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हिंदी न्यूज़ विदेश ट्रंप ने चीन के आयात पर लगाया 100% अतिरिक्त शुल्क, ‘महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर’ पर निर्यात नियंत्रण बढ़ाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अक्टूबर 2025 को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 1 नवंबर से अमेरिका, चीन से आयातित सभी सामानों पर मौजूदा शुल्क से ऊपर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। इसके साथ ही, अमेरिका 1 नवंबर से “सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर” (critical software) पर भी निर्यात नियंत्रण लगाएगा। यह कदम दो वैश्विक आर्थिक महाशक्तियों के बीच बढ़ते व्यापार विवाद को और बढ़ावा देगा।

अमेरिका चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि चीन ने दुनिया को एक “बेहद आक्रामक और शत्रुतापूर्ण पत्र” भेजा है जिसमें कहा गया है कि 1 नवंबर से चीन लगभग हर उत्पाद पर बड़े पैमाने पर निर्यात नियंत्रण लगाएगा, जिनमें से कई वस्तुएं वे खुद भी नहीं बनाते। उन्होंने बताया यह नीति सभी देशों को प्रभावित करेगी और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अभूतपूर्व माना जा सकता है। इस प्रतिक्रिया में, अमेरिका ने चीन के उत्पादों पर वर्तमान टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अब चीन से आयातित वस्तुओं पर कुल प्रभावी टैरिफ 130% तक पहुंच जाएगा, जो इस वर्ष अप्रैल में लगाए गए 145% के उच्चतम स्तर के करीब है।

निर्यात नियंत्रण में ‘सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर’ शामिल

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 1 नवंबर से सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर भी अमेरिकी निर्यात नियंत्रण लगाया जाएगा। उनकी इस घोषणा का मकसद अमेरिकी तकनीकी सुरक्षा को बढ़ाना और चीन के हाल के निर्यात प्रतिबंधों के जवाब में कड़ी नीति अपनाना है।

चीन का निर्यात नियंत्रण और रेयर अर्थ खनिज

चीन ने हाल ही में अपने रेयर अर्थ खनिजों पर निर्यात नियंत्रणों को कड़ा कर दिया है। लगभग 70% वैश्विक रेयर अर्थ मिनरल्स चीन से आते हैं, जो उच्च तकनीक उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और सेमीकंडक्टर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने घोषणा की कि 1 दिसंबर 2025 से विदेशी कंपनियों को उन उत्पादों के निर्यात के लिए लाइसेंस लेना होगा जिनमें 0.1% से अधिक रेयर अर्थ घटक हों या जो चीनी तकनीक से निर्मित हों। इसके अलावा, चीन ने खनन, शोधन, मैग्नेट बनाने और रीसाइक्लिंग तकनीकों पर भी सख्त नियंत्रण लगा दिए हैं।

अमेरिका-चीन के बीच तल्ख व्यापारिक रिश्ते

इस कदम से पहले ही अमेरिका ने चीन से आयातित अधिकांश वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाए हुए हैं, जिनमें स्टील और एल्युमीनियम पर 50% और उपभोक्ता वस्तुओं पर लगभग 7.5% टैरिफ शामिल हैं। प्रभावी टैरिफ दर फिलहाल लगभग 40% है। ट्रंप ने कहा कि चीन की इस विस्तारवादी निर्यात नियंत्रण नीति के जवाब में अमेरिका कड़ा रुख अपनाएगा।

APEC शिखर सम्मेलन पर अनिश्चितता

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसे तनाव के कारण 1 नवंबर के बाद दक्षिण कोरिया में होने वाले Asia-Pacific Economic Cooperation शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक रद्द हो सकती है। उन्होंने कहा कि “इस स्थिति में मुलाकात का कोई कारण नहीं दिखता”। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वे बैठक के लिए दक्षिण कोरिया जरूर जाएंगे और हो सकता है कि बैठक हो भी जाए।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर प्रभाव

इस नए टैरिफ और निर्यात नियंत्रण नीति का प्रभाव वैश्विक उद्योगों पर भी पड़ेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, खासकर सेमीकंडक्टर उद्योग को भारी चुनौती मिलेगी क्योंकि चीन इस क्षेत्र में प्रमुख कच्चा माल और प्रौद्योगिकी स्रोत है।
  • ऑटोमोबाइल उद्योग में, खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में उत्पादन लागत बढ़ेगी।
  • रक्षा उद्योगों में भी जरूरी मटेरियल की उपलब्धता और कीमतों में असर पड़ेगा।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले महीनों में ये संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं और अन्य देशों को भी उनकी व्यापार नीतियों को संशोधित करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

इस पूरी स्थिति का प्रभाव न केवल अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध को तेज करेगा, बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी और रक्षा निर्माण क्षेत्रों में भी अस्थिरता ला सकता है। यह कदम व्यापक रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों और नीतियों की पुनर्समीक्षा की जरूरत को भी दर्शाता है।

ट्रंप के इस आदेश से चीन के साथ अमेरिकी व्यापार पर पहले से मौजूद तनाव और ज़ोरदार हो गया है, जो 2025 के दौरान पहले भी कई बार टैरिफ और नीतिगत झटकों का विषय रहा। अब सामने आया है कि दोनों देशों के बीच यह तनाव अगले स्तर पर पहुंच चुका है।

यह जानकारी सी. एन. बी. सी. और बी. बी. सी. से ली गई है।