स्वास्थ्य

थायरॉइड की समस्याओं को समझनाः भारतीयों के लिए लक्षण और आहार युक्तियाँ

आजकल जब मैं अपने आसपास देखता हूँ, तो हर दूसरे-तीसरे घर में कोई न कोई ऐसा मिल जाता है जो सुबह उठते ही सबसे पहले एक छोटी सी गोली खाता है। खासकर हमारी माताओं और बहनों में यह परेशानी बहुत आम हो गई है। जब अचानक शरीर का वजन बढ़ने लगे, बाल झड़ने लगें या बिना कोई भारी काम किए शरीर टूटता हुआ महसूस हो, तो सबसे पहला शक इसी बीमारी पर जाता है।

हम अक्सर इस थकान को रोजमर्रा के काम का बोझ समझकर टाल देते हैं, लेकिन असल में हमारा शरीर हमें कुछ गंभीर संकेत दे रहा होता है। अगर सही समय पर थायराइड के लक्षण और डाइट को अच्छी तरह समझ लिया जाए, तो इस परेशानी को बहुत आसानी से काबू में किया जा सकता है। हम भारतीय खाने के बहुत शौकीन होते हैं और सबसे अच्छी बात यह है कि हमारी रसोई में ही ऐसे कई अचूक मसाले और अनाज मौजूद हैं जो इस बीमारी को नियंत्रित करने में हमारी बहुत मदद कर सकते हैं। सही खानपान और दिनचर्या को अपनाकर हम इस समस्या को अपने जीवन पर हावी होने से पूरी तरह रोक सकते हैं।

थायराइड ग्रंथि क्या है और यह कैसे काम करती है?

हमारे गले के निचले हिस्से में, सांस की नली के ठीक सामने एक बहुत ही छोटी सी ग्रंथि होती है जिसका आकार बिल्कुल एक तितली जैसा लगता है। इसे ही हम मुख्य रूप से थायराइड ग्रंथि कहते हैं। शरीर के भीतर इसका काम बहुत सीधा सा लेकिन हमारी पूरी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। यह ग्रंथि हमारे खून से आयोडीन लेकर मुख्य रूप से दो तरह के रस या हार्मोन बनाती है जिन्हें हम अपनी आसान भाषा में टी-तीन और टी-चार कह सकते हैं। जब हम कोई भी खाना खाते हैं, तो यही ग्रंथि तय करती है कि उस खाने से मिलने वाली ऊर्जा का हमारे शरीर में किस तरह और कितनी तेजी से इस्तेमाल होगा।

आपका दिल कितनी तेजी से धड़केगा, आपका खाया हुआ भोजन कितनी जल्दी पचेगा और आपके शरीर का अंदरूनी तापमान कितना रहेगा, यह सब इसी तितली जैसी छोटी ग्रंथि के हाथ में होता है। जब किसी भी बाहरी या भीतरी वजह से यह अपना काम ठीक से नहीं कर पाती और इन रसों का संतुलन बिगड़ जाता है, तब हमारे शरीर की पूरी अंदरूनी मशीनरी गड़बड़ाने लगती है और हमें कई तरह की शारीरिक परेशानियां घेरने लगती हैं।

ग्रंथि से जुड़ी मुख्य बातें सरल विवरण
शरीर में स्थान गले के निचले हिस्से में सांस की नली के पास
ग्रंथि की बनावट बिल्कुल एक छोटी सी तितली के आकार की
मुख्य काम शरीर के तापमान और ऊर्जा को पूरी तरह नियंत्रित करना
परेशानी का कारण रसों या हार्मोन का जरूरत से ज्यादा या कम बनना

थायराइड के मुख्य प्रकार जो हमें प्रभावित करते हैं

चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसके कई अलग-अलग रूप हो सकते हैं, लेकिन हमारी आम जिंदगी में लोगों को मुख्य रूप से दो तरह की परेशानियां सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती हैं। इन दोनों ही स्थितियों में हमारा शरीर बिल्कुल अलग-अलग तरीके से बर्ताव करता है और उनके संकेत भी एक-दूसरे से पूरी तरह विपरीत होते हैं। इसे आप अपनी साधारण भाषा में सुस्त ग्रंथि वाली बीमारी कह सकते हैं। इस स्थिति में यह ग्रंथि अपनी जरूरत से बहुत कम मात्रा में रस बनाती है। जब शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप से काम करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती, तो शरीर की पूरी रफ्तार बेहद धीमी पड़ जाती है। शरीर की चयापचय प्रक्रिया यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की ताकत इतनी सुस्त हो जाती है कि खाया हुआ खाना ऊर्जा में बदलने के बजाय चर्बी में बदलने लगता है।

भारत में सबसे ज्यादा मरीज इसी समस्या का शिकार होते हैं और उन्हें जीवन भर इस सुस्ती का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ इसका अतिसक्रिय रूप होता है जो पहले वाले प्रकार का बिल्कुल उल्टा है जहाँ शरीर की ऊर्जा जरूरत से ज्यादा खर्च होने लगती है। इसमें आपकी ग्रंथि जरूरत से ज्यादा तेज काम करने लगती है और बहुत अधिक मात्रा में रस सीधे आपके खून में छोड़ने लगती है। इससे शरीर की मशीनरी अपनी तय गति से कहीं ज्यादा तेज चलने लगती है जो शरीर को अंदर ही अंदर थका देती है। ऐसे में इंसान बहुत ज्यादा पौष्टिक खाना खाने के बाद भी लगातार कमजोर होता जाता है और उसका वजन तेजी से गिरने लगता है।

बीमारी का प्रकार शरीर पर होने वाला सीधा असर ऊर्जा में बदलाव
सुस्त ग्रंथि (कम काम करना) भोजन चर्बी में बदलने लगता है और वजन बढ़ता है शरीर में ऊर्जा की कमी और हर वक्त सुस्ती
अतिसक्रिय ग्रंथि (ज्यादा काम करना) शरीर अंदर से खोखला होने लगता है और वजन घटता है जरूरत से ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है और थकान होती है

शरीर में थायराइड के लक्षण और डाइट का महत्व

शरीर में थायराइड के लक्षण और डाइट का महत्व

बीमारी कोई भी हो, हमारा शरीर हमेशा हमें पहले से कुछ न कुछ चेतावनी जरूर देता है जिसे हमें पहचानना आना चाहिए। कई बार ये संकेत इतने आम और मामूली होते हैं कि हम इन्हें मौसम का बदलाव या काम की थकान समझकर पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं। अगर आप सही वक्त पर थायराइड के लक्षण और डाइट के गहरे तालमेल को समझ लें, तो इस बीमारी को गंभीर रूप लेने से पहले ही रोका जा सकता है। अगर आपकी ग्रंथि सुस्त पड़ गई है, तो आपको अपने शरीर में रोजमर्रा के कई अजीब बदलाव महसूस होंगे जो आपको परेशान कर सकते हैं। सबसे पहला और बड़ा असर आपके कपड़ों के आकार पर दिखता है, क्योंकि आपका वजन बिना ज्यादा खाए भी तेजी से बढ़ने लगता है। सुबह आठ घंटे सोकर उठने के बाद भी शरीर में भारीपन और हर वक्त एक अजीब सी थकान बनी रहती है।

त्वचा में बहुत ज्यादा रूखापन आ जाता है, एड़ियां फटने लगती हैं और सिर के बाल गुच्छों में झड़ने लगते हैं। इसके अलावा आपकी पाचन शक्ति इतनी कमजोर हो जाती है कि कब्ज की शिकायत रहने लगती है और किसी भी काम में ध्यान लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। दूसरी तरफ अगर आपकी यह ग्रंथि बहुत ज्यादा काम कर रही है, तो आपके शरीर के लक्षण पहले वाले से बिल्कुल बदल जाते हैं। इसमें बिना किसी कोशिश या कम खाए भी शरीर का वजन बहुत तेजी से गिरने लगता है और इंसान हड्डियों का ढांचा दिखने लगता है। बैठे-बैठे भी आपको अपने दिल की धड़कन बहुत तेज महसूस होती है और छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा घबराहट होने लगती है। कई बार लोगों को अपने हाथों में हल्का कंपन भी महसूस होता है, जैसे हाथ अपने आप कांप रहे हों। रात को गहरी नींद न आना, बिना गर्मी के भी बहुत ज्यादा पसीना आना और बार-बार शौच के लिए जाना इस बात का पक्का संकेत है।

ग्रंथि की स्थिति रोजमर्रा के सामान्य लक्षण जो आसानी से दिखते हैं
जब ग्रंथि सुस्त हो जाए बिना वजह वजन बढ़ना, बाल झड़ना, हमेशा कब्ज रहना, बहुत ज्यादा ठंड लगना
जब ग्रंथि अतिसक्रिय हो जाए तेजी से वजन गिरना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथों का कांपना, घबराहट होना

महिलाओं और पुरुषों में थायराइड का अलग-अलग असर

हालाँकि यह बीमारी किसी की भी उम्र या महिला-पुरुष देखकर नहीं आती, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े साफ बताते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को इसका खतरा कई गुना ज्यादा होता है। दोनों के शरीरों की बनावट अलग होने के कारण इसके दुष्प्रभाव भी अलग-अलग होते हैं। महिलाओं के शरीर में उनकी पूरी जिंदगी के दौरान कई तरह के अंदरूनी बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। खासकर जब कोई महिला मां बनने वाली होती है या जब उसकी उम्र ढलने लगती है, तब यह ग्रंथि बहुत ज्यादा नाजुक हो जाती है। इसका सबसे सीधा और बुरा असर महिलाओं के मासिक धर्म पर पड़ता है जिससे उनका पूरा चक्र बिगड़ जाता है। मासिक धर्म का समय पर न आना, बहुत ज्यादा पीड़ा होना या अत्यधिक रक्तस्राव होना एक बहुत ही आम समस्या बन जाती है।

कई बार जो महिलाएं मां बनना चाहती हैं, उन्हें भी इस हार्मोन की कमी या अधिकता के कारण गर्भधारण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं पुरुषों में इस बीमारी के मामले थोड़े कम सामने आते हैं, शायद इसलिए क्योंकि वे अपने स्वास्थ्य और छोटे-मोटे दर्द को लेकर अक्सर लापरवाह होते हैं और वैद्य के पास नहीं जाते। पुरुषों में इसके कारण सिर के बालों का बहुत तेजी से झड़ना और शरीर की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी आना मुख्य है। जो पुरुष नियमित रूप से अखाड़े या व्यायामशाला जाते हैं, उन्हें अक्सर लगता है कि उनके शरीर की ताकत कम हो गई है और वे जल्दी थक जाते हैं। कई बार यह बीमारी पुरुषों के यौन स्वास्थ्य और उनके पिता बनने की क्षमता पर भी बहुत बुरा असर डालती है जिससे उनका वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण हो जाता है।

प्रभावित वर्ग स्वास्थ्य पर पड़ने वाले मुख्य और गंभीर प्रभाव
महिलाएं मासिक धर्म का बिगड़ना, मां बनने में परेशानी आना, बिना बात चिड़चिड़ापन
पुरुष मांसपेशियों की ताकत कम होना, सिर के बालों का झड़ना, यौन स्वास्थ्य में गिरावट

थायराइड के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं?

यह बीमारी रातों-रात या अचानक से किसी को नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई साल की गलतियां होती हैं। इसके पीछे कई ऐसे कारण छिपे होते हैं जिन्हें हम अक्सर अपनी भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में पछताते हैं। हमारा अपना शरीर जो हमें बीमारियों से बचाता है, वह कभी-कभी गलती से हमारी अपनी इसी ग्रंथि को ही बाहरी दुश्मन समझकर उस पर अंदर से हमला कर देता है। इस स्थिति को चिकित्सा की भाषा में एक विशेष नाम दिया गया है जो सुस्त ग्रंथि का सबसे बड़ा कारण बनता है।

इसके अलावा हमारे रोजमर्रा के खानपान में नमक और आयोडीन की भारी कमी या जरूरत से ज्यादा अधिकता भी इसका एक बहुत बड़ा कारण है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बहुत ज्यादा मानसिक तनाव लेना, रातों को देर तक जागना और बाहर का गलत खानपान हमारे शरीर के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। कई लोगों को यह बीमारी अपने माता-पिता या दादा-दादी से जन्म के साथ ही मिलती है, जिसे हम आनुवंशिक कारण भी कहते हैं। इन सभी कारणों को जानकर ही हम अपनी आगे की जिंदगी को सुरक्षित कर सकते हैं।

बीमारी के मुख्य कारण यह हमारे शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचाता है
शरीर का खुद पर हमला रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से गले की ग्रंथि को ही नष्ट करने लगती है
आयोडीन की कमी खाने में आयोडीन कम होने से शरीर जरूरी रस नहीं बना पाता
अत्यधिक मानसिक तनाव चिंता के कारण शरीर में बुरे रस बढ़ते हैं जो ग्रंथि को काम करने से रोकते हैं
जन्मजात कारण माता-पिता से यह बीमारी खून के जरिए बच्चों तक आसानी से पहुंच जाती है

भारतीयों के लिए असरदार थायराइड डाइट प्लान

जब आप किसी वैद्य या चिकित्सक के पास जाते हैं तो वे आपको तुरंत एक गोली थमा देते हैं, लेकिन जिंदगी भर सिर्फ एक गोली के भरोसे रहना कोई समझदारी का काम नहीं है। एक सही और संतुलित आहार का होना सबसे ज्यादा जरूरी है और यही थायराइड के लक्षण और डाइट का असली महत्व है। हमारी भारतीय रसोई में हर वो चमत्कारी चीज मौजूद है जो इस बीमारी को जड़ से प्रबंधित करने में आपकी पूरी मदद कर सकती है। अगर आपको सुस्त ग्रंथि वाली परेशानी है, तो आपको ऐसा भोजन खाना चाहिए जो आपके शरीर की चयापचय प्रक्रिया को तेज करे और आपको भरपूर ऊर्जा दे। छिलके वाले अनाज जैसे दलिया, भूरा चावल, रागी और बाजरा अपनी रोज की थाली में जरूर शामिल करें क्योंकि इनमें मौजूद रेशा आपके पेट को साफ रखता है। सूखे धनिये के बीजों का पानी इस बीमारी में किसी जादू या संजीवनी बूटी से कम नहीं है।

रात में एक चम्मच सूखा धनिया एक गिलास पानी में अच्छी तरह भिगो दें और सुबह उसे आधा होने तक धीमी आंच पर उबालकर छान लें और चाय की तरह पिएं। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो आपकी दवा के असर को बिल्कुल खत्म कर देती हैं, इसलिए उनसे दूरी बनाना बहुत जरूरी है। सोयाबीन और सोया से बनी चीजें जैसे सोया की बड़ी या उसका दूध बिल्कुल बंद कर दें क्योंकि ये आपके शरीर में रस बनने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर रोकते हैं। कच्ची पत्ता गोभी, फूलगोभी, और शलजम का सेवन कच्चा सलाद के रूप में बिल्कुल न करें। अगर आपका शरीर जरूरत से ज्यादा तेज काम कर रहा है, तो आपको आयोडीन वाली चीजें कम खानी चाहिए ताकि ग्रंथि शांत रह सके। ऐसे में दूध, घर का बना पनीर और ताजी दही आपके लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इस बीमारी में शरीर की हड्डियां अंदर ही अंदर खोखली और कमजोर होने लगती हैं।

आपके लिए क्या खाना सही है आपको किन चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी है
छिलके वाले अनाज, दलिया, भूरा चावल, ताजे फल बाजार का सफेद आटा, बहुत ज्यादा चीनी, डिब्बाबंद खाना
सूखे धनिये का उबला पानी, दूध, घर का दही, मेवे सोयाबीन से बनी कोई भी चीज, कच्ची फूलगोभी या पत्ता गोभी

एक आसान और घरेलू थायराइड डाइट चार्ट

मोटी-मोटी किताबों में पढ़ना बहुत आसान लगता है लेकिन उसे अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ वाली जिंदगी में उतारना उतना ही मुश्किल होता है। इसलिए मैंने एक बहुत ही सामान्य और घर के शुद्ध खाने से जुड़ा एक आसान आहार पत्रक तैयार किया है जिसे कोई भी अपना सकता है। आप अपने शरीर और थायराइड के लक्षण और डाइट के इस नियम को अपनी भूख के हिसाब से थोड़ा बहुत घटा या बढ़ा सकते हैं। सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी नियमित दवा लें और उसके पैंतालीस मिनट तक भूलकर भी कुछ न खाएं-पिएं ताकि दवा खून में मिल सके। इसके बाद आप हल्का गर्म पानी पिएं जिसमें ताजे नींबू की कुछ बूंदें हों या फिर धनिये के बीजों का उबला हुआ पानी घूंट-घूंट करके पिएं।

सुबह के नाश्ते में आप चने के आटे का चीला, खूब सारी हरी सब्जियों वाला पोहा या सूजी का उपमा पेट भर खा सकते हैं। इसके साथ एक छोटी कटोरी ताजी और घर की जमी हुई दही लेना आपके पेट के लिए बहुत अच्छा रहेगा। दोपहर के खाने में कोशिश करें कि आपकी दो रोटियां कई तरह के अनाजों को मिलाकर बनी हों और साथ में दाल व भरपूर सलाद हो। शाम की भूख के लिए बिना चीनी वाली हरी चाय और भुने हुए चने खाएं। रात का खाना हमेशा सोने से कम से कम दो घंटे पहले और बहुत ही हल्का होना चाहिए ताकि वह आसानी से पच सके, जैसे सब्जियों का रस या उबली हुई लौकी की सब्जी।

समय घर पर आसानी से बनने वाले सेहतमंद भोजन के विकल्प
सुबह का सबसे पहला काम अपनी दवा खाएं और एक घंटे बाद उबले हुए धनिये का पानी पिएं
पौष्टिक नाश्ता चने का चीला या सब्जियों से भरा उपमा और एक छोटी कटोरी दही
दोपहर का भरपेट भोजन मिले-जुले अनाज की रोटी, एक कटोरी दाल, ताजी हरी सब्जी और सलाद
शाम की हल्की भूख के लिए बिना चीनी वाली चाय और साथ में मुट्ठी भर भुने हुए चने या मखाने
रात का सबसे हल्का भोजन आसानी से पचने वाली लौकी या तरोई की सब्जी और एक पतली रोटी

जीवनशैली में जरूरी बदलाव जो दवा से भी ज्यादा काम आते हैं

मैंने अपनी जिंदगी में ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो सिर्फ अच्छा और महंगा खाना खाते हैं और सोचते हैं कि बिना कुछ किए सब ठीक हो जाएगा। लेकिन पूरा सच तो यह है कि जब तक आप पसीना नहीं बहाएंगे, सिर्फ खाना सुधारने से कोई बड़ी बात नहीं बनेगी। आपको अपने पूरे दिन के रूटीन में छोटे-छोटे लेकिन बहुत कड़े बदलाव करने होंगे और अपने शरीर को बिस्तर से उठाकर थोड़ा फुर्तीला बनाना होगा। रोजाना सुबह या शाम को कम से कम चालीस मिनट का व्यायाम जरूर करें, भले ही आप सिर्फ खुली हवा में तेज कदमों से चलें।

आपको किसी महंगी जगह जाकर भारी लोहे के वजन उठाने की कोई जरूरत नहीं है, बस योग और प्राणायाम अपना लें। गले के व्यायाम वाले कुछ विशेष योगासन आपकी गले की इस ग्रंथि की अंदर से मालिश करते हैं और उसे दोबारा स्वस्थ रूप से काम करने के लिए मजबूर करते हैं। सबसे जरूरी और अहम बात यह है कि अपने दिमाग को शांत रखें और मानसिक तनाव को किसी भी कीमत पर खुद पर हावी न होने दें, क्योंकि चिंता चिता के समान होती है और यह आपके शरीर के सारे अच्छे रसों को सुखा देती है। रात के समय अपने मोबाइल और टीवी को खुद से दूर रखकर कम से कम आठ घंटे की अच्छी और बिना रुकावट वाली नींद लेना आपकी दवा से भी ज्यादा असरदार साबित होगा।

अच्छी आदतें जिन्हें अपनाना है इन आदतों का आपके बीमार शरीर पर क्या चमत्कारिक असर होगा
रोज खुली हवा में तेज चलना शरीर में ऊर्जा बढ़ेगी और जमा हुई फालतू चर्बी तेजी से कम होगी
गले के लिए विशेष योगासन गले की नसों में खून दौड़ेगा और ग्रंथि अपना काम ठीक से कर पाएगी
चिंता और तनाव से दूरी बनाना शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले रस कम होंगे और मन शांत रहेगा
रात में जल्दी और गहरी नींद लेना शरीर की अंदरूनी टूट-फूट की मरम्मत होगी और अगले दिन के लिए ताकत मिलेगी

अंतिम विचार

यह गले की बीमारी कोई ऐसी भयानक या जानलेवा परेशानी नहीं है जिससे आपको रात-दिन डरने या घबराने की जरूरत है। यह बस हमारे शरीर के काम करने के तरीके में आई एक छोटी सी अंदरूनी रुकावट है जिसे थोड़े से अनुशासन और संयम के साथ पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। आपको बस अपनी दिनचर्या सुधारनी है, बाहर के खराब खाने से दूरी बनानी है और घर के बने सादे, ताजे खाने को अपनी पहली पसंद बनाना है।

अगर आप अपने शरीर में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को समय रहते पहचान कर सही थायराइड के लक्षण और डाइट को अपनी जिंदगी का अटूट हिस्सा बना लेते हैं, तो आप एक बिल्कुल सामान्य, खुशहाल और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। हमेशा यह बात याद रखें कि हमारी छोटी-छोटी अच्छी आदतें और प्रकृति के करीब रहना ही एक मजबूत और निरोगी शरीर का असली निर्माण करती हैं।