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भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस स्टेशन में विस्फोट, नौ की मौत

भारत प्रशासित कश्मीर के प्रमुख शहर श्रीनगर के दक्षिणी इलाके नौगाम में स्थित एक पुलिस स्टेशन में शुक्रवार रात को जब्त किए गए विस्फोटकों के गोदाम के फटने से कम से कम नौ लोग मारे गए हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में 30 से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें कई पुलिसकर्मी, फोरेंसिक विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के घरों तक इसका असर महसूस किया गया, और कुछ शवों के टुकड़े 100 से 200 मीटर दूर बरामद हुए।​

यह घटना रात करीब 11:20 बजे हुई, जब फोरेंसिक टीम और पुलिस अधिकारी विस्फोटकों की जांच कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने इसे एक दुर्घटना बताया है, जो अस्थिर रसायनों के कारण हुई। घायलों को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) और भारतीय सेना के 92 बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां पांच लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ शव बुरी तरह जल चुके हैं और पहचान में कठिनाई हो रही है।​

हादसे का पूरा विवरण: जांच के दौरान हुई अनहोनी

नौगाम पुलिस स्टेशन में यह विस्फोट हाल ही में हरियाणा के फरीदाबाद से जब्त किए गए लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री के दौरान हुआ। ये विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट आधारित थे, जो बड़े हमलों के लिए इस्तेमाल होते हैं। पुलिस और फोरेंसिक टीम सैंपल निकालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रसायनों की अस्थिर प्रकृति के कारण अचानक धमाका हो गया। डीजीपी प्रभात ने कहा कि सामग्री को सावधानी से संभाला जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्य से यह हादसा हो गया।​

मृतकों में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के तीन सदस्य, राजस्व विभाग के दो अधिकारी, दो पुलिस फोटोग्राफर, स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के एक अधिकारी और एक दर्जी शामिल हैं, जो टीम के साथ काम कर रहा था। घायलों में 27 पुलिसकर्मी, दो राजस्व अधिकारी और तीन नागरिक हैं। विस्फोट ने स्टेशन की इमारत को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, कई वाहन जलकर खाक हो गए और आग की लपटें आसमान छूने लगीं।​

सीसीटीवी फुटेज से साफ पता चलता है कि धमाके का केंद्र स्टेशन के अंदर था, जहां विस्फोटक रखे गए थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि अचानक एक तेज चमक और धुआं उठा, जिसके बाद इमारत हिल गई। आसपास के निवासियों ने बताया कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि लगा जैसे भूकंप आ गया हो। फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और अतिरिक्त सुरक्षा बल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन क्षेत्र को सील कर दिया गया था, जिससे बचाव कार्य में थोड़ी देरी हुई।​

पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आतंकी हमला नहीं था, बल्कि जांच प्रक्रिया के दौरान हुई दुर्घटना। एनडीटीवी के वरिष्ठ संपादक आदित्य राज कौल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि फोरेंसिक टीम विस्फोटक सामग्री की जांच कर रही थी, जब यह हादसा हुआ। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अधिकारी स्टोरेज तथा हैंडलिंग के तरीकों की समीक्षा कर रहे हैं।​

दिल्ली कार धमाके से गहरा संबंध: जांच का नया मोड़

यह विस्फोट दिल्ली के रेड फोर्ट के पास सोमवार को हुए कार धमाके के ठीक चार दिन बाद हुआ है, जिसमें कम से कम 12-13 लोग मारे गए थे और 20 से अधिक घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने इसे आतंकी हमला करार दिया, जो पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और उसके कश्मीरी सहयोगी अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़ा था। उस धमाके में एक ह्युंडई आई20 कार में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) फिट किया गया था, जो रेड लाइट पर रुकी थी।​

दिल्ली जांच के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से विस्फोटक जब्त किए थे, जो नौगाम स्टेशन पर लाए गए। संदिग्धों में डॉक्टर उमर नबी, डॉक्टर मुजम्मिल शकील और डॉक्टर शाहीन सईद जैसे रेडिकलाइज्ड पेशेवर शामिल थे, जो जेईएम के विदेशी हैंडलर्स से संपर्क में थे। उमर नबी को कार धमाके के ड्राइवर के रूप में पहचाना गया, और जांचकर्ताओं का मानना है कि विस्फोटकों की जब्ती से घबरा कर उन्होंने आईईडी को ठीक से असेंबल नहीं किया।​

नौगाम पुलिस स्टेशन ने ही जेईएम के पोस्टरों की जांच शुरू की थी, जो कश्मीर में सुरक्षा बलों और ‘बाहरी लोगों’ पर हमले की धमकी देते थे। अक्टूबर में डॉक्टर आदिल अहमद राथर को गिरफ्तार किया गया, जो इन पोस्टरों को लगाते कैद में पकड़ा गया। उसके लॉकर से असॉल्ट राइफल बरामद हुई। इस जांच से ‘व्हाइट-कॉलर टेरर इकोसिस्टम’ का पर्दाफाश हुआ, जिसमें रेडिकलाइज्ड छात्र और डॉक्टर पाकिस्तान व अन्य देशों के हैंडलर्स से जुड़े थे।​

दिल्ली धमाके के बाद 650 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, और रेड अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छापेमारी हुई। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली मामले को अपने हाथ में ले लिया है, जबकि कश्मीर पुलिस नौगाम हादसे की अलग से जांच कर रही है। इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, और अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।​

कश्मीर विवाद की पृष्ठभूमि: लंबे समय से चला आ रहा तनाव

कश्मीर का विभाजन 1947 में भारत और पाकिस्तान के ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद हुआ था। दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश इस हिमालयी क्षेत्र पर पूर्ण दावा करते हैं, लेकिन केवल आंशिक नियंत्रण रखते हैं। 1947, 1965 और 1999 में तीन युद्ध हो चुके हैं, और सीमा पर तनाव हमेशा बना रहता है। भारत ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर कश्मीर की विशेष स्थिति समाप्त कर दी, जिससे पाकिस्तान के साथ संबंध और खराब हो गए।​

जेईएम जैसे पाकिस्तान स्थित समूह कश्मीर में भारत के शासन को चुनौती देते हैं। हाल के वर्षों में पारंपरिक उग्रवाद के अलावा ‘व्हाइट-कॉलर टेरर’ नेटवर्क उभरे हैं, जहां शिक्षित पेशेवर जैसे डॉक्टर और छात्र सोशल मीडिया व एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए हैंडलर्स से जुड़ते हैं। ये नेटवर्क बड़े हमलों की योजना बनाते हैं, जैसे दिल्ली धमाका।​

इस हादसे के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शोक व्यक्त किया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया। सुरक्षा बलों ने स्टोरेज प्रोटोकॉल को मजबूत करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों। कश्मीर में शांति प्रयास जारी हैं, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता बनी हुई है, जो वैश्विक ध्यान का केंद्र बनी हुई है।