अमेरिकी और चीनी अधिकारियों के बीच व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति के बाद एशियाई बाजारों और अमेरिकी शेयर वायदा में तेजी
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापार तनाव में कुछ राहत की उम्मीद जगी है। रविवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच व्यापार सौदे की एक प्रारंभिक रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद अमेरिकी शेयर वायदा में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। यह विकास चीनी सामानों पर प्रस्तावित 157% तक की टैरिफ बढ़ोतरी को टालने की संभावना को मजबूत करता है, जो अन्यथा वैश्विक व्यापार को और गहरा संकट में डाल सकता था। इसके अलावा, निवेशक फेडरल रिजर्व से एक और ब्याज दर कटौती की अपेक्षा कर रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में मददगार साबित हो सकती है। यह खबर बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है, विशेष रूप से तब जब इस महीने के प्रारंभ में दोनों वैश्विक महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के कारण बाजारों में भारी बिकवाली का दौर चला था। उस बिकवाली ने वैश्विक निवेशकों को चिंतित कर दिया था, लेकिन अब रूपरेखा पर सहमति से बाजारों में विश्वास बहाल हो रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यह रूपरेखा दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का परिणाम है, जो पिछले कई महीनों से गतिरोध का शिकार थीं।
डाउ जोन्स वायदा 0.65% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था, जबकि एसएंडपी 500 वायदा 0.74% ऊपर था। नैस्डैक वायदा में सबसे अधिक तेजी देखी गई, जो 0.92% चढ़ गया। ये आंकड़े अमेरिकी पूर्वी समयानुसार शाम 6:29 बजे के थे, जब एशियाई बाजार बंद हो चुके थे और यूरोपीय बाजार खुलने की तैयारी कर रहे थे। शुक्रवार को डाउ इंडस्ट्रियल एवरेज पहली बार 47,000 अंकों के ऊपर बंद हुआ था, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है। यह उछाल सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) डेटा से प्रेरित था, जिसमें वार्षिक मुद्रास्फीति दर अपेक्षाओं से कम 3.7% पर रही। यह दर जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर थी, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में स्थिरता का संकेत देती है। सीएनएन बिजनेस की विश्लेषण रिपोर्ट बताती है कि यह डेटा केंद्रीय बैंक—फेडरल रिजर्व—की आगामी नीति बैठक के लिए महत्वपूर्ण है, जहां ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की संभावना 85% से अधिक आंकी गई है। फेडरल रिजर्व के चेयर जेरोम पॉवेल ने हाल ही में बयानों में इंगित किया था कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखते हुए आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए दर कटौती आवश्यक है। इस सप्ताह की बैठक से निवेशकों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, जो शेयर बाजारों को और ऊंचाई प्रदान कर सकती है।
एशियाई बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया और वैश्विक प्रभाव
एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों ने भी इस सकारात्मक खबर का तुरंत स्वागत किया, जो अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में सुधार की उम्मीदों को प्रतिबिंबित करता है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में जापान का बेंचमार्क निक्केई 225 सूचकांक 1.9% की मजबूत बढ़त के साथ खुला, जो टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज पर सक्रियता को दर्शाता है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2.4% उछल गया, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.28% ऊपर ट्रेड कर रहा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह तेजी मुख्य रूप से व्यापार तनाव कम होने की संभावना से प्रेरित है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह प्रभावित कर रही थीं। एशियाई बाजारों की यह प्रतिक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन और उसके पड़ोसी देश इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और विनिर्माण क्षेत्रों में गहराई से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश दुर्लभ मिट्टियों और अन्य कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं, इसलिए टैरिफ टलने से उनकी कंपनियों को राहत मिलेगी। ब्लूमबर्ग की मार्केट एनालिसिस के अनुसार, हैंग सेंग की बढ़त में चीनी टेक कंपनियों जैसे टेनसेंट और एलीबाबा के शेयरों का बड़ा योगदान रहा, जो व्यापार युद्ध से सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। कुल मिलाकर, एशियाई बाजारों का यह प्रदर्शन वैश्विक निवेशकों को आश्वस्त कर रहा है कि अमेरिका-चीन सौदा न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाएगा।
ट्रंप-शी जिनपिंग की आगामी बैठक और राजनयिक दौरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दक्षिण-पूर्व एशिया का राजनयिक दौरा अब चरम पर पहुंचने वाला है। इस गुरुवार को वे दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे, जो इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। व्हाइट हाउस की आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, ट्रंप का यह दौरा व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें अमेरिका के प्रमुख व्यापार साझेदारों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं शामिल हैं। ट्रंप ने अपने दौरे के दौरान कई एशियाई नेताओं से मुलाकात की है, जो अमेरिकी हितों को मजबूत करने का प्रयास है। दक्षिण कोरिया में होने वाली यह बैठक अमेरिका-चीन संबंधों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता व्यक्तिगत रूप से सौदे की रूपरेखा को अंतिम रूप देने वाले हैं।
वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संबंध हाल ही में तब तनावपूर्ण हो गए जब चीन ने महत्वपूर्ण दुर्लभ मिट्टी खनिजों (रेर अर्थ मिनरल्स) पर निर्यात प्रतिबंधों को कड़ा करने की घोषणा की। ये खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए आधारभूत हैं, जिनका उपयोग सैटेलाइट्स, स्मार्टफोन्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और उपभोक्ता उपकरणों जैसे उत्पादों के निर्माण में होता है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन वैश्विक परिष्कृत दुर्लभ मिट्टियों के 90% से अधिक उत्पादन को नियंत्रित करता है, जो इसे व्यापार वार्ताओं में एक शक्तिशाली कार्ड प्रदान करता है। अमेरिका के लिए यह निर्भरता एक रणनीतिक चुनौती है, क्योंकि ये खनिज रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को “आर्थिक जबरदस्ती” करार दिया था।
इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने मौजूदा टैरिफ दरों के अलावा अतिरिक्त 100% शुल्क लगाने की धमकी दी, जो चीनी आयात पर कुल टैरिफ को 157% तक पहुंचा सकता था। बीजिंग ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी उपायों की चेतावनी जारी की, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई। यह तनाव पिछले महीने से चल रहा था, जब चीन ने पर्यावरणीय और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर निर्यात प्रतिबंध लगाए थे।
ट्रेजरी सचिव की आशावादी टिप्पणियां और सौदे की संभावनाएं
रविवार को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने शी जिनपिंग और ट्रंप की आगामी बैठक से पहले मजबूत आशावाद व्यक्त किया। मलेशिया के कुआलालंपुर से एबीसी न्यूज के कार्यक्रम “दिस वीक” में बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि हम दोनों नेताओं की अगले गुरुवार को होने वाली बैठक के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार कर चुके हैं, जिसके तहत टैरिफों को पूरी तरह टाला जा सकेगा।” बेसेन्ट ने जोर दिया कि यह रूपरेखा दोनों देशों के आर्थिक हितों को संतुलित करती है। बाद में एनबीसी के “मीट द प्रेस” कार्यक्रम पर उन्होंने रूपरेखा का विस्तृत विवरण तो नहीं साझा किया, लेकिन इंगित किया कि अमेरिका को दुर्लभ मिट्टी निर्यात नियंत्रणों पर “कुछ प्रकार का अस्थायी स्थगन या छूट” मिलने की उम्मीद है। यह स्थगन अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए राहत पैदा करेगा, जो इन खनिजों की कमी से जूझ रही थीं।
शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सकारात्मक संकेत दिए, जब उन्होंने कहा कि वे कुछ रियायतें देने को तैयार हैं और एक “बहुत व्यापक और लाभदायक सौदे” की “बहुत अच्छी संभावना” है। ट्रंप की यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया पोस्ट से आई, जहां उन्होंने एशियाई दौरे की प्रगति पर संतुष्टि जताई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि रूपरेखा में टैरिफ स्थगन के अलावा बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा, बाजार पहुंच में सुधार और कृषि निर्यात पर सहमति शामिल हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा न केवल तत्काल राहत देगा बल्कि लंबे समय में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा।
व्यापार युद्ध के व्यापक प्रभाव और किसानों पर असर
अमेरिका-चीन टैरिफ युद्ध ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है, जो मुद्रास्फीति से लेकर कृषि क्षेत्र तक फैला हुआ है। पिछले दो वर्षों में इस युद्ध ने अमेरिकी निर्यात को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार तनाव के कारण अमेरिकी निर्यात में $27 बिलियन से अधिक की कमी आई है, जिसमें विनिर्माण और कृषि उत्पाद प्रमुख रूप से प्रभावित हुए हैं। मुद्रास्फीति पर भी इसका असर पड़ा, क्योंकि आयातित सामानों की कीमतें बढ़ीं, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ा।
किसानों पर इसका प्रभाव सबसे कठोर रहा है, खासकर सोयाबीन उत्पादकों पर। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के सितंबर 2025 के डेटा के मुताबिक, चीन 2024 में अमेरिकी सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार था, जिसकी कीमत $12.5 बिलियन थी। लेकिन मई 2025 से चीन ने कोई भी अमेरिकी सोयाबीन नहीं खरीदा है, जो चीनी प्रतिबंधों और जवाबी टैरिफों का परिणाम है। यह कमी ने मिडवेस्ट के किसानों को परेशान किया है, जहां सोयाबीन फसलें अर्थव्यवस्था का आधार हैं। यूएसडीए के अनुसार, इस वर्ष सोयाबीन निर्यात 40% गिर गया है, जिससे किसानों को सरकारी सब्सिडी पर निर्भर होना पड़ा है।
इस सप्ताह होने वाली नेताओं की बैठक में अंतिम सौदे की उम्मीद है, जिसमें किसानों को विशेष राहत मिलेगी। सौदे में सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बहाल करने पर सहमति शामिल हो सकती है, साथ ही दुर्लभ मिट्टियों पर नियंत्रण कम करने और टैरिफ स्थगित करने के प्रावधान। यह विकास न केवल अमेरिकी किसानों को लाभ पहुंचाएगा बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी स्थिर करेगा। कुल मिलाकर, यह सौदा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ एशियाई आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे वैश्विक बाजारों में दीर्घकालिक स्थिरता आएगी।
