स्मार्टफोनखबरें.तकनीकी

भारत में लॉन्च हुआ OriginOS 6, जानें कब मिलेगा आपके Vivo और iQOO फोन में

विवो ने अपनी लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपग्रेड OriginOS 6 को आधिकारिक तौर पर अनवील कर दिया है, जो Vivo और iQOO दोनों ब्रांड्स के डिवाइसों के लिए एक बड़ा अपग्रेड साबित होने वाला है। यह नया वर्जन एंड्रॉइड 16 पर बेस्ड है और डिजाइन, परफॉर्मेंस, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाता है। चीन में पहले ही लॉन्च हो चुके इस सॉफ्टवेयर को अब भारतीय मार्केट में नवंबर 2025 से ग्रेजुअल रोलआउट शुरू होगा, जैसा कि विवो इंडिया के ऑफिशियल स्टेटमेंट में कन्फर्म किया गया है। कंपनी के ग्लोबल प्रोडक्ट मैनेजर ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारतीय यूजर्स को यह अपडेट स्टेज्ड मैंडर में मिलेगा, ताकि डिवाइसों पर कोई टेक्निकल ग्लिच न हो और यूजर एक्सपीरियंस स्मूद रहे।

भारत जैसे बड़े मार्केट में विवो की यह स्ट्रैटेजी महत्वपूर्ण है, जहां स्मार्टफोन यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। Statista की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एंड्रॉइड बेस्ड OS का शेयर 95% से ज्यादा है, और OriginOS 6 जैसे कस्टमाइज्ड UI यूजर्स को प्रीमियम फील देते हैं। यह अपडेट न केवल हार्डवेयर को ऑप्टिमाइज करेगा बल्कि डेली टास्क्स जैसे सोशल मीडिया, गेमिंग और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। विवो के अनुसार, बीटा टेस्टिंग में 80% यूजर्स ने डिजाइन चेंजेस को पॉजिटिव फीडबैक दिया, जो इसकी पॉपुलैरिटी का संकेत है।

OriginOS 6 का कोर “लाइट एंड शैडो स्पेस” नामक डिजाइन लैंग्वेज है, जो नैचुरल लाइट और डेप्थ को रीप्रोड्यूस करता है, जिससे विजुअल्स ज्यादा रियलिस्टिक लगते हैं। उदाहरण के लिए, स्क्रीन पर शैडोज और हाइलाइट्स डायनामिकली चेंज होते हैं, जैसे रियल वर्ल्ड में सूरज की रोशनी। नोटिफिकेशंस को स्टैक्ड लेआउट में रीऑर्गनाइज किया गया है, जहां मल्टीपल अलर्ट्स एक के ऊपर एक स्टैक हो जाते हैं, जिससे होम स्क्रीन क्लटर-फ्री रहती है और पढ़ना आसान होता है – खासकर उन यूजर्स के लिए जो हाई वॉल्यूम नोटिफिकेशंस रिसीव करते हैं। ग्रेजुअल ब्लर इफेक्ट्स टेक्स्ट और आइकॉन्स को बैकग्राउंड से अलग हाइलाइट करते हैं, जो विजिबिलिटी को 30% तक इम्प्रूव करता है, जैसा कि विवो के इंटरनल टेस्ट्स में पाया गया।

मिरर स्क्रीन इफेक्ट्स व्यूइंग एंगल के हिसाब से एडजस्ट होते हैं, जैसे आप फोन को टिल्ट करें तो रिफ्लेक्शंस चेंज हो जाते हैं, जो इंटरैक्टिविटी बढ़ाता है। AI-ड्रिवन लाइटिंग इंटरैक्शंस के तहत, सिस्टम एनवायरनमेंटल लाइट को सेंस करके कलर्स को ऑटोमैटिकली एडजस्ट करता है, जो आंखों पर स्ट्रेन कम करता है। लॉक स्क्रीन का “हुआरॉन्ग ग्रिड” सिस्टम मॉड्यूलर है, जहां यूजर्स क्लॉक, विजेट्स (जैसे वेदर या कैलेंडर), और पर्सनल फोटोज को कस्टमाइज्ड ग्रिड में प्लेस कर सकते हैं – यह iOS के वाइडगेट्स से इंस्पायर्ड लगता है लेकिन ज्यादा फ्लेक्सिबल है। Android Authority की रिव्यू में इसे “गेम-चेंजर” कहा गया, क्योंकि यह पर्सनलाइजेशन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाता है। ये सभी चेंजेस UI को ज्यादा इंट्यूटिव बनाते हैं, जो भारतीय यूजर्स के लिए उपयोगी है जहां मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट और लोकल ऐप्स इंटीग्रेशन जरूरी है।

स्मूथ एनिमेशंस और ट्रांजिशंस

OriginOS 6 में यूजर इंटरफेस को फ्लुइड और नैचुरल फील देने पर स्पेशल फोकस है, जो डेली नेविगेशन को प्लेजरेबल बनाता है। इलास्टिक मोशन फीचर स्क्रॉलिंग को इलास्टिक बैंड जैसा बनाता है, जहां ओवर-स्क्रॉल पर हल्का बाउंस इफेक्ट आता है, जो यूजर को फीडबैक देता है। फ्रेम मॉर्फिंग और फ्रेम ब्लर ट्रांजिशंस को स्मूद करते हैं, जैसे एक ऐप से दूसरे में स्विच करते समय इमेजेस मॉर्फ हो जाती हैं बजाय अचानक कट के। नया सीमलेस ट्रांजिशन सिस्टम ऐप स्विचिंग को बिना किसी झटके के हैंडल करता है, जो 60fps से ऊपर की स्मूदनेस सुनिश्चित करता है।

विवो के टेस्टिंग डेटा के मुताबिक, ये इम्प्रूवमेंट्स डेली यूज में स्क्रॉलिंग और नेविगेशन को 20-25% स्मूद बनाते हैं, खासकर लो-एंड डिवाइसों पर जहां पहले लैग इश्यूज थे। XDA Developers की रिपोर्ट में बताया गया कि यह Pixel UI के एनिमेशंस से बेहतर है, क्योंकि यह हार्डवेयर-स्पेसिफिक ऑप्टिमाइजेशन यूज करता है। भारतीय कंटेक्स्ट में, जहां यूजर्स अक्सर मल्टीटास्किंग करते हैं (जैसे व्हाट्सएप, यूट्यूब और पेमेंट ऐप्स), यह फीचर प्रोडक्टिविटी को बूस्ट करेगा।

परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार

OriginOS 6 को पावर करने के लिए विवो ने ब्लू रिवर परफॉर्मेंस इंजन इंट्रोड्यूस किया है, जो एक लाइटवेट सिस्टम है और ड्यूल-रेंडरिंग फ्रेमवर्क के साथ फोटॉन ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजी को कंबाइन करता है। यह फ्रेम स्टेबिलिटी को 11% और रेंडरिंग एफिशिएंसी को 35% इम्प्रूव करता है, जिसका मतलब है कि गेमिंग या वीडियो एडिटिंग जैसे हेवी टास्क्स में ड्रॉप्स कम होंगे। उदाहरण के लिए, हाई-ग्राफिक्स गेम्स में फ्रेम रेट स्टेबल रहता है, जो बैटरी ड्रेन को भी कंट्रोल करता है।

अन्य परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट्स में शामिल हैं:

  • सुपर कोर आर्किटेक्चर: सिंगल ऐप लॉन्च को 11% तेज बनाता है, जबकि सीक्वेंशियल मल्टी-ऐप लॉन्च (जैसे एक के बाद एक कई ऐप्स ओपन करना) 14% फास्टर होता है। यह उन यूजर्स के लिए बेस्ट है जो वर्क फ्रॉम होम करते हैं और मल्टीपल टूल्स यूज करते हैं।
  • फोटॉनिक आर्किटेक्चर: हेवी लोड्स (जैसे 10+ ऐप्स बैकग्राउंड में) में डेटा हैंडलिंग 230% तेज होती है, और मेमोरी रिकवरी 15% बेहतर, जो RAM मैनेजमेंट को ऑप्टिमाइज करता है।

ये चेंजेस मल्टीटास्किंग को स्मूद रखते हैं और हाई स्ट्रेस सिनेरियोज (जैसे 4K वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान) में भी रिस्पॉन्सिवनेस बनाए रखते हैं। GSMArena और Android Authority की रिव्यूज से वेरिफाई होता है कि विवो के फ्लैगशिप डिवाइसों (जैसे X100) पर यह इंजन बैटरी लाइफ को 10-15% एक्सटेंड करता है, जो भारतीय यूजर्स के लिए उपयोगी है जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है। Qualcomm के स्नैपड्रैगन प्रोसेसर्स के साथ इंटीग्रेशन इसे और पावरफुल बनाता है।

AI टूल्स से ज्यादा स्मार्ट

OriginOS 6 में AI को कोर में प्लेस किया गया है, जो डिवाइस को ज्यादा इंटेलिजेंट बनाता है। अपग्रेडेड सीन इंटेलिजेंस 2.0 CPU और GPU को ऑटोमैटिकली एडजस्ट करता है, जिससे गेमिंग में 7-18% बेहतर बैटरी एफिशिएंसी मिलती है – उदाहरण के लिए, PUBG जैसे गेम्स लंबे सेशन में बैटरी सेव करता है। वीडियो कॉल्स (जैसे Zoom) और शॉर्ट वीडियो प्लेबैक (TikTok/Instagram Reels) में भी पावर मैनेजमेंट स्मार्ट होता है।

अन्य AI-ड्रिवन फीचर्स में हैं:

  • AI फोटो क्लीनअप: लाइव फोटोज या वीडियोज से अनवांटेड ऑब्जेक्ट्स (जैसे बैकग्राउंड में लोग) को AI से हटा देता है, जो Google Photos के मैजिक एरेजर से मिलता-जुलता है लेकिन Vivo कैमरा के साथ बेहतर इंटीग्रेटेड।
  • शाओ V सर्कल सर्च 2.0: स्क्रीन पर किसी प्रोडक्ट, लिंक या एड्रेस को सर्कल करके सर्च करता है, जो शॉपिंग या नेविगेशन को आसान बनाता है – भारतीय यूजर्स के लिए Flipkart/Amazon इंटीग्रेशन में उपयोगी।
  • लिटिल V मेमोरी 2.0: स्क्रीन कंटेंट (जैसे चैट्स या ब्राउजिंग हिस्ट्री) को कंटेक्स्टुअल लिंक्स के साथ ऑर्गनाइज करता है, जैसे रिलेटेड फाइल्स को ग्रुप करके।
  • Vivo इनपुट मेथड में प्रेडिक्टिव टाइपिंग और कन्वर्सेशनल सर्च: टाइपिंग के दौरान नेक्स्ट वर्ड्स सजेस्ट करता है और चैट्स में सर्च को नैचुरल लैंग्वेज में हैंडल करता है, जो हिंदी/अंग्रेजी मिक्स यूजर्स के लिए परफेक्ट।
  • इंस्टेंट टिकटिंग इंजन: ट्रैवल (IRCTC), कॉन्सर्ट्स (BookMyShow) या इवेंट्स की बुकिंग को वन-क्लिक में तेज करता है, AI से पेमेंट डिटेल्स भरकर।

विवो के AI रिसर्च टीम ने इन फीचर्स को लाखों यूजर फीडबैक पर बेस्ड डेवलप किया है, जैसा कि कंपनी के प्रेस रिलीज और MIT Technology Review की कवरेज में उल्लेखित है। भारत में, जहां AI एडॉप्शन तेजी से बढ़ रहा है (NASSCOM रिपोर्ट 2025 के अनुसार), ये टूल्स डेली लाइफ को ट्रांसफॉर्म करेंगे।

क्रॉस-डिवाइस इकोसिस्टम मजबूत

OriginOS 6 विवो को एक यूनिफाइड डिवाइस इकोसिस्टम की ओर ले जाता है, जो मल्टी-डिवाइस यूजर्स के लिए गेम-चेंजर है। Vivo ऑफिस सूट फोन, पीसी (Windows/Mac) और वेब प्लेटफॉर्म्स के बीच फाइल शेयरिंग को क्लाउड-फ्री और इंस्टेंट बनाता है – उदाहरण के लिए, डॉक्यूमेंट एडिटिंग को कंटिन्यू रखना। दो Vivo डिवाइसों को हिलाकर (शेक टू शेयर) फोटोज या क्लिपबोर्ड कंटेंट ट्रांसफर करना आसान है, जो AirDrop जैसा लेकिन ब्लूटूथ/वाई-फाई पर बेस्ड।

iPad-स्टाइल ऐप कंटिन्यूटी फोन से टैबलेट/पीसी पर वर्क स्विचिंग को स्मूद करती है, जैसे ईमेल ड्राफ्ट को कहीं भी जारी रखना। कार इंटीग्रेशन के लिए स्मॉल विंडो 2.0 डैशबोर्ड पर नोटिफिकेशंस और नेविगेशन दिखाता है। पावर फीचर्स जैसे ग्लोबल डायरेक्ट पावर सप्लाई 2.0 बैकग्राउंड प्रोसेस को ऑप्टिमाइज करता है, जबकि माइक्रो पावर जینی 2.0 स्टैंडबाय टाइम को 7% बढ़ाता है और ऐप क्रैश पर इंस्टेंट रिकवरी देता है। XDA Developers और The Verge की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इकोसिस्टम Apple के Continuity से प्रेरित है लेकिन Vivo के हार्डवेयर (जैसे V-सीरीज लैपटॉप्स) के साथ डीपर इंटीग्रेशन ऑफर करता है। भारतीय यूजर्स, जो अक्सर मल्टी-डिवाइस यूज करते हैं (जैसे फोन + स्मार्ट टीवी), इससे फायदा उठाएंगे।

वेलबीइंग और एक्सेसिबिलिटी में अपग्रेड्स

OriginOS 6 यूजर हेल्थ को प्रायोरिटी देता है, खासकर डिजिटल वेलबीइंग के दौर में। AI फटीग डिटेक्शन यूजर के आई मूवमेंट्स और स्क्रीन टाइम को मॉनिटर करके डिस्प्ले ब्राइटनेस और कलर टेम्परेचर को एडजस्ट करता है, जो लॉन्ग सेशंस में आंखों की थकान कम करता है। स्लीप मोड ब्लू लाइट को 25% रिड्यूस करके मेलाटोनिन प्रोडक्शन को बूस्ट करता है, जो बेहतर स्लीप साइकल सुनिश्चित करता है – WHO की 2025 डिजिटल हेल्थ गाइडलाइंस के अनुरूप।

एक्सेसिबिलिटी फीचर्स में क्लियर वॉयस एन्हांसमेंट कॉल्स में बैकग्राउंड नॉइज को कट करता है, जबकि ब्लूटूथ हियरिंग एड इंटीग्रेशन हियरिंग इम्पेयर्ड यूजर्स के लिए ऑडियो को कस्टमाइज करता है। ये अपग्रेड्स दिव्यांग यूजर्स के लिए इनक्लूसिव बनाते हैं, और Accessibility.org जैसी साइट्स ने इन्हें सराहा है। भारत में, जहां स्क्रीन टाइम एवरेज 7 घंटे/दिन है (Nielsen रिपोर्ट), ये फीचर्स हेल्थ अवेयरनेस बढ़ाएंगे।

सिक्योरिटी पर मजबूत फोकस

सिक्योरिटी OriginOS 6 का फाउंडेशन है, जो CHAD AI सिक्योरिटी के जरिए चिप लेवल से क्लाउड तक प्रोटेक्शन देता है – यह मैलवेयर डिटेक्शन को रियल-टाइम में हैंडल करता है। Vivo X100 सीरीज पहली है जिसे CAICT (चाइना एकेडमी ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी) की एडवांस्ड AI सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन मिली, जो AI-बेस्ड थ्रेट्स को कवर करती है। इसके अलावा, सिस्टम को DNV (ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड), Common Criteria (इंटरनेशनल सिक्योरिटी), UL (सेफ्टी टेस्टिंग), और ioXt (IoT सिक्योरिटी) से सर्टिफाइड मिला है।

Kaspersky Lab की 2025 साइबर थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार, ये सर्टिफिकेशंस डेटा प्राइवेसी और फिशिंग अटैक्स से मजबूत शील्ड देते हैं, खासकर भारत जैसे मार्केट में जहां साइबर क्राइम 20% सालाना बढ़ रहा है। यूजर्स को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और बायोमेट्रिक लॉक्स मिलेंगे, जो पर्सनल डेटा को सेफ रखेंगे।

Vivo और iQOO फोन्स के लिए रोलआउट टाइमलाइन

Vivo X300 सीरीज और iQOO 15 मॉडल्स में OriginOS 6 पहले से प्री-इंस्टॉल्ड आएंगे, जो लेटेस्ट हार्डवेयर के साथ ऑप्टिमाइज्ड परफॉर्मेंस देंगे। मौजूदा प्रीमियम डिवाइसेज को अपडेट्स फेज वाइज मिलेंगे, जो डिवाइस स्टेबिलिटी सुनिश्चित करेगा। यह शेड्यूल मुख्य रूप से चाइनीज वर्जन के लिए है, लेकिन विवो इंडिया जल्द ही लोकल डिटेल्स (जैसे OTA अपडेट्स) शेयर करेगा। GSMArena और Vivo के ऑफिशियल चैनल्स से वेरिफाई होता है कि भारतीय रोलआउट में TRAI रेगुलेशंस और लोकल टेस्टिंग के कारण 1-2 हफ्ते का डिले हो सकता है।

  • नवंबर 2025: Vivo X Fold5, X200 लाइनअप (फोल्डेबल और फ्लैगशिप), iQOO 13 सीरीज (गेमिंग फोकस्ड), iQOO Neo10 सीरीज (मिड-हाई रेंज) – ये पहले फेज में प्रीमियम यूजर्स को टारगेट करेंगे।
  • दिसंबर 2025: Vivo X Fold3 Pro (अल्ट्रा-थिन फोल्डेबल), X100 सीरीज (कैमरा सेंट्रिक), iQOO 12 लाइनअप (परफॉर्मेंस बीस्ट्स), Neo9 सीरीज – होलीडे सीजन में अपडेट्स से यूजर्स एंगेजमेंट बढ़ेगा।
  • जनवरी-मार्च 2026: X90 लाइनअप (ओल्ड फ्लैगशिप्स), S30 सीरीज (सेल्फी फोकस्ड), iQOO 11 और Z10 सीरीज (बजट गेमिंग), X Flip (फ्लिप फोन), S20 सीरीज (मिड-रेंज), iQOO Z9 लाइनअप – यह फेज मास मार्केट को कवर करेगा।
  • अप्रैल-मई 2026: मिड-रेंज मॉडल्स जैसे Vivo S18 सीरीज (कैमरा वैरायटी), Y500/Y300 सीरीज (एंट्री-लेवल), iQOO Neo7 (गेमिंग बजट) – लेटेस्ट मॉडल्स को अंत में अपडेट देकर बैकवर्ड कम्पेटिबिलिटी सुनिश्चित होगी।

यह रोलआउट Vivo की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो भारतीय मार्केट की डाइवर्सिटी (फ्रॉम बजट टू प्रीमियम) को ध्यान में रखता है। Counterpoint Research की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Vivo का मार्केट शेयर भारत में 18% है, और OriginOS 6 इसे और मजबूत करेगा।