स के खिलाफ एक मिसाल भी कायम कर रही है।
प्राइवेसी-फर्स्ट अप्रोच और भारत में डेटा होस्टिंग
श्रीधर वेम्बू ने जोहो के प्रोडक्ट डेवलपमेंट और यूजर डेटा स्टोरेज को लेकर फैली अफवाहों का जवाब देते हुए एक अन्य पोस्ट में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी जोहो प्रोडक्ट्स, जिसमें अरट्टई भी शामिल है, पूरी तरह से भारत में विकसित किए गए हैं, और कंपनी का वैश्विक मुख्यालय चेन्नई में स्थित है। “भारतीय यूजर्स का सारा डेटा भारत में ही होस्ट किया जाता है। हम गर्व से कहते हैं कि हम ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ हैं, और हम इसकी हर बात पर अमल करते हैं”। वेम्बू ने आगे स्पष्ट किया कि जोहो अपनी सभी सेवाओं को अपने खुद के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क पर चलाता है, जो ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। कंपनी जानबूझकर अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), माइक्रोसॉफ्ट एज्योर या गूगल क्लाउड जैसे वैश्विक क्लाउड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं करती, ताकि डेटा की सुरक्षा और स्वतंत्रता बनी रहे।
खासतौर पर अरट्टई के बारे में बात करते हुए, वेम्बू ने आश्वासन दिया कि यह ऐप इनमें से किसी भी विदेशी क्लाउड पर होस्ट नहीं है। इसके बजाय, यूजर डेटा भारत के विभिन्न डेटा सेंटर्स में सुरक्षित रखा जाता है, जिनमें मुंबई, दिल्ली और चेन्नई शामिल हैं। कंपनी की योजना ओडिशा में भी विस्तार करने की है, ताकि डेटा की पहुंच और सुरक्षा और मजबूत हो सके। यह अप्रोच न सिर्फ भारत की डेटा प्राइवेसी नीतियों के अनुरूप है, बल्कि यूजर्स को विदेशी कंपनियों के डेटा शेयरिंग और मॉनेटाइजेशन से बचाती है, जो अक्सर व्हाट्सएप जैसे ऐप्स पर सवाल उठते हैं। जोहो का दावा है कि अरट्टई स्पाईवेयर-फ्री है और यूजर डेटा को विज्ञापनों या थर्ड-पार्टी के साथ शेयर नहीं किया जाता, जो इसे प्राइवेसी के लिहाज से एक मजबूत विकल्प बनाता है।
अरट्टई: व्हाट्सएप का नया भारतीय प्रतिद्वंद्वी?
अरट्टई शब्द तमिल भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब “कैजुअल चैट” या “आराम से बातचीत” होता है, जो ऐप की सरल और यूजर-फ्रेंडली प्रकृति को दर्शाता है। यह ऐप मूल रूप से 2021 में चुपचाप लॉन्च की गई थी, लेकिन हाल ही में घरेलू डिजिटल विकल्पों में बढ़ती रुचि और सरकारी समर्थन से इसकी लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है। अरट्टई में कई परिचित फीचर्स हैं, जैसे ग्रुप चैट्स, वॉइस और वीडियो कॉल्स, ब्रॉडकास्ट चैनल्स, और 24 घंटे की एफेमेरल स्टोरीज, लेकिन जो इसे खास बनाता है, वह है डेटा प्राइवेसी पर जोर और आक्रामक मॉनेटाइजेशन से दूरी।
हाल ही में ऐप के डाउनलोड्स में अचानक तेजी आई है, और कई लोग इसे भारत में व्हाट्सएप का पहला गंभीर चुनौती देने वाला मान रहे हैं। वर्तमान में, मेटा का व्हाट्सएप 500 मिलियन से ज्यादा भारतीय यूजर्स के साथ बाजार पर कब्जा जमाए हुए है। लेकिन व्हाट्सएप अक्सर मेटा की अन्य सेवाओं के साथ डेटा शेयरिंग और बड़े इकोसिस्टम में एकीकरण को लेकर विवादों में घिरा रहता है। इसके विपरीत, अरट्टई अपने खुलेपन, भरोसेमंदी और एकाधिकार से दूरी के वादे के साथ यूजर्स के बीच सबसे आशाजनक विकल्प बनकर उभरी है।
श्रीधर वेम्बू का सफर भी इस ऐप की कहानी को और रोचक बनाता है। 1968 में तमिलनाडु के थंजावुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे वेम्बू ने आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल की। क्वालकॉम में काम करने के बाद, वे सिलिकॉन वैली से लौटकर तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में बस गए, जहां उन्होंने जोहो की स्थापना की। यह ग्रामीण फोकस जोहो की प्राइवेसी-फर्स्ट फिलॉसफी को मजबूत बनाता है, और अरट्टई जैसे प्रोडक्ट्स में झलकता है।
अरट्टई की प्रमुख फीचर्स और व्हाट्सएप से तुलना
अरट्टई की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी यूजर-फ्रेंडली फीचर्स हैं, जो इसे व्हाट्सएप का मजबूत विकल्प बनाती हैं। ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉइस और वीडियो कॉल्स हैं, हालांकि टेक्स्ट मैसेजेस के लिए यह फीचर अभी पूरी तरह लागू नहीं है, लेकिन जोहो ने जल्द ही इसे जोड़ने का वादा किया है। ऐप कम बैंडविथ पर भी सुचारू रूप से काम करती है, जो ग्रामीण इलाकों और कमजोर इंटरनेट वाले यूजर्स के लिए आदर्श है। यह स्मार्टफोन्स, डेस्कटॉप, टैबलेट और यहां तक कि एंड्रॉइड टीवी पर भी उपलब्ध है, जो इसे मल्टी-डिवाइस सपोर्ट में व्हाट्सएप से आगे ले जाती है—खासकर टीवी पर मीटिंग्स या फैमिली कॉल्स के लिए।
अन्य प्रमुख फीचर्स में शामिल हैं: एक अलग पेज जहां सभी मेंशन्स (जैसे ग्रुप्स में आपके नाम का जिक्र) एक जगह दिखते हैं, ताकि यूजर्स आसानी से महत्वपूर्ण मैसेजेस को ट्रैक कर सकें। ग्रुप चैट्स में 1,000 सदस्यों तक सपोर्ट, वॉइस नोट्स, मीडिया शेयरिंग, और ब्रॉडकास्ट चैनल्स जहां कंटेंट क्रिएटर्स या बिजनेस अपडेट्स शेयर कर सकते हैं। ऐप में कोई विज्ञापन नहीं हैं, और यह लो-मेमोरी फोन्स पर भी तेज चलती है, जो इसे शहरी और ग्रामीण दोनों यूजर्स के लिए सुलभ बनाती है।
व्हाट्सएप से तुलना करें तो अरट्टई भारतीय मूल की है, डेटा भारत में रखती है, और कोई डेटा मॉनेटाइजेशन नहीं करती, जबकि व्हाट्सएप वैश्विक है और कभी-कभी डेटा प्राइवेसी पर सवाल उठते हैं। हालांकि, अरट्टई अभी शुरुआती दौर में है, और इसमें सर्वर ओवरलोड से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे ओटीपी डिले या कॉल ग्लिचेस देखी गई हैं, जिन्हें जोहो जल्द ठीक करने का दावा कर रहा है। कंपनी नवंबर 2025 में एक बड़ा अपडेट प्लान कर रही है, जिसमें और फीचर्स जोड़े जाएंगे। कुल मिलाकर, अरट्टई न सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप है, बल्कि डिजिटल स्वतंत्रता और प्राइवेसी का प्रतीक बन रही है, जो भारत के आत्मनिर्भर सपने को साकार करने में योगदान दे रही है।
