10 भारतीय ग्रामीण स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन नवाचार वैश्विक सुर्खियां बना रहे हैं
भारत की ६५ प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। यहां डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी से लोग छोटी बीमारियों के लिए भी लंबी यात्रा करते हैं। लेकिन टेलीमेडिसिन और ग्रामीण स्वास्थ्य नवाचारों ने यह बदलाव ला दिया है। ई-संजीवनी ऐप जैसी सरकारी पहल से लाखों लोग घर बैठे डॉक्टरों से सलाह ले पा रहे हैं। ये नवाचार सस्ते, आसान और पहुंच योग्य हैं। वे एआई, मोबाइल क्लिनिक और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैश्विक मंच इन्हें गरीब देशों के लिए मॉडल बता रहे हैं। भारत का टेलीमेडिसिन बाजार २०२५ तक ५.४ बिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट बढ़ने से ग्रामीण लोग अब दूर के डॉक्टरों से जुड़ पा रहे हैं। कोविड महामारी ने इन नवाचारों को तेजी दी। अब ग्रामीण स्वास्थ्य डिजिटल हो गया है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसे कार्यक्रम इनका समर्थन कर रहे हैं। इस लेख में हम इन १० नवाचारों को विस्तार से जानेंगे। हर एक के फायदे, आंकड़े और वैश्विक प्रभाव को समझेंगे। ये बदलाव ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के साथ-साथ भारत को स्वास्थ्य नवाचार का लीडर बना रहे हैं। ग्रामीण भारत अब स्वास्थ्य असमानता से लड़ रहा है। ये नवाचार न सिर्फ जीवन बचाते हैं, बल्कि आर्थिक बोझ भी कम करते हैं। आइए देखें कैसे ये १० नवाचार वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोर रहे हैं।
१. ई-संजीवनी ऐप: ग्रामीण टेलीमेडिसिन का राष्ट्रीय मॉडल
ग्रामीण भारत में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती है। ई-संजीवनी ऐप ने इसे हल करने के लिए सरकारी स्तर पर काम शुरू किया। यह ऐप ग्रामीण लोगों को वीडियो कॉल से डॉक्टरों से जोड़ता है। सरकारी हेल्थ सेंटर्स पर स्थापित कियोस्क से मरीज रजिस्ट्रेशन कराते हैं। फिर डॉक्टर लोकल भाषा में सलाह देते हैं। २०२५ तक, इसने १६३ मिलियन से ज्यादा परामर्श दिए हैं। ज्यादातर ग्रामीण महिलाएं और २५-४५ साल के लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह ऐप डायबिटीज, हाइपरटेंशन और सामान्य बीमारियों के लिए उपयोगी है। वैश्विक स्तर पर, यह लो-इनकम देशों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य का उदाहरण है।
ई-संजीवनी ने कोविड के बाद ग्रामीण स्वास्थ्य को डिजिटल बना दिया। अब यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़ गया है। ऐप के जरिए मरीज घर से ही दवाओं की सलाह पाते हैं। इससे यात्रा का खर्च बचता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से अब हजारों गांव जुड़ चुके हैं। यह नवाचार न सिर्फ स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि जागरूकता भी फैलाता है।
| विशेषता | विवरण | प्रभाव (२०२५ तक) |
| परामर्श प्रकार | वीडियो-बेस्ड, लोकल भाषा | १६३ मिलियन परामर्श |
| लक्ष्य समूह | ग्रामीण महिलाएं, युवा वयस्क | ५१% महिलाएं उपयोगकर्ता |
| बीमारियां कवर | डायबिटीज, हाइपरटेंशन, बुखार | पुरानी बीमारियों में ३०% वृद्धि |
| पहुंच | ३७४,००० CSC केंद्र | सभी २८ राज्य कवर |
यह तालिका दिखाती है कि ई-संजीवनी कैसे ग्रामीण स्वास्थ्य को आसान बना रही है।
ई-संजीवनी का सफल होना ग्रामीण टेलीमेडिसिन को बढ़ावा दे रहा है। गांवों में इंटरनेट बढ़ने से अब मरीज घंटों की यात्रा बचाते हैं। डॉक्टर शहरों से सलाह देते हैं, जो ग्रामीण डॉक्टरों की कमी पूरी करता है। वैश्विक रिपोर्ट्स में इसे डिजिटल हेल्थ का चमत्कार कहा जा रहा है। यह ऐप ग्रामीण महिलाओं को विशेष रूप से सशक्त बना रहा है।
२. अरविंद आई केयर सिस्टम: ग्रामीण आंखों की देखभाल में क्रांति
ग्रामीण इलाकों में आंखों की बीमारियां आम हैं, लेकिन इलाज दूर होता है। अरविंद आई केयर ने विजन सेंटर्स से इस समस्या को हल किया। यह ग्रामीण इलाकों में विजन सेंटर्स खोलकर आंखों की जांच करता है। हर सेंटर्स ५०,००० लोगों को १५-२० गांवों में सेवा देता है। फील्ड वर्कर्स बाइसिकल पर जाकर लोगों को चेक करते हैं। २०१४ में, मदुरै के सेंटर्स ने १२७,००० मरीजों का इलाज किया। अब २०२५ तक, यह पूरे भारत में फैल गया है। अग्रिम जांच से लोग समय पर इलाज पाते हैं। वैश्विक स्तर पर, WHO इसे आंखों की देखभाल का मॉडल मानता है। यह सिस्टम सस्ता और स्थानीय लोगों पर आधारित है।
सेंटर्स लोकल भाषा में जागरूकता फैलाते हैं। इससे ग्रामीणों का स्वास्थ्य व्यवहार बदल रहा है। अरविंद ने सर्जरी मॉडल से लागत कम की। अब ग्रामीण लोग सस्ते में चश्मा और इलाज पा रहे हैं। विजन सेंटर्स से ९०% मरीजों का इलाज लोकल ही होता है। बाकी १०% को ही हॉस्पिटल भेजा जाता है। इससे यात्रा का खर्च बचता है और कार्बन फुटप्रिंट कम होता है। ये सेंटर्स स्थानीय तकनीशियन चलाते हैं, जो ट्रेनिंग लेकर काम करते हैं।
| सेंटर्स का प्रभाव | आंकड़े (२०१४-२०२५) | लाभ |
| मरीजों की संख्या | १२७,००० (मदुरै) से ५० लाख+ | अंधापन में ७०% कमी |
| कवरेज | ५-७ किमी रेडियस | १०% आबादी पहुंच |
| स्टाफ | लोकल ट्रेन्ड वर्कर्स | स्वास्थ्य व्यवहार में बदलाव |
| लागत वसूली | ५०% से ऊपर | स्थिरता सुनिश्चित |
यह तालिका अरविंद के ग्रामीण प्रभाव को स्पष्ट करती है।
अरविंद ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य-खोजने का व्यवहार बदला है। पहले लोग आंखों की समस्या को नजरअंदाज करते थे। अब स्थायी सेंटर्स से वे जल्दी इलाज कराते हैं। वैश्विक सम्मेलनों में इसे चर्चा का विषय बनाया गया है। यह नवाचार भारत की स्वास्थ्य नवाचार क्षमता दिखाता है। ग्रामीण बच्चों की आंखों की देखभाल में भी यह अग्रणी है। विजन सेंटर्स ने यूनिवर्सल आई हेल्थ कवरेज बढ़ाया है।
३. हेल्थ एटीएम: ग्रामीणों के लिए तुरंत जांच केंद्र
ग्रामीणों को लैब जांच के लिए शहर जाना पड़ता है। हेल्थ एटीएम ने इसे घर के पास ला दिया। ये ग्रामीण इलाकों में लगाए गए कियोस्क हैं। ये ६५ से ज्यादा टेस्ट जैसे बीएमआई, ईसीजी और ब्लड शुगर करते हैं। पुणे की क्लिनिक्स ऑन क्लाउड ने इन्हें बिना बिजली या इंटरनेट के डिजाइन किया है। २०२५ तक, ३००० एटीएम लगे हैं और ८० लाख लोगों ने फायदा उठाया। ये १० मिनट में जांच पूरी करते हैं। सटीकता ९५% से ऊपर है। वैश्विक रूप से, यह रूरल हेल्थ टेक का उदाहरण है। ग्रामीणों को लैब जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ये एटीएम सोलर पावर से चलते हैं। इससे दूरदराज गांवों में भी उपयोग संभव है। रिपोर्ट्स डिजिटल होकर डॉक्टरों तक पहुंचती हैं।
| टेस्ट प्रकार | समय | लागत बचत |
| ईसीजी, ब्लड शुगर | १० मिनट | ५०% कम |
| यूनीन टेस्ट, बीएमआई | तुरंत | ग्रामीण पहुंच |
| कनेक्टिविटी | ऑफलाइन मोड | बिना इंटरनेट |
| उपयोगकर्ता | ८० लाख+ | स्वास्थ्य जोखिम कम |
यह तालिका हेल्थ एटीएम की सुविधा दिखाती है।
हेल्थ एटीएम ने ग्रामीण स्वास्थ्य जांच को आसान बनाया। किसान और महिलाएं अब घर के पास जांच करा सकती हैं। यह नवाचार भारत को डिजिटल हेल्थ में आगे ले जा रहा है। वैश्विक निवेशक इसे फंड कर रहे हैं। इससे प्रारंभिक बीमारियां जल्दी पकड़ में आ रही हैं।
४. टैटवान ई-क्लिनिक: ग्रामीण क्लिनिकों को टेलीमेडिसिन हब
ग्रामीण क्लिनिकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। टैटवान ई-क्लिनिक ने फ्रैंचाइजी मॉडल से इसे बदला। यह ग्रामीण क्लिनिकों को फ्रैंचाइजी बनाता है। यह ६००+ हब १८ राज्यों में चला रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर वीडियो से सलाह देते हैं। २०२५ में, यह २१८ जिलों को कवर करता है। ग्रामीण डॉक्टरों की कमी पूरी करता है। वैश्विक स्तर पर, यह हाइब्रिड मॉडल का उदाहरण है। स्थानीय ऑपरेटर ट्रेनिंग से रोजगार भी देता है। क्लिनिक लोकल भाषा में सेवा देते हैं। इससे ग्रामीणों का विश्वास बढ़ा। यह मॉडल दवाओं की डिलीवरी भी जोड़ता है।
| कवरेज | हब संख्या | लाभ |
| राज्य | १८+ | विशेषज्ञ पहुंच |
| जिले | २१८+ | ३५-७०% विकास |
| मरीज | लाखों | टेली-डायग्नोस्टिक्स |
| मॉडल | फ्रैंचाइजी | ग्रामीण एकीकरण |
यह तालिका टैटवान के विस्तार को दर्शाती है।
टैटवान ने छोटे शहरों को स्वास्थ्य से जोड़ा। मरीज अब महंगे शहरों नहीं जाते। यह भारत की हेल्थटेक क्रांति का हिस्सा है। वैश्विक रिपोर्ट्स इसे सराह रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है।
५. स्माइल फाउंडेशन टेलीमेडिसिन: पंजाब के गांवों में समान स्वास्थ्य
पंजाब के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य असमानता ज्यादा है। स्माइल फाउंडेशन ने ई-क्लिनिक से इसे ठीक किया। ये क्लिनिक कमजोर समुदायों को लक्ष्य बनाते हैं। ने पंजाब के मोगा में १२ ई-आरोग्य क्लिनिक लगाए। ये सोलर पावर और इंटरनेट से चलते हैं। मेडिसिन वेंडिंग मशीन दवाएं देती हैं। २०२३-२४ में शुरू, अब यह ग्रामीण स्वास्थ्य मजबूत कर रहा है। कमजोर स्वास्थ्य वाले ब्लॉक्स को लक्ष्य बनाया। WHO इसे पीपल-सेंटर्ड केयर का उदाहरण मानता है।
स्थानीय भाषा सामग्री से स्वीकृति बढ़ी। क्लिनिक २४x७ खुले रहते हैं। इससे इमरजेंसी में मदद मिलती है। साझेदारी से फंडिंग आसान हुई। ये क्लिनिक पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्टिंग करते हैं। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को विशेष ध्यान। सोलर पावर से बिजली की समस्या हल हो गई। अब दूर के गांव भी जुड़ रहे हैं।
| क्लिनिक सुविधा | संख्या | प्रभाव |
| ई-क्लिनिक | १२ | २४x७ बिजली |
| डायग्नोस्टिक्स | पॉइंट-ऑफ-केयर | दवाएं तुरंत |
| साझेदारी | SBI कार्ड्स | ग्रामीण पहुंच |
| लक्ष्य | मोगा ब्लॉक्स | असमानता कम |
यह तालिका स्माइल के योगदान को स्पष्ट करती है।
स्माइल ने ग्रामीण पंजाब को टेलीमेडिसिन से जोड़ा। गांववासी अब विश्वास से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में कदम है। वैश्विक फोरम इसे सराहते हैं। महिलाओं और बच्चों को विशेष फायदा हो रहा है। यह मॉडल अन्य राज्यों में फैल सकता है।
६. मोबाइल मेडिकल यूनिट्स: ग्रामीणों तक पहुंचने वाली स्वास्थ्य वैन
दूरदराज गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना मुश्किल है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स ने वैन से इसे संभव बनाया। ये वैन प्राइमरी केयर और इमरजेंसी मदद देती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने १,४२४ मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) चलाईं। ये ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी केयर देती हैं। १२,३४८ पीएचसी को २४x७ बनाया गया। २०२५ तक, ये इमरजेंसी सेवाएं बढ़ा रही हैं। एमपी, यूपी जैसे राज्यों में सक्रिय। वैश्विक रूप से, यह मोबाइल हेल्थ का मॉडल है। सालाना २५,००० मरीज प्रति वैन मदद पाते हैं। वैन मुफ्त दवाएं और जांच ले जाती हैं। स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता इनका संचालन करते हैं। जीपीएस से वैन ट्रैक होती हैं। इससे समय पर पहुंच सुनिश्चित। ग्रामीण महिलाओं को गायनेकोलॉजी जांच मिलती है। ये यूनिट्स टीबी और मलेरिया जैसे रोगों पर फोकस करती हैं।
| यूनिट प्रकार | संख्या | कवरेज |
| एमएमयू | १,४२४ | ग्रामीण इमरजेंसी |
| २४x७ पीएचसी | १२,३४८ | प्राइमरी केयर |
| एफआरयू | ३,१३३ | रेफरल यूनिट |
| मरीज | १७१ लाख+ | मुफ्त दवाएं |
यह तालिका एमएमयू के प्रभाव को दिखाती है।
एमएमयू ने दूरदराज गांवों को स्वास्थ्य पहुंचाया। महिलाओं और बच्चों को फायदा हो रहा है। यह भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य नीति का मजबूत हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर इसे अपनाया जा रहा है। भविष्य में इलेक्ट्रिक वैन जोड़ी जा सकती हैं।
७. डिजीक्योर ई-क्लिनिक: सेमी-अर्बन ग्रामीणों के लिए हाइपरलोकल केयर
सेमी-अर्बन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं। डिजीक्योर ने ई-क्लिनिक से लोकल केयर लाया। ये क्लिनिक हाइपरलोकल पहुंच पर फोकस करते हैं। भोपाल आधारित है। यह ई-क्लिनिक वीडियो कंसल्ट और डिजिटल प्रेस्क्रिप्शन देता है। शार्क टैंक पर फंडिंग मिली। ग्रामीण और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में फ्रैंचाइजी मॉडल। २०२५ में, यह हॉस्पिटल रेफरल बढ़ा रहा है। वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कम लागत से कम्युनिटी में घुला हुआ। ऐप बहुभाषी है। इससे ग्रामीण यूजर्स आसानी से जुड़ते हैं। रेफरल सिस्टम मजबूत है। फ्रैंचाइजी मालिक लोकल होते हैं। इससे विश्वास बढ़ता है। डिजिटल प्रेस्क्रिप्शन से दवाएं घर पहुंचती हैं। सेमी-अर्बन युवाओं को क्रॉनिक केयर मिल रही है।
| मॉडल | कवरेज | लाभ |
| ई-क्लिनिक | ग्रामीण क्षेत्र | वीडियो कंसल्ट |
| फंडिंग | ₹४० लाख | स्केलिंग |
| पार्टनर | लोकल क्लिनिक | रेफरल |
| उपयोग | हजारों मरीज | सस्ता |
यह तालिका डिजीक्योर की ताकत बताती है।
डिजीक्योर ने ग्रामीण स्वास्थ्य रेगिस्तान को भरा। मरीज अब आसानी से विशेषज्ञ पाते हैं। यह भारत की डिजिटल हेल्थ क्रांति का हिस्सा है। रोजगार सृजन भी कर रहा है। अन्य स्टार्टअप्स के लिए मॉडल।
८. एका केयर: डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड ग्रामीणों के लिए
ग्रामीण मरीजों के रिकॉर्ड खो जाते हैं। एका केयर ने डिजिटल रिकॉर्ड से इसे रोका। ये प्लेटफॉर्म निरंतरता सुनिश्चित करता है। पैन-इंडिया प्लेटफॉर्म है। यह ईएमआर और टेलीमेडिसिन देता है। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट से जुड़ा। प्रेस्क्रिप्शन और वैक्सीन रिकॉर्ड स्टोर करता है। २०२५ में, $१५ मिलियन फंडिंग मिली। ग्रामीण यूजर्स के लिए हेल्थ ट्रैकिंग। वैश्विक बाजारों में विस्तार। ऐप सिक्योर है। डेटा प्राइवेसी सुनिश्चित करता है। ग्रामीणों को हेल्थ आईडी मिलती है। वियरेबल डिवाइस से मॉनिटरिंग। फैमिली हेल्थ कार्ड फीचर। ग्रामीण प्रवासियों को फायदा।
| फीचर | लाभ | आंकड़े |
| ईएमआर | डेटा स्टोर | ABHA एकीकरण |
| टेलीमेडिसिन | वर्चुअल कंसल्ट | $१५M फंडिंग |
| ट्रैकिंग | हेल्थ ID | ग्रामीण उपयोग |
| बाजार | पैन-इंडिया | निरंतरता |
यह तालिका एका केयर के योगदान को स्पष्ट करती है।
एका केयर ने ग्रामीण डेटा प्रबंधन आसान किया। मरीज अब रिकॉर्ड खोने से बचते हैं। यह डिजिटल हेल्थ का भविष्य है। वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा। एआई से प्रेडिक्टिव एनालिसिस।
९. सेकंडमेडिक: एआई-ड्रिवन ग्रामीण टेलीमेडिसिन
एआई से ग्रामीण डायग्नोस्टिक्स आसान हो गए। सेकंडमेडिक ने एआई से शुरुआती जांच संभव की। ये प्लेटफॉर्म ब्रिजिंग गैप पर काम करता है। एआई से डायग्नोस्टिक्स करता है। ग्रामीण क्लिनिकों में हेल्थ कियोस्क लगाए। हिंदी, तमिल जैसी भाषाओं में उपलब्ध। उत्तर प्रदेश में ४०% रेफरल कम हुए। ५०,०००+ मरीज जुड़े। वैश्विक रूप से, यह एआई हेल्थ का मॉडल है। कियोस्क ऑफलाइन काम करते हैं। ई-फार्मेसी से दवाएं घर पहुंचती हैं। एआई एल्गोरिदम बीमारियों की प्रेडिक्शन करता है। ग्रामीण नर्स ट्रेनिंग। कम लागत वाली कंसल्टेशन।
| फीचर | कवरेज | प्रभाव |
| एआई डायग्नोस्टिक्स | डायबिटीज, एनीमिया | जल्दी पहचान |
| भाषा | बहुभाषी | ग्रामीण समावेश |
| कियोस्क | पीएचसी, CSC | ५०,००० मरीज |
| ई-फार्मेसी | दवाएं | यात्रा बचत |
यह तालिका सेकंडमेडिक की उपयोगिता दिखाती है।
सेकंडमेडिक ने ग्रामीण असमानता कम की। एआई से शुरुआती इलाज संभव हुआ। भारत की हेल्थटेक में यह अग्रणी है। भविष्य में और विस्तार होगा। वैश्विक पार्टनरशिप।
एआई ग्रामीण स्वास्थ्य को प्रेडिक्टिव बना रहा है। ये टूल्स डेटा से बीमारियां रोकते हैं। २०२५ तक, भारत का एआई हेल्थ खर्च $११.७८ बिलियन होगा। रूरल हेल्थ हब्स यूनिवर्सिटी और टेक कंपनियों को जोड़ते हैं। क्वे.एआई जैसी कंपनियां रेडियोलॉजी में एआई इस्तेमाल कर रही हैं। वैश्विक बाजारों में निर्यात बढ़ रहा है। यह ग्रामीण केयर को प्रोएक्टिव बना रहा है। एआई डेटा एनालिसिस से महामारियां रोकी जा सकती हैं। ग्रामीण हब्स नवाचार को टेस्ट करते हैं। ब्रॉडबैंड विस्तार से एआई पहुंच रहा है। चैटबॉट्स ग्रामीणों को सलाह देते हैं। मशीन लर्निंग से पर्सनलाइज्ड केयर। रूरल एआई हेल्थ में ३०% वृद्धि।
| एआई अनुप्रयोग | लाभ | आंकड़े |
| डायग्नोस्टिक्स | जल्दी पहचान | १३ FDA अप्रूवल |
| मॉनिटरिंग | रिमोट | $११.७८B खर्च |
| हब्स | सहयोग | ब्रेकथ्रू इनोवेशन |
| बाजार | निर्यात | यूके, यूएस |
यह तालिका एआई के प्रभाव को दर्शाती है।
एआई ने ग्रामीण स्वास्थ्य को स्मार्ट बनाया। भविष्य में यह और फैलेगा। भारत वैश्विक लीडर बन रहा है। ग्रामीणों को व्यक्तिगत केयर मिल रही है। एथिकल एआई पर फोकस।
ये १० नवाचार ग्रामीण भारत को मजबूत स्वास्थ्य दे रहे हैं। ई-संजीवनी से लेकर एआई तक, सब कुछ पहुंच योग्य बना। २०२५ में, भारत स्वास्थ्य नवाचार में ग्लोबल लीडर है। ये सस्ते और स्केलेबल हैं। भविष्य में, सार्वभौमिक कवरेज संभव होगा। ग्रामीणों को अब बेहतर जीवन मिल रहा है। टेलीमेडिसिन बाजार ५.४ बिलियन डॉलर का हो जाएगा। कोविड ने इनकी गति बढ़ाई। एआई और ब्रॉडबैंड से ग्रामीण स्वास्थ्य जुड़ेगा। ये नवाचार न सिर्फ भारत बदल रहे हैं, बल्कि विकासशील देशों के लिए मॉडल हैं। वैश्विक संगठन इन्हें सराह रहे हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य अब डिजिटल क्रांति का हिस्सा है। भारत की ये पहलें गरीबी और बीमारी से लड़ेंगी। आने वाले वर्षों में और अधिक नवाचार देखने को मिलेंगे। ये बदलाव पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं। ग्रामीण भारत अब स्वास्थ्य में आत्मनिर्भर बनेगा।
