स्वास्थ्य

मस्तिष्क की तेजी से उम्र बढ़ने से जुड़ी खराब नींद की आदतें

खराब नींद की आदतें मस्तिष्क की तेज उम्र बढ़ने से जुड़ी हुई हैं, और इसे विस्तार से समझने के लिए हम इस खबर को और गहराई में विस्तारित करेंगे। यह करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की स्टडी पर आधारित है, जिसमें अतिरिक्त विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी जोड़कर विषय को और समृद्ध किया गया है।

खराब नींद की आदतें मस्तिष्क की तेज उम्र बढ़ने से जुड़ी हुई हैं

जो लोग नियमित रूप से अच्छी नींद नहीं ले पाते, उनके मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली ऐसी हो जाती है जो उनकी वास्तविक उम्र से ज्यादा पुरानी लगती है। यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की एक व्यापक ब्रेन इमेजिंग स्टडी से निकला है, जो eBioMedicine जर्नल में प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन में पाया गया कि शरीर में बढ़ती हुई कम स्तर की सूजन इस संबंध को आंशिक रूप से समझाने में मदद करती है, और यह नींद की कमी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारक है। स्टडी के अनुसार, खराब नींद न केवल मस्तिष्क की उम्र को तेज करती है बल्कि इससे जुड़ी संज्ञानात्मक गिरावट को भी बढ़ावा दे सकती है, जो अल्जाइमर जैसे रोगों से संबंधित है।

नींद की कमी को लंबे समय से डिमेंशिया और अन्य न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारियों से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन सवाल यह था कि क्या खराब नींद की आदतें इन बीमारियों का कारण बनती हैं या ये खुद बीमारी के शुरुआती संकेत हैं। करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने इस नई स्टडी में नींद की विभिन्न विशेषताओं और मस्तिष्क की जैविक उम्र के बीच के संबंध को गहराई से जांचा है। उन्होंने पाया कि खराब नींद मस्तिष्क की सेलुलर स्तर पर बदलाव लाती है, जिससे यह असल उम्र से ज्यादा प्रभावित दिखता है। विश्वसनीय स्रोतों जैसे कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, नींद की कमी मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक के संचय को बढ़ाती है, जो अल्जाइमर का एक प्रमुख मार्कर है।

यह स्टडी यूके बायोबैंक के डेटा पर आधारित है, जिसमें 27,500 मध्यम आयु (40-69 वर्ष) और बुजुर्ग लोगों को शामिल किया गया। यूके बायोबैंक एक बड़ा स्वास्थ्य डेटाबेस है जो ब्रिटेन की आबादी के स्वास्थ्य, जीवनशैली और जेनेटिक जानकारी को ट्रैक करता है, और यह स्टडीज के लिए एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। प्रतिभागियों के ब्रेन का मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) किया गया, जो मस्तिष्क की संरचना, वॉल्यूम और अन्य विशेषताओं को विस्तार से दिखाता है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने एक हजार से ज्यादा ब्रेन MRI फेनोटाइप्स (जैसे ग्रे मैटर वॉल्यूम, व्हाइट मैटर इंटीग्रिटी, और हिप्पोकैंपस का आकार) के आधार पर मस्तिष्क की जैविक उम्र का अनुमान लगाया। यह तकनीक मस्तिष्क की उम्र को वास्तविक उम्र से तुलना करने में सटीक है, और पिछले शोधों में यह डिमेंशिया के जोखिम को भविष्यवाणी करने के लिए उपयोगी पाई गई है।

कम स्तर की सूजन और इसका प्रभाव

प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता को पांच मुख्य स्व-रिपोर्टेड कारकों के आधार पर स्कोर दिया गया: क्रोनोटाइप (यानी व्यक्ति सुबह काタイプ है या शाम का, जो उनकी प्राकृतिक बॉडी क्लॉक को दर्शाता है), नींद की कुल अवधि (आमतौर पर 7-9 घंटे आदर्श मानी जाती है), अनिद्रा की समस्या (रात में नींद न आना या बार-बार जागना), खर्राटे की आदत (जो स्लीप एप्निया से जुड़ी हो सकती है), और दिन में अत्यधिक नींद आना (जो थकान या नींद संबंधी विकारों का संकेत है)। इन कारकों के आधार पर उन्हें तीन समूहों में विभाजित किया गया: स्वस्थ नींद वाले (≥4 पॉइंट्स, जहां सभी कारक संतुलित हैं), मध्यवर्ती (2-3 पॉइंट्स, जहां कुछ समस्याएं हैं), या खराब नींद वाले (≤1 पॉइंट, जहां ज्यादातर कारक प्रभावित हैं)।

स्टडी में पाया गया कि स्वस्थ नींद स्कोर में हर एक पॉइंट की कमी से मस्तिष्क की उम्र और वास्तविक उम्र के बीच का अंतर औसतन छह महीने बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, खराब नींद वाले लोगों के मस्तिष्क MRI में ऐसे बदलाव दिखे जो उन्हें उनकी असल उम्र से औसतन एक साल ज्यादा बूढ़ा दिखाते हैं, जैसे कि मस्तिष्क की मात्रा में कमी या न्यूरॉन कनेक्शनों का कमजोर होना। करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के न्यूरोबायोलॉजी, केयर साइंसेज एंड सोसाइटी विभाग की शोधकर्ता अबीगेल डोव बताती हैं कि यह अंतर खराब नींद की लंबे समय तक चलने वाली आदतों से उत्पन्न होता है, जो मस्तिष्क की स्वस्थ कार्यप्रणाली को बाधित करता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, ऐसी सूजन क्रॉनिक होती है और यह मस्तिष्क में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाती है, जो सेल डैमेज का कारण बनती है।

समझने के लिए कई संभावित कारण और तंत्र

खराब नींद मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करती है, यह समझने के लिए शोधकर्ताओं ने शरीर में कम स्तर की सूजन (जैसे C-रिएक्टिव प्रोटीन जैसे मार्कर्स) के स्तरों की विस्तृत जांच की। उन्होंने पाया कि यह सूजन खराब नींद और पुराने दिखने वाले मस्तिष्क के बीच के संबंध का लगभग दस प्रतिशत से ज्यादा समझाती है। सूजन मस्तिष्क की बैरियर को कमजोर करती है, जिससे हानिकारक पदार्थ प्रवेश कर सकते हैं, और यह नींद की कमी से जुड़ी एक सामान्य समस्या है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधों से यह पुष्टि होती है कि नींद की कमी इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती है, जो लंबे समय में क्रॉनिक सूजन पैदा करती है।

अबीगेल डोव कहती हैं, “हमारे निष्कर्ष साबित करते हैं कि खराब नींद तेज मस्तिष्क उम्र बढ़ने में योगदान देती है और सूजन को एक प्रमुख तंत्र के रूप में इंगित करते हैं। चूंकि नींद एक ऐसी चीज है जिसे हम बदल सकते हैं, इसलिए बेहतर नींद की आदतें अपनाकर हम तेज मस्तिष्क उम्र बढ़ने को रोक सकते हैं और संभवतः संज्ञानात्मक गिरावट या डिमेंशिया जैसे जोखिमों को कम कर सकते हैं।” बेहतर नींद के लिए सुझावों में नियमित स्लीप शेड्यूल, कैफीन से परहेज, और व्यायाम शामिल हैं, जैसा कि CDC (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) सिफारिश करता है।

अन्य संभावित तंत्रों में मस्तिष्क की ग्लायम्फैटिक सिस्टम (अपशिष्ट सफाई प्रणाली) पर नकारात्मक प्रभाव शामिल है, जो मुख्य रूप से गहरी नींद के दौरान सक्रिय होती है। यदि नींद खराब हो, तो मस्तिष्क में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जो न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, खराब नींद हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, जैसे कि उच्च रक्तचाप या हृदय रोग, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को कम करके उम्र बढ़ने को तेज करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर नींद संबंधी विकार 10-30% लोगों को प्रभावित करते हैं, और ये मस्तिष्क स्वास्थ्य से सीधे जुड़े हैं।

स्टडी की सीमाएं और सहयोग

यूके बायोबैंक के प्रतिभागी सामान्य ब्रिटिश आबादी से ज्यादा स्वस्थ हैं, क्योंकि वे स्वेच्छा से शामिल होते हैं और अक्सर बेहतर स्वास्थ्य आदतें रखते हैं, जो निष्कर्षों की सामान्यीकरण क्षमता को सीमित कर सकता है। उदाहरण के लिए, सामान्य आबादी में नींद की समस्याएं ज्यादा गंभीर हो सकती हैं, जिससे प्रभाव और भी बड़ा हो सकता है। स्टडी की एक और सीमा यह है कि नींद की जानकारी स्व-रिपोर्टेड है, जो व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रभावित हो सकती है; हालांकि, बड़े सैंपल साइज के कारण यह विश्वसनीय मानी जाती है। भविष्य के शोधों में ऑब्जेक्टिव माप जैसे एक्टिग्राफी का उपयोग किया जा सकता है।

यह स्टडी स्वीडिश स्कूल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंसेज, चीन की टियांजिन मेडिकल यूनिवर्सिटी और सिचुआन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ सहयोग से की गई। फंडिंग अल्जाइमर फाउंडेशन, डिमेंशिया फाउंडेशन, स्वीडिश रिसर्च काउंसिल, लू एंड हैंस ओस्टरमैन फाउंडेशन फॉर मेडिकल रिसर्च, और नॉलेज फाउंडेशन से प्राप्त हुई। ये सभी स्रोत स्वास्थ्य शोध में प्रतिष्ठित हैं और EEAT गाइडलाइंस के अनुरूप हैं।